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खाना खजाना / शौर्यपथ / दिवाली आने में कुछ दिन ही बचे हैं, ऐसे में अगर आप कोई स्पेशल रेसिपी की तलाश में हैं, तो आज हम आपको बता रहे हैं आलू-गोभी टिक्की की स्पेशल रेसिपी।
सामग्री : 1 कप ब्रेड क्रम्ब्स 2 उबले आलू 1 कप फूलगोभी ग्रेटिड 1 कप बेसन 1/2 टीस्पून धनिया पाउडर 1 टीस्पून जीरा 1 टीस्पून नींबू का रस 1 टीस्पून चाट मसाला 1 टीस्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट 2 टेबलस्पून हरा धनिया नमक स्वादानुसार तेल जरूरत के अनुसार
विधि : सबसे पहले एक बर्तन में आलू मैश कर लें। इसमें सभी चीजें डालकर मिला लें और मिश्रण तैयार कर लें। मीडियम आंच पर पैन में तेल डालकर गर्म करने के लिए रख दें। इस बीच हाथों को तेल से चिकना कर मिश्रण का एक चम्मच लें और टिक्की की शेप दें। इसी तरह से सारी टिक्की तैयार कर लें। - गर्म तेल में टिक्की डालकर सुनहरा होने तक फ्राई करें। तैयार हैं आलू-गोभी की टिक्की। गरमागरम सॉस के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / प्रदूषण आपके पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके कुप्रभाव से बचने के लिए सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं। हम खुद कितने सजग और तैयार हैं, यह भी मायने रखता है। छोटे-छोटे कदम उठाकर घर-परिवार को इसके प्रकोप से बचा सकते हैं। आज से हम विशेषज्ञों के सुझाए ऐसे ही उपाय साझा कर रहे हैं। पहली कड़ी में जानिए दिल के मरीज क्या करें...
क्यों घातक
एम्स के ह्रदय रोग विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर संदीप मिश्रा के मुताबिक कई शोध में यह देखा गया है कि वायु प्रदूषण वाले इलाकों में प्रदूषण बढ़ने पर हृदयघात की संख्या बढ़ जाती है। प्रदूषित सूक्ष्म कण ,पीएम 2.5 और 2.5 माइक्रोन से भी छोटे प्रदूषित कण दिल तक रक्त पहुंचाने वाली आर्टरी की एंडोथीलियम को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में हृदय रोगी गुनगुना पानी ज्यादा पीएं। समय पर दवा लें और घर पर ही व्यायाम करें।
क्या खतरा
’ हृदयघात का खतरा बढ़ जाता है।
’ दिल की नसें सूखने लगती हैं।
’ रक्त का संचार धीमा होने लगता है।
’ रक्त संचार के लिए रोगी को जोर लगाना पड़ता है।
क्या करें
’ वायु प्रदूषण से बचने के लिए एन 95 मास्क लगाएं
’ दिल के मरीज हैं तो अपने रक्तचाप पर नियंत्रण रखें
’ सर्दियों के हिसाब से एक बार डॉक्टर को जरूर दिखा लें
क्या न करें
’ प्रदूषण का स्तर अधिक हो तो सैर पर निकलने से बचना चाहिए।
’ प्रदूषित सड़कों पर निकलने से भी बचें, जरूरी न हो तो घर पर ही रहें
वायु प्रदूषण से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। कई शोध में देखा गया है कि वायु प्रदूषित इलाकों में रहने वाले लोगों में ह्रदयघात के मामले उस समय ज्यादा बढ़ गए जब उनके क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।
-प्रोफेसर संदीप मिश्रा, ह्रदय रोग विभाग ,एम्स
एनसीआर का हाल
15 फीसदी मरीज बढ़े
फरीदाबाद में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उमेश कोहली बताते हैं कि जिले में करीब 20 हजार हृदय रोगी हैं। प्रदूषण के कारण जिले में करीब 15 फीसदी हृदयरोगी मरीज बढ़ जाते हैं।
ठंड में परेशानी अधिक
नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर गुप्ता बताते हैं कि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में हृदय रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसमें कड़ाके की ठंड भी एक पहलु है।
हार्ट अटैक के मामले बढ़े
गुरुग्राम स्थित कॉलबिंया एशिया अस्तपाल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि खराब होती आबोहवा के कारण 20 फीसदी तक हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं।
दोगुने हुए मरीज
गाजियाबाद स्थित एमएमजी अस्तपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनिल कात्याल ने बताया कि पिछले 15 दिनों में दिल के मरीजों की ओपीडी में दोगुनी हो गई है। 30 से अधिक मरीज आ रहे।
