July 24, 2026
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    दुनिया में समावेशी भारत की गूंज

    • rounak group

    ओपिनियन / शौर्यपथ / खुशी, खूबसूरती और खैर-खैरियत के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है। यह सिर्फ मेरे भारत के लोगों के संस्कार, संस्कृति और संकल्प की शक्ति का ही करिश्मा है। मुझे याद है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मेरे सरकारी निवास पर 5 नवंबर, 2019 को धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय 100 से ज्यादा प्रबुद्ध लोगों की बैठक हुई थी। गौर करने की बात है कि उस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सभी ने एकमत से यह तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मुद्दे पर जो भी फैसला आएगा, उसका दोनों पक्ष पूरा सम्मान भी करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। जब फैसला आया, तब सभी पक्षों ने वैसा ही किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी ने भी अपनी जीत या हार के रूप में नहीं लिया और सभी ने शांति-सद्भाव के साथ फैसले को स्वीकार किया।
    अब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है, उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन भी दे दी गई है। बोर्ड ने निर्माण के लिए समिति का भी गठन कर दिया है।
    अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन सद्भाव और समरसता के साथ संपन्न होना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की ताकत और ‘अनेकता में एकता’ की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान की धाक मजबूत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किसी सीमित दायरे में नहीं बांधे जा सकते। वह न केवल हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
    कवि अल्लामा इकबाल ने अपनी मृत्यु (1938) से पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिए जो कहा था, वह एक बार फिर हमें गर्व का एहसास कराता है।
    लबरेज है शराब-ए-हकीकत से जाम-ए-हिंद।
    सब फलसफी हैं खित्ता-ए-मगरिब के राम-ए-हिंद।।
    यह हिंदियों के फिक्र-ए-फलक रस का है असर।
    रिफअत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद।।
    इस देस में हुए हैं हजारों मलक सरिश्त।
    मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद।।
    है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज।
    अहले-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिन्द।।
    दशकों से जिस मुद्दे ने भारत के लोगों को बेचैन कर रखा था, जिसके समाधान के लिए महंत रामदास जी परमहंस और हाशिम अंसारी एक ही रिक्शे से मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाया करते थे। हाशिम अंसारी के मन में भी भगवान राम के प्रति भरपूर श्रद्धा थी, तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था, ‘अब यह विवाद यहीं खत्म होना चाहिए, श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो, अयोध्या का विकास हो, अब यही मेरी तमन्ना है’। तब से अब तक सरयू में खूब पानी बह चुका है, अब न महंत रामदास जी परमहंस इस दुनिया में हैं, और न हाशिम अंसारी। खुशी की बात यह है कि हाशिम अंसारी के बेटे कल के भव्य ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने हैं। भारत का इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि कितना लंबा खिंचा है अयोध्या का यह मामला। आज सम्मान, सहमति और सद्भाव के सुंदर माहौल में यह विवाद खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना भी साकार होने जा रहा है।
    सबसे खूबसूरत बात यह है कि देश के न किसी मोहल्ले में तनाव है, न किसी शहर में अशांति, और न किसी गांव में हंगामा, सभी ने इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत किया है। सब इस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनकर आनंदित हैं। यही नहीं, आज के कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भगवान श्रीराम को संपूर्ण मानवता, इंसानियत और इंसाफ का प्रतीक बताया है।
    हमारे देश के मुस्लिम समाज को किसी विदेशी आक्रमणकारी की करतूतों-गुनाहों का गुनहगार नहीं समझा जा सकता। इस ऐतिहासिक क्षण का उसने भी सकारात्मक सोच के साथ स्वागत किया है। एक मुल्क के तौर पर हमारी प्राथमिकताएं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति है। यह बदलते हुए भारत की नई पीढ़ी समझ चुकी है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद समाज का हर हिस्सा प्रगति में बराबर का हिस्सेदार और भागीदार बन रहा है। उदाहरण के लिए, अभी-अभी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के 187 नौजवान चुने गए हैं। इन नौजवानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के होनहार भी शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘बिना भेदभाव सबके सशक्तीकरण, काबिलियत की कद्र’ का नतीजा है कि आज समाज के सभी वर्ग तरक्की की दिशा में हमसफर बन रहे हैं। इसी तरह, साल 2017-2018 के भी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम काफी उत्साहवद्र्धक रहे हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रशासनिक सेवाओं में अब चुने जा रहे हैं। जो लोग आज तक मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर वास्तविक सवालों से भरमाने का चक्रव्यूह रचते रहे, उनको भी अब यह अच्छी तरह समझ में आ रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास का मसौदा’, ‘वोट के सौदे’ से कोसों दूर है।
    हमने सदियों पुराने सद्भाव के जिस रास्ते को चुना है, वही ‘नए भारत, मजबूत भारत, समावेशी भारत’ की नई इबारत लिखेगा। भारत की संस्कृति समावेशी सोच से भरपूर रही है। हिन्दुस्तान अकेला देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं, जहां समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक अधिकार सुरक्षित हैं। भारत अकेला देश है, जहां मंदिरों के घंटे, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारों की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थनाओं की गूंज हमेशा बनी रहती है। विभिन्न धर्मों की मिली-जुली यह गूंज दुनिया को हिन्दुस्तान के समावेशी समाज का खूब एहसास कराती है।
    बुधवार को भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ का संदेश पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है कि भारत में किसी ने इसे अपनी विजय नहीं कहा। सभी ने मानवता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने सद्भाव से भरपूर समावेशी समाज के संकल्प को दोहराया। यह हमारे लिए सबक भी है और संदेश भी। हमें इसी सबक या संदेश को आने वाले दिनों में भी सार्थक करते चलना है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री

     

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