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बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आर्यन फि़ल्म टीम द्वारा बुके नहीं, बुक भेंट करें अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य औपचारिक बुके की जगह किताबें, कॉपी-पेन एवं अध्ययन सामग्री भेंट कर शिक्षा और ज्ञान को प्रोत्साहित करना है।
इसी क्रम में बिलासपुर ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के लिए उपहार स्वरूप कॉपी, पेन एवं अध्ययन सामग्री आर्यन फि़ल्म टीम को प्रदान की गई। यह सामग्री आर्यन फि़ल्म की टीम द्वारा स्कूलों में पहुंचकर बहनों के बीच वितरित की जाएगी। इस अवसर पर आर्यन फि़ल्म की ओर से डायरेक्टर रामा नन्द तिवारी, दिनेश चंदानी (होटल बंशीवाला), रूह्म्ह्य. क्कह्म्ड्डठ्ठह्लद्बद्मड्ड क्चद्धड्डह्म्स्र2ड्डद्भ (स्ढ्ढ), उमा शंकर पाण्डेय , सनी मनीष भटेजा, जीतेन्द्र सिदार एवं रवि सहित टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
फरार आरोपियों की सूचना देने पर मिलेगा ईनाम
बिलासपुर / शौर्यपथ / पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना तोरवा, जिला बिलासपुर में दर्ज अपराध के फरार आरोपियों की सूचना देने वालों के लिए 5 हजार रूपये के ईनाम की घोषणा की गई है। थाना तोरवा में दर्ज अपराध के आरोपी अर्जुन यादव, पिता बहोरिक यादव, उम्र 25 वर्ष, निवासी पंचायत भवन के पास महमंद, थाना तोरवा एवं आरोपी गोविंदा पासी, पिता जय सिंह पासी, उम्र 25 वर्ष, निवासी काली मंदिर के पास लालखदान तोरवा, थाना तोरवा जिला बिलासपुर (छ.ग.) के संबंध में सूचना देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रूपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा एवं पुरस्कार वितरण के संबंध में पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर का निर्णय अंतिम होगा।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर 07752-223330, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर 9479193002, पुलिस नियंत्रण कक्ष, बिलासपुर 07752-228504, मो.नं. 9479193099, थाना प्रभारी, तोरवा मो.नं. 9479193021 पर संपर्क किया जा सकता है।
रायपुर/ / शौर्यपथ /
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में अवैध रेत की काली कमाई पर्यावरण और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। सामान्य तौर पर 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत उत्खनन में पूर्ण प्रतिबंध रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में रेत माफिया मानसून (बारिश) के दौरान भी नदी से खनन कर रहे हैं, नदियों में पनडुब्बी मशीने लगाकर रेत निकाला जा रहा है, रोक लगने से पहले भी भारी मात्रा में अवैध रेत निकालकर खेतों, गांवों और नदी के कैचमेंट एरिया के पास, सड़कों के किनारे और गोठानों की सरकारी जमीनों में बड़े-बड़े पहाड़ जैसे अवैध भंडारण (स्टॉक) खड़े कर दिए गए हैं ताकि बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। हालिया मामले रायपुर जिले के समोदा, कुरुद और करमंदी इलाकों में महानदी को बुरी तरह काटकर रेत के ऊंचे पहाड़ बना दिए गए हैं। बिलासपुर में अरपा और शिवनाथ नदी के पास, जशपुर की शंख नदी और बलौदाबाजार में भी बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण पकड़ा गया है। दुर्ग में शिवनाथ, बिलासपुर में अरपा, मनियारी, गरियाबंद में पैरी और बस्तर में शबरी, शंखनी, डंकनी, नारंगी और इंद्रावती में भी यही हाल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत के अवैध करोबारियों को भाजपा सरकार का संरक्षण है, इन्हीं की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ से अवैध रेत सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर खपाएं जा रहे हैं। झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा, यूपी, उड़ीसा, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक रेत तस्कर सक्रिय हैं। ये तस्कर गिरोह संगठित रुप से नदी का सीना छलनी कर रेत का खनन कर रहे है। अवैध उत्खनन