September 11, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    नई दिल्ली। रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की कथित फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर सामने आया विवाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम रचनात्मक स्वतंत्रता की बहस का विषय बनता जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) ने इस मामले को गंभीर कानूनी और संवैधानिक दायरे में ला दिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान दीपक कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि फिल्म में भारतीय खुफिया एजेंसियों और सैन्य अभियानों से जुड़ी ऐसी जानकारियां दिखाई गई हैं, जो अत्यधिक संवेदनशील हो सकती हैं।

    याचिका में मुख्य रूप से यह कहा गया है कि फिल्म में:

    अंडरकवर ऑपरेशन की कार्यप्रणाली,

    रणनीतिक सैन्य प्रोटोकॉल,

    संवेदनशील लोकेशन,

    इंटेलिजेंस नेटवर्क की तकनीकी जानकारी

    को अत्यधिक वास्तविक और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    सुरक्षा को लेकर क्या चिंता?

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक रूप से दिखाई जाती है, तो:

    भारत के गुप्त एजेंटों की पहचान और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है,

    दुश्मन देश या आतंकी संगठन भारतीय ऑपरेशनल सिस्टम को समझ सकते हैं,

    यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

    याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह मामला Official Secrets Act और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रावधानों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिए हैं कि वे:

    फिल्म की सामग्री की जांच करें,

    राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करें,

    और आवश्यक होने पर उचित कार्रवाई करें।

    कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भले ही किसी फिल्म को “काल्पनिक” बताया जाए, लेकिन यदि उसमें वास्तविक सैन्य या खुफिया संरचना से मेल खाते तत्व हों, तो सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    बड़ा सवाल: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

    यह विवाद एक बार फिर उस संवेदनशील बहस को सामने लाता है, जहां:

    एक ओर फिल्मकार रचनात्मक स्वतंत्रता का अधिकार रखते हैं,

    वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय सूचनाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है।

    भारत में पहले भी कई फिल्मों और वेब सीरीज पर सेना, RAW, IB और सुरक्षा अभियानों के चित्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अदालत द्वारा सीधे मंत्रालय और CBFC को जांच के निर्देश देना इस मामले को विशेष रूप से गंभीर बनाता है।

    फिलहाल फिल्म निर्माताओं या रणवीर सिंह की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। सरकार ने ओबीसी कैटेगरी-ए और कैटेगरी-बी की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नई नीति लागू करने का निर्णय लिया है।

    अब तक राज्य में ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत तथा ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था। नई व्यवस्था के अनुसार केवल 7 प्रतिशत आरक्षण ही प्रभावी रहेगा। सरकार का कहना है कि यह आरक्षण केवल “वास्तविक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हिंदू समुदायों” को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में शामिल नहीं हैं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुस्लिम समुदायों को दिए जा रहे ओबीसी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएंगे। हालांकि संशोधित सूची में कुछ मुस्लिम समुदायों के बने रहने को लेकर भी चर्चा जारी है।

    राज्य सरकार ने अपने फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप बताया है। वहीं विपक्ष ने इस निर्णय को लेकर सरकार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि इस फैसले से हजारों पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

    राज्य की राजनीति में इस फैसले के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    रायपुर/कोरिया। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai का सख्त प्रशासनिक अंदाज देखने को मिला। कोरिया जिले में चौपाल के दौरान शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने सहायक आयुक्त सहकारी संस्थाएं आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। कार्य में लापरवाही से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए यह बड़ी कार्रवाई की।

    सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की समीक्षा भी की। प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए और लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।

    शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री का कड़ा रुख सामने आया। परीक्षा परिणाम अपेक्षानुसार नहीं आने पर उन्होंने अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कलेक्टर को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए ठोस एवं परिणाममूलक प्रयास आवश्यक हैं।

    चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने आम लोगों की समस्याएं भी सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री का यह सख्त और जवाबदेह प्रशासनिक रवैया अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

    सीएम Vishnu Deo Sai के निर्देश पर जिला सहकारी बैंक की बड़ी कार्रवाई

    रायपुर। सुशासन तिहार 2026 के दौरान मिली शिकायतों पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त रुख का असर अब प्रशासनिक कार्रवाई में साफ दिखाई देने लगा है। कोरिया जिले की जिल्दा समिति, खड़गंवा में खाद वितरण से जुड़े गबन मामले में लापरवाही बरतने वाले प्रभारी शाखा प्रबंधक एवं नोडल अधिकारी कोरिया श्री कल्लु प्रसाद मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    खाद वितरण में अनियमितता और गबन की शिकायतों के बाद मामले की समीक्षा की गई, जिसमें दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई में गंभीर लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने निलंबन आदेश जारी किया।

