Google Analytics —— Meta Pixel
May 25, 2026
Hindi Hindi

कमला एकादशी 7 पद्मिनी एकादशी कथा व व्रत वाले दिन क्या करे

  • rounak group

धर्म संसार /शौर्यपथ /त्रेता युग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा महिष्मतिपुरी में राज्य करते थे। इनकी एक हजार पत्नियां थीं किन्तु सन्तान कोई नहीं थी, जो राज्य संभाल सके। देवताओं, पितरों व साधुओं के निर्देशानुसार विभिन्न व्रतों के अनुष्ठान करने से भी उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। वे अपने मंत्री को सम्पूर्ण राज्य-भार देकर, राजसी वेष त्याग कर तपस्या करने चले गए। महाराज के साथ उनकी बड़ी रानी, जो की इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न महाराज हरिश्चन्द्र की कन्या पद्मिनी थी ने भी उनका अनुसरण किया। उन दोनों ने मन्दराचल पर्वत पर जाकर दस हज़ार वर्ष तक घनघोर तपस्या की।
तपस्या करने से महाराज का शरीर एकदम कमज़ोर हो गया। इधर महारानी पद्मिनी ने महासाध्वी अनुसूयाजी से विनीत होकर पूछा कि हे साध्वी! मेरे पति ने दस हज़ार वर्ष तक तपस्या की परन्तु फिर भी सर्व-दु:ख विनाशकारी भगवान केशवदेव अब तक प्रसन्न नहीं हुए। आप कृपा करके मुझे किसी ऐसे व्रत का उपदेश दीजिए कि जिसके पालन करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हो जाएं एवं हमें राजचक्रवर्ती की तरह कीर्तिमान श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति हो सके। पतिपरायणा साध्वी अनुसूया, रानी पद्मिनी की प्रार्थना सुनकर बड़ी प्रसन्न हुईं एवं रानी से बोलीं – 32 महीने बाद एक बार अधिक मास आता है। इस महीने में पद्मिनी एवं परमा नाम की दो एकादशियां आती हैं, इन एकादशियों के व्रत का पालन करने पर पुत्रदाता भगवान बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अनुसूया देवी जी के कथनानुसार रानी पद्मिनी ने विधिपूर्वक एकादशी व्रत का पालन किया। तब भगवान केशवदेव गरुड़ पर स्वार होकर रानी के समीप आए और उन्होंने रानी से वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने बड़ी श्रद्धा से भगवान की स्तुति-वन्दना की तथा पतिदेव की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए निवेदन किया। भगवान ने कहा- हे भद्रे! मैं तुम पर अति प्रसन्न हूं।
अधिक मास को मेरे नाम पर ही पुरुषोत्त्म मास कहते हैं। इस पवित्र महीने के समान अन्य कोई महीना मेरा प्रिय नहीं है। इस महीने की एकादशी भी मुझे अत्यन्त प्रिय है। आप लोगों ने इस व्रत का सही विधि-विधान से पालन किया है। अत: आपके पतिदेव को उनका अभिलषित वरदान अवश्य दूंगा। राजा को इच्छानुसार वरदान देकर भगवान अन्तर्हित हो गए। कालान्तर में उसी रानी के गर्भ से महाराज कृतवीर्य का पुत्र कार्तवीर्यार्जुन का जन्म हुआ। तीनों लोकों में कार्तवीर्यार्जुन के समान कोई बलवान नहीं था। इसी कार्तवीर्यार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया था।
कमला एकादशी (पद्मिनी एकादशी) व्रत वाले दिन क्या करे
वरुण मंत्र को जपकर पवित्र तीर्थों के अभाव में उनका स्मरण करते हुए किसी तालाब में स्नान करना चाहिए ।
अधिक मास की शुक्लपक्ष की 'पद्मिनी एकादशीÓ का व्रत निर्जल करना चाहिए ।
यदि मनुष्य में निर्जल रहने की शक्ति न हो तो उसे जल पान या अल्पाहार से व्रत करना चाहिए ।
इस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए भूमि पर सोना चाहिए।
स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करके संध्या, तर्पण करके मंदिर में जाकर भगवान की धूप, दीप, नैवेघ, पुष्प, केसर आदि से पूजा करनी चाहिए ।
इस व्रत को करने के लिए दशमी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए।
प्रति पहर मनुष्य को भगवान या महादेवजी की पूजा करनी चाहिए ।
इसके पश्चात सफेद वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करें और कथा का पाठ करें।भक्तजनों के साथ भगवान के सामने पुराण की कथा सुने ।
रात्रि में जागरण करके नाच और गान करके भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए ।
पहले पहर में भगवान को नारियल, दूसरे में बिल्वफल, तीसरे में सीताफल और चौथे में सुपारी, नारंगी अर्पण करना चाहिए ।
इस तरह से सूर्योदय तक जागरण करना चाहिए और स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए ।
स्नान में तिल, मिट्टी, कुश व आंवले के चुर्ण भी शामिल करें।

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)