से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक को रोकने में यह सरकार नाकाम है। रेत माफियाओं का साम्राज्य फैलता जा रहा है, इनका खौफ इतना ज्यादा है कि इसके विरोध का साहस पंचायत प्रतिनिधित तक नहीं जुटा पा रहे हैं, राजनीतिक संरक्षण, मुनाफे में हिस्सेदारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ही रेत तस्कर बेलगाम हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत का अवैध कारोबार अब गैंगवार, चाकूबाजी, गोलीबारी के खूनी खेल तक पहुंच गया है। रेत की काली कमाई में एकाधिकार के लिए ही विगत दिनों कोरिया जिले के एक भाजपा नेता के दूसरे भाजपा नेता और उनके साथियों को फॉर्चूनर गाड़ी में बंद करके जिंदा जला दिया। उससे पहले जांजगीर चांपा के जैजेपुर में घर घर में घुसकर दो भाइयों को गोली मार दी गई। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि खनिज विभाग के अधिकारीयों, पुलिस और प्रशासन को भी खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं। बलरामपुर में रेत माफियाओं ने पुलिस कांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचल कर मार दिया। गरीयाबंद और बलौदाबाजार में खनिज इंस्पेक्टर और माइनिंग अधिकारियों को पीटा गया, बस्तर से हो रहे रेत के अंतर्राज्यीय तस्करी पर खबर चलाने वाले चार पत्रकारों के गाड़ी में गांजा रखवाकर झूठे केस में फंसा दिया गया। कहीं किसी की हत्या हो रही है तो कहीं इनके गुर्गे खुलेआम धमका रहे हैं, बिना सत्ता के प्रश्रय के यह संभव नहीं है।
भिलाई। कभी समाजसेवा, कभी कारोबारी गतिविधियां, कभी खेल और सामाजिक आयोजनों में सहभागिता—इंद्रजीत सिंह उर्फ ‘छोटू’ की सार्वजनिक पहचान लंबे समय से अलग-अलग रूपों में शहर के सामने आती रही है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से उन्हें समाजसेवी और कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। लेकिन अब इसी चमकदार सार्वजनिक छवि के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसे नजरअंदाज करना शायद आसान नहीं होगा—आखिर ‘समाजसेवी’ की पहचान के साथ ‘लोहा चोरी’ जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा क्यों जुड़ रही है?
सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है क्योंकि हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की सोशल मीडिया पोस्ट में इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ को लेकर बेहद गंभीर आरोपात्मक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उनके पोस्ट में “लोहा चोर ट्रांसपोर्ट कारोबारी” जैसे शब्द लिखे गए हैं और साथ ही GST कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। यह पोस्ट अब भिलाई में चर्चा का विषय बनी हुई है।
हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी पत्रकार की पोस्ट या मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं। अंतिम सत्य जांच एजेंसियों की जांच, आधिकारिक दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
GST की दस्तक ने बढ़ाई बेचैनी
24 अगस्त 2026 से इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ से जुड़े हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठिकानों पर स्टेट GST की टीम द्वारा जांच की खबर सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हथखोज स्थित कंपनी परिसर के साथ बलौदाबाजार स्थित यार्ड में भी कारोबारी दस्तावेजों, लेन-देन और GST से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। कंपनी के कारोबार में बड़ी संख्या में ट्रकों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि GST विभाग की ओर से जांच की अंतिम वजह, कथित अनियमितता और जांच का निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिर सवाल उठता है—जब तक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है, तब तक इतनी बड़ी चर्चा क्यों?
जवाब शायद उसी सार्वजनिक छवि में छिपा है, जिसे वर्षों से पोस्टर, बैनर, सामाजिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए मजबूत किया गया।
पोस्टर की चमक से आरोपों की धूल तक?
