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June 19, 2026
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Naresh Dewangan

Naresh Dewangan


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जगदलपुर से नरेश देवांगन की रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। साय सरकार भले ही प्रदेश में सुशासन का ढोल पीट रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत जगदलपुर के हाटगुड़ा क्षेत्र में उस ढोल की पोल खोलती साफ दिखाई दे रही है। लालबाग से गणपति रिसोर्ट होते हुए बस्तर सांसद के गृहग्राम जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों विकास नहीं, बल्कि धूल और लापरवाही की मिसाल बन चुका है।

PMGSY विभाग द्वारा चलाए जा रहे सड़क मरम्मत कार्य में निर्माण कम और “धूल का आतंक” ज़्यादा नजर आ रहा है। सड़क को उधेड़कर छोड़ दिया गया है, लेकिन डस्ट कंट्रोल के नाम पर न पानी का छिड़काव हो रहा है, न ही डामरीकरण का काम शुरू किया जा रहा है। नतीजा—दिनभर गुजरने वाले वाहनों से उड़ती घनी धूल ने हाटगुड़ा के दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। कुछ ही घंटों में दुकानों, घरों और सामानों पर धूल की मोटी परत जम जा रही है। स्थिति ऐसी है मानो यह कोई सड़क निर्माण स्थल नहीं, बल्कि धूल उत्पादन केंद्र बन गया हो। सांस लेना मुश्किल हो रहा है, आंखों में जलन, खांसी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

हाटगुड़ा के दुकानदारों का कहना हैं कि धूल के कारण न सिर्फ उनका सामान खराब हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बावजूद इसके, PMGSY विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ज़मीनी हालात से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि यह वही मार्ग है, जिससे होकर बस्तर सांसद अपने गृहग्राम आते-जाते हैं, फिर भी PMGSY विभाग में कोई संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही। जनता पूछ रही है—जब सांसद के मार्ग की यह हालत है, तो बाकी इलाकों का क्या हाल होगा?

काम के दौरान पानी तक न डालना, और डामर का काम शुरू न करना किसी तकनीकी कारण का नहीं, बल्कि सीधी लापरवाही और उदासीनता का संकेत है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ सामने होते हुए भी न विभाग हरकत में है, न जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है। काम के नाम पर धूल उड़ रही है, और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठकर सुशासन की फाइलें झाड़ रहे हैं।

PMGSY विभाग के साथ-साथ बस्तर सांसद की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है। क्या जनता की सेहत, रोज़मर्रा की परेशानी और नुकसान अब प्राथमिकता की सूची से बाहर हो चुके हैं? हाटगुड़ा के लोग अब सिर्फ सड़क नहीं, जवाब और जिम्मेदारी भी मांग रहे हैं।

BEO तोकापाल ने भेजी ‘तस्वीर’, पर ज़मीनी हकीकत पर सवाल बरकरार

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रकाशित खबर के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आता दिखाई दिया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) तोकापाल ने मामले में प्रतिक्रिया देते हुए समूह की बैठक लेकर बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी है। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी बताई गई है।

BEO तोकापाल द्वारा भेजे गए संदेश में कहा गया है कि मध्यान भोजन व्यवस्था को सुधारने के लिए संबंधित स्व-सहायता समूह को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को अच्छा, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।

 

राशि पंचायत की, निगरानी किसकी?

MDM राशि और समूह की नियुक्ति को लेकर दी गई यह सफाई अपने आप में कई सवाल छोड़ जाती है। यदि पैसा समूह को और नियुक्ति पंचायत की जिम्मेदारी है, तो फिर बच्चों की थाली में कमी आने पर जिम्मेदार कौन है?और सबसे अहम—अब तक निगरानी व्यवस्था कहां थी?

 

तस्वीर में सब सही, ज़मीनी हकीकत?

मामले में BEO तोकापाल की ओर से एक तस्वीर भी भेजी गई है, जिसमें मूली, बैंगन, पत्तागोभी की सब्ज़ी, दाल और चावल बना हुआ दिख रहा है। तस्वीर में भोजन भरपूर और संतुलित नजर आता है, लेकिन सवाल यह नहीं कि आज क्या बना—सवाल यह है कि हर दिन क्या बनेगा। क्या यही भोजन अब तोकापाल ब्लॉक की प्रत्येक शाला में बच्चों को प्रतिदिन दिया जाएगा?क्या सभी स्कूलों में तय मेनू चार्ट का सख्ती से पालन होगा, या तस्वीरें सिर्फ जवाब देने का माध्यम बनेंगी?

 

खबर से पहले क्यों नहीं जागा सिस्टम?

