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June 01, 2026
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महानवमी के दिन मां दुर्गा को लगाएं इन चीजों का भोग, मान्यतानुसार मिलती है माता की कृपा

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   व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज 23 अक्टूबर, सोमवार शारदीय नवरात्री का नौंवा दिन है जिसे नवमी या महानवमी कहा जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौंवे रूप मां सिद्धिदात्री  की पूजा की जाती है. नवमी पर जितना महत्व पूजा-आराधना का होता है उतना ही महत्व माता को लगाए जाने वाले भोग का भी है. मां को भोग में भक्त उनके प्रिय पकवान अर्पित करते हैं तो माता प्रसन्न होती हैं और माना जाता है कि भक्तों पर उनकी विशेष कृपादृष्टि भी पड़ती है. नवमी  के ही दिन बहुत से भक्त अपने घर में कन्यापूजन करते हैं. कन्यापूजन यानी कंजक में नौ कन्याओं को बुलाकर प्रसाद खिलाया जाता है और उपहार दिए जाते हैं. साथ ही, माता के समक्ष लगाए गए भोग को भी प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है. ऐसे में भोग का विशेष महत्व होता है. जानिए आज मां को किन-किन चीजों का भोग लगाया जा सकता है.
नवमी पर माता को किन चीजों का भोग लगाएं
 नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस चलते भोग भी मां के प्रिय पकवानों से तैयार किया जाता है.
पूरी
  सादे आटे की पूरी मां को भोग में विशेषकर लगाई जाती है. पूरी छोटी-छोटी हों तो देखने में अच्छी भी लगती हैं. ज्यादातर पूरी के साथ हलवा और चना भोग में लगाए जाते हैं और यही प्रसाद में कन्याओं को भी परोसा जाता है.
काले चने
   भोग में माता को काले चने  चढ़ाना शुभ मानते हैं. काले चनों से भोग तैयार करने के लिए रात में ही चने भिगोकर रख दें. सुबह इन चनों को उबालें और फिर तेल, जीरा और नमक डालकर फ्राई कर लें. चने बेहद स्वादिष्ट बनेंगे और प्रसाद में भी चढ़ाए जा सकेंगे.
हलवा
  नवमी भोग  में हलवा चढ़ाना बेहद शुभ इसलिए भी होता है क्योंकि यह मीठा पकवान है और मीठे को पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में खाना बेहद अच्छा मानते हैं. भोग में हलवा चढ़ाने के लिए सबसे पहले सूजी को कढ़ाही में डालकर भून लें. जब सूजी सुनहरी हो जाए तो इसमें घी, चीनी, इलायची पाउडर और सूखे मेवे डालकर अच्छे से मिलाएं. पानी डालकर पकाएं और बस तैयार है आपका सूजी का हलवा.
मालपुए
  पूजा के भोग में मालपुए बनाकर भी मां के समक्ष अर्पित किए जा सकते हैं. मालपुए या पुए आटे से बनते हैं और स्वाद में मीठे होते हैं. इन्हें आटे में चीनी, इलायची पाउडर और पानी मिलाकर तैयार किया जाता है. तेल में इस मिश्रण को डालकर सुनहरा भूरा होने तक पकाते हैं और फिर सादा या चाशनी में डुबोकर खाते हैं.

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