भिलाई में यह कोई छिपी बात नहीं कि बड़े कारोबारी और प्रभावशाली सामाजिक चेहरों के कार्यक्रमों की तस्वीरें और बधाई संदेश अक्सर शहर के पोस्टर-बैनरों में दिखाई देते हैं। सवाल यह नहीं कि किसी कारोबारी को सामाजिक कार्य करने का अधिकार है या नहीं—बिल्कुल है।
सवाल यह है कि क्या सामाजिक सेवा की चमक किसी व्यक्ति से जुड़े गंभीर आरोपों पर सवाल पूछने की पत्रकारिता को रोक सकती है?
यदि किसी व्यक्ति पर आरोप सामने आए हैं तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सम्मान करते हुए भी सवाल पूछे जाने चाहिए।
और अगर आरोप निराधार हैं तो जवाब भी उतनी ही मजबूती से सामने आना चाहिए।
क्योंकि पोस्टर से बनी छवि को पोस्टर ही बचा पाएगा, यह जरूरी नहीं; कई बार एक जांच की फाइल पूरी तस्वीर बदल देती है।
भिलाई में सवाल बहुत हैं, जवाब अभी बाकी
वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की पोस्ट ने जो सवाल उठाए हैं, वे अब स्थानीय चर्चाओं का हिस्सा बन चुके हैं। दूसरी ओर इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ की सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़ाव की चर्चा भी होती रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्हें ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के साथ सामाजिक और खेल संगठनों से जुड़ा बताया गया है।
यानी तस्वीर के दोनों पहलू मौजूद हैं।
एक तरफ समाजसेवा और कारोबारी पहचान, दूसरी तरफ लोहा चोरी जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा और GST जांच।
अब असली परीक्षा पोस्टर-बैनर की नहीं, दस्तावेजों की है।
‘10 हजार करोड़’ की चर्चा भी जांच के दायरे में क्यों नहीं?
भिलाई स्टील प्लांट से कथित बड़े पैमाने पर लोहा चोरी को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हजारों करोड़ रुपये के आंकड़े और दावे सामने आते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी का दावा भी किया गया है। लेकिन ऐसे आंकड़ों को आधिकारिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष के बिना स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसलिए सवाल होना चाहिए—दावा कितना बड़ा है और उसके पीछे दस्तावेज कितने मजबूत हैं?
अब भिलाई को ‘चर्चा’ नहीं, खुलासा चाहिए
इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ वास्तव में केवल एक समाजसेवी और कारोबारी हैं या उनके कारोबार से जुड़े आरोपों में भी कोई सच्चाई है—इसका फैसला सोशल मीडिया, चौक-चौराहे या पोस्टर-बैनर नहीं करेंगे।
फैसला जांच की रिपोर्ट करेगी।
यदि आरोप गलत हैं तो उन्हें सामने आकर तथ्य और दस्तावेजों के साथ खारिज करने का पूरा अधिकार है।
और यदि जांच में कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो फिर समाजसेवा की चमकदार तस्वीर के पीछे छिपे सवालों का जवाब भी देना होगा।
फिलहाल भिलाई की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—
“नाम समाजसेवी का, पहचान कारोबारी की और अब ‘लोहा चोर’ जैसे आरोपों की सुर्खियां... आखिर असली चेहरा कौन सा है?”
