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नई दिल्ली / शौर्यपथ / कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे आंदोलनरत किसानों के साथ केंद्र सरकार की बातचीत चल रही है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल , आंदोलनकारी किसानों के 35 प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर रहे हैं सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मंगलवार सुबह मुलाकात की. कृषि कानूनों के खिलाफ ये किसान दिल्ली में मोर्चा डाले हुए हैं.समझा जाता है कि किसानों के साथ तीसरे राउंड की बातचीत में सरकार नए कृषि कानून के बारे में जानकारी के साथ इस बात का आश्वासन दे सकती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को खत्म नहीं किया जाएगा.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
पहले सरकार की ओर से 3 दिसंबर को बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था. गृहमंत्री अमित शाह ने शर्त रखी थी कि किसानों को बातचीत के लिए बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा और दिल्ली की सीमाओं से हटना होगा. लेकिन सशर्त बातचीत के इस प्रस्ताव को किसानों ने ठुकरा दिया था.
रविवार देर रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बड़े नेताओं के साथ मीटिंग की थी. अब सरकार ने सर्दी और कोरोना का हवाला देते हुए किसानों को 3 दिसंबर से पहले ही, एक दिसंबर को यानी आज बातचीत का न्योता दिया था.
केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए बुंदेलखंड़ के करीब 500 किसान निजी साधनों से बृहस्पतिवार को दिल्ली कूच करेंगे। यह जानकारी एक किसान संगठन के पदाधिकारी ने दी.
पंजाब किसान यूनियन के नेता अमरीक सिंह ने कहा कि हम सरकार के सामने अपनी दो मांगें मुख्य तौर पर रखेंगे. पहली मांग कि तीनों कानून को तत्काल प्रभाव से वापिस लिया जाए और दूसरी मांग कि सरकार MSP की लीगल गारंटी दे.
जिस तैयारी से किसान आए हैं, वो सोच कर आए हैं कि केंद्र सरकार इनकी बात आसानी से नहीं मानेगी. उनके पास 6 महीने का तेल, गैस, आटा, दाल, चावल हैं. वे इन तीनों क़ानूनों को वापस कराकर अपने घर जाएंगे. सरकार को इनसे खुले मन से बातचीत करनी चाहिए.
बुराड़ी के निरंकारी मैदान से कृषि कानून के खिलाफ डटे किसानों ने NDTV से बात करते हुए कहा कि हमें सरकार से बहुत उम्मीद नहीं है क्योंकि सरकार की नीयत ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि यह किसानों की नहीं पूजीपतियों की सरकार है. किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक कानून रद्द नहीं होगा तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.
केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की बात ''सुने'' और मैत्रीपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाए. विजयन ने एक ट्वीट में किसानों को देश का ''जीवन आधार'' बताया और कहा कि यह उनके साथ खड़े रहने का समय है.
इस बीच, किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को अब फिर सत्ता में उसकी एक और सहयोगी पार्टी ने चेतावनी दी है. हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष और उनके पिता अजय चौटाला ने कहा कि सरकार को इस मसले पर बड़ा सोचना चाहिए और किसानों की मांगों पर कुछ समाधान निकालना चाहिए.
किसानों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश करने में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने भारी-भरकम तरीकों का इस्तेमाल किया था. खट्टर के आदेश पर पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसाए और कई जगहों पर उनपर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. यहां तक कि पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश में हाईवे तक खोदकर रख दिया था.
कृषि कानूनों के मामले में केंद्र में बीजेपी पहले ही अपने सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल के साथ को खो चुकी है. सोमवार को ही राजस्थान से उसके एक सहयोगी सांसद हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी से अपना रिश्ता खत्म करने की धमकी दी थी. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