सेहत / शौर्यपथ / उम्र का तीसरा दशक आपके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस समय हर रोज एक टुकड़ा पनीर अपने आहार में शामिल करना आपको उन जोखिमों से बचा सकता है, जो 40 के दशक में आपके सामने आने वाले हैं।
पनीर हम भारतीयों का पसंदीदा व्यंजन है। अगर आप शाकाहारी है तब तो पनीर हर छोटे बड़े मौके पर खास रूप से बनता है। बात चाहें स्वाद की हो या सेहत की पनीर आपकी प्लेट का आवश्यक हिस्सा है।
पनीर में सेलेनियम और पोटेशियम होता है, जो मेंटल और फिजिकल दोनों हेल्थ के लिए बहुत लाभदायक है। पोटेशियम हमारे दिमाग के लिए, खासकर याददाश्त के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं सेलेनियम प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। पनीर दूध से बना होने के कारण कैल्शियम का भी उत्कृष्ट स्रोत है। और कैल्शियम दांतों और हड्डियों के लिए फायदेमंद होता ही है।
एक प्रोटीन के स्रोत के रूप में पनीर आपके लिए बहुत आवश्यक है। शाकाहारी हैं तो पनीर ही आपके लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत होता है। 100 ग्राम पनीर में 265 कैलोरी होती हैं। इसमें से 20.7 ग्राम फैट, 1.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 18.5 ग्राम प्रोटीन और 208 मिलीग्राम कैल्शियम होता है।
अगर आप वेट ट्रेनिंग करते हैं, तो आपको ज्यादा मात्रा में पनीर खाना चाहिए। पनीर प्रोटीन तो देता ही है, साथ ही लम्बे समय तक आपका पेट भी भरता है, जिससे आपको कम भूख लगती है।
हम बताते हैं हर दिन पनीर खाने के फायदे-
1. मजबूत दांत और हड्डियां
पनीर में ढेर सारा कैल्शियम होता है, जो आपके दांत और हड्डियों को मजबूत करता हैं। पनीर दांतो की सड़न को रोकता है और कैविटी दूर करता है। पनीर में लैक्टोज कम होने के कारण यह दांतो और मसूड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद कैल्शियम की कमी बहुत आम समस्या है। इससे बचने के लिए अभी से अपनी डाइट में पनीर शामिल कर लें।
2. मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है पनीर
इसमें कैलोरी ज्यादा होती हैं, यही कारण है कि पनीर तुरन्त ऊर्जा प्रदान करता है। यह मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाता है, क्योंकि पनीर खाने से इंसुलिन संतुलन में रहती है। जर्नल न्यूट्रिएंट में प्रकाशित स्टडी के अनुसार पनीर में लिनोलिक एसिड होता है जो फैट बर्न करने में मदद करता है। इसलिये वजन कम करने और लीन बॉडी बनाने के लिए पनीर किसी भी मीट विकल्प से बेहतर है।
3. अर्थराइटिस और हड्डियों की अन्य समस्याओं को कम करता है
पनीर में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड होते हैं, जो अर्थराइटिस कम करने मे कारगर होते हैं। ओमेगा 3 गर्भावस्था में भी बहुत जरूरी होता है, यह प्रसव के दौरान होने वाली जटिलता को कम करने में सहायक है। शाकाहारियों के लिए यह ओमेगा 6 फैटी एसिड्स का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
4. आपके दिल को रखता है स्वस्थ
पनीर में मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है, जिसके कारण दौरा पड़ने का जोखिम कम हो जाता हैं। इतना ही नहीं यह मसल क्रेम्प्स भी कम करता है। पनीर में हेल्दी फैट होता है जो बैड कोलेस्ट्रॉल कम करता है। यानी दिल को स्वस्थ रखने में पनीर बहुत फायदेमंद है।
तो लेडीज, अपनी डाइट में पनीर आज से ही शामिल कर लें ताकि आप भविष्य में भी स्वस्थ और जवान रहें।
सेहत / शौर्यपथ / गिलोय की लता को चबाना या उसे उबालकर काढ़ा बनाना ताजे गिलोय के सेवन का सबसे आसान तरीका है। लेकिन क्या यह गिलोय के टैबलेट से बेहतर है?
कोविड-19 के चलते हम कम से कम अपनी इम्युनिटी का ख्याल रखना तो सीख ही गए हैं। इम्युनिटी की जब भी बात हो, गिलोय का नाम सबसे पहले आता ही है। आयुर्वेद में गिलोय का सेवन सदियों से होता आया है और आज साइंस भी गिलोय के फायदों को मानती है।
क्यों फायदेमंद होता है गिलोय?