इस सवाल का जवाब पोस्टर नहीं देगा।
जवाब जांच देगी, दस्तावेज देंगे और अंततः कानून देगा।
तब तक सवाल पूछना भी पत्रकारिता का अधिकार है और आरोपों का जवाब देना संबंधित व्यक्ति का अधिकार।
क्योंकि समाजसेवा की असली कसौटी पोस्टर पर छपी तस्वीर नहीं, बल्कि जांच की कसौटी पर खरे उतरने वाले दस्तावेज होते हैं।
आस्था अपनी जगह, शिक्षा अपनी जगह... लेकिन जब आस्था के नाम पर मेहनत, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को गौण बताया जाने लगे, तब सवाल उठना लाजिमी है।
शौर्यपथ लेख।
देश में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे दौर में विद्यार्थियों को हौसला देने, मेहनत करने और शिक्षा के महत्व को समझाने की जरूरत है। लेकिन यदि किसी लोकप्रिय कथावाचक के मंच से यह संदेश जाए कि परीक्षा में सफलता के लिए पढ़ाई से ज्यादा कोई धार्मिक विधि कारगर हो सकती है, तो यह केवल आस्था का विषय नहीं रह जाता—यह सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल बन जाता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा के एक कथित वक्तव्य में परीक्षा में सफलता के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की विधि बताए जाने और इसे करने से पढ़ाई की जरूरत न होने जैसी बात कही गई। यदि वक्तव्य का आशय वास्तव में यही है, तो सवाल बेहद सीधा है—क्या वर्षों तक किताबों के बीच मेहनत करने वाले विद्यार्थियों की जगह अब परीक्षा की तैयारी के लिए पूजा-पाठ को पर्याप्त मान लिया जाए?
अगर बेलपत्र चढ़ाने से बिना पढ़े परीक्षा पास होना संभव है, तो फिर स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान, शिक्षक, किताबें और शिक्षा पर सरकार द्वारा खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये किस काम के?
क्यों न परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को किताबों की जगह बेलपत्र थमा दिया जाए?
क्यों न मेहनत, अनुशासन और अध्ययन की जगह धार्मिक विधि को परीक्षा की तैयारी का ‘शॉर्टकट’ घोषित कर दिया जाए?
लेकिन हकीकत यह है कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिका में विद्यार्थी की आस्था नहीं, उसका ज्ञान और उसकी तैयारी उसके उत्तर लिखती है।
आस्था व्यक्ति को मानसिक शक्ति दे सकती है, विश्वास दे सकती है, सकारात्मक सोच दे सकती है—इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन आस्था को शिक्षा का विकल्प बनाकर प्रस्तुत करना एक अलग बात है। यही वह सीमा है, जिस पर जिम्मेदार सार्वजनिक व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
पंडित प्रदीप मिश्रा कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। उनके प्रवचन सुनने वाले लाखों अनुयायी हैं। ऐसे में मंच से निकला प्रत्येक शब्द केवल व्यक्तिगत विचार नहीं रह जाता, उसका प्रभाव समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचता है। खासकर विद्यार्थी यदि यह संदेश ग्रहण कर लें कि पढ़ाई किए बिना भी किसी धार्मिक उपाय से परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है, तो इसका नुकसान सीधे उनके भविष्य को हो सकता है।
आज का छात्र पहले ही परीक्षा प्रणाली, प्रतियोगिता, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में उसे यह बताने की जरूरत है कि “मेहनत करो, ज्ञान हासिल करो, असफलता से मत डरो और दोबारा प्रयास करो।”
न कि यह कि “पढ़ाई छोड़ो और किसी विधि के भरोसे परीक्षा देने चले जाओ।”
कटाक्ष यह भी है कि यदि वास्तव में कोई ऐसी धार्मिक विधि है जो बिना अध्ययन के परीक्षा में सफलता दिला सकती है, तो फिर शिक्षा मंत्रालय को पाठ्यक्रम बदल देना चाहिए। किताबों की जगह बेलपत्र, नोट्स की जगह पूजा की विधि और परीक्षा की तैयारी की जगह कथा का आयोजन कर देना चाहिए!
लेकिन क्या ऐसा संभव है?