जानकारों का मानना है कि यदि नियमित निरीक्षण, अचानक जांच और जवाबदेही पहले से तय होती, तो बच्चों के भोजन को लेकर शिकायतें सामने ही क्यों आतीं? खबर आने के बाद बैठक और तस्वीरें भेजना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था स्थायी होगी?

 

अब सिर्फ वादे नहीं, परिणाम चाहिए

फिलहाल विभाग की यह सक्रियता कागज और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे रही है। असली परीक्षा अब ज़मीनी स्तर पर होगी—जहां बच्चों की थाली रोज भरेगी या फिर कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आएंगे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। विजय दिवस के पावन अवसर पर बस्तर संभाग पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1971 के भारत–पाक युद्ध में देश की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया तथा पूर्व सैनिकों के शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में विंग कमांडर जे.पी. पात्रो, समाजसेवी ज्ञानेश मिश्रा तथा नगर निगम के पार्षद एवं MIC सदस्य सुरेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है।

बस्तर संभाग पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संरक्षक घासीराम बघेल, अध्यक्ष विजय झा, उपाध्यक्ष अर्जुन पांडेय, सचिव अजय शुक्ला, उप सचिव सोनू सिंह, उप सचिव मनोज शुक्ला सहित सौरव यादव, सुभाष जॉन एवं तोप सिंह ने आयोजन की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाई। परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की अनुशासित सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

वक्ताओं ने युवाओं से राष्ट्र सेवा, अनुशासन और देशभक्ति के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

परिषद द्वारा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज रात्रि में जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे शीत ऋतु में गरीब एवं असहाय लोगों को राहत प्रदान की जा सके।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत हो गया।

तोकापाल ब्लॉक की शालाओं में “पोषण” नहीं, सिर्फ पेट भरने का औपचारिकता?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। विकासखंड तोकापाल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा निर्धारित मेनू चार्ट के अनुरूप भोजन नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बच्चों की थाली में परोसा जा रहा भोजन न तो स्वाद में संतोषजनक है और न ही पोषण की कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देता है। भोजन की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि परोसी गई सब्ज़ी है या पानी में उबली सब्ज़ी की परछाईं।

स्वाद की बात छोड़ भी दी जाए, तो पोषण का अभाव साफ नजर आता है। बच्चों और स्थानीय लोगों के अनुसार सब्ज़ियाँ अक्सर अधपकी होती हैं, मेनू चार्ट के अनुसार अचार-पापड़ जैसे निर्धारित घटक नहीं दिए जाते और भोजन लगभग प्रतिदिन एक जैसा, फीका व बेस्वाद रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

 

निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्यान भोजन योजना की नियमित जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय है, लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह संकेत देती है कि जमीनी निरीक्षण प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहे हैं।

इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), तोकापाल की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण नियमित रूप से हो रहे होते, तो भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रही ये शिकायतें सामने नहीं आतीं—या समय रहते सुधारी जा सकती थीं।

 

योजना का उद्देश्य और ज़मीनी हकीकत

मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य केवल बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं यह योजना सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गई है। सरकार इस योजना पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद यदि बच्चों की थाली में पोषण नहीं पहुँच पा रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

इस संबंध में ब्लॉक तोकापाल खण्ड शिक्षा अधिकारी पुनम सलाम से फ़ोन मे संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

अब यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे विकासखंड में मध्यान भोजन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि बुरूंगपाल की यह स्थिति है, तो अन्य शालाओं में भोजन की गुणवत्ता कैसी है—यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक के समापन की घोषणा के साथ ही जगदलपुर का आसमान एक अविस्मरणीय नजारे का गवाह बना। गृह मंत्री श्री शाह ने जैसे ही समापन की घोषणा की, पूरा वातावरण तालियों और हर्ष ध्वनि से गूंज उठा, और इसके ठीक बाद शुरू हुई शानदार आतिशबाजी ने दर्शकों का मन मोह लिया।

