August 27, 2026
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    भाजपा का आदिवासी व महिला विरोधी चेहरा हुआ बेनकाब -आर एन वर्मा

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    राष्ट्र प्रमुख आदिवासी महिला राष्ट्रपति की बजाय प्रधानमंत्री द्वारा संसद भवन का लोकार्पण अनुचित -: आर. एन. वर्मा

    दुर्ग । शौर्यपथ । राष्ट्र प्रमुख आदिवासी महिला राष्ट्रपति एवं राष्ट्र की प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू की बजाए संसद भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कराया जा रहा है जो कि पूरी तरह अनुचित है, इससे भाजपा का आदिवासी व महिला विरोधी चेहरा अब बेनकाब हो चुका है उक्त बातें छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) आर. एन. वर्मा ने व्यक्त की है

    श्री वर्मा का कहना है कि जब नवीन संसद भवन का भूमि पूजन हुआ तब भी राष्ट्र प्रमुख एवं राष्ट्र का प्रथम नागरिक होने के नाते राष्ट्रपति से भूमि पूजन कराया जाना चाहिए था मगर तब भी इस देश के राष्ट्रपति अनुसूचित जाति समुदाय के श्री रामनाथ कोविंद थे जिन्हें नवीन संसद भवन के भूमि पूजन का हक ना देकर प्रधानमंत्री के द्वारा भूमि पूजन कराया गया तभी से भाजपा का अनुसूचित जाति विरोधी चेहरा सामने आ गया था और अब लोकार्पण कराया जाना है तब भी राष्ट्र प्रमुख राष्ट्रपति के हाथों इसका लोकार्पण नहीं कराया जा रहा है वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति आदिवासी होने के साथ साथ महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं जिन्हें राष्ट्रपति बनाते समय भाजपा ने अनुसूचित जनजाति एवं महिला हितैषी होने की बात कह कर खूब अपनी पीठ थपथपाई थी मगर अब उन्हीं आदिवासी महिला राष्ट्रपति को राष्ट्र प्रमुख होने के नाते संसद भवन के लोकार्पण के हक से वंचित किया जा रहा है इससे पता चलता है सिर्फ वोट के लिए सहानुभूति बटोरने भाजपा ऐसा करती मगर उन्हें उनका वास्तविक हक देने की बात आती है तब वह पीछे हट जाती है इससे भाजपा का अनुसूचित जनजाति व महिला विरोधी वास्तविक चेहरा आज पूरे देश के सामने आ गया है जिसे पूरा देश देख रहा है श्री वर्मा का कहना है कि राष्ट्रपति का संवैधानिक दर्जा प्रधानमंत्री से ऊपर है तथा देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद भवन के उद्घाटन का मुख्य अतिथि बनाकर उनके हाथों लोकार्पण कराया जाना चाहिए था संसद भवन का लोकार्पण राष्ट्रपति की बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कराया जा रहा है जो राष्ट्रपति का भी अपमान है दो ऐतिहासिक मौके ऐसे आए जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला समुदाय को महत्व दिया जा सकता था, पहला संसद भवन निर्माण का भूमि पूजन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथो करा कर उन्हें महत्व दिया जा सकता था, दूसरा संसद भवन का उद्घाटन आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करा कर उन्हें महत्व दिया जाना चाहिए था मगर संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे है राष्ट्रपति का पद संवैधानिक दृष्टि से प्रधान मंत्री से बड़ा होता है इसलिए देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद भवन का लोकार्पण राष्ट्रपति के हाथों से ही होना चाहिए जो संवैधानिक दृष्टि से उचित होता।

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