नहीं।
क्योंकि वास्तविक जीवन में सफलता के पीछे मेहनत, ज्ञान, अभ्यास, अनुशासन और निरंतर प्रयास होता है।
धार्मिक आस्था किसी व्यक्ति की निजी शक्ति हो सकती है, लेकिन उसे विद्यार्थियों के भविष्य का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे लोकप्रिय कथावाचक से अपेक्षा इसलिए अधिक है क्योंकि उनके शब्दों का प्रभाव सामान्य व्यक्ति से कहीं अधिक है। लाखों लोग उन्हें सुनते हैं, उनकी बातों को महत्व देते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करते हैं। इसलिए सार्वजनिक मंच से विद्यार्थियों और परीक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर कही गई बातों में जिम्मेदारी और सावधानी अपेक्षित है।
क्योंकि किसी विद्यार्थी की एक गलत धारणा उसके वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
और यदि कोई छात्र पढ़ाई छोड़कर केवल किसी धार्मिक उपाय के भरोसे परीक्षा देने बैठ जाए और असफल हो जाए, तो उस असफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या तब उसके हाथ में किताब होगी या केवल बेलपत्र?
यही असली सवाल है।
आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन शिक्षा का स्थान शिक्षा ही ले सकती है। परीक्षा में सफलता का सबसे विश्वसनीय मंत्र आज भी वही है—पढ़ो, समझो, अभ्यास करो और मेहनत करो।
कथावाचक का काम समाज में विश्वास जगाना है; लेकिन ऐसा विश्वास नहीं, जो विद्यार्थी को मेहनत से दूर कर दे।
क्योंकि भगवान पर भरोसा रखने में कोई बुराई नहीं, मगर परीक्षा की कॉपी में उत्तर लिखने के लिए कलम भी चलानी पड़ती है और उसके पीछे पढ़ाई भी करनी पड़ती है।
रायपुर/शौर्यपथ। रक्षाबंधन के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।
विद्यालय की छात्राओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर सैनिकों के नाम भावपूर्ण संदेश लिखकर उनके साहस, त्याग और देशसेवा को नमन किया।
इस दौरान सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद कर सेना के जीवन, अनुशासन और देशसेवा के अनुभव साझा किए तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल, कर्नल अरिंदम मजूमदार, सूबेदार राज किशोर, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
राखी के इस आयोजन ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का भाव और मजबूत किया।
रायपुर / शौर्यपथ / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV)) की बी.एस.सी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (एजीसीएच 221) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सुई और नुकीले औजार से छेदा लिफाफा, वीडियो बनाकर 11 हजार में बेचा
पुलिस खुलासे के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38 वर्ष) है। आरोपी प्रोफेसर पिछले एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र ले जाने का काम कर रहा था। 17 अगस्त को आरोपी ने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए। इसके बाद वह 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र का लिफाफा चुपके से अपने घर ले गया। वहां उसने सुई और नुकीले औजार से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरे से प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आरोपी ने यह लीक कंटेंट अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेचा, जिसके बाद यह प्रश्न पत्र अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।
100 से अधिक पुलिस टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य
20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) श्री तारकेश्वर पटेल की सतत मॉनिटरिंग में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के लिए 100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
जब्त सामग्री एवं कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी - प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.), हाल पता - चंदखुरी, दुर्ग, अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद, हाल पता - आनंद विहार, दुर्ग, नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर, हाल पता - पोटिया चौक, दुर्ग और आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग शामिल हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। उन्होंने प्रकाशन को जशपुर की विशिष्ट पहचान, प्रशासनिक अनुभवों और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
पुस्तक में आजादी के बाद जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव, सुशासन, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और भविष्य की विकास संभावनाओं का समग्र अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की पहाड़ियां, वन, नदियां, जलप्रपात और समृद्ध जनजातीय परंपराएं इसे छत्तीसगढ़ के विशिष्ट अंचलों में स्थान देती हैं। स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों तथा महिला और युवा उद्यमिता के माध्यम से जशपुर की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। यह अध्ययन प्रशासन को जिले की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और भविष्य की विकास प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के तहत प्रत्येक क्षेत्रीय शाखा को संबंधित राज्य के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का दायित्व दिया गया है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया गया। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर रायगढ़ जिले की तहसील था। अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर, जनगणना 2011, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रकाशनों, विभागीय रिपोर्टों और जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया है।