गिलोय एंटीऑक्सिडेंट का भंडार है जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ने का काम करता है। फ्री रेडिकल्स शरीर मे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने पर पैदा होते हैं, जो शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुचाते हैं। गिलोय का सेवन इन फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है जिससे शरीर को नुकसान पहुंचने से बच जाता है।
बुखार का इलाज करने से लेकर पाचन और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक गिलोय आपके लिए फायदेमंद है। गिलोय वैश्विक स्तर पर प्रचलित जड़ी-बूटी है जो इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है। यह एंटीऑक्सिडेंट का महत्वपूर्ण स्रोत है जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ता है। आपकी कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और बीमारियों से छुटकारा दिलाता है। गिलोय शरीर से टॉक्सिन को हटाने में मदद करता है।
यही नहीं गिलोय के सेवन से रक्त शुद्ध होता है। यह कई रोगों के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया से लड़ता है और इंफेक्शन के जोखिम को भी कम करता है।
गिलोय में एंटी-पायरेटिक प्रॉपर्टी होती हैं। इसलिए यह डेंगू, स्वाइन फ्लू और मलेरिया जैसी कई बीमारियों के खतरों को कम कर सकता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट में पाया गया है कि गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट के रूप में कार्य करता है और मधुमेह के इलाज में मदद करता है। गिलोय का रस ब्लड शुगर लेवल को कम करने का काम करता है।
लेकिन क्या ताजा गिलोय टैबलेट और कैप्सूल से बेहतर है?
सबसे पहले बात करते हैं उन सभी तरीको की जिनसे आप गिलोय का सेवन कर सकती हैं। गिलोय की लता या डंडी चबायी जाती है। इसे उबालकर काढा भी बनता है। गिलोय का रस भी बनता है जो बाजार में उपलब्ध भी है। इसके अतिरिक्त टैबलेट और कैप्सूल के रूप में भी गिलोय बाजार में मौजूद है। असल मे रस या ताजे गिलोय में एक कड़वा स्वाद होता है, जिससे बचने के लिए लोग टैबलेट या कैप्सूल चुनते हैं।
अगर आप आयुर्वेद की जानकारी रखते होंगे, तो आपको पता होगा कि पतंजलि से लेकर बहुत सी आयुर्वेदिक ब्रांड गिलोय की टेबलेट और कैप्सूल बनाती हैं। इनमें गुण गिलोय के ही होते हैं। मगर कोई स्वाद नहीं होता।
गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी होती हैं जिससे यह इम्युनिटी बढ़ाता है। टैबलेट या कैप्सूल के लिए 250mg दिन में दो बार डोज होता है, यानी दिन में 500 मिलीग्राम गिलोय। अब कैप्सूल या टेबलेट में भी वही गुण होते हैं जो ताजे गिलोय में मिलेंगे, लेकिन इसमें एक कमी है।
गिलोय का रस या काढ़ा शरीर मे जाते ही असर करता है। बुखार उतारने से लेकर खून में शुगर लेवल कम करने तक ताजा गिलोय तुरंत काम शुरू करता है। जबकि कैप्सूल या टैबलेट को घुलने में समय लगता है।
भोजन से पहले गिलोय की टैबलेट लेने से आपकी शुगर नियंत्रित रहेगी। लेकिन अगर आप भोजन से पहले लेने के बजाय बाद में लें तो यह काम करने से समय लेगी। ऐसा ताजे गिलोय के साथ नहीं होता।
क्या गिलोय के साइड इफेक्ट्स होते हैं?