          समापन समारोह का मुख्य आकर्षण वह अद्भुत आतिशबाजी रही, जिसने मानो रात के खुले आसमान को अचानक सतरंगी बादलों से भर दिया। अलग-अलग रंगों और आकार के पटाखों की लड़ियाँ जब एक साथ फूटीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे इंद्रधनुष के सारे रंग नीचे उतर आए हों। पारंपरिक और आधुनिक खेलों के महाकुंभ रहे बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के बाद, इस भव्य आतिशबाजी ने उत्सव के माहौल को चरम पर पहुँचा दिया। उपस्थित जनसमूह, जिसमें स्थानीय निवासी, खिलाड़ी और गणमान्य व्यक्ति शामिल थे, इस नयनाभिराम दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने और खुली आँखों से निहारने में मशगूल रहे। यह आतिशबाजी सिर्फ पटाखों का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि बस्तर की समृद्ध खेल संस्कृति और यहाँ की शांतिपूर्ण प्रगति का एक चमकदार प्रतीक थी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है और बस्तर अब विकास की दिशा में सशक्त गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक समृद्ध राज्य है, किंतु माओवाद की समस्या प्रारंभ से ही राज्य के विकास में एक बड़ी बाधा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण अब माओवाद के अंत की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नियद नेल्ला नार योजना के दायरे को 5 किलोमीटर से बढ़ाकर 10 किलोमीटर तक विस्तारित किया गया है, जिसके माध्यम से 403 गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचने लगी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि माओवाद के कारण बंद पड़े स्कूल अब पुनः खुल रहे हैं। सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित कर अंदरूनी इलाकों को आवागमन की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। माओवाद से मुक्त गांवों में जनहितकारी योजनाओं का पूर्ण सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप विकास के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी तथा आगामी वर्ष और बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में एक नया इतिहास रच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा और बस्तर पुनः खुशहाल बनेगा। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा ने भी संबोधित किया और बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए खिलाड़ियों को बधाई दी। विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह के अंत में सांसद महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।

इस मौके पर केबिनेट मंत्री केदार कश्यप, सांसद भोजराज नाग, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी, विधायक सर्वश्री विक्रम उसेंडी, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन से पूर्व आयोजन स्थल पर एक ऐसा भावनात्मक और प्रेरणादायी क्षण देखने को मिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया। माओवादी बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर अपने पैर गंवा चुके साहसी प्रतिभागियों की विशेष व्हील चेयर दौड़ का आयोजन किया गया, जिसने खेल भावना के साथ-साथ अदम्य साहस और आत्मविश्वास का सशक्त संदेश दिया।

       इस व्हील चेयर दौड़ में बीजापुर जिले के छोटे तुमनार निवासी किशन हपका, सुकमा जिले के पुसवाड़ा के माड़वी सुक्का, सुकमा जिले के ही मेड़वाही के मड़कम मुन्ना, बीजापुर जिले की सरस्वती ओयाम तथा करटम जोगक्का ने भाग लिया। सभी प्रतिभागी माओवादियों द्वारा बिछाई गई आईईडी विस्फोटक सुरंगों की चपेट में आकर अपने पैरों से लाचार हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हौसले और जज्बे में कोई कमी नहीं दिखी। व्हील चेयर पर दौड़ते हुए इन साहसी लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि शारीरिक अक्षमता उनके सपनों और आत्मविश्वास को रोक नहीं सकती। उन्होंने अपने संघर्ष और जीवटता के माध्यम से यह साबित किया कि माओवादी हिंसा उनके जीवन की गति को थाम नहीं सकी है और वे पूरे आत्मबल के साथ आगे बढ़ने के लिए संकल्पित हैं। दौड़ के दौरान दर्शकों की तालियों और उत्साह ने माहौल को भावुक बना दिया। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और सकारात्मक सोच का प्रतीक बन गया। बस्तर ओलम्पिक के मंच से दिया गया यह संदेश लंबे समय तक लोगों के मन में प्रेरणा के रूप में जीवित रहेगा कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवन के प्रति विश्वास और आगे बढ़ने की इच्छा सबसे बड़ी ताकत होती है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में आया और आज बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन में भी शामिल होकर सर्वाधिक खुशी की अनुभूति हुई, आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं 2026 में जब लाल आतंक समाप्त होगा तो फिर बस्तर ओलंपिक समारोह में आऊंगा और कहूंगा कि बस्तर सबसे विकसित संभाग है। बस्तर ओलंपिक केवल यहां के लोगों की खेल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है बल्कि यह समूचे बस्तर के उम्मीदों की पहचान बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज बस्तर ओलंपिक 2025 के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मार्च 2026 तक समूल नक्सल उन्मूलन के कगार तक पहुंच चुके हैं।

          केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमनसिंह तथा अन्य अतिथियों ने बस्तर ओलम्पिक समापन सत्र के दौरान नुवा बाट के व्हीलचेयर रेस, रिले रेस, रस्साकसी सहित अन्य प्रतिस्पर्धाओं का फाइनल मुकाबला देखा। साथ ही बस्तर अंचल एवं छत्तीसगढ़ की लोकरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखी। वहीं एजुकेशन सिटी जावंगा के घुड़सवारी में दक्ष बच्चों ने मार्चपास्ट में हिस्सा लेकर आकर्षण का केंद्र बने। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु साय सहित अतिथियों ने बस्तर ओलंपिक 2025 के विजेताओं यूथ आइकॉन को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान बस्तर ओलंपिक 2024 के विधिवत घोषणा की गई और ध्वज मुख्य अतिथि को सौपा गया।

