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आज दोपहर 03:13 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ पुण्यकाल प्रारंभ हो गया है।
पुण्य काल: 03:13 PM से 05:45 PM
महा पुण्य काल: 03:13 PM से 04:48 PM
विशेष संयोग: सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग
इन शुभ योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर प्रवेश करते हैं। यह पर्व पारिवारिक सौहार्द, मतभेदों को समाप्त करने और संबंधों में मधुरता लाने का संदेश देता है।
महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन ही देह त्याग का चयन किया था, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस काल में शरीर त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख है कि आज के दिन देवी संक्रांति ने असुर मकर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय सुनिश्चित की थी।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी है। लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर को विटामिन D मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
आयुर्वेद के अनुसार, ठंड के मौसम में तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्म रखता है और आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान हजार गुना फल देता है।
दान के लिए विशेष वस्तुएं:
तिल और गुड़
खिचड़ी
कंबल एवं ऊनी वस्त्र
पितरों के लिए तिल युक्त जल से तर्पण
आज पितृ तर्पण करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है।
आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल एवं काले तिल मिले जल से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
