Google Analytics —— Meta Pixel
May 26, 2026
Hindi Hindi

भगवान विष्णु के 24 अवतारों में छठे स्थान हैं भगवान दत्तात्रेय, शिवजी की विशेष कृपा पाने के लिए करें इस विधि से पूजा, पढ़ें कथा

  • rounak group

धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान दत्तात्रेय को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इन्हें भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। कहा जाता है कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन दत्तात्रेय जयंती पर पूजा करने पर विष्णु और शिव की कृपा मिलती है। इस बार यह तिथि 29 दिसंबर को पड़ रही है। कहते हैं कि दत्तात्रेय में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों दव की शक्तियां समाहित हैं। इसके साथ ही इनकी गणना भगवान विष्णु के 24 अवतारों में छठे स्थान पर की जाती है।
भगवान दत्तात्रेय की पूजा विधि-
मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु और शिवजी की कृपा से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय जी ने 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी और इन्हीं के नाम पर ही दत्त समुदाय का उदय हुआ। दक्षिण भारत में इनका प्रसिद्ध मंदिर भी है।
1. भगवान दत्तात्रेय की पूजा के लिए घर के मंदिर या फिर किसी पवित्र स्थान पर इनकी प्रतिमा स्थापित करें।
2. अब उन्हें पीले फूल और पीली चीजें अर्पित करें।
3. इसके बाद इनके मन्त्रों का जाप करें।
4. मंत्र इस प्रकार हैं ‘;ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा’ दूसरा मंत्र ‘ॐ महानाथाय नमः’।
5. मंत्रों के जाप के बाद भगवान से कामना की पूर्ति की प्रार्थना करें।
6. इस दिन एक वेला तक उपवास या व्रत रखना चाहिए।
भगवान दत्तात्रेय के जन्म की कथा-
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तीन देवियों को अपने सतीत्व यानी पतिव्रता धर्म पर अभिमान हो गया। तब भगवान विष्णु ने लीला रची। तब नारद जी ने तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती जी के समक्ष अनसूया के पतिव्रता धर्म की प्रशंसा कर दी। इस पर तीनों देवियों ने अपने पतियों से अनसूया के पतिधर्म की परीक्षा लेने का हठ किया।
तब त्रिदेव ब्राह्मण के वेश में महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे, तब महर्षि अत्रि घर पर नहीं थे। तीन ब्राह्मणों को देखकर अनसूया उनके पास गईं। वे उन ब्राह्मणों का आदरसत्कार करने के लिए आगे बढ़ी तब उन ब्राह्मणों ने कहा कि जब तक वे उनको अपनी गोद में बैठाकर भोजन नहीं कराएंगी, तब तक वे उनकी आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस शर्त से अनसूया चिंतित हो गईं। फिर उन्होंने अपने तपोबल से उन ब्राह्मणों की सत्यता जान गईं। भगवान विष्णु और अपने पति अत्रि को स्मरण करने के बाद उन्होंने कहा कि यदि उनका पतिव्रता धर्म सत्य है तो से तीनों ब्राह्मण 6 माह के शिशु बन जाएं। अनसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेवों को शिशु बना दिया। शिशु बनते ही तीनों रोने लगे।
तब अनसूया ने उनको अपनी गोद में लेकर दुग्धपान कराया और उन तीनों को पालने में रख दिया। उधर तीनों देवियां अपने पतियों के वापस न आने से चिंतित हो गईं। तब नारद जी ने उनको सारा घटनाक्रम बताया। इसके पश्चात तीनों देवियों को अपने किए पर बहुत ही पश्चाताप हुआ। उन तीनों देवियों ने अनसूया से क्षमा मांगी और अपने पतियों को मूल स्वरूप में लाने का निवेदन किया।

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)