July 24, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    रोहिणी नक्षत्र में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान इन 3 उपायों से बरसेगी लक्ष्मी की कृपा

    • rounak group

    धर्म संसार / शौर्यपथ /कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली का पर्व कल देशभर में मनाया जाएगा। इसी के साथ ही कार्तिक मास स्नान भी कल से समाप्त हो जाएगा। एक मास के कार्तिक स्नान के आखिरी दिन पूर्णिमा को श्रद्धालु मंदिरों में दीप दान करते हैं। इसी दीप दान को देव दीपावली के नाम से जाना जाता है।
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही माता तुलसी वनस्पति के रूप में पृथ्वी पर प्रगट हुई थीं। पुराणों में कार्तिक मास की महत्ता के साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के महत्व को भी विस्तार से वर्णन किया गया है।
    हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक पूर्णिमा 29 और 30 नवंबर 2020 (रविवार, सोमवार) को है। 29 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू होगी और 30 नवंबर को दोपहर 02:25 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा का व्रत करने वालों के लिए रविवार को पूर्णिमा होगी जबकि स्नान-दान करने वाले सोमवार को पूर्णिमा मनाएंगे।
    कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिरों में दीपदान करना व दीपदर्शन करना बहुत ही शुभ होता है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दि भगवान के विष्णु के साथ गौरी-महादेव का पूजन किया जाता है। साल की 12 पूर्णिमाओं में से कार्तिक, माघ और वैशाख पूर्णिमा को विशेष ही पुण्यदायी माना गया है।
    कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि-
    कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रात: गंगा स्नान या पास की नदी/जलाशय में स्नान करना चाहिए।
    घर के बाहर जाना संभव न हो तो घर में ही स्नान के बाद गंगाजल छिड़क सकते हैं।
    स्नान करने के बाद भगवान विष्णु, शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
    कार्तिक पूर्णिमा की शाम को मंदिरों दीपक जलाना चाहिए। साथ शिव मंदिर में जाकर शिव परिवार (शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी) का दर्शन करना चाहिए।
    कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था त्रिपुरासुर का अंत
    इस संदर्भ में एक कथा है कि त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे। त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए, त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव, जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा।
    सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा, ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया। देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की। तब महादेव ने त्रिपुरासुर के वध का निर्णय लिया। महादेव ने तीनों लोकों में दैत्य को ढूंढ़ा। कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया। उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई।
    कार्तिक पूर्णिमा का पर्व सोमवार (30 नवंबर 2020 को) को अगर भरण और रोहिणी नक्षत्र में स्नान-दान के साथ मनाया जाएगा। सोमवार को सुबह पूर्णिमा तिथि को रोहणी नक्षत्र होने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। पू्र्णिमा तिथि तो रविवार को दोपहर 12:30 के बाद शुरू हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि सोमवार को होने के करण ग्रहस्थ लोग सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा मनाएंगे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली, तुलसी प्राकट्योत्सव और गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व भी मनाया जाएगा। इस प्रकार गुरुनानक देव जी का 151 प्रकाशोत्सव होगा।
    कार्तिक पूर्णिमा 2020 तिथि:
    29 नवंबर 2020, रविवार: पूर्णिमा तिथि आरंभ-दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर
    30 नवंबर 2020, सोमवार: पूर्णिमा तिथि समाप्‍त - दोपहर 02 बजकर 59 मिनट पर
    देव दीपावली का पर्व भगवान विष्णु से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन बनारस के घाटों पर देवता देव दीपावली मनाने आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली को लेकर पुराणों में कई कथाओं का वर्णन मिलता है।
    लक्ष्मी जी की कृपा पाने को कार्तिक पूर्णिमा को करें ये 3 उपाय
    1- तुलसी की पूजा करें। तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। कार्तिक पू्र्णिमा को ही तुलसी पृथ्वी पर वनस्पति के रूप में आई। इसलिए आज के दिन उनकी पूजा का विधान है। मान्यता है कि ऐसे करने वालों पर माता लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं।
    2- गंगा/नदी में स्नान कर पूजापाठ और दान करने के बाद मंदिरों में घी का दिया जलाएं। ऐसा करने से देवता प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं।
    3- घर अपने अपने पितरों के नाम पर दीपक रखें। परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए पितरों को खुश करना बेहद जरूरी माना जाता है। देव दीपावली को पितर देवताओं को दीप दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
    कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर सोमवार को है। इस दिन स्नान के साथ दान का भी बहुत महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग व वर्धमान योग बन रहे हैं। इस योग के कारण कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में या तुलसी के पास दीप जलाने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
    कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार कोरोना के कारण कई जगह गंगा स्नान की अनुमति नहीं है। इसलिए श्रद्धालु घर पर नहाने के लिए रखे गए पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान का पुण्य ले सकते हैं।
    ज्योतिषाचार्य डा.सुशांत राज के अनुसार इस दिन किए जाने वाले दान-पुण्य समेत कई धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा की संध्या पर भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। दूसरी मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया था।
    तीसरा उपच्छाया ग्रहण 30 नवंबर को
    तीसरा उपच्छाया ग्रहण भी 30 नवंबर को ही है। यह वास्तव में चंद्रग्रहण नहीं होता। इस उपच्छाया ग्रहण की समयावधि में चंद्रमा की चांदनी में केवल धुंधलापन आ जाता है। इससे ग्रहण के सूतक भी नहीं लगेगा। भारत सहित यह उपच्छाया अधिकतर यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिमी दक्षिण अमरीका (पूर्वी ब्राजील, उर्गवे, पूर्वी अर्जेन्टीना), प्रशांत तथा हिन्द महासागर आदि क्षेत्रो में दिखाई देगा। भारत के कई प्रांतों में यह उपच्छाया दिखाई नही देगी।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision