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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
“भारत “विकसित भारत 2047” के विजन और एक सुदृढ़ जैव-अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है”
‘अगली पीढ़ी के बायो-इन्पुट्स– जैव-आधारित कीटनाशक, शक्ति वर्धक एवं उर्वरक' की थीम पर आधारित बायोपीएसएफ 2026 नई दिल्ली में संपन्न
नई दिल्ली / भारत अपनी मजबूत वैज्ञानिक आधारशिला, समृद्ध जैव विविधता और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के कारण, जैव अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि-लागत क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने की अपार क्षमता क्षमता रखता है।
यह बात रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग(डीसीपीसी) के सचिव, श्री तेजवीर सिंह ने आज नई दिल्ली में दो दिवसीय संगोष्ठी-सह-कार्यशाला, 'बायोपीएसएफ 2026' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा।
“अगली पीढ़ी के बायो-इन्पुट्स– जैव-आधारित कीटनाशक, शक्ति वर्धक एवं उर्वरक” की थीम पर आधारित 'बायोपीएसएफ 2026' कार्यक्रम का आयोजन कीटनाशक सूत्रीकरण प्रौद्योगिकी संस्थान (आईपीएफटी), गुरुग्राम द्वारा किया गया था, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के डीसीपीसी (रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
श्री सिंह ने कहा कि सतत कृषि के लिए बढ़ता नीतिगत समर्थन और जैव-अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाली लक्षित पहलों सहित अनेक सकारात्मक कारक भारत को जैव-अर्थव्यवस्था तथा जैव-आधारित कृषि-इनपुट क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनने के मार्ग पर अग्रसर करेंगे।
डीसीपीसी के सचिव ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी साझेदारी तथा उभरते युवा नवोन्मेषकों के तकनीकी योगदान भविष्य के सतत कृषि समाधानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जैव-कीटनाशकों के व्यावहारिक पहलुओं और सफलता पर प्रकाश डालते हुए, श्री तेजवीर सिंह ने इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि जैव-कीटनाशकों की वास्तविक सफलता ऐसी मज़बूत फ़ॉर्मूलेशन प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी निर्भर करती है, जो उत्पाद की स्थिरता, खेतों में उसकी प्रभावशीलता, उपयोग में आसानी और किसानों के बीच उसकी समग्र स्वीकार्यता को बढ़ा सकें।
इसके अलावा, डीसीपीसी के सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे भारत “विकसित भारत 2047” और एक सशक्त जैव-अर्थव्यवस्था के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा जैव-आधारित रसायनों, फसल संरक्षण प्रौद्योगिकियों और सतत कृषि-इनपुट्स के क्षेत्र में स्टार्टअप-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम आईपीएफटी के 36वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नियामकों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया तथा जैव-आधारित कृषि-इनपुट्स के क्षेत्र में हालिया विकास और सतत कृषि में उनकी भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि जब नागरिक एकता और पारस्परिक सहयोग के सूत्र में बंधे होते हैं, तब राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प के बल पर देश निरंतर प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा:
"जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥"
जिस प्रकार लकड़ी के टुकड़े अलग-अलग रहने पर अपनी पूरी ऊर्जा प्रदर्शित नहीं कर पाते, लेकिन एक साथ आने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, उसी प्रकार किसी राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर निर्भर करता है।
राजनीति का बदलता स्वरूप और बढ़ती जनअपेक्षाएं
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि केवल कानून बनाने या सरकारी योजनाओं की घोषणा करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास के केंद्र भी होते हैं। समय के साथ राजनीति का स्वरूप बदला है और अब जनता केवल चुनावी वादों या मंचीय भाषणों से संतुष्ट नहीं होती। आम नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों को पसंद कर रहा है जो उसकी दैनिक जरूरतों, सामाजिक समस्याओं और जीवन की वास्तविक चुनौतियों को समझते हुए सीधे समाधान प्रस्तुत करें।
छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में आज राजनीति का मूल्यांकन विकास कार्यों के साथ-साथ जनसरोकारों के आधार पर भी होने लगा है। जनता अब यह देख रही है कि उसका प्रतिनिधि केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है या फिर उससे आगे बढ़कर समाज की आवश्यकताओं को समझते हुए नवाचार और जनहित के नए मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।
जब जनप्रतिनिधित्व बन जाए जनसेवा का माध्यम
दुर्ग जिले के वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक रिकेश सेन द्वारा किए जा रहे विभिन्न सामाजिक प्रयासों की चर्चा लगातार बढ़ रही है। सीमित संसाधनों में आम नागरिकों की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम लागत या प्रतीकात्मक शुल्क पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
