July 25, 2026
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    कोरोना काल में इन कारणों से बच्चों की आंखें हो रही हैं कमजोर, ऐसे करें देखभाल

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    सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में कई महीने से घर के अंदर रहने के कारण बच्चों को नजर कमजोर हो रही है। उनको दूर की चीजें देखने में दिक्कत महसूस हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना काल में बच्चे घरों में मोबाइल-कम्प्यूटर स्क्रीन पर घंटों काम कर रहे हैं। इससे उन्हें निकट दृष्टि रोग (मायोपिया) हो सकता है, जिसमें दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल शर्मा के मुताबिक कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घर से ही पढ़ाई हो रही है। कई घंटों तक चलने वाली ऑनलाइन क्लास के दौरान बरती गईं छोटी-छोटी लापरवाही आंखों में खुजली, लालिमा, रुखापन और सिरदर्द को बढ़ा रही हैं। लम्बे समय तक ऐसी स्थिति रही तो इससे मायोपिया हो सकता है। बच्चों में मोबाइल व टीवी के बढ़ते इस्तेमाल, आउटडोर खेलों से दूरी व लगातार पढ़ते रहने से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। बच्चों को एक घंटे से ज्यादा मोबाइल या टीवी न इस्तेमाल करने दें।
    धुंधलापन और रूखापन की समस्या
    स्क्रीन पर आंखों की पलकें नहीं झपकती हैं। जिसकी वजह से बच्चों की आंख में चुभन, दर्द, जलन और सूखने की दिक्कतें आ रही हैं। काफी देर बाद स्क्रीन से आंख हटाने पर दूर की चीजें धुंधली दिखने के साथ आंखों में तनाव और थकान लगती है। सिरदर्द, ज्यादा पलक झपकाना, आंख रगडऩा और बच्चों में थकान महसूस करना, देखने में परेशानी के संकेत हो सकते हैं। अगर मायोपिया का इलाज नहीं किया जाता है तो यह भविष्य में मायोपिक मैक्युलर डीजनरेशन, रेटिनल डिटैचमेंट, कैटेरेक्ट्स और ग्लुकोमा जैसी गंभीर बीमारियों की प्रवृत्ति का कारण बन सकती है। पढ़ाई के बीच एक घंटे के अंतराल पर आंखों को आराम देना चाहिए। रोजाना खिड़की से दूर की चीजें दिखाएं।
    दिल्ली और आसपास के 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया के शिकार
    एम्स में कुछ साल पहले हुए अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में करीब 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया से पीडि़त हैं। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में अभिभावकों को बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
    ऐसे करें बचाव
    20/20/20 नियम का पालन करें
    गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रोवर अभिभावकों को 20/20/20 रूल को फॉलो करने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट में बच्चों को 20 फीट की दूरी पर कम से कम 20 सेकंड के लिए कुछ देखना चाहिए। इससे आपकी आंखों को आराम मिलता है और वे अपने नेचुरल पोज में आ जाती हैं।
    मोबाइल की जगह कंप्यूटर या लैपटॉप इस्तेमाल करें। स्क्रीन की तेज रोशनी से बचाव करने वाले एंटीग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करें। योग को जीवन शैली का हिस्सा बनाएं। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के वक्त खुले कमरे या प्राकृतिक रोशनी में बैठाना चाहिए। क्योंकि मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन की लाइट आंखों पर पड़ती है, जो नुकसानदायक है।
    ये व्यायाम भी करें
    हाथ योग
    अपने दोनों हाथों को तब तक रगड़ें, जब तक की वो गर्म न हो जाएं। अब अपने हाथों को अपनी आंखों पर रख लें। इससे आंखों के आस-पास की नसों को आराम मिलेगा और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
    आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइस और एंटी-क्लॉकवाइस घुमाएं। ऐसा अपनी आंखें बंद कर के करें। इसे दिन में दो बार करें। हालांकि, इसे आप दिन में दो से अधिक बार भी कर सकते हैं।
    क्या है मायोपिया या निकट दृष्टि रोग
    मायोपिया या निकट दृष्टि रोग में आंख की पुतली (आई बॉल) का आकार बढऩे से प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली और अस्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन पास की वस्तुएं देखने में कोई परेशानी नहीं होती है।
    कोरोना काल में बच्चों और वयस्कों को घर पर घंटों ऑनलाइन काम करना पड़ रहा है। इससे उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। अस्पतालों में आंखों में जलन, ड्राइनेस और धुंधलापन के काफी मामले आ रहे हैं। लोग एहतियात रखेंगे तो वे इन परेशानियों को नियंत्रित कर सकते हैं।

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