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वास्तुशास्त्र /शौर्यपथ / वास्तु पुरुष के 32 पदों में से यह कड़ी पश्चिम दिशा के 17 से 24 पदों तक पर आधारित है। इसमें हम आपको बताएंगे पश्चिम दिशा में किस जगह दरवाजा होने पर क्या नुकसान और फायदा हो सकता है। ज्योतिषचार्य पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार वास्तु की दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
डब्ल्यू-1-यह पश्चिम दिशा का प्रथम पद है और पितृ कहलाता है। ऐसे पद पर दरवाजा होने पर घर से गरीबी नहीं जाती। घर के सदस्यों की आयु कम हो सकती है। रोग पीड़ा एवं अनावश्यक खर्चे बने रहते हैं। विशेष रुप से गृहस्वामी के लिए यह स्थान द्वार के लिए अशुभ होता है।
डब्ल्यू-2-पश्चिम दिशा का दूसरा पद द्वारिका कहलाता है। यह स्थान भी दरवाजे के लिए शुभ नहीं होता है। जिनके घर का द्वार इस पद पर होता है उस घर के निवासियों में अपव्यय की प्रवृत्ति होती है। नौकरी और व्यापार में अस्थिरता चलती है। कभी-कभी भयंकर धोखा हो जाता है और कर्जा बढ जाता है।
डब्ल्यू-3-पश्चिम दिशा का तीसरा पद सुग्रीव कहलाता है। यह पद पश्चिम दिशा का सबसे शुभ पद है। इस पद पर दरवाजा होने पर घर में खुशियों की बहार आ जाती है। व्यापार, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए द्वार बनाने के लिए बहुत ही शुभ स्थान है। यहां पर दरवाजा होना घर की विकास के द्वार खोल देता है। यदि कंपनी अथवा फैक्ट्री या दुकान का दरवाजा हो तो शीघ्र ही कई ब्रांच खुल जाती हैं।
डब्ल्यू-4-पश्चिम दिशा का चौथा पद पुष्यदंत कहलाता है। इस पद पर घर का द्वार बहुत शुभ रहता है। इस पद पर द्वार होने से घर में संतुलित आय होती है। इस घर की संतान वृद्धि को प्राप्त होते हैं और उन्नति करते हैं। घर में सुख, शांति, एकता का निवास होता है। ऐसे घर के लोग मर्यादित जीवन जीते हैं।
डब्ल्यू-5- पश्चिम दिशा का पांचवा पद वरुण कहलाता है। पश्चिम दिशा का यह पद द्वार के लिए बहुत शुभ होता है। जिसके घर का द्वार इस पद पर होता है, वहां के लोग बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वे हर कार्य में निपुणता प्राप्त कर लेते हैं और धन वृद्धि व प्रतिष्ठा वृद्धि निरंतर बनी रहती है। इसी पद पर द्वार वाले व्यक्ति दूसरों की सहायता करने में देर नहीं करते।
डब्ल्यू-6-पश्चिम दिशा का छठा पद असुर कहलाता है। यहां द्वार बनाना परिवार के लिए शुभ नहीं होता है। ऐसे घरों में तनाव और निराशा का भाव जल्दी आता है। आर्थिक हानियां निरंतर चलती रहती हैं। कई घरों में तो ऐसी स्थिति वाले द्वारों के घरों के सदस्य डिप्रेशन में पाए गए हैं। धन संबंधी कार्यों में सफलता कम मिलती है। धन के मामले में कोई न कोई अभाव बना रहता है।
डब्ल्यू-7- पश्चिम दिशा का सातवां पद सौख्य कहलाता है। इस पद पर द्वार होना भी शुभ नहीं होता है। हमेशा निराशाजनक वातावरण रहता है। ऐसे घरों के व्यक्ति स्वार्थी हो जाते हैं। गृह स्वामी को निरंतर घर से बाहर रहना पड़ता है। कई घरों में वहां के सदस्यों के मन में नकारात्मक विचार घर कर लेते हैं। इससे वहां की प्रगति प्रभावित होती है।
डब्ल्यू-8-पश्चिम दिशा का आठवां एवं अंतिम पद पापयक्ष्मा कहलाता है। जिन व्यक्तियों के घर के द्वार इस दिशा में होते हैं उस घर के लोग स्वार्थी होते हैं। घर के महिला सदस्य अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहती हैं। पुरुष वर्ग को अधिकतर बाहर रहना पड़ता है। कई लोग तो विदेशों में भी फंस जाते हैं। अर्थात यह स्थान द्वार के लिए उपयुक्त नहीं है। घर में अनावश्यक आवागमन बना रहता है। इससे घर में अपव्यय अधिक होता रहता है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
