July 23, 2026
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    माता सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती पर गूंजा नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता का संदेश

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    अदम्य साहस, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति थीं सावित्रीबाई फूले

    दुर्ग, शंकर नगर।
    अखिल भारतीय एससी-एसटी-ओबीसी संयुक्त मोर्चा, छत्तीसगढ़ द्वारा भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती मनवा कुर्मी भवन, शंकर नगर दुर्ग में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में अनिल मेश्राम (राष्ट्रीय सचिव) मुख्य अतिथि तथा कौशल वर्मा (प्रदेश अध्यक्ष) की अध्यक्षता रही।

    कार्यक्रम की शुरुआत माता सावित्रीबाई फूले के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई।

    महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं सावित्रीबाई फूले

    संयुक्त मोर्चा महिला प्रकोष्ठ की दुर्ग जिला अध्यक्ष सविता वर्मा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फूले अदम्य साहस, असीम धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने महिलाओं के शैक्षणिक उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

    उपाध्यक्ष नलिनी बंछोर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाकर सावित्रीबाई फूले ने महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाया और समाज में नई चेतना का संचार किया।

    सच बोले बिना सामाजिक बदलाव संभव नहीं

    लक्ष्मीनारायण कुंभकार ने कहा कि यदि महापुरुषों के इतिहास का सच नहीं बोला जाएगा, तो झूठ और पाखंड का बोलबाला बढ़ता जाएगा।
    डी.एल. वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी जातिवाद और छुआछूत का दंश झेला, जबकि माता सावित्रीबाई फूले ने 1845 से 1890 तक विषम परिस्थितियों में महिला होकर शिक्षा का जो संघर्ष किया, वह अतुलनीय है।

    पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आगे आना होगा

    प्रदेश अध्यक्ष कौशल वर्मा ने कहा कि ज्योतिबा फूले और माता सावित्रीबाई फूले को आदर्श बनाकर दलित समाज आगे बढ़ा, लेकिन जागरूकता के अभाव में पिछड़ा वर्ग पीछे रह गया। अपने संतों और महापुरुषों के इतिहास को पढ़कर आत्ममंथन की आवश्यकता है।

    मुख्य अतिथि अनिल मेश्राम ने कहा कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को माता सावित्रीबाई फूले के त्याग, साहस और धैर्य को आत्मसात कर आगे बढ़ना होगा। तभी एससी-एसटी-ओबीसी की एकजुटता और डॉ. भीमराव अंबेडकर का सपना साकार हो सकेगा।

    महिला कल्याण की दिशा में प्रेरणास्रोत

    वक्ताओं ने कहा कि माता सावित्रीबाई फूले का जन्म 3 जनवरी 1831 (सातारा, महाराष्ट्र) तथा निधन 10 मार्च 1897 (पुणे, महाराष्ट्र) में हुआ। उनका पूरा जीवन वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों को शिक्षित करने में समर्पित रहा। उनका जीवन दर्शन हमें शिक्षित होकर संवैधानिक मार्ग पर संगठित होकर चलने की प्रेरणा देता है।

    उपस्थित रहे ये गणमान्य

    कार्यक्रम में अनिल मेश्राम, कौशल वर्मा, मुकुंद बंसोड, सविता वर्मा, डी. रजनी, हेमलता साहू, नलिनी बंछोर, उषा ठाकुर, पूर्णिमा टंडन, ऊषा मंडावी, डी.एल. वर्मा, अरुण बघेल, राकेश बोबांरडे, लक्ष्मीनारायण कुंभकार, अशोक मडामे, पवन दिल्लीवार, सुनीत यादव, तेजबहादुर बंछोर, रोशन वर्मा, अशोक साहू, धरमपाल वर्मा, भरत सेलारे, एस.आर. मंडावी सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का संचालन पवन दिल्लीवार (संगठन सचिव) ने किया तथा आभार प्रदर्शन अरुण बघेल (कोषाध्यक्ष) द्वारा किया गया।

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