August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

      रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतंत्र सेनानी श्री महावीर प्रसाद जैन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री महावीर प्रसाद जैन ने अपने जीवन को समाजसेवा, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया।आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उस समय उनके द्वारा किया गया त्याग और समर्पण लोकतांत्रिक चेतना के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जैन का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें।

    राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएँ

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।
    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।

    राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी श्री रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव श्री आशीष भट्ट, सचिव श्री भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

       पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।

    संसदीय यात्रा पूरी करने की इच्छा

    नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
    वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है
    सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।

    बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री

    इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।

    मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की बात

    नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।


    विपक्ष के आरोप: “जनादेश के साथ विश्वासघात”

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
    वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।

    विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।

    भाजपा का बढ़ता दबाव भी चर्चा में

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    स्वास्थ्य और पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
    वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।


    कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं

    मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —

    1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
    2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
    3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
    4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

    सरकार का संभावित स्वरूप

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।


    राज्यसभा चुनाव: 16 मार्च को मतदान

    बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है
    नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।

    एनडीए के उम्मीदवार

    एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —

    • नीतीश कुमार (JD-U)

    • नितिन नबीन (BJP)

    • शिवेश कुमार राम (BJP)

    • रामनाथ ठाकुर (JD-U)

    • उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)

    विपक्ष का उम्मीदवार

    वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

    खाली हो रही सीटें

    ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।

    जीत का गणित

    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
    एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।

    चंद लोगों की एकाधिकार मानसिकता से बढ़ रहा आंतरिक द्वंद, जमीनी पत्रकारों में असंतोष

    दुर्ग। शौर्यपथ।

    लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। समाज में पत्रकारों को केवल सूचना देने वाला माध्यम नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में देखा जाता है, जो सत्ता, समाज और व्यवस्था को आईना दिखाने का कार्य करता है। परंतु जब स्वयं पत्रकारिता का मंच ही आंतरिक विवाद, एकाधिकार और गुटबाजी का शिकार हो जाए, तब यह स्थिति न केवल पत्रकारों के लिए बल्कि लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है।

    दुर्ग शहर का प्रेस क्लब प्रदेश के पुराने प्रेस क्लबों में गिना जाता है, लेकिन इन दिनों इसकी कार्यप्रणाली को लेकर पत्रकारों के बीच कई तरह की चर्चाएं और असंतोष सामने आ रहे हैं। आरोप यह भी है कि प्रेस क्लब का संचालन एक लोकतांत्रिक संस्था के रूप में नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों की मर्जी से होता हुआ दिखाई देता है। यही कारण है कि कई पत्रकार स्वयं को इस व्यवस्था से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

    प्रेस क्लब में पहले भी हो चुकी है टूट

    दुर्ग के पत्रकार जगत में यह कोई नई स्थिति नहीं है। कुछ वर्षों पहले भी मतभेद इतने बढ़ गए थे कि प्रेस क्लब दो हिस्सों में बंट गया था। समय के साथ स्थिति सामान्य होने की उम्मीद थी, लेकिन अब फिर से वैसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं।

    हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि एक नए प्रेस क्लब के गठन की चर्चा भी सामने आ चुकी है। इतना ही नहीं, नए समूह को कमजोर करने या उसे तोड़ने के प्रयासों की बातें भी पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय बन रही हैं।

    अपनी लाइन बड़ी करने के बजाय दूसरे की छोटी करने की होड़

    कहावत है कि आगे बढ़ने के लिए अपनी लाइन बड़ी करनी चाहिए, लेकिन दुर्ग के पत्रकार जगत में स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। यहां आगे बढ़ने की बजाय दूसरे की पहचान और अवसर को छोटा करने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई दे रही है।

    कई युवा और जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का कहना है कि इस मानसिकता के कारण उन्हें अपनी पहचान बनाने और आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    चुनाव प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

    प्रदेश के अधिकांश प्रेस क्लबों में नियमित चुनाव होते हैं और उनकी चर्चा पत्रकारों के बीच खुलकर होती है। छोटे कस्बों में भी प्रेस क्लब चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में दिखाई देते हैं।

