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नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस के दिग्गज नेता जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद से सियासी हंगामा मचा हुआ है. कांग्रेस के और भी नेताओं के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं. कांग्रेस में नेताओं की नाराजगी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस मौजूदा समय में भारी संकट के दौर से जूझ रही है. कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के समूह 'जी-23' (G-23) ने इस बारे में सोनिया गांधी को लिखा भी था कि पार्टी में व्यापक सुधारों की जरूरत है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी 'जी-23' क्लब के प्रमुख सदस्य हैं.
जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने पर जब एनडीटीवी ने कपिल सिब्बल से बात की तो उन्होंने कहा कि ये 'प्रसादा राम राजनीति' है, ऐसे सैद्धांतिक समझौतों से जनता का राजनीति पर से भरोसा उठ जाएगा. जब उनसे पूछा गया कि आपको अगर ऐसा कदम उठाना पड़ा तो.. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले को मेरे मृत शरीर से होकर गुजरना होगा.
जितिन प्रसाद के कदम पर सिब्बल ने आगे कहा, "मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता कि पार्टी नेतृत्व ने क्या किया है या नहीं किया है. हम भारतीय राजनीति में एक ऐसे चरण में पहुंच गए हैं जहां इस प्रकृति के निर्णय विचारधारा पर आधारित नहीं हैं. वे उस पर आधारित हैं जिसे अब मैं प्रसादा राम राजनीति कहता हूं. पहले यह आया राम गया राम था. हमने पश्चिम बंगाल में ऐसा होते देखा है- अचानक लोग चले जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि भाजपा सफल होने जा रही है... आप एक विचारधारा के प्रति अपने विश्वासों के आधार पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं बल्कि आपको विश्वास है कि 'मुझे व्यक्तिगत रूप से कुछ मिल सकता है'. मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ..."
राहुल गांधी के करीबी रहे जितिन प्रसाद ने दो साल की अटकलों के बाद कल बुधवार को इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा, "मेरा कांग्रेस के साथ तीन पीढ़ी का नाता है, इसलिए मैं बहुत देर बाद विचार-विमर्श कर यह निर्णय ले पाया. पिछले 8-10 सालों में, मैंने महसूस किया है कि अगर कोई एक पार्टी है जो वास्तव में राष्ट्रीय है, तो वह भाजपा है. अन्य दल क्षेत्रीय हैं लेकिन यह राष्ट्रीय पार्टी है.” जितिन प्रसाद भी कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के क्लब जी-23 के सदस्य थे. उन्होंने भी पत्र लिखकर सोनिया गांधी से पार्टी नेतृत्व में सुधारों की अपील की थी.
सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस को सुधारों की सख्त जरूरत है और पार्टी नेतृत्व को सुनना होगा. उन्होंने कहा कि यह समझ से परे था कि जितिन प्रसाद जैसा व्यक्ति भाजपा में शामिल होगा. उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति सोचता है कि मुझे कुछ नहीं मिल रहा है, तो वह पार्टी छोड़ सकता है. जितिन के पास कांग्रेस छोड़ने के अच्छे कारण हो सकते हैं. मैं उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए दोषी नहीं ठहराता. मैं उन्हें उन कारणों के लिए दोषी ठहराता हूं जिसके आधार पर वह भाजपा में शामिल हुए. वह किस चेहरे से कह सकते हैं कि अब मैं एक ऐसी विचारधारा को अपना रहा हूं जिसका मैं तीन दशकों से विरोध कर रहा था? और यह पार्टी जो सैद्धांतिक राजनीति की बात करती है, वे जितिन को किस चेहरे से अपना रहे हैं? इस तरह की राजनीति से लोगों का विश्वास उठ रहा है."
राहुल गांधी के पूर्व सहयोगी ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद प्रसाद का कांग्रेस का साथ छोड़ना दूसरा बड़ा झटका है. ज्योतिरादित्य ने पिछले साल मध्य प्रदेश के विधायकों के साथ राज्य में कांग्रेस की सरकार गिरा दी थी. मध्यप्रदेश के दलबदल के साथ-साथ एक के बाद एक चुनावी हार ने सिब्बल, गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे कांग्रेस के दिग्गजों को कांग्रेस में सुधार के लिए पार्टी नेतृत्व को पत्र को लिखने पर मजबूर कर दिया. कांग्रेस के अभी तक के इतिहास में गांधी परिवार को ऐसा पत्र कभी नहीं मिला था.
पिछले साल राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत के बाद से ही सचिन पायलट को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं, जो पार्टी में उचित हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं. पायलट को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सुधार के वादे पर विरोध समाप्त करने के लिए राजी किया. उन्होंने हाल ही में अपनी पार्टी के नेताओं को याद दिलाया कि तब से कुछ भी नहीं बदला है.
उपायों पर कांग्रेस की विफलता के बारे में पूछे जाने पर, सिब्बल ने कहा, "मुद्दों पर अभी तक कोई बात नहीं हुई है, यह सच है. उन्हें जल्द से जल्द इसे संबोधित किया जाना चाहिए. हम उन मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे. अगर पार्टी किसी कारण से मुझसे कहती है कि हमें आपकी जरूरत नहीं है, तो मैं पार्टी छोड़ दूंगा. मैं पार्टी में अपने लिए नहीं हूं, लेकिन मैं अपने जीवन में कभी भी भाजपा में शामिल नहीं होऊंगा, जिसका मैंने एक राजनेता के रूप में अपने जन्म के बाद से विरोध किया है. जितिन प्रसाद के साथ मेरा यही मुद्दा है."
तथाकथित सुधारों पर दबाव डालते हुए उन्होंने जवाब दिया, "मुझसे मत पूछो, उनसे पूछो जिन्हें उन्हें संबोधित करना है. कांग्रेस को सबसे पुरानी पार्टी बनना चाहिए. इसके लिए हमें सुधारों की जरूरत है. अगर हमने इसे संबोधित नहीं किया है. हम सिस्टम के भीतर लड़ रहे हैं, हमने मुद्दों को उठाना जारी रखा है. हम केवल इतना कहना चाहते हैं कि यह सुनने का समय है. अगर नेतृत्व सुनना बंद कर देता है, तो संगठन अस्वीकार कर देगा. हम बस इतना चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी को हमारी बात सुननी चाहिए."
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
