July 24, 2026
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    भटकता पाकिस्तान

    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / बुनियादी हकीकत को भुला देने वाले मुल्क पाकिस्तान को अगर दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, तो कोई आश्चर्य नहीं। अरब दुनिया में अलग-थलग पड़ने लगा पाकिस्तान अब चीन को साथ रखने के लिए और भी मजबूर है। पाकिस्तान की जो आक्रामक व अतार्किक नीतियां हैं, उनके मुताबिक कोई भी समझदार, न्यायपूर्ण देश खुलकर उसके साथ खड़ा नहीं हो सकता। यह विडंबना है कि पाकिस्तान को भाग-भागकर उस चीन के पास जाना पड़ता है, जिसे उस धर्म की कतई परवाह नहीं है, जिसके आधार पर कभी पाकिस्तान बना था। जहां नमाज पढ़ने और दाढ़ी रखने पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है, वहां पाकिस्तान को किस रूप में होना चाहिए? शायद इस पर पाकिस्तान में कम ही लोग विचार करते हैं। वहां का सत्ता प्रतिष्ठान इतनी गहराई तक भारत विरोधी हो चुका है कि अपने देश की पहचान, आदर्श और संपदा की कीमत पर चीन से दोस्ती खरीदना चाहता है। यह बदलाव उसके भटकाव को ही साबित करता है। जिन मुस्लिम मुल्कों को वह अपना सहोदर मानता था, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात, उनकी बेरुखी भी पाकिस्तान को सुधार के लिए प्रेरित नहीं कर पाई। पाकिस्तान समझ नहीं पा रहा है कि भारत का वजूद पिछले कुछ दशकों में खुद मुस्लिम मुल्कों में किस कदर मजबूत हो चुका है, तो दूसरी ओर, इन्हीं दशकों में पाकिस्तान का वजूद कितना सिमटता जा रहा है।
    एक समय था, जब अरब दुनिया में पाकिस्तान की थोड़ी-बहुत सुनी जाती थी, लेकिन विगत चार वर्षों में भारत की व्यापक नीतियां अरब मुल्कों को समझ में आने लगी हैं। इसके अलावा जो धर्म के नाम पर चीन में हो रहा है, वह भी अरब मुल्कों से छिपा हुआ नहीं है। पाकिस्तान इस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता, पर एक समय आएगा, जब यह बात कहीं न कहीं से उठेगी और तब सबसे ज्यादा तकलीफ पाकिस्तान को होगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री अपने सेना प्रमुख के अरब से लौटते ही चीन पहुंच गए हैं, जहां उनकी चीनी विदेश मंत्री से बात होगी। वहां भले ही यह कहा जा रहा हो कि भारत की कोई चर्चा नहीं होगी, लेकिन यह बात अब छिपी नहीं है कि कश्मीर और भारत विरोधी प्रस्तावों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चीन क्यों सक्रिय नजर आता है। संकेत साफ है, चीन और पाकिस्तान की बातचीत का एक मुख्य मुद्दा भारत ही है। खुद को आर्थिक रूप से गिरवी रखते हुए पाकिस्तान जिस तरह से भारत विरोधी सौदे-साजिशें करता आ रहा है, उसे समझना किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से संकेत भी है, पाकिस्तान-चीन के बीच सीपैक, द्विपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय मसलों पर बातचीत होगी, लेकिन साथ ही भारत को चिढ़ाने के लिए उनके विशेषज्ञों ने यहां तक कहा है कि भारत कोविड-19 से लड़ने में अपनी विफलता की खीज चीन और पाकिस्तान पर निकाल रहा है।
    कहना न होगा, भारत को चिंता की नहीं, सावधान रहने की जरूरत है। पाकिस्तान अपनी भारत विरोधी गलत नीतियों के कारण अकेला पड़ रहा है, साजिश हो या विलाप, चीन उसका आखिरी कंधा है। भारत की रणनीति सही है, जो भी देश लोकतंत्र, न्याय, पारदर्शिता, अमन-चैन और सद्भाव के दुश्मन हैं, हिंसा और आतंक के प्रेमी हैं, उन्हें अकेले बैठना ही पड़ेगा। और हमारा काम है, उन पर चौकस नजर रखना।

     

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