    लेकिन दुर्ग प्रेस क्लब के संबंध में कई पत्रकारों का कहना है कि यहां चुनाव तो होते हैं, पर इतनी “शांतिपूर्ण” तरीके से कि अधिकांश पत्रकारों को इसकी जानकारी तक नहीं हो पाती। यह स्थिति भी पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है।

    चाटुकारिता बनाम काबिलियत

    पत्रकारों के बीच यह चर्चा भी आम है कि नियम-कायदे और सदस्यता से जुड़े निर्णय कुछ लोगों की पसंद-नापसंद पर आधारित दिखाई देते हैं। कई ऐसे लोग भी प्रेस क्लब से जुड़े बताए जाते हैं जो सक्रिय पत्रकारिता से दूर हैं, लेकिन सुविधाओं का लाभ लेने में आगे रहते हैं।

    कुछ मामलों में यह भी आरोप सामने आते हैं कि अपने स्वयं के प्रकाशन होने के बावजूद दूसरे मीडिया संस्थानों से जुड़ाव दिखाकर सदस्यता बनाए रखने की प्रवृत्ति भी देखी जा रही है।

    भिलाई का उदाहरण, दुर्ग में अलग तस्वीर

    दुर्ग जिला मुख्यालय के समीप भिलाई शहर में प्रेस क्लब की पहचान प्रदेश स्तर पर एक संगठित और सक्रिय संस्था के रूप में देखी जाती है। वहां पत्रकारों के बीच सामूहिकता और संवाद का माहौल दिखाई देता है।

    इसके विपरीत दुर्ग के पत्रकार जगत में लगातार बढ़ती दूरी और गुटबाजी की चर्चा चिंता का विषय बनती जा रही है।

    सम्मान से तिरस्कार तक का सफर

    एक समय था जब दुर्ग के वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान न केवल पत्रकारों के बीच बल्कि समाज और राजनीतिक क्षेत्र में भी अत्यंत ऊंचा था। लेकिन बदलते समय के साथ अब कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के प्रति असंतोष की भावना भी सामने आने लगी है।

    कई लोग खुलकर तो नहीं बोलते, लेकिन दबे स्वर में यह जरूर कहते हैं कि वरिष्ठता का अर्थ मार्गदर्शन होना चाहिए, न कि एकाधिकार।

    सभी पत्रकार एक जैसे नहीं

    यह भी सच है कि दुर्ग के पत्रकार जगत में आज भी अनेक ऐसे पत्रकार हैं जिनकी ईमानदारी, जमीनी रिपोर्टिंग और निष्पक्ष लेखन के कारण समाज में सम्मान है। उनके काम की सराहना भी होती है और उन्हें आदर्श के रूप में देखा जाता है।

    लेकिन कुछ विवादित प्रवृत्तियों के कारण पूरी बिरादरी की छवि प्रभावित होती है। जैसा कि कहा जाता है — एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है।

    जमीनी पत्रकारों की चिंता

    दुर्ग शहर में सक्रिय पत्रकारों की संख्या सैकड़ों में है। इसका प्रमाण यह भी है कि शासन-प्रशासन और राजनीतिक दल अपनी प्रेस विज्ञप्तियां सभी पत्रकारों को भेजते हैं।इसके बावजूद यदि कुछ लोग खुद को ही प्रतिनिधि मानने का दावा करें तो यह स्थिति जमीनी स्तर पर काम कर रहे पत्रकारों के लिए निराशाजनक बन जाती है।

    प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती 

    शासन प्रशासन द्वारा पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों के लिए कई सुविधाएं भी समय समय पर प्रदान की जाती हैं ऐसे में भविष्य में कुछ ऐसा होगा तो अन्य पत्रकारों द्वारा भी सुविधाओं का दावा किया जाएगा ऐसे में प्रशासन के सामने किसे सुविधा दे किसे नहीं यह फैसला लेना मुश्किल होगा हो सकता है सुविधाओं को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए क्योंकि एक पक्ष के लिए फैसला लेना प्रशासन की नजर में भी अनुचित होगा जिसका नुकसान जमीनी स्तर से जुड़े सभी पत्रकारों को हो तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी 

