July 25, 2026
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    फल-सब्जी के छिल्के में छिपा है कई बीमारियों का इलाज, जानें किसका सेवन करने से मिलेगी किस रोग से निजात

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    सेहत /शौर्यपथ / अगली बार जब आप केला खाएं तो उसका छिल्का फेंकें नहीं। संतरे और मौसमी के छिल्के को भी सहेजकर रखें। जी हां, जापान सहित दुनिया के विभन्नि देशों में हुए शोध में फल-सब्जी के छिल्के को डिप्रेशन से लेकर दिल की बीमारियों तक से बचाव में कारगर करार दिया गया है। त्वचा को मुलायम, दाग रहित और चमकदार बनाए रखने में भी छिल्कों की अहम भूमिका पाई गई है।

    छिल्के में है दम
    केला : डिप्रेशन, मोतियाबिंद
    -ताइवान की चुंग शान मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोध में केले के छिल्के में फील गुड हार्मोन सेरोटोनिन की मौजूदगी दर्ज की गई, जो बेचैनी-उदासी का भाव घटाता है
    -इसमें ल्यूटिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी पाया गया है, जो आंखों में मौजूद कोशिकाओं को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाकर मोतियाबिंद के खतरे में कमी लाता है
    यूं करें इस्तेमाल : केले के छिल्के को दस मिनट तक साफ पानी में उबालें। पानी ठंडा होने के बाद इसे छानकर पी लें।

    नाशपाती : पेट और लिवर रोग
    -ब्रिटेन स्थित रॉयल सोसायटी ऑफ मेडिसिन के एक शोध के मुताबिक नाशपाती का छिल्का विटामिन-सी और फाइबर के अलावा ब्रोमलेन का बेहतरीन स्रोत
    -चयापचय क्रिया दुरुस्त रखने के साथ ही पेट में मौजूद मृत ऊतकों के शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है यह एंजाइम, लिवर रोग रखता है दूर
    यूं करें इस्तेमाल : नाशपाती को छिल्के सहित खाना पसंद नहीं करते हैं तो उसका जूस, शेक या सूप बनाकर पी सकते हैं।

    लहसुन : हृदयरोग, स्ट्रोक
    -द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में छपे एक जापानी अध्ययन में लहसुन के छिल्के में फिनायलप्रॉपेनॉयड नाम के एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी सामने आई है
    -रक्तचाप के साथ ही लो-डेन्सिटी लाइपोप्रोटीन (एलडीएल) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाकर हृदयरोग और स्ट्रोक से बचाता है यह एंटीऑक्सीडेंट
    यूं करें इस्तेमाल : रोज सुबह खाली पेट दो कली लहसुन चबाएं, वो भी बिना छिल्का उतारे। सब्जी-चटनी में भी छिल्के सहित इस्तेमाल करें।

    संतरा-मौसमी : हृदयरोग, स्ट्रोक
    -रॉयल सोसायटी ऑफ मेडिसिन के एक अन्य शोध से पता चला है कि संतरे-मौसमी जैसे खट्टे फलों के छिल्के में भारी मात्रा में सुपर-फ्लैवोनॉयड मौजूद होता है
    -बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाता है यह एंटीऑक्सीडेंट, रक्त प्रवाह के दौरान धमनियों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ने देता, हृदयरोग-स्ट्रोक से महफूज रखता है
    यूं करें इस्तेमाल : सब्जी-सूप में छिल्का कद्दूकस करके डाल सकते हैं। केक और मफिन में प्रयोग भी अच्छा विकल्प। जूस बनाकर पी सकते हैं।

    कद्दू : कैंसर
    -अमेरिका के एरिजोना कैंसर सेंटर के एक रिसर्च में कद्दू के छिल्के में मौजूद बीटा कैरोटीन फ्री-रैडिकल्स का खात्मा कर कैंसर से बचाव में मददगार मिला
    -जिंक की मौजूदगी नाखून को मजबूत बनाने के अलावा अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा कोशिकाओं की रक्षा करती है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर
    -यूं करें इस्तेमाल : छिल्का मुलायम हो तो सब्जी के साथ पकाएं। और अगर कड़ा हो तो छीलकर धूप में सुखाएं। ओवन में भूनकर चिप्स के रूप में खा सकते हैं।

    आलू : पाचन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें
    -जर्नल ऑफ मेडिकल प्लांट्स में छपे शोध की मानें तो एक बड़े आलू का छिल्का रोजाना जरूरी जिंक, आयरन, विटामिन-सी, पोटैशियम की खुराक पूरा करता है
    -रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही पाचन तंत्र दुरुस्त रखता है, त्वचा की रंगत में निखार लाने के साथ ही आंखों के किनारे पड़े काले धारे दूर करने में मददगार
    यूं करें इस्तेमाल : आलू की सब्जी/भरता छिल्का सहित बनाएं। बारीक काटकर कुछ देर गर्म पानी-नमक के घोल में रखें। धूप में सुखाकर चिप्स बनाएं।

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