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May 26, 2026
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पाचन से जुड़ी समस्या से हैं परेशान तो नियमित करें इन 3 योगासन का अभ्यास

  • rounak group

सेहत /शौर्यपथ / अनहेल्दी लाइफस्टाइल और जंक फूड के सेवन का सीधा असर आपके पेट यानी की आपकी पाचन शक्ति पर पड़ता है। खराब खानपान और व्यायाम न होने के कारण पाचन से जुड़ी समस्या परेशान करती है। अगर आप भी इन्हीं समस्याओं से परेशान हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए। जी हां योगासन की मदद से आप पाचन संबंधी परेशानियों से राहत पा सकते है। आइए जानते है कौन से योगासन है जिनका आपको नियमित अभ्यास करना चाहिए....
कपालभाति प्राणायाम
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अपने हाथों को घुटनों पर रखें और एक लंबी गहरी सांस अंदर लें। सांस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचें। पेट की मांसपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचें। जैसे ही आप पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है। कपालभाती 5 मिनट से शुरू करके 10 और 30 मिनट तक किया जा सकता है। कपालभाती प्राणायाम करते समय जोर से सांस को बाहर छोड़ें।यह पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है। यह वजन कम करने में मदद करता है।नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है। रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
मत्स्यासन
मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़ा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। सावधानी : छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। बड़ी सावधानी से यह आसन करना चाहिए, शीघ्रता से गर्दन में मोच आ जाने का भय रहता है, क्योंकि धड़ को बिल्कुल ऊपर कर देना होता है। यह आसन एक मिनट से दो मिनट तक किया जा सकता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। गला साफ रहता है तथा छाती और पेट के रोग दूर होते हैं। रक्ताभिसरण की गति बढ़ती है, जिससे चर्म रोग नहीं होता। दमे के रोगियों को इससे लाभ मिलता है। पेट की चर्बी घटती है। खांसी दूर होती है।
धनुरासन
मकरासन की अवस्था में पेट के बल लेट जाएँ। फिर दोनों पैरों को आपस में सटाते हुए हाथों को कमर से सटाएँ। ठोड़ी भूम‍ि पर रखें। एड़ी-पंजे और घुटने मिले हुए हों। कोहनियाँ कमर से सटी हुई और हथेलियाँ ऊपर की ओर रखें।अब टाँगों को घुटनों से मोड़ें। फिर दोनों हाथों से पैरों को टखनों के पास से पकड़ें। हाथों और पैरों को खींचते हुए घुटने भी ऊपर उठाएँ। जितना हो सके उतना सिर पीछे की ओर ले जाएँ। प्रयास कीजिए क‍ि पूरे शरीर का बोझ नाभिप्रदेश के ऊपर ही रहे। पैर के तलवे और सिर समान रूप से सीध में रहें। कुम्भक करके इस स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें।वापस आने के लिए पहले ठोड़ी को भूमि पर टिकाएँ, फिर हाथों को बाद में धीरे-धीरे पैरों को भूमि पर लाते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लेट जाएँ और पूरक करें। श्वास-प्रश्वास के सामान्य होने पर दूसरी बार करें। इस प्रकार 3-4 बार करने से इसका अभ्यास बढ़ता है।
धनुरासन से पेट की चरबी कम होती है। इससे सभी आंतरिक अंगों, माँसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। पाचनशक्ति बढ़ती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है। मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। सर्वाइकल, स्पोंडोलाइटिस, कमर दर्द एवं उदर रोगों में लाभकारी आसन है। स्त्रियों की मासिक धर्म सम्बधी विकृतियाँ दूर करता है। मूत्र-विकारों को दूर कर गुर्दों को पुष्ट बनाता है।

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