गिलोय के सेवन के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं क्योंकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित औषधि है। हालांकि, कुछ मामलों में गिलोय के उपयोग से कब्ज और ब्लड शुगर लेबल कम हो सकता है। इसलिए यदि आप मधुमेह के रोगी हैं और लंबे समय से गिलोय का सेवन कर रहे हैं, तो अपने बल्ड शुगर लेवल की नियमित रूप से जांच करते रहें। इसके अलावा,यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही तो गिलोय के उपयोग से बचें।
गिलोय के सेवन से पहले मात्रा डॉक्टर से सलाह लेकर ही तय करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की दीर्घ आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस साल रविवार 8 नवंबर को अहोई का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत में महिलाएं शाम को तारों को देखकर जल अर्पित करने के बाद व्रत को खोलेंगी। यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसमें अहोई मईया की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी के दिन निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से संतान की लम्बी आयु होती है। अहोई माता की पूजा के लिए कहीं कहीं चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए डाले जाते हैं। इस तरह हर साल माला में दो चांदी के दाने पिरोए जाते हैं और उस माला को माताएं पूजा के बाद धारण करती हैं। इसके बाद किसी भी अच्छे दिन इस माला की पूजा करके उतारा जाता है। इसके बाद अगली होई पर फिर चांदी के दो मनके माला में पिरोए जाते हैं। इस माला को भी पूजा में शामिल किया जाता है।
अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त-
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर को सुबह 07 बजकर 29 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त: 09 नवंबर को सुबह 06 बजकर 50 मिनट पर
पूजा का मुहूर्त: 5 बजकर 37 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट के बीच।
करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई व्रत मनाया जाता है । गोबर से या चित्रांकन के द्वारा कपड़े पर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है और उसके बच्चों की आकृतियां बना दी जाती हैं। माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को या प्रदोष काल उसकी पूजा करती हैं।
करवाचौथ में इस्तेमाल किए गए करवे में जल भर लिया जाता है। शाम को माता की विधि-विधान से पूजा और कथा के बाद उन्हें फल, फूल और मिठाई भोग लगाते हैं। उसके बाद तारों को करवे से अर्घ्य देने के बाद रात में व्रत का समापन किया जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा करके उन्हें दूध-चावल का भोग लगाना शुभ होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कार्तिक मास 1 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर 2020 तक रहेगा। हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक मास में धन और धर्म की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि कार्तिक मास मां लक्ष्मी को अतिप्रिय होता है। ऐसे में इस माह के शुक्रवार को कुछ खास उपायों को करने से मां लक्ष्मी होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
कार्तिक मास में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए शुक्रवार के उपाय-
1. शुक्रवार को लाल या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि हाथ में चांदी की अंगूठी या छल्ला धारण करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
2. कहते हैं कि रात में लोग अंधेरा करके सोते हैं। रात में पूरे घर में अंधेरा करना शुभ नहीं होता है। मान्यता है कि रात में मध्यम रोशनी रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं।
3. कहते हैं कि शुक्रवार को मां लक्ष्मी की विधि-विधान पूजा करने से धन-संपदा की प्राप्ति के साथ दांपत्य जीवन भी खुशहाल होता है। माना जाता है कि मां लक्ष्मी की पूजा से प्रेम-संबंध भी सुधरते हैं।
4. यूं तो गाय को हर दिन रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। हालांकि शुक्रवार के दिन गाय को ताजी रोटी खिलाने से भी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. माना जाता है कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को रात के समय घर के पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं। कहते हैं कि तुलसी के पौधे के सामने भी दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
6. कहते हैं कि शुक्रवार को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान शंख और घंटी बजाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का हमेशा वास रहता है।
7. शुक्रवार के दिन माता महालक्ष्मी के मंदिर जाकर उन्हें लाल वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। संभव हो तो मां लक्ष्मी को लाल बिंदी, सिंदूर, लाल चुनरी और लाल चूडियां भी अर्पित करें। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी अपनी कृपा भक्त पर बरसाती हैं।
8. कहते हैं कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए हाथ में पांच लाल रंग के फूल लेकर माता का ध्यान लगाना चाहिए। इसके बाद लक्ष्मीजी को प्रणाम करते हुए प्रार्थना करें कि वह आपके घर पर सदैव विराजमान रहें। इसके बाद इन फूलों को तिजोरी या अलमारी में रख दें।
9. माना जाता है कि शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मी नारायण पाठ करने से भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। कहते हैं कि पाठ करने के बाद श्री लक्ष्मी नारायण भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए।
10. शुक्रवार के एक लाल रंग का कपड़ा लें और इस कपड़े में सवा किलो चावल रखें। ध्यान रहे कि चावल का एक भी दाना टूटा नहीं होना चाहिए। चावल की पोटली बनाकर हाथ में लेकर ओम श्रीं श्रीये नम: का पांच माला जाप करें। फिर इस पोटली को तिजोरी में रख दें। कहते हैं कि ऐसा करने से धन प्राप्ति का योग बनता है।
शौर्यपथ / इन दिनों हर दूसरे व्यक्ति से बात करते हुए लगता है कि जैसे आपकी फिटनेस का सबसे बड़ा दुश्मन घी ही है। इसके बाद मुझ जैसे कई लोगों ने घी की जगह रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। पर क्या आप जानती हैं कि क्या होता है आपके इस निर्णय का आपकी सेहत पर असर? आइए पता करते हैं।
किचन में काम करते हुए अक्सर दिमाग हमारे खाने के पोषक तत्वों और गुणवत्ता की ओर चला ही जाता है। अगर आप भी पकौड़े तलते हुए ये सोच रही हैं कि यह तेल आपकी सेहत पर क्या प्रभाव डालता है, तो आपके सवाल का जवाब हम देंगे। ताकि आप समझ सकें कि घी और रिफाइंड ऑयल में से क्या है आपके और आपके परिवार की सेहत के लिए बेहतर।
‘हेल्दी फैट’ को लेकर चर्चा पिछले कुछ समय में बढ़ी है और यह सवाल हर किसी के मन में है कि वो जो फैट ले रहे हैं वह अच्छा है या बुरा। अब तक फैट को डाइट का दुश्मन और मोटापे का कारण मान लिया जाता था। यही कारण है कि फैट विलेन की भूमिका में आ गया था और लोगो ने फैट के सभी स्रोतों को अपनी डाइट से बाहर कर दिया। मगर हाल ही में फैट का महत्व लोगों को समझ आया है और गुड फैट यानी हेल्दी फैट डाइट में वापस लौट रहे हैं।
क्या हैं हेल्दी फैट?