    भविष्य के लिए चेतावनी

    फिलहाल यह विवाद सांकेतिक रूप में ही दिखाई दे रहा है, लेकिन यदि समय रहते संवाद और पारदर्शिता का रास्ता नहीं अपनाया गया तो यह खुला संघर्ष भी बन सकता है।

    और यदि ऐसा हुआ तो इसका सबसे बड़ा नुकसान पत्रकारिता की साख और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को होगा।

    नोट: लेख दुर्ग के पत्रकारों की स्थिति के अनुसार, समाचार पत्र किसी भी क्लब और संस्था से परोक्ष/अपरोक्ष रुप संबंधित नहीं है 

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज 5 मार्च 2026 (गुरुवार) को राजधानी रायपुर में विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में व्यस्त कार्यक्रम निर्धारित है। जारी आधिकारिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह से दोपहर तक भाजपा प्रदेश कार्यालय, विधानसभा और राज्य नीति आयोग में महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 9:40 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान करेंगे। इसके बाद वे सुबह 9:55 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे परिसर, बोरियाकला रायपुर पहुंचेंगे, जहां उनका आगमन एवं संक्षिप्त प्रवास निर्धारित है।

    इसके पश्चात मुख्यमंत्री सुबह 10:00 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय से प्रस्थान कर सुबह 10:20 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे। यहां वे दोपहर 12:30 बजे तक विधानसभा में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल रहेंगे।

    विधानसभा में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे नवा रायपुर से प्रस्थान कर 12:35 बजे छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग, नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे, जहां वे आयोग से जुड़े कार्यों और बैठकों में भाग लेंगे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:05 बजे राज्य नीति आयोग से प्रस्थान करेंगे और दोपहर 1:35 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस दौरे को शासन और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बैठकों और समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। राजधानी रायपुर में आज होने वाली इन बैठकों में विधानसभा संबंधी कार्यों, नीतिगत मुद्दों और संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा होने की संभावना है।

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री श्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। 

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

    राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा तो कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर जताया भरोसा, 9 अप्रैल को होगा मतदान

    दुर्ग/रायपुर। आगामी 9 अप्रैल को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी ओर से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस) ने अपनी वर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर मैदान में उतारते हुए उन पर भरोसा जताया है। दोनों दलों की ओर से घोषित इन नामों के साथ राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण लगभग स्पष्ट माना जा रहा है।

    भाजपा की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा: संगठन और सामाजिक समीकरण का संतुलन

    भाजपा ने छत्तीसगढ़ से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा की है। लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

    राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से उनका चयन भाजपा की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज (ओबीसी वर्ग) से आती हैं, जिसे प्रदेश में एक प्रभावशाली सामाजिक वर्ग माना जाता है। पार्टी के इस निर्णय को ओबीसी वर्ग और महिला मतदाताओं यानी “मातृ शक्ति” को संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक अनुभव की बात करें तो लक्ष्मी वर्मा रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं।

    कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर दोबारा जताया भरोसा

    वहीं कांग्रेस ने अपनी मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उन पर भरोसा दोहराया है। फूलो देवी नेताम का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

    फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से आती हैं और कांग्रेस की ओर से एक प्रमुख आदिवासी महिला चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने संगठन व जनप्रतिनिधि के रूप में कई जिम्मेदारियां निभाईं।

    वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और पूर्व में विधायक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। आदिवासी समाज और महिला नेतृत्व के प्रतिनिधित्व के लिहाज से कांग्रेस का यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्यसभा चुनाव का गणित लगभग स्पष्ट

    छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

    90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक और कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इस संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों प्रमुख दलों का एक-एक सीट जीतना लगभग तय माना जा रहा है।

