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April 15, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दिव्यांग सोनी 

बिलासपुर। जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं पर लगाम कसते हुए बिलासपुर पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने एक संगठित बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश किया है। तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर की सटीक सूचना और टीमवर्क के दम पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह शहर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में साहिल मरावी, रितेश सेन, निलेश शुक्ला उर्फ राजा, हिमांशु जगत, नंदकुमार रजक एवं सोनू केंवट शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक चोरी के कम से कम 6 प्रकरणों में संलिप्त पाए गए हैं। आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावना जताई जा रही है कि इनके द्वारा अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया गया हो सकता है।

इस सफलता के पीछे पुलिस की सतत निगरानी, तकनीकी इनपुट और मुखबिर तंत्र की अहम भूमिका रही। बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अपराधों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

पुलिस की अपील:

नागरिक अपने वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके।

दुर्ग | विशेष रिपोर्ट

शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट में इन दिनों अतिक्रमण को लेकर दोहरी नीति का आरोप तेज होता जा रहा है। एक ओर नगर निगम छोटे ठेले-खोमचे वालों पर कार्रवाई कर “शहर को व्यवस्थित” करने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर ओम ज्वैलर्स द्वारा कथित रूप से किए गए खुलेआम अतिक्रमण ने शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बरामदा जनता के लिए, कब्जा ज्वैलर्स के लिए?

नगर निगम परिसर में बनाए गए बरामदे का उद्देश्य आम जनता की आवाजाही को सुगम बनाना था, लेकिन आरोप है कि ओम ज्वैलर्स ने इस सार्वजनिक स्थान पर अवैधानिक कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, दुकान के बाहर सड़कों तक सुरक्षा कर्मियों की बैठकों के जरिए 5 से 10 फीट तक सड़क घेर लेने की बात सामने आ रही है।

यह स्थिति न केवल यातायात और आम लोगों की सुविधा को प्रभावित कर रही है, बल्कि नगर निगम के नियमों की खुली अवहेलना भी प्रतीत होती है।

“कार्रवाई गरीबों पर, खामोशी अमीरों पर?”

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि

छोटे दुकानदारों पर चालानी कार्रवाई तुरंत होती है

लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई “फाइलों” में ही अटक जाती है

महापौर श्रीमती अलका बाघमार की कार्यशैली को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अतिक्रमण हटाने की नीति में आर्थिक हैसियत के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है?

वायरल वीडियो और ‘घमंड’ का आरोप

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से ओम ज्वैलर्स के संचालक द्वारा मीडिया पर टिप्पणी की गई कि “विज्ञापन नहीं मिलने पर खबरें चलाई जा रही हैं।”

इस बयान के बाद यह धारणा और मजबूत हुई है कि पैसे के प्रभाव का खुला प्रदर्शन किया जा रहा है।

प्रशासन की जानकारी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक चर्चाओं से यह संकेत मिल रहा है कि संबंधित विभाग को इस अतिक्रमण की जानकारी है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है:

क्या नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं?

क्या प्रभावशाली लोगों को “छूट” मिल रही है?

या फिर पर्दे के पीछे कोई और खेल चल रहा है?

बाजार की अव्यवस्था या बहाना?

ओम ज्वैलर्स द्वारा बाजार की अव्यवस्था को मुद्दा बनाकर अपने कब्जे को सही ठहराने की कोशिश भी चर्चा में है। लेकिन सवाल यह है कि

क्या अव्यवस्था के नाम पर नियमों का उल्लंघन जायज हो जाता है?

जनता पूछ रही है—क्या सब बराबर हैं?

महापौर अलका बाघमार ने शपथ के समय बिना भेदभाव के कार्य करने का वादा किया था, लेकिन एक साल बाद जमीनी हकीकत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि:

क्या नगर निगम ओम ज्वैलर्स पर कार्रवाई करेगा?

क्या अतिक्रमण विभाग “बड़े नामों” तक पहुंचेगा?

या फिर कार्रवाई का दायरा सिर्फ गरीबों तक ही सीमित रहेगा?

निष्कर्ष:

इंदिरा मार्केट का यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता की परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह है कि

अलका बाघमार “समान कानून” की मिसाल पेश करती हैं या ओम ज्वैलर्स का कब्जा यूं ही शहर की व्यवस्था पर सवाल बनकर खड़ा रहेगा।

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

यौन उत्पीड़न, पद के दुरुपयोग और सेवा नियम उल्लंघन के आरोपों पर कार्रवाई — विभागीय आदेश जारी, हाई-लेवल जांच तेज

रायपुर । शौर्यपथ । 

छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लेते हुए 2003 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी विभागीय आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि डांगी द्वारा पद की गरिमा के विपरीत आचरण, नैतिकता का उल्लंघन और पद के प्रभाव का दुरुपयोग किया गया, जिससे न केवल सेवा नियमों का हनन हुआ बल्कि पुलिस विभाग की छवि भी प्रभावित हुई।

? विभागीय आदेश में क्या कहा गया?