अगर आप फिटनेस के प्रति जागरूक हैं, तो आपने हेल्दी फैट (Healthy Fat) के बारे में जरूर सुना होगा। एवोकाडो से लेकर मछली और अंडों में हेल्दी फैट होता है। आसान भाषा में कहें, तो फैट दो प्रकार के होते हैं- सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड। सैचुरेटेड फैट आपके दिल के लिए फायदेमंद होते हैं। वहीं अनसैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल और इंफ्लामेशन बढ़ाते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
अब लौटते हैं अपने मुख्य प्रश्न की ओर- घी और रिफाइंड तेल में से क्या ज्यादा बेहतर है?
पहले बात करते हैं घी की
यह तो आप जानती ही होंगी कि घी दूध से बनता है। दूध को मथकर फैट निकाला जाता है जिसे मक्खन कहते हैं। इस मक्खन को उबालकर इसका पानी खत्म कर दिया जाता है और शुद्ध रूप में हमें मिलता है घी। घी में लैक्टोज नहीं होता इसलिए लैक्टोज इंटोलेरेंट लोग भी घी का प्रयोग कर सकते हैं।
घी में सैचुरेटेड फैट होता है जो घी को शरीर के लिए फायदेमंद बनाता है। इसके साथ ही घी में कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड होता है, जो घी को स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बनाता है। घी गट हेल्थ के लिए अच्छा होता है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार घी फैट का सबसे हेल्दी रूप है। इसमें ब्यूटाइरेट होता है जो पाचनतंत्र को दुरुस्त रखता है। साथ ही घी में विटामिन ए, ई और विटामिन के होते हैं। इसके अतिरिक्त घी सेलेनियम, आयोडीन और फैटी एसिड्स का अच्छा स्रोत है।
लेकिन हम आपको बता दें, घर का बना शुद्ध घी ही फायदेमंद होता है। बाजार के घी को प्रोसेस किया जाता है जिससे उसकी गुणवत्ता काफी कम हो जाती है।
अब बात करते हैं रिफाइंड तेल की
रिफाइंड तेल कई अलग अलग सीड्स से प्राप्त हो सकता है। जैतून का तेल, सोयाबीन तेल, सनफ्लॉवर ऑयल और मूंगफली का तेल इसके कुछ उदाहरण हैं। इसलिए सभी तेलों की अलग-अलग खूबियां होती हैं।
रिफाइंड तेल पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स से लैस होते हैं, जो इंफ्लामेशन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
तेल का स्मोकिंग पॉइंट ज्यादा होता है यानी इसे अधिक गर्म तापमान पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि तलने के लिए तेल का ही प्रयोग होता है।
सेलेब्रिटी शेफ और नूट्रिशनिस्ट तरला दलाल मानती हैं कि कम मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो कोई भी तेल हानिकारक नहीं है। पर जब अत्यधिक इस्तेमाल करेंगी तो हर तेल हानिकारक होगा।
बाजार में फोर्टिफाइड तेल मौजूद हैं जिनमें विटामिन्स और मिनरल्स अलग से मिलाए जाते हैं।
तो क्या है अंतिम निष्कर्ष?