    निलंबन अवधि में श्री मिश्रा का मुख्यालय शाखा बैकुंठपुर, जिला कोरिया निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार, गबन और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की नीति से आम जनता का भरोसा शासन व्यवस्था पर लगातार मजबूत हो रहा है।

    शौर्यापथ लेख 

    आज का इंसान दुनिया की सबसे तेज़ दौड़ में शामिल है। कोई दौलत के पीछे भाग रहा है, कोई शोहरत के पीछे, कोई सत्ता और पहचान की तलाश में भटक रहा है। लेकिन इस अंधी दौड़ में वह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ को पीछे छोड़ देता है — खुद को।

    यही कारण है कि जीवन के शोर में आत्मा की आवाज़ दब जाती है और इंसान बाहर की दुनिया जीतते-जीतते भीतर से हार जाता है।

    सूफ़ी दर्शन और संत परंपरा सदियों से एक ही बात कहती आई है कि ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता बाहर नहीं, भीतर से होकर जाता है। जब तक मनुष्य स्वयं को नहीं पहचानता, तब तक वह परम सत्य को नहीं पा सकता।

    इसी गहरी अनुभूति को मशहूर शायर सदा अम्बालवी ने बेहद खूबसूरती से कहा—

    "कैसे मिले ख़ुदा से जो ख़ुद से मिला नहीं"

    यह सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी का दर्शन है।

    क्योंकि जो व्यक्ति अपने मन की परतों से अनजान है, जो अपनी आत्मा की खामोशी को नहीं सुन पाया, वह ईश्वर की आवाज़ कैसे सुन सकेगा?

    मनुष्य अक्सर मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और तीर्थों में ईश्वर को तलाशता है, जबकि असली इबादत अपने भीतर झाँकने से शुरू होती है।

    जब इंसान अपने अहंकार, लालच, क्रोध और झूठ की धूल हटाकर दिल के आईने को साफ करता है, तब उसे एहसास होता है कि जिसे वह बाहर खोज रहा था, वह तो उसके भीतर ही मौजूद था।

    तलाश-ए-अक्स में अपनी, वो उम्र भर भटकता रहा,

    मिला सब कुछ जहाँ में, बस खुद से मिलना रह गया।

    आज समाज में तनाव, अवसाद और अकेलेपन की सबसे बड़ी वजह यही है कि इंसान ने दुनिया से रिश्ता जोड़ लिया, लेकिन खुद से रिश्ता तोड़ लिया।

    मोबाइल, भीड़, सोशल मीडिया और कृत्रिम चमक ने इंसान को इतना व्यस्त कर दिया कि उसे अपने भीतर उतरने का समय ही नहीं मिला।

    आध्यात्मिकता का अर्थ संसार छोड़ देना नहीं है, बल्कि संसार के बीच रहकर अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना है।

    जब इंसान खुद को समझने लगता है, तब उसे यह भी समझ आने लगता है कि नफरत व्यर्थ है, अहंकार क्षणिक है और प्रेम ही सबसे बड़ा सत्य है।

    खुदा को ढूंढने निकले हो और खुद से ही बेगाने हो,

    मिलेगा क्या तुम्हें हासिल, जब अपने घर से अनजाने हो।

    मन का सबसे पवित्र मंदिर इंसान का हृदय है।

    यदि वहाँ प्रेम, करुणा और सच्चाई का दीप जल जाए, तो हर दिशा में ईश्वर दिखाई देने लगता है।

    फिर धर्म दीवार नहीं बनता, बल्कि आत्मा को जोड़ने वाला पुल बन जाता है।

    दिल के आईने को साफ कर, फिर देख तमाशा,

    वही खुदा का घर है, जिसे तू बाहर ढूंढता रहा।

    आख़िरकार, जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है कि ईश्वर तक पहुँचने की यात्रा स्वयं तक पहुँचने से शुरू होती है।

