July 24, 2026
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    कोरोना श्वसन तंत्र को ही नहीं दिमागी सेहत को भी पहुंचाता है नुकसान, मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक का खतरा

    • rounak group

    शौर्यपथ / अस्पताल में भर्ती रहे कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज अब मानसिक अस्थिरता से जूझने लगे हैं। शिकागो के नॉर्थ-वेस्टर्न विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अध्ययन से पता लगा कि चालीस प्रतिशत गंभीर मरीजों के मस्तिष्क पर वायरस इतना गहरा असर कर रहा है कि वे मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक के खतरों जूझ रहे हैं।
    कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि कोविड-19 का वायरस सिर्फ श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी मस्तिष्क समेत कई महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचाता है। इसी क्रम में ताजा अध्ययन बताता है कि अस्पताल में भर्ती रहे एक-तिहाई संक्रमित मरीजों के मस्तिष्क में एन्सेफैलोपैथी बीमारी विकसित हो जाती है।
    इस रोग में मस्तिष्क के उस हिस्से का पतन होने लगता है जिसके जरिए इंसान सोचता और शरीर को काम करने का निर्देश देता है। यह अध्ययन एन्नल्स ऑफ क्लीनिकल एंड ट्रांसजेशनल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ।
    कोमा तक का खतरा
    नॉर्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. इगोर कोरालनिक ने 509 कोविड मरीजों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि 82.3 प्रतिशत मरीजों के मस्तिष्क पर इलाज के दौरान ही न्यूरोलॉजिकल असर दिखने लगता है। 31.8 प्रतिशत मरीजों में एन्सेफैलोपैथी की स्थिति दिखती है जो मरीज में मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक पहुंचा सकती है।
    वह कहते हैं कि यह कोविड-19 का सबसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल असर है। इसके अलावा 44.8 प्रतिशत मरीज मांसपेशियों का दर्द, 37.7 प्रतिशत मरीज सिरदर्द, 29.7 प्रतिशत मरीज थकावट, 15.9 प्रतिशत मरीज स्वादहीनता व 11.4 प्रतिशत मरीज गंधहीनता महसूस करने लगते हैं।
    युवा मरीजों में खतरा ज्यादा
    न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को देखा जाए तो करीब 45% मरीजों में मांसपेशियों में दर्द, 38% मरीजों में सिरदर्द, करीब 30% मरीजों में चक्कर आने की शिकायत देखी गईं। जबकि, स्वाद या सूंघने की परेशानियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या कम थी। स्टडी के मुताबिक, एंसेफेलोपैथी के अलावा युवाओं में न्यूरोलॉजिकल लक्षण होने की संभावना ज्यादा थी।
    चीन और स्पेन से ज्यादा मामले
    बदली हुई मानसिक स्थिति केवल न्यूरोलॉजिकल परेशानी नहीं है। कुल मिलाकर 82% भर्ती मरीजों में बीमारी के दौरान किसी न किसी मौके पर न्यूरोलॉजिकल लक्षण नजर आए थे। यह दर चीन और स्पेन में ज्यादा है।

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