चाहे गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह सीजन में मेहंदी की व्यवस्था हो, कम लागत में चश्मा उपलब्ध कराना हो, सामाजिक आयोजनों के लिए पेयजल सहायता हो, दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और तीन पहिया साइकिल की व्यवस्था हो अथवा विभिन्न वर्गों के लिए सहयोगात्मक योजनाएं—इन पहलों ने राजनीति में जनसहभागिता के एक नए मॉडल की चर्चा शुरू की है।
इन प्रयासों का प्रभाव केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह संदेश भी गया है कि जनप्रतिनिधि यदि इच्छाशक्ति रखे तो सामाजिक सहयोग और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से कई सकारात्मक पहलें संभव हैं।
जनता की अपेक्षाएं अब और बढ़ चुकी हैं
यही कारण है कि एक क्षेत्र में दिखाई देने वाले सकारात्मक प्रयास अन्य क्षेत्रों के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं। स्वाभाविक रूप से नागरिक अपने क्षेत्र के विधायक, सांसद, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी ऐसी ही सक्रियता और नवाचार की अपेक्षा करने लगते हैं।
दुर्ग जिले में भी विभिन्न राजनीतिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। नागरिक यह चाहते हैं कि विकास कार्यों के साथ-साथ ऐसे जनहितकारी प्रयास भी दिखाई दें जो सीधे आम व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करें। सड़क, भवन और अधोसंरचना विकास आवश्यक हैं, लेकिन आम परिवार के दैनिक जीवन में राहत पहुंचाने वाली पहलें लोगों के मन में स्थायी स्थान बनाती हैं।
पद बड़ा नहीं, प्रभाव बड़ा होना चाहिए
राजनीति में पद और अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जनता अंततः उस कार्य को याद रखती है जिसका सीधा लाभ उसे मिला हो। इतिहास गवाह है कि अनेक जनप्रतिनिधि अपने पद के कारण नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और जनहितकारी कार्यों के कारण लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं को समझें, समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करें और ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दें जो आम नागरिक के जीवन को सरल और सम्मानजनक बना सकें।
लोकतंत्र की असली शक्ति जनता की उम्मीदों में है
वर्तमान दौर की राजनीति में जनता केवल प्रतिनिधित्व नहीं चाहती, बल्कि सहभागिता और संवेदनशीलता भी चाहती है। नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों की तलाश में हैं जो उनके सुख-दुख में सहभागी बनें, समस्याओं को सुनें और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करें।
दुर्ग से लेकर प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों तक एक संदेश स्पष्ट दिखाई दे रहा है—जनता अब उन नेताओं को अधिक महत्व दे रही है जो सत्ता के केंद्र में नहीं, बल्कि समाज के बीच दिखाई देते हैं। राजनीति का भविष्य भी संभवतः उसी दिशा में आगे बढ़ेगा जहां जनप्रतिनिधि अपने पद की शक्ति से अधिक अपनी जनसेवा की पहचान से जाने जाएंगे।
रायपुर / शौर्यपथ / कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।
यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।
शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।
आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।
रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया।
इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।
“Month of Solar” अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए मिलेगा पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड
मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन में देश में दूसरा स्थान
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को वितरित किए विभिन्न योजनाओं के लाभ: ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद
सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्री
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बना आधुनिक बेली ब्रिज: कनेक्टिविटी और विकास को मिली नई गति
जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।
कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।
बदलते बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
गाजियाबाद के खोड़ा में 17 वर्षीय छात्र की निर्मम हत्या से पूरे देश में आक्रोश, प्रशासन ने दिखाई सख्ती; एनकाउंटर, गिरफ्तारियां और अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई जारी
नई दिल्ली / एजेंसी /
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के खोड़ा थाना क्षेत्र स्थित नवनीत विहार में 17 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की नृशंस हत्या के बाद पुलिस और प्रशासन ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। महज कुछ दिनों के भीतर मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, साजिशकर्ता पिता की गिरफ्तारी और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
क्या था पूरा मामला?