    जिस दिन इंसान अपने भीतर के अंधेरे को पहचान लेगा, उसी दिन उसे रौशनी का असली अर्थ समझ आएगा।

    और शायद तभी वह यह महसूस कर पाएगा कि खुदा कहीं दूर आसमान में नहीं, बल्कि उसकी अपनी आत्मा की गहराइयों में बसता है।

    दुर्ग। कांग्रेस संगठन ने दुर्ग जिले में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ को और अधिक सक्रियएवं मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युवा एवं संघर्षशील नेता शिशिर कांत कसार को पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, दुर्ग जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

    राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपनी सक्रियता, मेहनत और जमीनी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले शिशिर कांत कसार ने लगातार संगठन को मजबूती देने का कार्य किया है। कांग्रेस के विभिन्न आंदोलनों, सामाजिक अभियानों एवं जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें युवा नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है।

    कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिले में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा तथा समाज के पिछड़े वर्गों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। संगठन में उनकी नियुक्ति को कांग्रेस की युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस अवसर पर कांग्रेसजनों ने कहा कि शिशिर कांत कसार की ऊर्जा, संघर्षशीलता और संगठन के प्रति समर्पण निश्चित रूप से पार्टी को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। उनके सफल एवं उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए कार्यकर्ताओं ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी समय में दुर्ग जिले की राजनीति में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है, ऐसे में शिशिर कांत कसार की नियुक्ति संगठन के लिए एक रणनीतिक निर्णय साबित हो सकती है।

    समन्वय साहित्य परिवार का बृहद साहित्यकार सम्मेलन सम्पन्न
    रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा के गद्य जगत के युग प्रवर्तक डॉ. पालेश्वर शर्मा की 98 वीं जयंती पर बृहद साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया।
    ऋषि- कृषि संस्कृति के उपासक,भाषाविद् डॉ.पालेश्वर की स्मृति में पहला छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य सम्मान विजय मिश्रा 'अमित' को दिया गया। उनकी पचास वर्षीय साहित्य साधना का मूल्यांकन करते हुए समन्वय साहित्य परिवार के प्रबुद्ध निर्णायक मंडल ने विजय मिश्रा का चयन किया।पुरस्कार के अंतर्गत सम्मान राशि 5001/ रुपए के साथ ही प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं शाल- श्रीफल से उन्हें सम्मानित किया गया।
    सम्मेलन में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा के आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा,अध्यक्ष डॉ. चित रंजन कर,रविशंकर विश्वविद्यालय के साहित्य भाषा अध्ययन शाला के पूर्व अध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश मिश्रा, पाणिनीय शोध संस्थान की अध्यक्षा डॉ.पुष्पा दीक्षित, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश वाजपेई, विदूषी लेखिका सरला शर्मा एवं प्रख्यात नवगीतकार डॉ अजय पाठक शामिल हुए।
    संस्था के प्रदेशाध्यक्ष डॉ देवधर महंत ने डॉ पालेश्वर शर्मा के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कीर्तिशेष डॉ शर्मा की रचनाओं को कालजयी और नवपीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक निरूपित किया।आभार प्रदर्शन संस्था के केंद्राध्यक्ष डॉ गंगाधर पटेल ने किया।

    नई दिल्ली ।
    भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। वर्तमान में ये अधिकारी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों, नैतिकता और जनसेवा के मूल्यों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ अब उनसे अपेक्षाएं भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

    “करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन जरूरी”

    राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन्हें करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—

    “भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें। नियमों का पालन करें, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को कभी न भूलें।”

    उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की निष्पक्षता उसकी न्यायप्रियता को दर्शाती है, जबकि उसकी संवेदनशीलता समाज के हर वर्ग के प्रति उसकी समावेशी सोच का प्रमाण होती है।

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रशासनिक निर्णयों में देरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान मानी जाती है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब भी लोगों के वैध अधिकारों को प्रभावित करता है।

    उन्होंने कहा—

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है। जनहित और व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही सच्ची नैतिकता है।”

    युवा अधिकारियों को सीखने और नेतृत्व की सलाह

    राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध परिस्थितियों और क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा, जहां उन्हें विशेषज्ञ टीमों का नेतृत्व भी करना होगा। ऐसे में उनकी सीखने की क्षमता तेज और अनुकूलन क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

    उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और निरंतर कार्य निष्पादन को प्रशासनिक जीवन का आधार बनाने की सलाह दी।

    “जनता और वंचित वर्ग रहें केंद्र में”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने लोकतंत्र की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाएं उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आती हैं, इसलिए अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “विकसित भारत” का सपना आसान परिस्थितियों में नहीं, बल्कि चुनौतियों के बीच संघर्ष करते हुए पूरा होगा।

    अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को अपने विचार और कार्यों के केंद्र में रखने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि वे विकसित एवं समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    नई दिल्ली, । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री श्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भारत-स्वीडन संबंधों को लेकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें दोनों देशों के बीच बढ़ते…

    दैनिक शौर्यपथ महासमुंद ब्यूरो संतराम कुर्रे 

    संगम क्रिकेट लीग" में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने दर्ज की शानदार जीत

    पिथौरा। पीसीए (पिथौरा क्रिकेट एकेडमी) के तत्वावधान में आयोजित “संगम क्रिकेट लीग” के अंतर्गत पत्रकारों के बीच खेले गए मैत्री क्रिकेट मुकाबले में रोमांच, जोश और खेल भावना का शानदार संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बतौर अतिथि वरिष्ठ पत्रकार रजिंदर खनूजा, जाकिर कुरैशी, पवन गुप्ता, ऋषिकेश शुक्ला एवं पीसीए के संयोजक मनमीत छाबड़ा उपस्थित रहे। अतिथियों ने सर्वप्रथम खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा टॉस प्रक्रिया संपन्न कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रजिंदर खनूजा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह एक अत्यंत सराहनीय पहल है। आज सभी पत्रकार क्रिकेट मैदान में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं वरिष्ठ पत्रकार मंच से आयोजन की गरिमा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पत्रकारों के बीच आपसी भाईचारा, एकता और सौहार्द को मजबूत करने का कार्य करते है।

    मुकाबले में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन की कप्तानी बलराज नायडू ने संभाली, जबकि श्रमजीवी पत्रकार संघ की कमान स्वप्निल तिवारी के हाथों में रही। दोनों कप्तानों के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने खेल भावना का उत्कृष्ट परिचय दिया। टॉस जीतकर श्रमजीवी पत्रकार संघ ने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया।

    श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से बल्लेबाजी की शुरुआत करने उतरे सौरभ अग्रवाल और राजा उपाध्याय ने टीम को सधी हुई शुरुआत दिलाई। सौरभ अग्रवाल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए मात्र 38 गेंदों में 74 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी दमदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम ने निर्धारित 10 ओवरों में 2 विकेट के नुकसान पर 97 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    98 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। विकास अग्रवाल और उमाशंकर की सलामी जोड़ी ने तेज गति से रन बनाकर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। विकास अग्रवाल ने 17 गेंदों में 27 रन बनाए, वहीं उमाशंकर ने मात्र 10 गेंदों में 26 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर मैच का रुख बदल दिया।

    विशेष रूप से विकास अग्रवाल ने पारी को अंत तक संभाले रखा और जिम्मेदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को जीत की ओर अग्रसर किया। उनकी संयमित और रणनीतिक बल्लेबाजी ने लक्ष्य तक पहुंचने की मजबूत नींव रखी।

    तेज बल्लेबाजी और शानदार तालमेल के दम पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने महज 7.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। मैच का विजयी चौका गोविंद शर्मा ने लगाकर टीम को शानदार जीत दिलाई। जीत के बाद खिलाड़ियों और पत्रकार साथियों ने मैदान में उत्साहपूर्वक जश्न मनाया।

    मैच में ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उमाशंकर को "मैन ऑफ द मैच" चुना गया। उन्होंने 26 रन बनाने के साथ गेंदबाजी में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मात्र 11 रन देकर एक विकेट हासिल किया।

    इस अवसर पर जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के कप्तान बलराज नायडू ने सभी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उनके नेतृत्व, मार्गदर्शन और प्रेरणा से टीम ने यह यादगार जीत दर्ज की। खिलाड़ियों ने भी इस जीत का श्रेय टीम भावना और कप्तान के कुशल नेतृत्व को दिया।

    इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में दुर्गेश सोनी, सुनील यादव, तारी टुटेजा एवं हर्ष सहित पूरी पीसीए टीम की विशेष एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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