September 14, 2026
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    दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस में ‘वाशिंग मशीन’ की चर्चा: लक्ष्मी साहू की नियुक्ति से गरमाई सियासत, राकेश ठाकुर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ? Featured

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    दुर्ग। शौर्यपथ। भारतीय जनता पार्टी पर “दागदार नेताओं को सर्फ से धोकर राजनीति में शामिल करने” का आरोप लगाने वाली कांग्रेस अब खुद उसी आरोपों के घेरे में नजर आ रही है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस की नई कार्यकारिणी समिति के गठन के बाद महामंत्री पद पर लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने संगठन के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

    हाल ही में घोषित ग्रामीण कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी में पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू को महामंत्री बनाया गया। जैसे ही उनका नाम सूची में सामने आया, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सवाल उठने लगे—क्या दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस में साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं की कमी हो गई है? या फिर कांग्रेस भी अब उसी “वाशिंग मशीन” राजनीति की राह पर है, जिसका वह विरोध करती रही है?

    नियुक्ति पर उठे सवाल, संगठन में असंतोष की आहट

    वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जब कांग्रेस पहले से ही बैकफुट पर मानी जा रही है, ऐसे समय में यह नियुक्ति पार्टी के भीतर असहजता का कारण बन गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ कांग्रेसी सदस्य ही इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा का केंद्र दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर की कार्यशैली भी बन गई है।

    लक्ष्मी साहू का नाम हाल ही में एक विवाद के कारण भी सुर्खियों में रहा है। रसमड़ा निवासी संतोष रामटेक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर लक्ष्मी साहू, उनके पति यशवंत साहू और मोनिका साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे लिए गए और कार्य न होने पर रकम वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी गई। संतोष रामटेक ने यह भी दावा किया है कि उनकी मां के साथ मारपीट की गई, जिसका वीडियो उन्होंने सबूत के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है।

    हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या पुलिस द्वारा किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक चर्चा में इन आरोपों का उल्लेख प्रमुखता से हो रहा है।

    क्या संगठन को अंधेरे में रखा गया?

    लक्ष्मी साहू की नियुक्ति के बाद यह भी चर्चा उठी कि क्या राकेश ठाकुर ने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिया था? क्या यह निर्णय सर्वसम्मति से हुआ या शीर्ष स्तर पर तय कर दिया गया?

    राकेश ठाकुर की ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के समय भी संगठन के भीतर विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। ऐसे में अब यह नया विवाद उनके नेतृत्व पर दोबारा सवाल खड़े कर रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में लक्ष्मी साहू का रामटेक परिवार से विवाद सामने आया था, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन गया है।

    ‘काबिलियत या सेटिंग’ की बहस

    संगठन के भीतर यह भी फुसफुसाहट है कि क्या नियुक्तियां काबिलियत के आधार पर हो रही हैं या “सेटिंग” के जरिए? क्या कांग्रेस में सर्वसम्मति और सामूहिक निर्णय की परंपरा कमजोर पड़ रही है?

    पूर्व में भी राकेश ठाकुर पर दुर्ग में कांग्रेसी नेताओं के फोटो पोस्टरों से हटवाने को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। ऐसे में यह नया घटनाक्रम उनकी कार्यप्रणाली को लेकर आलोचनाओं को और बल दे रहा है।

    कांग्रेस की छवि पर असर?

    राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और चर्चा होना सामान्य बात है, लेकिन जब हर चर्चा नकारात्मक दिशा में जाए तो उसका असर संगठन की छवि पर पड़ना स्वाभाविक है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अब अपनी जंबो टीम के साथ राजनीतिक मुकाबले के लिए मैदान में उतर चुकी है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि यह चयन प्रक्रिया भविष्य में संगठन को मजबूती देती है या आंतरिक असंतोष को और बढ़ाती है।

    फिलहाल, लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने दुर्ग की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में पुलिस जांच और संगठनात्मक प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है, यही तय करेगा कि यह विवाद अस्थायी राजनीतिक शोर है या कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक चुनौती।

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