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नई दिल्ली / शौर्यपथ / कवि और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास इन दिनों अपने पिता के साथ समय गुजार रहे हैं. कोरोना काल में वह प्रकृति के करीब रहकर सोशल मीडिया पर कई जानकारिया शेयर करते रहते हैं. कई बार उनकी पोस्ट में कटाक्ष भी छिपा रहता है. आज भी उन्होंने एक ट्वीट किया है, जिसमें कुमार ने लिखा है कि पिताजी के पास रहने का सबसे कठिन समय होता है मेरा हर काम उनके परीक्षक की नज़र से गुजरना. आज सुबह चीकू तोड़ने का मेरा स्वयं-श्लाघापूर् आत्मविश्वास, उनके चीकू-परीक्षण का सत्र प्रारंभ होते ही नेताओं में नैतिकता की तरह उड़न छू हो गया. ख़ैर, आज तो अपुन पास हो गए. बोले “हम्म...ठीक तोड़े है, अब इन्हें अख़बार में लपेट कर दो दिन रख दो, पक जाएंगे.” ये तो मुझे भी पता है कि खबर पढ़-पढ़कर कोई भी पक जाता है, ये तो फिर भी चीकू हैं. वैसे टीवी के आगे रखने से ज़्यादा जल्दी नहीं पकते ? मने पूछ रए हैं? आपसे....पिताजी से पूछने पर तो जूताभिषेक का भय है.
इस ट्वीट पर लोग अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि पिता के पास होना किसी सौभाग्य से कम नहीं होता. कुछ यूजर्स ने देश में घट रही घटनाओं की तरह उनका ध्यान दिलाने की कोशिश की.एक ने लिखा-श्रीमान चीकू तोड़ लिए हैं तो इन घटनाओं पर भी विचार प्रकट करें. एक ने लिखा कि दादा दादा जी के पास तो काफी अच्छा एंड्रॉयड स्मार्टफोन है. इसका कुमार विश्वास ने जवाब भी दिया कि अजी मत पूछिए, स्मार्टनेस में कोई कमी नहीं. लेटेस्ट कार,घड़ी,सेलफोन और लेटेस्ट ज्ञान .दुनिया में क्या हो गया है, ग़ाज़ा पट्टी का क्या अपडेट है, बंगाल में बीजेपी के प्रतिशत में कितनी बढ़ोतरी हुई और मैंने लेटेस्ट टीवी इंटरव्यू में कौन-सी “मूर्खता” की? सब नज़र में है टाइगर की.
बता दें कि कुमार विश्वास अपनी सोशल पोस्ट के जरिए मुद्दे भी उठाते रहते हैं. उन्होंने पेट्रोल के दामों पर एक ट्वीट किया था कि प्रिय पेट्रोल ! दो दिन की सड़क-यात्रा के दौरान तुम्हारी राष्ट्रीय प्रगति का पता चला ! योग्य अभिभावक हों तो तुम जैसे बालक एक्ट ऑफ गॉड हो ही जाते हैं ! तुम्हारी बेशर्म बढ़ोतरी को न्यायसंगत ठहराते अपने मीडिया फूफाओं का योगदान कभी न भूलना बेटा. तुम्हारा- (ख़ामोश व बेबस नागरिक). ये ट्वीट वायरल हुआ था. किसानों के मुद्दे पर भी उन्होंने कई पोस्ट लिखे थे. गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के मामले में उन्होंने किसानों के आंदोलन पर सीख देता हुआ एक पोस्ट लिखा था कि आंदोलन की सफलता इन चार बातों पर निर्भर होती हैं- पहली - आंदोलन का उद्देश्य आख़री आदमी तक सही-सही समझा पाना. दूसरी-आंदोलन के कुछ सर्वसम्मति से बने मानक चेहरे होना. तीसरी- आंदोलन की गति सत्ता विरोध से किसी भी हाल में देश-विरोधी न होने देना और चौथी
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
