July 24, 2026
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    रुचिपूर्ण व्यवस्था बने

    • rounak group

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / लॉकडाउन के समय से सभी स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं तो शुरू हो गईं, लेकिन वे बस नाम की रह गई हैं। विशेषकर प्राइमरी कक्षाओं में तो शिक्षक प्रश्नोत्तर की एक सारणी बनाकर पीडीएफ के रूप में अभिभावकों को भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ले रहे हैं। न तो विद्यार्थियों को विषय-वस्तु के बारे में समझाया जाता है, न बच्चों से कोई संवाद किया जाता है। बच्चे केवल स्क्रिन पर देखकर प्रश्नों के उत्तर अपनी कॉपी में उतार लेते हैं। कई बच्चे मोबाइल फोन अथवा कंप्यूटर के आगे बैठे तो रहते हैं, पर पढ़ने में उनकी कोई रुचि नहीं होती। यहां मैं दोष शिक्षकों को दूंगी कि उन्हें इस तरह पढ़ाना चाहिए कि बच्चे सरल तरीके से सब कुछ समझ सकें। वर्तमान स्थिति में शिक्षण-सामग्री और पठन-पाठन, दोनों ही उपयोगी और रुचिपूर्ण हो, तभी ऑनलाइन कक्षा का उद्देश्य पूरा होगा।
    विभा गुप्ता, बेंगलुरु

    डूब गया सितारा
    चेतन चौहान का निधन एक तारा के टूटने के समान है। क्रिकेट के मैदान में कई ऑलराउंडर देखने को मिलते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में चंद लोग ही ऑलराउंडर बनते हैं। क्रिकेट के मशहूर बल्लेबाज रहे चेतन चौहान ने हमेशा इस खेल से अपना लगाव बनाए रखा और विभिन्न भूमिकाओं में रहकर इसकी सेवा की। बाद में समाज सेवा के लिए वह राजनीति में आए, और अभी उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में भी शामिल थे। अपनी काबिलियत से वह विरोधियों का भी दिल जीत लेते थे। यही वजह है कि क्रिकेटर, प्रशासक और राजनेता, सभी भूमिका में वह सफल साबित हुए। उनका जीवन सदैव नौजवानों को मार्गदर्शन और प्रेरणा देता रहेगा। उनके आकस्मिक निधन से समाज, राजनीति और खेल जगत, सभी को अपूरणीय क्षति हुई है।
    हिमांशु शेखर, गया

    आत्मनिर्भरता पर जोर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए भाषण में सबसे प्रमुख मुद्दा था, आत्मनिर्भर भारत, जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध दिखती है। इसी कारण से गरीब मजदूरों, छोटे कारोबारियों, कुटीर उद्योग वाले व्यापारियों को बैंक से बिना किसी ब्याज के कर्ज मुहैया कराया जा रहा है। जिस दिन ये छोटे कुनबे के लोग अपने-अपने व्यापार में सफल होंगे, देश का विकास खुद हो जाएगा। प्लास्टिक के गिलास को छोड़कर कुल्हड़ का प्रयोग करना ही देश और हमारे स्वास्थ्य के लिए श्रेयस्कर है। सरकार सभी नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के भरसक प्रयास कर रही है, जिससे हमारी पूंजी और मुनाफा हमारा रहे, कोई दूसरे देश की कंपनी न ले जाए। जल्द ही भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर होगा। इसके लिए सभी नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
    शुभम पांडेय गगन
    अयोध्या, उत्तर प्रदेश

    मैदान को टाटा
    अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी से हजारों-लाखों लोगों का दिल जीतने वाले भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने स्वतंत्रता दिवस की शाम को अपने इंस्टाग्राम पर ‘पल दो पल का शायर हूं’ कहते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इससे स्वाभाविक तौर पर उनके समर्थकों को झटका लगा और उनमें मायूसी छा गई। हालांकि, धौनी के संन्यास के बाद उनके जोड़ीदार सुरेश रैना ने भी ऐसा ही एलान किया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने की बात कही। धौनी टीम इंडिया के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी ही नहीं थे, बल्कि सलाहकार और टीम की जीत की राह बनाने वाले एक अच्छे फिनिशर भी थे। रैना के साथ उनकी जोड़ी तो वाकई तमाम क्रिकेटप्रेमियों को याद रहेगी। भले ही रैना और धौनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है, पर जब-जब अंतरराष्ट्रीय मैचे खेले जाएंगे, उनकी बात जरूर होगी।
    अनिल, दिल्ली विश्वविद्यालय

     

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