28 मई 2026 को 11वीं कक्षा के छात्र सूर्या चौहान पर कुछ आरोपियों ने चाकुओं से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मुख्य आरोपी असद एनकाउंटर में ढेर
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या का मुख्य आरोपी असद था। 31 मई की तड़के गाजियाबाद पुलिस ने चेकिंग के दौरान उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में वह घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ।
हत्या का मास्टरमाइंड निकला आरोपी का पिता
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे आरोपी असद का पिता नवाब मुख्य साजिशकर्ता था। पुलिस के अनुसार उसी ने बेटे को हत्या के लिए उकसाया और पूरी योजना बनाई। पुलिस ने नवाब समेत फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
अवैध संपत्ति पर चलेगा बुलडोजर
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने आरोपी असद तथा उसके परिवार की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अवैध निर्माण पाए जाने पर नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने परिवार को जवाब देने और स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।
'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' के तहत बड़ी कार्रवाई
हत्याकांड के बाद खोड़ा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। ड्रोन कैमरों, आधुनिक तकनीक और पुलिस टीमों की सहायता से हिस्ट्रीशीटरों एवं संदिग्ध अपराधियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। अपराध से अर्जित संपत्तियों को भी चिन्हित किया जा रहा है।
अफवाहों से सावधान रहने की अपील
सोशल मीडिया पर सूर्या हत्याकांड के दिन गाजियाबाद में एक अन्य हत्या की अफवाह भी फैलाई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो जनवरी 2025 की एक पुरानी घटना का था, जिसे वर्तमान मामले से जोड़कर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
पीड़ित परिवार को सहायता
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है। सूर्या चौहान के बड़े भाई को नौकरी देने तथा क्षेत्र के किसी प्रमुख मार्ग अथवा चौराहे का नाम सूर्या चौहान के नाम पर रखने की घोषणा भी की गई है।
शौर्यपथ विशेष
सूर्या चौहान हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। जिस तेजी से पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई की है, उसने स्पष्ट संदेश दिया है कि निर्दोष की हत्या करने वालों के लिए कानून के शिकंजे से बच पाना आसान नहीं होगा। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।
शौर्यपथ विशेष विश्लेषण
लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है। उसकी भूमिका सरकार का प्रचारक बनने की नहीं, बल्कि जनता और सत्ता के बीच जवाबदेही का सेतु बनने की होती है। लेकिन जब किसी पत्रकार, एंकर या मीडिया संस्थान पर निष्पक्षता खोने के आरोप लगने लगते हैं, तब उसका असर केवल उसकी व्यक्तिगत साख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकार, लोकतंत्र और पूरे मीडिया जगत पर पड़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में देश में एक नई बहस उभरी है। बहस यह कि क्या कुछ टीवी एंकरों की शैली और प्रस्तुति ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया है? सोशल मीडिया पर बार-बार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि कुछ प्रमुख चेहरे सत्ता से कठिन सवाल पूछने के बजाय विपक्ष को घेरने में अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं।