          इस संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक की सबसे खास बात ये रही कि इसमें 700 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) तथा माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए। वहीं करीब दो हजार 800 से ज्यादा अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में मुख्य रूप से फुटबॉल, वॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, कबड्डी, आर्चरी, एथलेटिक्स, रस्साकसी, हॉकी और रिलेरेस शामिल है। इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, लोकसभा सांसद बस्तर महेश कश्यप, सांसद कांकेर भोजराज नाग, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक अंतागढ़ विक्रम उसेंडी, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कारपोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह और उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधी उपस्थित थे।

      इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा और नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा।

        श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 जिलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। श्री शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे।

       केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी और सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों जिले सभी आदिवासी जिलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले जिले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। श्री शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और श्री विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।

         श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात जिलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। श्री शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है।

         केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है। उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है।

       श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि आज जिन खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लिया है, उनकी प्रतिभा को पहचानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की एक टीम यहां आई है। श्री शाह ने कहा कि इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बस्तर के खिलाड़ी खेलें, वहां तक ले जाने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। श्री शाह ने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है, जो लगभग ढाई गुना की वृद्धि है और बहनों की प्रतिभागिता में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह देखकर आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ को चुना है।

       केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और बस्तर अब भय नहीं भविष्य का पर्याय बन चुका है, जहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां आज स्कूल की घंटियां बज रही हैं। जहां सड़क बनाना एक सपना था, वहां आज रेलवे ट्रैक और राजमार्ग बिछाए जा रहे हैं, जहां लाल सलाम के नारे लगते थे, वहां आज भारत माता की जय के नारे लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ों में नक्सलियों को मारने का लक्ष्य नही रखा था, क्योंकि 2000 से अधिक नक्सली युवाओं ने सरेंडर भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है, उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को ढांढस भी बंधाया है और हिम्मत भी दी है। गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग आज भी हथियार लेकर घूम रहे हैं, वे उन्हें समझाकर समाज की मुख्यधारा वापिस में लाने का काम करें।

           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य समृद्ध राज्य है, लेकिन माओवाद समस्या शुरू से ही राज्य के विकास में बाधक रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और गृहमंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ संकल्प से इसके अंत की डेट लाइन तय की है। गृह मंत्री द्वारा नियद नेलानार योजना के 05 किलोमीटर के दायरे को 10 किलोमीटर तक विस्तार किया गया है, जिसके माध्यम से गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही है। माओवाद के कारण बंद स्कूलें अब खुल रहे हैं। सड़कों का जाल बिछाकर अंदरूनी इलाकों को आवागमन सुविधा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही इन ईलाके के लोगों को जनहितकारी योजनाओं से सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के फलस्वरूप अब विकास से लोगों का विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी और आगामी वर्ष पुनः बेहतर प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दी।

       इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में इतिहास रच रहा है, 100 साल के इतिहास में माओवाद समस्या की समाप्ति की तिथि वर्ष 2026 तक तय करने का साहस गृहमंत्री श्री अमित शाह ने किया है। जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा तो बस्तर फिर खुशहाल होगा। इस दौरान उप मुख्यमंत्री द्वय अरूण साव और विजय शर्मा ने भी बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। वहींे विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उदबोधन में सभी अतिथियों और खिलाड़ियों का स्वागत किया। समारोह के अन्त में सांसद बस्तर महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।

       इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, सांसद कांकेर भोजराज नाग, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक अंतागढ़ विक्रम उसेंडी, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कारपोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन में भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी की प्रेरणा से बस्तरिया नौजवान खिलाड़ियों का बढ़ा जोश

जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इस अवसर पर भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक, बाईचुंग भूटिया ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अपने चहेते खिलाड़ी को अपने बीच पाकर बस्तर के नौजवान खिलाड़ी अत्यधिक उत्साहित और रोमांचित हो उठे।

      बाईचुंग भूटिया, जिन्हें भारतीय फुटबॉल में सिक्किमी स्निपर के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुँचे थे। उन्होंने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया और खेल के प्रति उनके समर्पण तथा जुनून की सराहना की।

      बाईचुंग भूटिया का नाम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वह यूरोपियन क्लब (इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे, जिसने भारतीय प्रतिभा के लिए वैश्विक द्वार खोले। लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का उनका रिकॉर्ड आज भी प्रेरणास्रोत है। खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।

     एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उनके प्रेरक शब्द और सहज उपस्थिति ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। स्थानीय युवा खिलाड़ियों की आँखों में एक चमक और अपने सपनों को साकार करने का एक नया जोश साफ दिखाई दिया। बस्तर ओलम्पिक का यह समापन समारोह अब बाईचुंग भूटिया की यादगार यात्रा के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जिसने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।


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