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March 11, 2026
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अंग्रेजी माध्यम के बच्चों का हिन्दी माध्यम में प्रवेश का एसोसियेशन ने किया विरोध

  • devendra yadav birth day

राजनांदगांव/शौर्यपथ / संचालक लोक शिक्षण संचालनालय इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र लिखकर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि निजी स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया जावे, क्योंकि प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के द्वारा यह लिखित दावा किया जा रहा है कि लगभग 2 लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ दिया है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि शाला त्यागी बच्चे जो ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम से है और सरकार की सरकारी स्कूलें ज्यादातर हिन्दी मिडियम के है। ऐसी परिस्थिति में अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को जबरदस्ती हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि संचालक के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि इन शालात्यागी बच्चों को सरकारी स्कूलों के किस मिडियम में प्रवेश दिया जाएगा।
पॉल का कहना है कि सरकार द्वारा विगत दो वर्ष पूर्व हर विकासखंड में अंग्रेजी मिडियम स्कूल आरंभ किया गया था और इस वर्ष सभी जिले में उत्कृष्ट अंग्रेजी मिडियम स्कूल आंरभ किया गया है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अब इन सभी शालात्यागी बच्चों को सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई जा रही है।
पॉल ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा निजी इंग्लिश मिडियम स्कूलों से आने वाले बच्चों को भी सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिया जाना न्यायसंगत नहीं है। सरकार की नियत और नीति दोनों पर सवाल उठाया जाएगा, क्योंकि निजी इंग्लिश मिडियम स्कूल में जो बच्चा बचपन से इंग्लिश मिडियम में पढ़ा हो उसे कैसे हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिलाया जा सकता है। शिक्षा विभाग इन बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ इस प्रकार जान-बुझकर खिलवाड़ नहीं कर सकती है, इसलिए एसोसियेशन की यह मांग है कि अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में और हिन्दी माध्यम से आने वाले बच्चों को हिन्दी माध्यम में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों के जीवन व भविष्य के खिलवाड़ बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
पॉल का कहना है कि बच्चा जब निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में प्रवेश लेगा, तो सबसे पहले उसकी किताबें और कोर्स नई होगी, क्योंकि प्रायवेट स्कूलों में ज्यादातर किताबें प्रायवेट प्रकाशक की पढ़ाई जाती है। उसके पश्चात् सभी स्कूलों में कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स पूर्ण किया जा चुका है ऐसे परिस्थिति में जो बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में जा रहे है उनका क्या होगा?

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