हालिया शिक्षा संबंधी विवाद ने इस बहस को और तेज कर दिया। लाखों छात्रों और डिजिटल शिक्षा मंचों से जुड़े लोगों ने इसे केवल एक टिप्पणी का मामला नहीं माना, बल्कि इसे उस मानसिकता का प्रतीक बताया जिसमें जमीनी मुद्दों से अधिक महत्व टीवी बहसों को दिया जाता है।
सरकार को भी हो सकता है नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी सरकार के लिए सबसे उपयोगी मीडिया वह होता है जो उसकी उपलब्धियों को दिखाने के साथ-साथ कमियों की ओर भी ईमानदारी से ध्यान दिलाए। जब जनता को यह महसूस होने लगता है कि मीडिया का एक वर्ग केवल बचाव की भूमिका निभा रहा है, तब उसका असंतोष केवल मीडिया तक सीमित नहीं रहता बल्कि सरकार तक भी पहुँचता है।
यही कारण है कि कई बार सरकार के समर्थक माने जाने वाले कुछ मीडिया चेहरों की कार्यशैली अंततः सरकार की छवि के लिए भी चुनौती बन सकती है। जनता सवाल पूछने वाले पत्रकार को सम्मान देती है, लेकिन पक्षकार बनते दिखने वाले पत्रकार पर संदेह करने लगती है।
डिजिटल युग में बदल गया समीकरण
आज सूचना का स्रोत केवल टीवी चैनल नहीं हैं। यूट्यूब, सोशल मीडिया और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म लाखों लोगों तक सीधे पहुँच रहे हैं। ऐसे माहौल में यदि मुख्यधारा मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका लाभ वैकल्पिक मंचों को मिलता है।
यही वजह है कि अब पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी टीआरपी नहीं बल्कि भरोसा बन चुकी है।
लोकतंत्र के लिए चेतावनी
पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता का विरोध करना नहीं, बल्कि सत्ता से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उसी प्रकार पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता का बचाव करना भी नहीं है। जब मीडिया किसी एक छवि में बंध जाता है तो उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है और लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होता है।
निष्कर्ष
देश में प्रेस की स्वतंत्रता, मीडिया की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने के लिए आवश्यक है कि पत्रकारिता तथ्यों, संतुलन और जवाबदेही के सिद्धांतों पर कायम रहे। किसी भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत आलोचना से बचना नहीं, बल्कि आलोचना सुनकर स्वयं को बेहतर बनाना होती है। और किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी पहचान सत्ता के निकट होना नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के योग्य बने रहना है।
शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
ब्रिटेन को दुनिया की सबसे मजबूत बैंकिंग और सुरक्षा व्यवस्थाओं वाले देशों में गिना जाता है, लेकिन इतिहास के पन्नों में दर्ज कुछ ऐसी डकैतियां भी हैं जिन्होंने इस दावे को चुनौती दी। करोड़ों पाउंड की नकदी, सोना और वित्तीय दस्तावेज लूटने वाली इन घटनाओं ने न केवल ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि अपराध की दुनिया में भी नए अध्याय लिख दिए।
इनमें से कुछ डकैतियां इतनी बड़ी थीं कि आज भी उन्हें अपराध जगत की सबसे साहसिक और चर्चित घटनाओं में गिना जाता है।
सिटी बॉन्ड्स डकैती (1990): इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय लूट
2 मई 1990 को लंदन की एक व्यस्त सड़क पर हुई घटना ने पूरे वित्तीय जगत को स्तब्ध कर दिया। कूरियर एजेंट जॉन गोडार्ड से एक लुटेरे ने चाकू की नोक पर उसका ब्रीफकेस छीन लिया।
यह कोई साधारण ब्रीफकेस नहीं था। इसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के 301 बियरर बॉन्ड्स और ट्रेजरी बिल रखे थे, जिनकी कुल कीमत 291.9 मिलियन पाउंड आंकी गई। वर्तमान मूल्य के अनुसार यह राशि लगभग 720 मिलियन पाउंड के बराबर मानी जाती है।
