July 24, 2026
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    काम पर लौटते मजदूर

    • rounak group

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर घर वापस आ गए थे, लेकिन अब राजनीतिक हथियार की तरह उपयोग होने के बाद धीरे-धीरे उन्हीं शहरों में लौटने लगे हैं, जहां से उन्होंने वापसी की थी। मजदूरों की वापसी की मजबूरी समझी जा सकती है, क्योंकि जिस वक्त वे अपने घर लौटे थे, तब सरकार सहित तमाम संस्थानों ने उनको अपने ही राज्य में कुशलता के आधार पर रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन मजदूरों के हाथ खाली ही रहे। अब जब सब कुछ धीरे-धीरे खुल रहा है, तो इन मजदूरों के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाना भी मुश्किल हो रहा है। परिवार के भरण-पोषण के लिए वे फिर परदेश का रुख करने लगे हैं, जबकि वहां इस बात की गारंटी कोई लेने को तैयार नहीं है कि यदि इस प्रकार की विपदा फिर आती है, तो क्या उन्हें सरकार पर भरोसा करना चाहिए? ऐसे में, क्या यह अच्छा नहीं होगा कि हुनर के हिसाब से उनको अपने राज्यों में ही काम मिले, ताकि उन्हें फिर से प्रवासी बनने की पीड़ा न भुगतनी पड़े?
    अभिनव त्रिपाठी
    बेल्थरा रोड, बलिया

    उकसावे में नेपाल
    आजकल भारत और नेपाल के बीच तनाव चल रहा है। बिगड़ते आपसी रिश्ते की वजह नेपाल में बढ़ता राष्ट्रवाद है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली तमाम घरेलू मुद्दों पर असफल हो चुके हैं। अपनी सरकार बचाने के लिए वे लोगों में राष्ट्रवादी सोच भरना चाहते हैं। राष्ट्रवाद का होना अच्छी बात है, लेकिन जब यह साम्राज्यवाद के साथ मिल जाता है, तब बहुत खतरनाक हो जाता है। ऐसा हमें यूरोप में देखने को मिला था, जब साम्राज्यवाद से जुड़कर राष्ट्रवाद 1914 में यूरोप को महाविपदा की ओर ले गया। नेपाल का राष्ट्रवाद भी इसी कदम पर बढ़ता दिख रहा है, जो उसे महाविपदा की ओर ले जाएगा।
    चेतन कुमार कर्ण

    साथ दे विपक्ष
    लोकतंत्र में विपक्ष की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उसका काम सरकार को सलाह देना, गलत निर्णय का विरोध करना और सही फैसले का स्वागत करना है। विपक्ष का काम यह नहीं है कि वह सरकार के अच्छे कामों का भी विरोध करे। वर्तमान परिस्थिति में विपक्ष सरकार को सुझाव दे, न कि विकास के कामों को रोकने का प्रयास करे। जैसे, चीन के मुद्दे पर विपक्ष को सरकार और सेना के साथ चलना चाहिए। साथ ही सेना की कार्यशैली पर उसे सवाल नहीं उठाना चाहिए। मगर विपक्ष के ऐसा न करने से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सत्ता पाने के लिए हर हद तक उतर जाना राजनीतिक दलों को शोभा नहीं देता।
    रितेश आनंद, गोड्डा, झारखंड

    सावधानी जरूरी
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख के अनुसार, कोरोना महामारी का अभी सबसे बुरा समय आना बाकी है। यहां उल्लेखनीय है कि चीन में लगभग छह महीने पहले कोविड-19 का पहला मामला सामने आया था। तब अनुमान लगाया गया था कि इससे अधिकतम आठ सौ लोग मारे जाएंगे, लेकिन आज कोरोना से एक करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और पांच लाख से ज्यादा लोगों की जान यह वायरस ले चुका है। एक कहावत है कि अगर आप गीदड़ का शिकार करने जा रहे हैं, तो तैयारी शेर के शिकार की होनी चाहिए। लेकिन अपने यहां जन-सामान्य में कोविड-19 को लेकर उल्टा ही ट्रेंड दिख रहा है। बिना मास्क के घूमना, दो गज की दूरी का पालन न करना और इस बीमारी को हल्के में लेना इसके संक्रमण के ग्राफ को प्रतिदिन नई ऊंचाइयां दे रहा है। सरकार ने विगत तीन महीने में जागरूकता पैदा कर दी है, लेकिन कुछ लोग अपनी ही धुन में हैं। वे अपनी और अपने परिवार के लोगों के लिए तो संकट बुला ही रहे हैं, समाज और देश का भी अहित कर रहे हैं।
    मनोज कुमार शर्मा, स्याना

     

     

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