July 24, 2026
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    हरतालिका तीज व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है व्रत, यहां पढ़िए पूरी कथा

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    धर्म संसार / शौर्यपथ / भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21 अगस्त 2020 को पड़ रहा है। हरतालिका तीज व्रत का उत्तर भारत में विशेष महत्व है। इस व्रत में महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की अराधना करती हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, हरतालिका तीज व्रत में मिट्टी से बनी शिव-पार्वती प्रतिमा का विधिवत पूजन किया जाता है। इसके साथ ही हरतालिका तीज व्रत कथा को सुना जाता है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर के लिए इस व्रत को रखती है। कहते हैं कि एक बार व्रत रखने के बाद इस व्रत को जीवनभर रखा जाता है। बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है।

    हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व-

    शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत में कथा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि कथा के बिना इस व्रत को अधूरा माना जाता है। इसलिए हरतालिका तीज व्रत रखने वाले को कथा जरूर सुननी या पढ़नी चाहिए।

    हरतालिका तीज व्रत कथा-

    शास्त्रों के अनुसार, हिमवान की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए बालकाल में हिमालय पर्वत पर अन्न त्याग कर घोर तपस्या शुरू कर दी थी। इस बात पार्वती जी के माता-पिता काफी परेशान थे। तभी एक दिन नारद जी राजा हिमवान के पास पार्वती जी के लिए भगवान विष्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। माता पार्वती ने यह शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

    पार्वती जी ने अपनी एक सखी से कहा कि वह सिर्फ भोलेनाथ को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी। सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से खुश होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
    Hartalika Teej 2020 Puja: हरतालिका तीज की पूजा में इन चीजों की होगी जरूरत
    Hartalika Teej :हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाद्रपद महीने की तृतीया तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला रहकर अगले दिन व्रत का पारण करती हैं। सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनी जाती है।

    पूजा साम्रगी
    भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति रखने के लिए प्लेट
    जिस पर पूजा की जाएगी लकड़ी का पाटा
    लकड़ी के पाटे पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा
    पूजा के लिए नारियल
    पानी से भरा कलश
    आम के पत्ते
    घी
    दिया
    अगरबत्ती और धूप
    दीप जलाने के लिए देसी घी
    आरती के लिए कपूर
    पान के पत्ते
    सुपारी
    केले
    दक्षिणा

    बेलपत्र
    धतूरा
    शमी की पत्तियां
    जनेऊ
    चंदन
    माता के लिए चुनरी
    सुहाग का सामान
    मेंहदी
    काजल सिंदूर
    चूड़ियां, बिंदी
    गौर बनाने के लिए मिट्टी और पंचामृत

    सिद्ध व साध्य योग में 21 को हरितालिका तीज, पति की खातिर महिलाएं रखेंगी व्रत, होगी शिव-पार्वती की पूजा
    महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिये भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुक्रवार 21 अगस्त को हरितालिका तीज करेंगी। महिलाएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और पार्वती की पूजा करेंगी। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती सबसे पहले भगवान शिव को वर को रूप में प्राप्त करने के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखा था। इधर बाजार में तीज को लेकर फल-फूल, सौंदर्य प्रसाधन की जमकर खरीदारी हो रही है।

    21 को रात दो बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त
    आचार्य विप्रेंद झा माधव के मुताबिक शुक्रवार को सूर्योदय से लेकर रात 2 बजे तक तृतीया तिथि है। महिलाएं उस दिन सिद्ध तथा साध्य योग में शिव व पार्वती की पूजा करेंगी। शास्त्र के अनुसार इस दिन सुहागन स्त्रियों द्वारा उपवास रहकर श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती का पूजन करने से अखंड सौभाग्य, संतान, धन-वैभव की प्राप्ति होती है। शिव के समान पति की कामना के लिए कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ करती हैं। इसी दिन भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया था।

    गजकेशरी योग में होगी पूजा
    ज्योतिषाचार्य पीके युग के मुताबिक 21 अगस्त को मंगल, गुरु, शनि व सूर्य अपनी खुद की राशि में रहेंगे। इससे गजकेशरी और बुधादित्य योग का संयोग बनेगा। यह बहुत ही शुभ संयोग है। महिलाओं के सौभाग्य के कारक ग्रह गुरु भी खुद की राशि धनु में रहेंगे।

    प्रदोष काल में पूजन सर्वोत्तम
    आचार्य के मुताबिक हरितालिका तीज का पूजन प्रदोष(संध्याकाल) काल में सबसे बढ़िया माना जाता है। महिला व्रती प्रदोष काल में भगवान शिव, मां पार्वती और गणेश भगवान की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करती हैं। पूजन में फल-फूल के साथ सौंदर्य प्रसाधन की सभी वस्तुएं रखी जाती हैं। हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार शिव की बालू की प्रतिमा बनाकर पूजा किया था। तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। आज भी महिलाएं मिट्टी से भोलेनाथ-गौरी की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर विधि-विधान से पूजा कर कथा श्रवण करती हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त
    सुबह 6 बजे से 9 बजे
    दोपहर 12. 08 बजे से 02.25 बजे
    शाम 6. 16 बजे से रात 9.16 बजे

    पूजन में करें अर्पण
    - पंचामृत से शिव स्नान के बाद रेशमी वस्त्र अर्पित करें
    - गुलाब व इत्र अर्पण कर धूप दिखाएं
    - हरा-लाल या पीला वस्त्र धारण कर पूजा करें
    - मां पार्वती को हल्दी व भोलेनाथ को सफेद चंदन अर्पित करें
    - शिव का शृंगार तथा ओम नमः शिवाय का जाप करें
    - शिव-पार्वती को पीला फूल का हार चढ़ाकर रुद्राष्टकम का पाठ करें
    - शिव जी को बेलपत्र और दूर्वा चढ़ाए, मेहंदी जरूर लगाएं
    - शृंगार की वस्तुओं का दान करें
    - शिव-पार्वती को सुगंधित पुष्प अर्पित करें
    - सफेद चंदन तथा घी का दीपक प्रज्वलित करें
    - महादेव को श्वेत पुष्प अर्पित करें

     

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