यह डकैती आज भी ब्रिटेन के इतिहास की सबसे बड़ी डकैती और दुनिया की सबसे बड़ी एकल सड़क लूट की घटनाओं में शामिल है।
सिक्यूरिटास डिपो डकैती (2006): नकदी की सबसे बड़ी चोरी
फरवरी 2006 में दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के टोनब्रिज स्थित सिक्यूरिटास डिपो पर अपराधियों ने बेहद सुनियोजित हमला किया।
लुटेरों ने पहले डिपो के प्रबंधक और उसके परिवार को बंधक बनाया। इसके बाद वे सुरक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और नोटों से भरी बोरियां लेकर फरार हो गए।
इस डकैती में करीब 53 मिलियन पाउंड नकद लूटे गए, जो ब्रिटेन के इतिहास की सबसे बड़ी नकदी डकैती मानी जाती है।
हालांकि बाद में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन पूरी राशि कभी बरामद नहीं हो सकी।
ब्रिंक्स-मैट डकैती (1983): जब लुटेरों के हाथ लगा 3 टन सोना
26 नवंबर 1983 को हीथ्रो हवाई अड्डे के निकट स्थित ब्रिंक्स-मैट गोदाम पर कुछ अपराधियों ने एक सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत से धावा बोला।
लुटेरों को उम्मीद थी कि उन्हें केवल नकदी मिलेगी, लेकिन उनके सामने सोने का खजाना खुल गया।
डकैत लगभग 3 टन वजन की 6,800 सोने की छड़ों और हीरों के साथ फरार हो गए। उस समय इसकी कीमत लगभग 26 मिलियन पाउंड आंकी गई थी।
यह घटना ब्रिटेन के इतिहास की सबसे बड़ी स्वर्ण डकैती के रूप में दर्ज है और आज भी अपराध विज्ञान के छात्रों के लिए अध्ययन का विषय बनी हुई है।
द ग्रेट ट्रेन रॉबरी (1963): 15 मिनट में इतिहास रचने वाली डकैती
8 अगस्त 1963 की रात ब्रिटेन के अपराध इतिहास की सबसे चर्चित रातों में से एक बन गई।
15 अपराधियों के एक गिरोह ने ग्लासगो से लंदन जा रही रॉयल मेल ट्रेन के सिग्नल सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर ट्रेन को रोक दिया।
मास्टरमाइंड ब्रूस रेनॉल्ड्स के नेतृत्व में गिरोह ने महज 15 मिनट के भीतर इंजन और हाई-वैल्यू कोच को अलग किया और नोटों से भरे 120 बैग लेकर फरार हो गया।
डकैतों ने लगभग 2.6 मिलियन पाउंड लूटे, जिसकी वर्तमान कीमत 53 मिलियन पाउंड से अधिक आंकी जाती है।
यह डकैती केवल चोरी की रकम के कारण नहीं, बल्कि उसकी योजना, निष्पादन और बाद की पुलिस जांच के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध हुई।
अपराध से सुरक्षा सुधार तक
इन सभी घटनाओं में एक समानता थी—अत्यंत सुनियोजित योजना, सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों का फायदा और अंदरूनी सूचनाओं का उपयोग।
इन डकैतियों के बाद ब्रिटेन में बैंकिंग सुरक्षा, नकदी परिवहन, स्वर्ण भंडारण और उच्च मूल्य के वित्तीय दस्तावेजों की सुरक्षा संबंधी नियमों में व्यापक बदलाव किए गए।
अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, कड़े सत्यापन मानक, बेहतर सुरक्षा प्रशिक्षण और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों को लागू किया गया ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
इतिहास का सबक
ब्रिटेन की ये चार डकैतियां केवल अपराध की घटनाएं नहीं थीं, बल्कि उन्होंने यह साबित किया कि दुनिया की सबसे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी तब कमजोर पड़ सकती है जब अपराधी योजना, धैर्य और अंदरूनी जानकारी के साथ हमला करें।
इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण सबक दिया—सुरक्षा केवल ताले, हथियार और कैमरों से नहीं, बल्कि सतत निगरानी, जवाबदेही और तकनीकी सतर्कता से सुनिश्चित होती है।
आज भी सिटी बॉन्ड्स डकैती, सिक्यूरिटास डिपो लूट, ब्रिंक्स-मैट स्वर्ण चोरी और ग्रेट ट्रेन रॉबरी अपराध इतिहास के ऐसे अध्याय हैं, जिन्हें दुनिया कभी भूल नहीं पाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