नवा रायपुर स्थित मंत्रालय, महानदी भवन से जारी आदेश (दिनांक 26/03/2026) के अनुसार—

डांगी पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत गंभीर उल्लंघन prima facie पाए गए हैं

विशेष रूप से नियम 3(1)(a), 3(1)(i), 7(2)(vii) और नियम 17 के उल्लंघन का उल्लेख

उनके कृत्य इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में प्रसारित होने से पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई

उन्हें व्यक्तिगत रूप से इन कृत्यों के लिए जिम्मेदार मानते हुए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित

⚖️ निलंबन की शर्तें

सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत कार्रवाई करते हुए:

डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय (PHQ), नवा रायपुर निर्धारित

बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध

केवल निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय

? आरोपों का पूरा परिप्रेक्ष्य

मामले में एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी ने आरोप लगाया है कि:

वर्ष 2017 में कोरबा में पहचान के बाद

पिछले 7 वर्षों से शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया

हालांकि, रतन लाल डांगी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का शिकार बताया है।

? हाई-लेवल जांच: हर एंगल पर नजर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों—

डॉ. आनंद छाबड़ा

मिलना कुर्रे

की एक विशेष जांच समिति गठित की गई है, जो निम्न बिंदुओं की जांच कर रही है:

क्या डांगी ने अपने प्रभाव से SI को बार-बार थाना प्रभारी (TI) पद दिलवाया?

वायरल फोटो और चैट की फॉरेंसिक जांच

डांगी के ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के दावों की सत्यता

सेवा आचरण नियमों का वास्तविक उल्लंघन

? आगे की कार्रवाई क्या होगी?

जांच समिति को जल्द प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके आधार पर संभावित कदम:

आपराधिक मामला (FIR) दर्ज होना

या सख्त विभागीय दंडात्मक कार्रवाई

?️ सुशासन का सख्त संकेत

इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि:

कानून और नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे

उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा

महिला सुरक्षा और संस्थागत गरिमा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं

✍️ निष्कर्ष

रतन लाल डांगी का निलंबन केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि शासन की उस नीति का प्रतिबिंब है जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता सर्वोपरि हैं।

अब पूरे प्रदेश की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा—विभागीय अनुशासन या आपराधिक न्याय।

रायपुर । शौर्यपथ । 

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 के उद्घाटन अवसर पर अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे सपने—एशियन गेम्स पदक—को लेकर खुलकर बात की। भारतीय वेटलिफ्टिंग की यह दिग्गज खिलाड़ी, जिसने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का परचम लहराया है, अब भी एशियाई खेलों में पदक जीतने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती हैं।

मीराबाई ने कहा, “एशियन गेम्स मेरे लिए बेहद खास हैं। वहां प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा होता है और यही इसे सबसे चुनौतीपूर्ण बनाता है। मेरा सपना है कि मैं वहां पदक जीतूं।”

उनका यह सपना अब तक कई बार चोटों के कारण अधूरा रह गया। 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में 19 वर्ष की उम्र में पदार्पण करते हुए वह नौवें स्थान पर रहीं। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में पीठ की चोट ने उन्हें बाहर कर दिया, जबकि 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में हिप इंजरी के कारण वह पदक की दौड़ में शामिल नहीं हो सकीं।

वजन वर्ग बदलना बना नई चुनौती

31 वर्षीय मीराबाई के सामने अब एक नई तकनीकी चुनौती भी है। बदलते नियमों के कारण उन्हें 48 किलोग्राम और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच संतुलन बनाना होगा।

वे 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी, जबकि 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

उन्होंने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स तक मैं 48 किलोग्राम में खेलूंगी, लेकिन एशियन गेम्स के लिए फिर से 49 किलोग्राम वर्ग में आना होगा, जो एक बड़ी चुनौती है।”

शानदार फॉर्म में मीराबाई

हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीराबाई ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाते हुए कुल 205 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया—जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

केआईटीजी को बताया ‘गेम-चेंजर’

मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 को देश के खेल परिदृश्य में एक “गेम-चेंजर” बताते हुए कहा कि यह आयोजन विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा मंच है।

उन्होंने कहा, “देश के उत्तर-पूर्व और जनजातीय क्षेत्रों में अपार प्रतिभा है, लेकिन उन्हें सही मंच नहीं मिल पाता। ऐसे आयोजन उन खिलाड़ियों को पहचान और अवसर देने में अहम भूमिका निभाते हैं।”