    राजनीतिक संदेश भी अहम

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार के उम्मीदवार चयन में दोनों दलों ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। भाजपा ने ओबीसी महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी महिला नेतृत्व को पुनः राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया है।

    ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाला राज्यसभा चुनाव भले ही गणितीय रूप से लगभग तय दिखाई दे रहा हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक संदेश के लिहाज से यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

       नई दिल्ली / पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व से उच्चस्तरीय संवाद स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को कतर के अमीर, कुवैत के क्राउन प्रिंस और ओमान के सुल्तान से टेलीफोन पर अलग-अलग वार्ता कर क्षेत्रीय शांति, संप्रभुता और भारतीय समुदाय की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

    कतर के अमीर से बातचीत
    प्रधानमंत्री मोदी ने कतर के अमीर महामहिम शेख तमीम बिन हमद अल सानी से बातचीत में भारत की ओर से कतर के साथ अटूट एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कतर की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन की कड़ी निंदा की।
    दोनों नेताओं ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने इस चुनौतीपूर्ण समय में कतर में रह रहे भारतीय समुदाय को वहां के नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन और स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया।

    कुवैत के क्राउन प्रिंस से सार्थक संवाद
    प्रधानमंत्री ने कुवैत के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से भी फोन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करता है तथा इस कठिन समय में कुवैत के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।
    वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति बहाली में कूटनीतिक प्रयासों और संवाद की अहम भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने में कुवैती नेतृत्व के सहयोग की सराहना की।

    ओमान के सुल्तान से पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श
    प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक से भी बातचीत की और पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने ओमान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करते हुए क्षेत्र में स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए निरंतर कूटनीतिक संवाद को आवश्यक बताया।
    प्रधानमंत्री ने ओमान द्वारा भारतीय समुदाय को दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

    भारत का स्पष्ट संदेश
    इन तीनों वार्ताओं के माध्यम से भारत ने एक स्पष्ट और संतुलित कूटनीतिक संदेश दिया है—
    खाड़ी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता।
    तनाव की स्थिति में संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता।
    विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।
    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की यह सक्रिय पहल न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन का संकेत है, बल्कि खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत रणनीतिक और मानवीय संबंधों को भी रेखांकित करती है।
    भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक मंच पर शांति, स्थिरता और सहयोग की नीति पर अडिग है।

    कृषक उन्नति योजना: किसानों की खुशहाली का मनाया गया त्यौहार
     

       बालोद / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की किसान हितैषी सरकार ने किसानों की समृद्धि के अपने संकल्प को पूरा करते हुए आज प्रदेश के किसानों के बीच उनकी खुशहाली का त्यौहार मनाया दिया। कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के 24.75 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में 10 हजार करोड़ रुपय से अधिक की अंतर राशि का सीधा हस्तांतरण किसानों के बैंक खाते में किया गया। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि लाखों किसानों के अनगिनत सपने अब साकार होने जा रहे हैं।
    बालोद जिले में इस कृषक उन्नति योजना का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। जिले के 01 लाख 48 हजार से अधिक किसानों के बैंक खातों में 511 करोड़ 11 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की गई है। इस बड़ी आर्थिक मदद ने जिले के किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। अपने बैंक खाते में राशि अंतरण होने के बाद जिले के विभिन्न गांवों के किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। किसानों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बड़े भाई के रूप में संबोधित करते हुए ’’धन्यवाद विष्णु भैया’’ के नारे लगाए। किसानों का मानना है कि साय सरकार का सुशासन और पारदर्शिता उनके जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है। एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था से बिचैलियों की भूमिका खत्म हुई है और सीधे मेहनत का फल किसानों के खातों में पहुंच रहा है।
    जिले के ग्राम बगदई के किसान लक्ष्मीचंद साहू के बैंक खाते में कृषक उन्नति योजना के तहत 01 लाख 91 हजार रुपये अंतरित हुआ है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे इस राशि का उपयोग घर में होने वाली आगामी शादी के खर्चों के लिए करेंगे। इसी तरह ग्राम कोचेरा के किसान महेन्द्र साहू ने भी प्राप्त राशि 01 लाख 10 हजार रूपए को अपनी बेटी के विवाह की तैयारियों में करेंगे, राशि मिलने पर अब वे निश्चिंत होकर विवाह कार्य सम्पन्न करेंगे। ग्राम टेंगना बरपारा के किसान श्री चमन लाल साहू को 1 लाख 28 रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसे वे अपने नए घर के निर्माण में लगाएंगे। वहीं ग्राम डोकला के किसान श्री टोकेश्वर और बोरतरा के जीवनलाल साहू भी आज प्राप्त हुई राशि का उपयोग अपने निर्माणाधीन मकानों को पूरा करने और प्लास्टर कार्य में करेंगे।
    किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में हमें एकमुश्त राशि मिल रही है, जिससे बड़े काम भी आसानी से हो जाते हैं। हमें अब कर्ज लेने की जरूरत नहीं है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से दी गई यह राशि केवल एक वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के किसानों के स्वाभिमान और उनके बेहतर भविष्य की गारंटी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब किसानों की खुशहाली का प्रदेश बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार शराब की खपत बढ़ाने और काली कमाई में लिप्त – सुशील आनंद शुक्ला

