July 31, 2026
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    इस पौधे से बनने वाली माला को माना जाता है बेहद शुभ, धारण करने पर मिलती है सुख-समृद्धि

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    आस्था /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में मालाएं धारण करना बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं मालाएं धारण करना या फिर माला से जाप करने पर आराध्य सभी मनोकामनाएं सुनते हैं. वहीं, माला से जाप करने पर ध्यानकेंद्रित करने में मदद मिलती है और मन शांत भी महसूस करता है. मालाएं कई अलग-अलग तरह की होती हैं और इन्हीं में से एक है तुलसी की माला. तुलसी की माला धारण करना अत्यधिक शुभ माना जाता है. कहते हैं तुलसी की माला में स्वयं मां लक्ष्मी का वास होता है और तुलसी की माला से जाप करने पर भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं. ऐसे में मन को तो शांति मिलती ही है, साथ ही आत्मा पवित्र भी हो जाती है. जानिए तुलसी की माला से जाप करने और इस माला को धारण करने से मिलने वाले लाभ और नियमों के बारे में.
    तुलसी की माला को धारण करने के लाभ |
    माना जाता है कि तुलसी में मां लक्ष्मी का वास होता है. ऐसे में तुलसी की माला से जाप करने या फिर तुलसी की माला धारण करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है.
    तुलसी को धार्मिक मान्यतानुसार भगवान विष्णु की प्रिय कहा जाता है. ऐसे में तुलसी की माला पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है.
    तुलसी की माला धारण करने पर भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है और भगवान विष्णु जातक के घर-परिवार में खुशहाली लाते हैं.
    मान्यतानुसार तुलसी की माला धारण करने पर बुध और शुक्र ग्रह मजबूत रहते हैं. इससे मन शांत भी रहता है.
    तुलसी की माला धारण करने के नियम
    तुलसी की माला धारण करने से पहले इस माला को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है. इसके बाद तुलसी माता के मंत्रों का जाप किया जाता है और फिर माला धारण करते हैं.
    जो व्यक्ति तुलसी की माला धारण करता है उसे सात्विक भोजन करा पड़ता है. इसके अतिरिक्त, माला धारण करने वाला व्यक्ति मदिरा का सेवन या तामसिक भोजन भी नहीं कर सकता है.
    तुलसी की माला पहनने वालों को रुद्राक्ष पहनने की मनाही होती है. दोनों तरह की मालाएं एक साथ पहनना अच्छा नहीं माना जाता है.
    रोजाना तुलसी की माला की पूजा की जाती है और कहते हैं इस माला को धारण करने के बाद उतारना नहीं चाहिए. नित्य कर्म से पहले माला उतारी जाती है और स्नान के पश्चात इसे फिर पहन सकते हैं.
    माना जाता है कि जो लोग तुलसी की माला को गले में धारण नहीं कर सकते हैं वे इसे दाएं हाथ पर बांध सकते हैं.

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