September 29, 2026
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    AIADMK का सहयोगी BJP को सख्त संदेश- 'नहीं चाहिए नेशनल पार्टी का साथ अगर..'

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    नई दिल्ली / शौर्यपथ / चेन्नई / तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी AIADMK ने गठबंधन की अपनी सहयोगी साथी BJP को एक सख्त संदेश देते हुए कहा है कि 'अगर उसपर रौब जमाया जाएगा, तो सहयोगी के तौर पर उसे नेशनल पार्टी नहीं चाहिए.' पार्टी ने इससे साफ कर दिया है कि वो राज्य में बीजेपी की पिछलग्गू नहीं बनेगी. पार्टी ने रविवार को साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री ई पलानीसामी ही अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों में फिर अगले सीएम के कैंडिडेट होंगे. दरअसल, हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पलानीसामी की कैंडिडेसी को लेकर पूछे गए सवाल को टाल दिया था.
    AIADMK के सांसद केपी मुनुसामी, जो कि राज्य में पार्टी के उप-संयोजक भी हैं, ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी मई, 2021 में होने वाले इन चुनावों में गठबंधन का नेतृत्व करेगी. उन्होंने कहा कि 'अगर कोई नेशनल पार्टी इसके खिलाफ जाना चाहती है तो वो गठबंधन से बाहर जाने के लिए स्वतंत्र हैं.'
    दरअसल, राज्य में बीजेपी का कोई भी विधायक या फिर सांसद नहीं है, जिसके चलते AIADMK इतनी सख्त है. 9 सालों से सत्ता में बनी पार्टी अब एंटी-इंकंबेंसी का सामना कर रही है. मुख्यमंत्री पलानीसामी को उम्मीद है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में 7.5 फीसदी आरक्षण, अम्मा मिनी क्लिनिक्स और ऐसे ही निवेश करके वहीं कोविड क्राइसिस को हैंडल करके उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की है.
    पार्टी का यह बयान तब आया है, जब सुपरस्टार रजनीकांत हैदराबाद से हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर चेन्नई लौट आए हैं. बीजेपी को उम्मीद हो सकती है कि उसे रजनी का साथ मिल सकता है. रजनीकांत 31 दिसंबर को अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान करने वाले हैं. उनके समीकरण में आने से यहां काफी उलट-पलट हो सकती है.
    बीजेपी के लिए बिहार में भी गठबंधन सहयोगी नीतीश कुमार के साथ मुश्किलें नजर आ रही हैं. जनता दल यूनाइटेड ने कई मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई है. अरुणाचल प्रदेश ताजा मामला है, जहां जेडीयू के छह विधायक पिछले हफ्ते बीजेपी में शामिल हो गए थे.
    बीजेपी की अन्य सहयोगी रही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने पिछले हफ्ते शनिवार को घोषणा की कि पार्टी किसान आंदोलन के मुद्दे को लेकर बीजेपी नीत एनडीए को छोड़ रही है. सितंबर में शिरोमणि अकाली दल पहले ही इसी मुद्दे पर एनडीए को छोड़ चुकी है. शिवसेना भी पिछले साल ही एनडीए से अलग हो चुकी है.

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