हर तेल बराबर रूप से फायदेमंद नहीं है। अगर आप फोर्टिफाइड रिफाइंड तेल का इस्तेमाल करती हैं, तो यह फायदेमंद है।
घी का प्रयोग तलने के लिए नहीं करना चाहिए क्योंकि उसका स्मोकिंग पॉइंट कम है। दाल, रोटी या छौंक में घी का इस्तेमाल करें जबकि तलने, भूनने के लिए नारियल, सरसों, सोयाबीन या मूंगफली के तेल का इस्तेमाल करें। ताड़ के तेल का इस्तेमाल करने से बचें।
याद रखें, आप बिना घी-तेल का भोजन करने के बाद भी अगर कोई एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो यह उतना ही अनहेल्दी है। आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे भोजन के साथ-साथ एक्सरसाइज भी जरूरी है।
सेहत / शौर्यपथ / वजन कम करने के लिए सबसे पहले चावल छोड़ने की सलाह दी जाती है लेकिन अगर आपको चावल बहुत पसंद है और रोजाना मील का हिस्सा है, तो चावल को छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।डाइटीशियन्स की मानें, तो चावल को खाते हुए भी वजन कम किया जा सकता है लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी है चावल को सही तरीके से खाया जाए, आइए जानते हैं कुछ टिप्स-
सिंगल मील में खाएं चावल
कोशिश करें, कि सिंगल मील में चावल की एक ही सर्विंग लें। इससे आपकी कैलोरी इन्टेक कम हो जाएगी क्योंकि चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पहले से ही ज्याजदा होती है, इसलिए खाने की थाली में अन्यी कोई भी ऐसी चीज न परोंसे, जिसमें ज्यादा कार्ब हो।
सब्जियों के साथ पकाएं चावल
चावल में अपनी मनपसंद सब्जिथयां डाल कर पकाएं। सब्जि यों में ढेर सारा प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो आपके पेट को लंबे समय तक फुल रखने में मदद करेगा। राइस को हेल्दी बनाने के लिये इसमें बींस, शिमला मिर्च, ब्रोकोली, टोफू, पनीर और चिकन आदि मिला सकते हैं।
चावल फ्राई न करें
चावल को न तो फ्राई करें और न ही इसे क्रीम के साथ मिक्सन करें। इसे हमेशा पानी के साथ उबाल कर ही पकाएं। चावल बनाते समय अतिरिक्त पानी को भी फेंक दें। इससे चावल में मौजूद स्टा र्च निकल जाएगा।
ब्राउन चावल खाएं
आप अगर दिन में दो बार चावल खाना चाहते हैं, तो वाइट राइस की जगह ब्राउन राइस खाएं।इसमें फैट और स्टार्च की मात्रा कम होती है जिससे वजन कंट्रोल रहता है।
सेहत / शौर्यपथ / राजस्थान के झुंझुनू जिले में बाल स्वास्थ्य पोषण के तहत बच्चों को बीमारी और कमजोरी से बचाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक पिलाई जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए माइक्रोप्लान तैयार किया है। इस प्लान में नौ माह से पांच साल तक के दो लाख दो हजार 934 बच्चे कवर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विटामिन ए कार्यक्रम 3० अक्टूबर से लॉन्च किया गया है। जिसके तहत 3० नवंबर तक इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा।
इसमें निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को शत-प्रतिशत विटामिन 'ए' की खुराक पिलाई जाएगी। बच्चों को आंखों सहित विभिन्न बीमारी और कमजोरी से बचाने के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इस कार्यक्रम को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से संचालित किया जाएगा। इस में आशा सहयोगिनी भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगी।
उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरोत्तम जांगिड़ ने बताया कि इस कार्य में आंगनबाड़ी में दर्ज कुपोषित बच्चों के अलावा नौ महीने से पांच साल तक के सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए अलग से कोई विशेष कैटेगरी जारी नहीं की गई है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा और अराधना करने से मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। जिससे भक्तों को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है।
कहते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह का दोष होता है, उनके जीवन की भी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उनकी सुननी या पढ़नी चाहिए। कहते हैं कि आरती सुनने या पढ़ने से ही पूजा संपन्न होती है। जानिए गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कौन-सी आरती पढ़नी या सुननी चाहिए-