    रायपुर/ राजनीति /
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा सरकार अब शराब में खुलेआम कमीशनखोरी की व्यवस्था तैयार कर रही है।

    शुक्ला ने कहा कि साय सरकार द्वारा शराब निर्माता कंपनियों से उनके ब्रांड के रेट पर टेंडर मंगाया गया है, जिसमें सरकार कंपनियों द्वारा दिए गए रेट में अपना सेस जोड़कर वही दर शराब की बोतलों पर चस्पा करेगी और उसी के आधार पर बिक्री कराई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा रेट नेगोशिएशन की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है, जिससे निर्माता कंपनियां सत्ता में बैठे लोगों का कमीशन जोड़कर रेट तय करेंगी और सरकार उसी दर पर शराब खरीदेगी।

    अन्य राज्यों में भारी डिस्काउंट, छत्तीसगढ़ में पूरा रेट

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष ने कहा कि जिन राज्यों में शराब दुकानें निजी ठेकेदारों के माध्यम से संचालित होती हैं, वहां शराब निर्माता कंपनियां 40 से 60 प्रतिशत तक डिस्काउंट देती हैं। वहीं वही ब्रांड अन्य राज्यों में कम दर पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार पूरे रेट पर शराब खरीदी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया से घोटाले की बू आ रही है।

    शराबबंदी केवल राजनीतिक पाखंड

    सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा जब विपक्ष में थी, तब शराबबंदी को लेकर बड़े-बड़े आंदोलन और प्रदर्शन किए गए, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि साय सरकार के फैसले स्पष्ट रूप से शराबखोरी को संरक्षण देने वाले हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा मनपसंद मोबाइल ऐप लागू करने, 67 नई शराब दुकानें खोलने और अब इस वर्ष 30 और नई दुकानों की तैयारी से यह साबित हो गया है कि भाजपा का शराबबंदी का दावा केवल राजनीतिक पाखंड था।

    शराब बिक्री बढ़ाने की नीति, काउंटर दोगुने

    कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार बनने के बाद शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से नीतियां बनाई गईं। पहले से संचालित लगभग 700 शराब दुकानों को कंपोजिट कर देशी और अंग्रेजी शराब एक ही दुकान में बेचने की व्यवस्था की गई, जिससे प्रभावी रूप से करीब 1400 काउंटर बन गए और शराब की उपलब्धता दोगुनी कर दी गई।

    अवैध शराब और तस्करी का आरोप

    सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अवैध शराब की बिक्री में वृद्धि हुई है। दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी हो रही है और बिना होलोग्राम या नकली होलोग्राम वाली शराब सरकारी दुकानों से बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी सरकार शराब से होने वाली काली कमाई में डूबी हुई है।

    कांग्रेस ने मांग की कि सरकार शराब नीति, खरीदी प्रक्रिया और रेट निर्धारण की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे तथा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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