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नजरिया / शौर्यपथ कोरोना वायरस की वजह से करीब चार माह के व्यवधान के बाद इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच टेस्ट मैच की शुरुआत के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी हो गई। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 13 मार्च को सिडनी मैदान पर बिना दर्शकों के मैच खेले जाने के बाद से यह पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच है। क्रिकेट की वापसी होने के बाद अब निगाहें इस साल के आखिर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप के स्थगन और आईपीएल के आयोजन की घोषणा पर लग गई हैं। आईसीसी बोर्ड की इस हफ्ते के अंत में होने वाली बैठक में विश्व कप के स्थगन की घोषणा तय मानी जा रही है। इसकी वजह क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का अब इससे ध्यान हटाकर सितंबर मध्य में इंग्लैंड के साथ लिमिटेड ओवरों की सीरीज आयोजित करने पर ध्यान केंद्रित करना है। कोरोना की वजह से ज्यादातर क्रिकेट बोर्डों की आर्थिक तौर पर कमर टूट चुकी है और वे खिलाड़ियों की फीस में खासी कटौती कर चुके हैं। इसलिए दुनिया के ज्यादातर क्रिकेटर हमेशा से टी-20 विश्व कप की जगह आईपीएल के आयोजन के पक्षधर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसमें भाग लेना उनकी माली हालत को सुधार सकता है।
अब सवाल यह है कि बीसीसीआई को यदि टी-20 विश्व कप की विंडो मिल भी जाती है, तो क्या वह अपने यहां इस टी-20 लीग को आयोजित करने की स्थिति में भी है? देश में कोरोना वायरस के लगातार पैर पसारने से तो नहीं लगता कि यहां इस समय आईपीएल आयोजन की स्थिति है और साल के आखिर तक इन हालात में बदलाव की भी संभावना नजर नहीं आ रही है। सभी क्रिकेट बोर्ड इस बात को अच्छे से जानते हैं कि आईपीएल का आयोजन करने से कोरोना के कारण बिगड़ी आर्थिक हालत पटरी पर आ सकती है। संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड तो पहले ही आईपीएल के आयोजन अपने यहां कराने का प्रस्ताव बीसीसीआई को भेज चुके हैं। अब इसमें नया नाम न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड का भी जुड़ गया है। न्यूजीलैंड कोरोना से मुक्त होने वाला पहला देश भी है। अब यह बीसीसीआई को तय करना है कि साल 2009 की तरह क्या इस बार भी आईपीएल का आयोजन विदेश में किया जाए?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि न्यूजीलैंड में आईपीएल दर्शकों के साथ आयोजित किया जा सकता है, लेकिन यूएई और श्रीलंका में इसे आयोजित करने पर यह बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती। लेकिन न्यूजीलैंड में आईपीएल कराने के खिलाफ एक ही बात जाती है कि उसके और भारत के बीच समय में करीब साढ़े सात घंटे का फर्क है, इसलिए वहां भारतीय समयानुसार देर से देर दोपहर 12.30 बजे तक मैच शुरू कराए जा सकते हैं, लेकिन इस कारण भारत में दफ्तरों में काम करने वाले ज्यादातर लोग इन मैचों से नहीं जुड़ सकेंगे। इसके अलावा, वहां मैचों में भारतीय उपमहाद्वीप की तरह दर्शक भी नहीं जुट सकते। फिर, यूएई को 2014 में आईपीएल के कुछ मैच आयोजित करने का अनुभव है, तो श्रीलंका में आयोजन किफायती रह सकता है।
बीसीसीआई को दुनिया भर के क्रिकेट बोर्डों में सबसे अमीर माना जाता है और इसमें आईपीएल की भी अहम भूमिका है। इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि वर्ष 2018 से 2022 का मीडिया राइट्स करार स्टार स्पोट्र्स से 4,087 करोड़ रुपये का हुआ है। यही नहीं, बीसीसीआई टाइटल प्रायोजक, आधिकारिक पार्टनर्स, अंपायरों के प्रायोजक व स्ट्रेटजिक टाइम आउट प्रायोजकों के जरिए भी कमाई करता है। इसी तरह, कोई जीते या हारे, खूब कमाई होती है। इन वजहों से ही इस लीग से जुड़े लोग इसे रद्द करने के पक्ष में नहीं हैं। इनका मानना है कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन हो चुकी क्रिकेट अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।
बीसीसीआई आईपीएल के आयोजन के संबंध में कोई भी घोषणा करने को लेकर देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहा है। वह चाहता है कि पहले टी-20 विश्व कप के स्थगन की घोषणा हो और फिर चीनी कंपनियों के प्रायोजक होने का मामला सुलझे, उसके बाद ही आईपीएल के आयोजन को लेकर कोई घोषणा की जाए। वैसे बीसीसीआई सितंबर के आखिर से लेकर नवंबर की शुरुआत के बीच आईपीएल आयोजन करने का मन बना चुका है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