खेल संरचना की भी सराहना

इस दौरान उन्होंने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई (SAI) ट्रेनिंग सेंटर की भी सराहना की। उनके अनुसार, इन संस्थानों में खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, पोषण और आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं, जो भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।

*केआईटीजी 2: कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने जीता दूसरा पदक*

• ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

• असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट के बावजूद वेटलिफ्टिंग में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर । शौर्यपथ । कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं।

मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।

मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2:25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2:34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2:36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2:53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2:59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3:06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।

मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।”

मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

परिणाम

फुटबॉल पुरुष:

ग्रुप A: छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल 1-1 से ड्र

ग्रुप B: अरुणाचल प्रदेश ने गोवा को 2-0 से हराया

तैराकी

महिला:

200 मीटर इंडिविजुअल मेडले: स्वर्ण पदक – अंजलि मुंडा (ओडिशा) 2:53.82 सेकंड; रजत पदक – अनुष्का भगत (छत्तीसगढ़) 2:59.33 सेकंड; कांस्य पदक – अंजलि मलिक (ओडिशा) 3:06.13 सेकंड

पुरुष:

200 मीटर इंडिविजुअल मेडले: स्वर्ण पदक – मणिकांता एल (कर्नाटक) 2:25.93 सेकंड; रजत पदक – रियाज त्रिपुरा (त्रिपुरा) 2:34.04 सेकंड; कांस्य पदक – कान्हू सोरेन (ओडिशा) 2:36.21 सेकंड

वेटलिफ्टिंग

महिला:

48 किग्रा: स्वर्ण पदक – मोनिखा सोनोवाल (असम) 132 किग्रा; रजत पदक – दीपा रानी मलिक (ओडिशा) 120 किग्रा; कांस्य पदक – अलास्का अलीना (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) 115 किग्रा

53 किग्रा: स्वर्ण पदक – झिल्ली दलाबेहरा (ओडिशा) 160 किग्रा; रजत पदक – किउचांगलियू गांगमेई (मणिपुर) 160 किग्रा; कांस्य पदक – लारिटिंगकाई लॉरिनियांग (मेघालय) 132 किग्रा

पुरुष:

60 किग्रा: स्वर्ण पदक – इसाक मालसावम्तलुआंगा (मिजोरम) 235 किग्रा; रजत पदक – बाबूलाल हेम्ब्रम (झारखंड) 230 किग्रा; कांस्य पदक – सुब्रत नाइक (ओडिशा) 228 किग्रा

ट्राइबल गेम्स की सफलता के बाद बड़े लक्ष्य तय, 2027 में फिर मेजबानी की पुष्टि; खेलों से सामाजिक बदलाव की मजबूत तस्वीर

रायपुर । शौर्यपथ । 

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल आयोजन के बाद छत्तीसगढ़ अब खेलों के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने केंद्र से नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और स्पोर्ट्स साइंस सेंटर जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की मांग रखी है, जिससे प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय मंच मिल सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात कर प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में अपार खेल प्रतिभा मौजूद है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उद्घाटन समारोह के दौरान राज्य सरकार की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट नजर आई। मुख्यमंत्री साय ने 100 करोड़ रुपये के खेल उत्कर्ष मिशन का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार का आभार जताया और कहा कि राज्य में खेलों के विकास के लिए ठोस बजटीय प्रावधान किए जा रहे हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक का उदाहरण देते हुए बताया कि इन आयोजनों में लाखों लोगों की भागीदारी ने प्रदेश में खेल संस्कृति की मजबूती को साबित किया है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव रखते हुए रायपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, बिलासपुर में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, अंबिकापुर में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और दुर्ग व अंबिकापुर में एथलेटिक्स सुविधाओं के उन्नयन की मांग की।

इस बीच, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने 2027 में भी छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी दिए जाने की पुष्टि कर दी, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

राज्य के मुख्य सचिव विकास शील ने भी छत्तीसगढ़ को नेशनल गेम्स की मेजबानी देने का आग्रह किया। वहीं भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के माध्यम से प्रदेश के 33 जिलों में 33 खेलो इंडिया सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां लगभग 990 खिलाड़ी विभिन्न खेलों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। खेल विकास के लिए अब तक 20.17 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

फिट इंडिया अभियान और अस्मिता लीग जैसी योजनाओं ने भी प्रदेश में खेलों को जन-आंदोलन का रूप दिया है। अस्मिता लीग के तहत अब तक 124 प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें लगभग 14 हजार लड़कियों की भागीदारी रही है। वहीं फिट इंडिया ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के तहत 18,776 आयोजनों में 2 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