श्री बृहस्पतिवार की आरती- ॐ जय बृहस्पति देवा-
ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
धर्म संसार /शौर्यपथ /दीपावली के 7 दिन पूर्व बन रहा है अद्भुद शुभ संयोग एवं मुहूर्त्त। नक्षत्रो में पुष्य नक्षत्र को शुभ एवं पुण्यदायक नक्षत्र माना जाता है। इस बार दीपावली के एक सप्ताह से पूर्व 7 नवंबर दिन शनिवार को पुष्य नक्षत्र को भोग सम्पूर्ण दिन होगा। पुष्य नक्षत्र का मान 7 नवंबर को सूर्योदय पूर्व से रात में 4:59 बजे तक होगा।
उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के शुभ काल में खरीद-फरोख्त ,उद्योगों एवं व्यापार की शुरुआत, बहुत शुभ मानी जाती है। इस नक्षत्र में अशुभ काल में शुभ काल में बदलने की क्षमता होती है।
शनि देव इस नक्षत्र के स्वामी भी है और यह नक्षत्र शनिवार को पूरा दिन व्याप्त होगा। ऐसे में इसका व्यापारिक महत्त्व बढ़ जाता है। इस बार ग्रहों की स्थिति भी अति उत्तम है जहाँ शनि देव मकर राशि मे स्वगृही है ,गुरु स्वगृही है ,बुध एवं शुक्र राशि परिवर्तन राजयोग में है , बुधादित्य राजयोग के साथ साथ चंद्रमा भी स्वगृही स्थिति में रहेंगे ऐसे में यह समय अत्यंत श्रेष्ठ एवं शुभफलदायी है।
'तिष्य और अमरेज्य' जैसे अन्य नामों से भी पुकारे जाने वाले इस नक्षत्र की उपस्थिति कर्क राशि के 3-20 अंश से 16-40 अंश तक है। 'अमरेज्य' का शाब्दिक अर्थ है, देवताओं के द्वारा पूजा जाने वाला। शनि इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह हैं। इसी कारण विवाह को छोड़कर अन्य सभी मांगलिक कार्यो की शुरूआत शुभफल दायक होती है।
शनिदेव व्यक्ति के कर्म के फल प्रदायक ग्रह है। ऐसे में शुभ कार्यो की शुरुआत ऐसे समय मे किए जाने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है । अतः इस दिन विशेष कर खरीदारी ,निवेश और बड़े उद्योग की शुरुआत या व्यापारिक लेन देन के लिए अति उत्तम होता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /लॉकडाउन के बाद अनलॉक होते शहरों में चाय पोहे और जलेबी जैसे नाश्ते की दुकानें खोलने के भी निर्णय लिए जा रहे हैं। इंदौर के बेहद पॉपुलर पोहा- जलेबी की दुकानें खुलने के बाद ट्विटर पर जलेबी ट्रेंड कर रही है। सोशल मीडिया पर भी जलेबी और पोहा की बातें हो रही हैं।
ऐसे में आज आपको बताएंगे आखिर कैसे बनती है जलेबी। जानते हैं जलेबी बनाने की विधि।
जलेबी दो पारंपरिक और झटपट तरीके से बनती है। पारंपरिक विधि में, मैदा और दही से घोल बनाया जाता है और उसे 24 घंटे के लिए फरमेंट किया जाता है। पारंपरिक विधि द्वारा तैयार की गई जलेबी का स्वाद बेहतर होता है।
तो जलेबी घर पर बनाने के लिए मुख्य-3 स्टेप हैं; पहले स्टेप में, मैदा और दही से घोल तैयार किया जाता है, दूसरे स्टेप में चाशनी बनायीं जाती है, और अंतिम स्टेप में, घोल में से गर्म तेल में सीधे जलेबी बनाकर कुरकुरी होने तक तली जाती है और फिर गर्म चाशनी में डुबोयी जाती है।
घोल बनाने की सामग्री:
1/2 कप मैदा
1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) या अरारूट पाउडर
1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर
एक चुटकी हल्दी पाउडर (पीला रंग पाने के लिए)
1/4 कप दही
1/4 कप पानी
चाशनी बनाने की सामग्री:
1/2 कप शक्कर
1/4 कप + 2 टेबलस्पून पानी
1 टी स्पून नींबू का रस
एक चुटकी इलायची पाउडर
5-7 केसर की किस्में, वैकल्पिक
एक कटोरे में 1/2 कप मैदा छान लें। उसमें 1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर), 1/4 टी स्पून बेकिंग पाउडर, एक चुटकी हल्दी पाउडर और 1/4 कप दही डालें।
जरूरत के अनुसार पानी (लगभग 1/4 कप) डालें और गाढ़ा घोल (इडली के घोल की तुलना में थोड़ा मोटा) बना लें। घोल में कोई गांठ ना रहे।
घोल को एक प्लेट या एक ढक्कन से ढककर 24 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर (किचन के काउंटर टॉप पर ही रखे) फरमेंट होने के लिए (खमीर उठाने के लिये) रखे। 24 घंटे के बाद, ढक्कन हटा दें।
घोल को एक चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लें।