यह पुस्तक पारंपरिक जिला गजेटियर के बजाय जशपुर के प्रशासन, समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विकास यात्रा का संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पुस्तक प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बनेगी तथा भविष्य में जशपुर पर होने वाले विस्तृत शोध और विकासपरक अध्ययनों का आधार तैयार करेगी।
विमोचन अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन एवं पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन, पूर्व मुख्य सचिव एवं वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित रहे।
पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट में प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और जनसरोकार के विविध रंगों ने खींचा ध्यान
रायपुर / तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।
प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री श्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।
प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
तस्वीरों में दिखे प्रकृति, संस्कृति और जनसरोकार के विविध रंग
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, महासचिव श्री गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष श्री दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष श्री दिनेश यदु, संयुक्त सचिव सुश्री निवेदिता साहू एवं श्री भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक श्री दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट श्री गोकुल सोनी, श्री प्रदीप डडसेना, श्री राजकुमार चतुर्वेदी, श्री रुपेश यादव, श्री नरेंद्र बंगाले, श्री सुधीर सागर, श्री रमन हलवाई, श्री किशन लोखंडे, श्री मनोज देवांगन, श्री विजय देवांगन, श्री विनय घाड़गे, श्री पंकज चौहान, श्री हीरा मानिकपुरी, श्री त्रिलोचन मानिकपुरी, श्री हेमंत गोस्वामी, श्री जय गोस्वामी, श्री पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।
30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली, नियमित आर्थिक सहायता से परिवार को मिला संबल
रायपुर / महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी दैनिक जरूरतों में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के साथ परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सकलो की निवासी श्रीमती सालू सिंह भी महतारी वंदन योजना की लाभार्थी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना के तहत हर माह 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होती है। रक्षाबंधन से पहले योजना की 30वीं किस्त उनके खाते में पहुंची है, जिससे इस बार त्योहार की तैयारियों के लिए उन्हें विशेष आर्थिक सहारा मिला है।
महतारी वंदन की राशि से भाई के लिए खरीदेंगी राखी और मिठाई
सालू सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर वे महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने में करेंगी। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने भाई के साथ प्रेम और स्नेह का पर्व पूरे उत्साह से मनाने का माध्यम भी बनी है।
उन्होंने कहा कि समय पर राशि मिलने से त्योहार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है। अपने खाते में राशि आने से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मविश्वास मिलता है और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च का निर्णय स्वयं ले पाती हैं।
सीधे खाते में राशि मिलने से बढ़ा आर्थिक आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना के तहत सहायता राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों के अनुसार राशि का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिल रही है। घरेलू आवश्यकताओं से लेकर बच्चों, परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों तक, महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर रही हैं।
सालू सिंह बताती हैं कि हर माह मिलने वाली सहायता परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा है। इससे उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ विशेष अवसरों और त्योहारों की तैयारियां करने में भी सुविधा मिलती है।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार, भाई के साथ विष्णु भैया को भी राखी भेजने की इच्छा
महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ के लिए सालू सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी धन्यवाद दिया।
रक्षाबंधन से पहले 30वीं किस्त मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने भाई को राखी बांधकर यह पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाएंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भी राखी भेजने की भावना जाहिर की।
आर्थिक संबल से त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनी
सालू सिंह की कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। महतारी वंदन योजना से मिली राशि ने उनके लिए रक्षाबंधन की तैयारियों को आसान बनाया है और त्योहार को लेकर उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह बढ़ाया है।
महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें अपनी जरूरतों और खुशियों के लिए निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दे रही है। रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की सालू सिंह की खुशी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की इसी बदलती तस्वीर को सामने लाती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
