August 26, 2026
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    क्या भाजपा के आगे नतमस्तक हुए महापौर धीरज बाकलीवाल ? Featured

    क्या भाजपा के आगे नतमस्तक हुए महापौर धीरज बाकलीवाल ? क्या भाजपा के आगे नतमस्तक हुए महापौर धीरज बाकलीवाल ?
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       दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के महापौर धीरज बाकलीवाल वोरा परिवार के कट्टर समर्थक माने जाते थे किन्तु वर्तमान समय में उनकी कार्यशैली ऐसा प्रतीत हो रही है कि वह अब वोरा परिवार से तो दूर नजर आ रहे है वही कांग्रेस के लिए भी अपरोक्ष रूप से दूर हो रहे है . लोकतंत्र का एक सुन्दर चेहरा होता है कि सत्ताधारी के अवैधानिक कार्यो का विरोध करे किन्तु निगम सत्ता की ताकत होने के बाद भी दुर्ग निगम के महापौर सत्ता और विधायक गजेन्द्र यादव के आगे नतमस्तक नजर आ रहे है .
      हाल ही में निगम के भवन शाखा की बिना अनुमति के नजूल की भूमि पर दुर्ग के विधायक गजेन्द्र यादव ने विधायक कार्यालय बना लिया और पूरी कांग्रेस मौन रही . संवैधानिक शक्तिया महापौर के रूप में धीरज बाकलीवाल के पास मौजूद है किन्तु इस असंवैधानिक भवन के निर्माण में निगम के महापौर ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया वैसे महापौर धीरज बाकलीवाल व्यापारिक पृष्ठभूमि के है शायद इसी का परिणाम है कि अवैधानिक रूप से संचालित कांग्रेसी नेत्री के रेन बसेरा पर कार्यवाही की भी अनुशंसा नहीं कर पाए या यह भी संभव है कि महीने की एक फिक्स रकम अवैध सञ्चालन के एवज में मिल रही हो कारण चाहे जो भी हो यह जाँच का विषय है किन्तु वर्तमान समय में राजनीती का एक बड़ा मुद्दा जो कांग्रेस के लिए फायदेमंद मंद होता उस मुद्दे पर महापौर धीरज बाकलीवाल का मौन रहना कही ना कही कांग्रेस के विरोध में कार्य करने जैसा है .
       निविदा घोटाला की गूंज कई दिनों तक निगम में चलती रही जिसमे भाजपा विधायक गजेन्द्र यादव के दामाद और निगम में कार्यरत करण यादव का नाम सामने आ रहा था किन्तु इस मामले पर भी महापौर धीरज बाकलीवाल का मौन रहा कई कांग्रेसियों में हताशा को जन्म दे दिया और कांग्रेस ने एक बार फिर बड़ा मुद्दा हाँथ से गवा दिया जबकि इस निविदा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज भाजपा पार्षद ने उठाया जो काबिले तारीफ़ रहा . ऐसे कई महत्तवपूर्ण मुद्दे रहे जो कांग्रेस को यह साबित करने में मददगार होते कि भ्रष्टाचार में कही ना कही वर्तमान विधायक का नाम भी सामने आ रहा है किन्तु इन मुद्दों को दरकिनार कर कांग्रेस के कार्यकर्ता होने की दृष्टि से निगम महापौर धीरज बाकलीवाल खो दिया .
       इन सब मुद्दों पर मौन रहने पर शहर में यह चर्चा जोरो पर है कि क्या पूर्व विधायक अरुण वोरा का राजनैतिक सफ़र समाप्त करने की दिशा में परदे के पीछे धीरज बाकलीवाल का बड़ा हाथ है . राजनीती में सब संभव हो जाता है एक रात पहले तक जो राजनैतिक प्रतिद्वंदी रहते है रातोरात गहरे दोस्त बन जाते है क्या कुछ ऐसी ही कोशिश वर्तमान में की जा रही है और विधायक के समर्थन में परदे के पीछे से हाथ मिलाया जा रहा है . क्या चुनाव पूर्व भी कुछ ऐसी कोशिश रही जिससे शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा की छवि को धूमिल किया जा सके . अब देखना यह है कि प्रदेश कांग्रेस द्वारा क्या इन मुद्दों पर कोई पहल होगी या आने वाले समय के लिए नई रणनीति बनेगी ?
      कारण चाहे जो भी हो किन्तु वर्तमान समय में अज्ञातवास सा जीवन महापौर धीरज बाकलीवाल के राजनैतिक गुरु बिता रहे है और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर महापौर धीरज बाकलीवाल का मौन रहना कही ना कही कांग्रेस के लिए ही नुक्सान दायक साबित हो रहा है 

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