खास बात यह है कि बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खेलों के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ अब खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण और विकास का सशक्त माध्यम बना रहा है।

पुलिस एकेडमी में प्रशिक्षणरत जवानों में भरा जोश, जनता-पुलिस विश्वास को बताया सबसे बड़ी ताकत

रायपुर। शौर्यपथ ।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस एकेडमी, चंद्रखुरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे उप निरीक्षकों, प्लाटून कमांडर्स और अन्य जवानों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सेवा, अनुशासन और संवेदनशीलता का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के कल्याण और लोगों की भलाई के लिए समर्पित होना है।

अरुण साव ने अपने उद्बोधन में पुलिस और जनता के बीच विश्वास को व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि जनता का भरोसा ही पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। वर्दी के प्रति निष्ठा, कर्तव्य के प्रति ईमानदारी और देश के प्रति समर्पण ही एक पुलिसकर्मी को सम्मान दिलाता है।

उन्होंने जवानों को समझाया कि उनके पास आने वाला हर व्यक्ति केवल समस्या लेकर नहीं, बल्कि पुलिस की प्रतिष्ठा बढ़ाने का अवसर लेकर आता है। ऐसे में हर नागरिक के साथ संवेदनशीलता, सहानुभूति और विनम्रता से व्यवहार करना आवश्यक है।

उप मुख्यमंत्री ने जीवन मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि सफलता कभी अकेले नहीं मिलती, इसमें माता-पिता, गुरु और समाज का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए विनम्रता बनाए रखना और सादगीपूर्ण जीवन जीना ही वास्तविक संतोष का मार्ग है। उन्होंने नकारात्मकता और अनावश्यक आलोचना से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने की सलाह दी।

उन्होंने कार्य संस्कृति पर बल देते हुए कहा कि समयबद्धता और पूर्ण समर्पण के साथ किया गया कार्य ही सफलता की पहचान है। साथ ही यह भी कहा कि कार्यस्थल का तनाव परिवार तक नहीं ले जाना चाहिए और जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

इस अवसर पर डायरेक्टर आईजी अजय यादव, एसएसपी डॉ. अभिषेक पल्लव, एडिशनल एसपी पंकज शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

रायपुर/बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक रामावतार जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 22 साल पुराने इस बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड की फाइल सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दोबारा खुल गई है, जिससे प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब इस मामले में 1 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में अंतिम सुनवाई होनी है।

? क्या था पूरा मामला?

4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता और विद्याचरण शुक्ल के करीबी रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था।

हत्या के तुरंत बाद जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर साजिश के गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया।

? CBI जांच और निचली अदालत का फैसला

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई। लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन इस केस के सबसे चर्चित नाम अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

⚖️ हाईकोर्ट का रुख और 2024 का फैसला

इस फैसले के खिलाफ अपीलें दायर की गईं, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2024 में दोषियों की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद यह मामला लगभग बंद माना जा रहा था।

?‍⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल

हालांकि, CBI और सतीश जग्गी की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए मामले को फिर से हाईकोर्ट में पुनर्विचार (reopen) के लिए भेज दिया। शीर्ष अदालत के इस फैसले ने पूरे केस को नई दिशा दे दी है।

? अब क्या हो रहा है?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने:

अमित जोगी और सतीश जग्गी को नोटिस जारी किया है

रायपुर एसपी को नोटिस तामील कराने की जिम्मेदारी सौंपी है

नोटिस की तामिली के बाद शपथ पत्र के माध्यम से रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार अमित जोगी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया है।

⏳ 1 अप्रैल: क्यों है अहम?

1 अप्रैल की सुनवाई को इस मामले का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, क्योंकि:

यह सुनवाई तय करेगी कि क्या पहले के फैसलों में कोई चूक हुई

क्या साजिश के आरोपों की फिर से जांच की जरूरत है

और क्या इस बहुचर्चित केस में कोई नया मोड़ आएगा

? राजनीतिक और कानूनी मायने

यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति, सत्ता और न्यायिक प्रक्रिया के जटिल रिश्तों का प्रतीक बन चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसका फिर से खुलना यह संकेत देता है कि न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम सत्य तक पहुंचने की कोशिश अभी बाकी है।

शौर्यपथ सार:

रामावतार जग्गी हत्याकांड अब एक बार फिर न्याय की कसौटी पर है। 22 साल बाद खुली यह फाइल न केवल पुराने सवालों को फिर से जिंदा कर रही है, बल्कि यह भी तय करेगी कि क्या इस राजनीतिक हत्याकांड का सच अब सामने आएगा या रहस्य और गहरा जाएगा।

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