July 24, 2026
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    महामारी से महायुद्ध

    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / बढ़ते कोरोना संक्रमण के समय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन सुनिश्चित करने के लिए यदि सुप्रीम कोर्ट की जरूरत पड़ रही है, तो यह न केवल दुखद, बल्कि शर्मनाक भी है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी केवल देश के नागरिक ही नहीं, बल्कि इस वक्त कोरोना के खिलाफ लड़ रहे योद्धा हैं, ऐसे योद्धाओं के वेतन-भत्ते सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पर पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक और त्रिपुरा जैसे राज्यों ने डॉक्टरों के भुगतान में देरी या ढिलाई की है। कुछ राज्यों ने डॉक्टरों के क्वारंटीन समय को भी छुट्टी माना है, यह तो और दुखद है। यह सब जानते हैं कि सौ से ज्यादा डॉक्टरों की मौत कोरोना से लड़ते हुई है और बड़ी संख्या में डॉक्टर कोरोना को पराजित करके ड्यूटी पर लौटे हैं, ऐसे में, तमाम सरकारों को इस सेवक बिरादरी का विशेष ध्यान रखना चाहिए था और शिकायत सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने की नौबत नहीं आनी चाहिए थी। इन कोरोना योद्धाओं के उत्साह और समर्पण को बनाए रखने के लिए भी विशेष पहल जरूरी है। उन इलाकों में तो खास तौर पर संवेदनशील पहल-प्रोत्साहन की जरूरत है, जहां मरीजों की सेवा से डॉक्टरों के बचने की शिकायतें आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कदम उठाने का आदेश दिया, तो कोई आश्चर्य नहीं। केंद्र को इन बातों का खुद भी ध्यान रखना होगा और महामारी के समय सारा भार राज्यों के कंधों पर नहीं छोड़ना चाहिए। जिन राज्यों ने डॉक्टरों के वेतन में कोताही बरती है, उन्हें सुधार के लिए विवश करना समय की मांग है।
    ध्यान रहे, आज कोरोना के खिलाफ युद्ध जिस मुकाम पर है, हम अपनी लड़ाई या तैयारी में कहीं से भी कमी नहीं आने दे सकते। भारत में अकेले गुरुवार को 55,000 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। संक्रमितों ने 16 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है। जाने गंवाने वालों की संख्या 36,000 के आंकड़े को छू चुकी है। आज चार लाख से अधिक संक्रमण के साथ महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्य बना हुआ है, लेकिन यह ज्यादा अफसोसजनक है कि डॉक्टरों की वेतन संबंधी शिकायतें महाराष्ट्र से भी आई हैं। कहना न होगा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब जैसे अपेक्षाकृत विकसित राज्यों को कोरोना के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करना चाहिए था।
    केंद्र ने भले ही अनलॉक होने की ओर बढ़ने संबंधी कुछ घोषणाएं की हैं, लेकिन सच यही है कि राज्यों की चिंता लगातार बढ़ रही है। ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी है, 10 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं, चिंता यह कि संक्रमण के मामले अब 21 दिन में ही दोगुना होने लगे हैं। विशेषज्ञों का मामना है, संख्या देखकर घबराने की ज्यादा जरूरत नहीं, हो सकता है कि जैसे-जैसे जांच की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले भी बढ़ते लग रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की जल्दी से जल्दी जांच व उसकी रिपोर्ट की ओर सरकार को और ध्यान देना चाहिए। जांच और नतीजों की खामियों को दूर करना भी जरूरी है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिशा-निर्देशों का स्पष्ट होना भी जरूरी है। यह भी विडंबना ही है कि लॉकडाउन और अनलॉक होने की प्रक्रिया साथ-साथ चल रही है। राज्यों के अंदर व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय अब और जरूरी हो गया है, साथ ही, केंद्र की जिम्मेदारी भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

     

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