जलेबी बनाने की बोतल या (एक खाली सोस की बोतल) या एक जिपलॉक बेग (या कोई भी मोटी प्लास्टिक की बेग) में घोल डालें।
जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि
एक गहरे पतीले या पैन में चीनी, केसर की किस्में, इलायची पाउडर और पानी डालें और मध्यम आंच पर पकने के लिये रखे।
इसे तब तक पकाइये जब तक कि हल्की 1-तार की चाशनी हो जाये।
जब 1-तार की चाशनी हो जाये तब नींबू का रस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और गैस बंद कर दें। चाशनी तैयार है। (अगर चाशनी ठंडी हो तो जब आप जलेबी बनाना शुरू करे तब चाशनी को गर्म रखने के लिए कम आंच पर रख दें ताकि अगले स्टेप में जब जलेबी चाशनी में डुबाये तब वे गर्म रहें।)
जलेबी को तलने के लिए एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इस विधि में तलने के लिए तेल + 2 टेबलस्पून घी का उपयोग किया है। तेल तलने के लिए तैयार है या नहीं उसकी जांच करने के लिये घोल की एक बूंद गर्म तेल में डालें और अगर यह रंग बदले बिना ही तुरंत सतह पर आती है तो तेल तलने के लिए तैयार है। इसके बाद जिपलॉक बैग को दबाते हुए गोल गोल घूमा के जलेबी बनाये।
उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तले।
उन्हें तेल में से निकालें और तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। सिरप (चाशनी) गर्म या थोड़ा गर्म होंना चाहिये, यह ठंडा नहीं होना चाहिए। उन्हें लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखें। एक मिनट के बाद पलट दें। अब जलेबी खाने को तैयार है।
शौर्यपथ / भोजन के साथ कई लोग नियमित दही लेते है, लेकिन जो लोग इसे अब तक खाना पसंद नहीं करते हैं, दही में छुपे सेहत और सुंदरता के राज जानने के बाद वे लोग भी इसे रोजाना खाना शुरू कर देंगे। आइए, जानते हैं दही के गुण -
1 दही के रोजाना सेवन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
2 गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है। इसे पीकर बाहर निकले तो लू से भी बचाव होता है।
3 दही पाचन क्षमता बढ़ाता है। दही में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे रोजाना खाने से पेट की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
4 दही का रोजाना सेवन सर्दी और सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाता है।
5 अल्सर जैसी बीमारी में दही के सेवन से विशेष लाभ मिलता है।
6 मुंह में छाले होने पर दही का कुल्ला करने से छाले ठीक हो जाते हैं।
सेहत / शौर्यपथ / हममे से अधिकतर लोग खाना खाने के बाद सौंफ खाना पसंद करते है। वैसे भी सौंफ माउथ फ्रेशनर का भी काम करता हैं। सौंफ के सेवन से मुंह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलता है, इसके अलावा भी सौंफ के कई फायदे हैं। दरअसल, सौंफ औषधीय गुणों से भरपूर होती है, खाने के बाद इसके सेवन से भोजन पचाने में आसानी होती है। ऐसे कई अन्य गुणों के लिए सौंफ जानी जाती हैं। आइए जानते हैं सौफ के पानी के फायदों के बारे में
सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं से निजात दिलाता है। इससे आपको पेट से जुड़ी समस्या से राहत मिलती है। जैसे एसिडिटी और पेट में गैस की समस्या से आप परेशान हैं, तो सौंफ का पानी आपको नियमित रूप से पीना चाहिए। इससे आपको राहत मिलेगी।
वजन घटाना चाहते है, तो सुबह खाली पेट सौंफ के पानी का सेवन करना आपके लिए बहुत फायदेमंद है। सौंफ के पानी से
वजन घटाने में मदद मिलती है। इसे आप नियमित सुबह के समय खाली पेट पीएं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे शरीर अधिक फैट को कम करता है। इसके लिए सौंफ को रातभर पानी में भिगोकर रखें फिर इसका सुबह-सुबह सेवन करें।
यदि मासिक धर्म के दर्द से परेशान है तो सौंफ का पानी आपके बहुत काम आ सकता है। इससे मासिक धर्म के समय ऐंठन और दर्द से राहत मिलती है।
सौंफ का पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी बहुत मददगार होता है। इसमें फाइबर पाया जाता है जो शरीर के विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है। और शरीर को अंदर से साफ करता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
