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रायपुर । शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक के संयुक्त तत्वावधान में 3 एवं 4 जुलाई को रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन तथा सहकार संकल्प दौड़ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे, जबकि अध्यक्षता सहकारिता मंत्री केदार कश्यप करेंगे।
3 जुलाई को सुबह 6 बजे मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) में सहकार संकल्प दौड़ आयोजित होगी। वहीं 3 और 4 जुलाई को सुबह 11 बजे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम ऑडिटोरियम में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन में सहकारी नीतियों, कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों के सशक्तिकरण पर चर्चा होगी। इसमें प्रदेशभर से सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान, अपेक्स बैंक, मार्कफेड, राज्य सहकारी संघ, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
आयोजकों ने किसानों, युवाओं और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर "सहकार से समृद्धि" के संकल्प को मजबूत बनाने की अपील की है।
रायपुर/बस्तर ।
बस्तर जिले के भानपुरी में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को स्कूल बैग एवं शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित समाज की आधारशिला है और राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शिक्षा एवं सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं सांसद महेश कश्यप ने विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और तकनीक का लाभ उठाकर अपने भविष्य को संवारने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम बनियागांव में ₹1 करोड़ 12 लाख 80 हजार की लागत से निर्मित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नए भवन का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही विद्यालयों को डिजिटल शिक्षा के लिए स्मार्ट टीवी प्रदान किए गए तथा मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में दोनों जनप्रतिनिधियों ने बच्चों के साथ सहभोज कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एआई मिशन, भारतनेट फेज-3, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और डिजिटल सुशासन की परियोजनाओं की समीक्षा; शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग पर जोर
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्ष प्रशासन और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एआई मिशन, मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स और विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
एआई मिशन से युवाओं को मिलेगा नया अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि युवाओं को एआई आधारित कौशल, रोजगार और नवाचार के लिए तैयार करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और प्रशासन में एआई के उपयोग से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में बताया गया कि राज्य का एआई मिशन पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा—
एआई कौशल विकास
नवाचार एवं स्टार्टअप
जागरूकता एवं आउटरीच
सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई
सुशासन में एआई का उपयोग
स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, रोबोटिक्स क्लब और हैकाथॉन, महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही एआई डेटा लैब्स, स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाओं और क्लाउड आधारित नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
डिजिटल सुशासन और डेटा सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को प्राथमिकता देते हुए राज्य की एआई नीति तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता, तकनीकी ऑडिट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक विभाग में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली और एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।
मोबाइल नेटवर्क और भारतनेट का विस्तार
बैठक में बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में लगभग 1,000 नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जबकि 577 अतिरिक्त टावरों को स्वीकृति मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट सुविधा समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
भारतनेट फेज-3 के तहत राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को आधुनिक रिंग टोपोलॉजी आधारित नेटवर्क से जोड़ा जाएगा तथा गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
सेवा सेतु से 94.3 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण
समीक्षा में बताया गया कि सेवा सेतु पोर्टल पर वर्तमान में 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश के 16,726 सेवा केंद्रों के माध्यम से 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण कर 94.3 प्रतिशत सफलता दर हासिल की गई है। पोर्टल पर क्यूआर आधारित सत्यापन, डिजिलॉकर, आधार प्रमाणीकरण, ई-चालान और डीबीटी जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
आईटी निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति
बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र और जीआईएस आधारित डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मयंक अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय अभियान में 90% लक्ष्य पूरा, दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचकर 7,931 बालिकाओं का हुआ टीकाकरण; अब शत-प्रतिशत कवरेज पर फोकस
रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 से प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बालिकाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी दिशा में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
जिले में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले ने समन्वित रूप से अभियान संचालित किया। विशेष रणनीति के तहत दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को व्यापक जनसहभागिता भी प्राप्त हुई।
इस उपलब्धि पर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए निर्देश दिए कि अभियान से छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाकर शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण का लक्ष्य शीघ्र पूरा किया जाए।
दूरस्थ भौगोलिक परिस्थितियों वाले बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता के माध्यम से जिले ने यह सिद्ध किया है कि मजबूत योजना और सतत प्रयासों से कठिन क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी विस्तार संभव है।
रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन, ₹1 करोड़ की विकास राशि और नई नगर पंचायत की घोषणा; पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश
रायपुर। सरगुजा जिले के ऐतिहासिक रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का संकल्प दोहराते हुए क्षेत्र के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नई नगर पंचायत बनाने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा और हाथीपोल जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा को भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में माना जाता है, जबकि जोगीमारा गुफा अपने प्राचीन भित्तिचित्रों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इस क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व भी और बढ़ जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़ क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि रामगढ़ महोत्सव का आयोजन भविष्य में भी इसी भव्यता के साथ प्रतिवर्ष किया जाएगा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरगुजा जिले में पिछले ढाई वर्षों में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं और प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने किसानों के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल धान खरीदी, 13 लाख किसानों को बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना, तीर्थयात्रा दर्शन योजना, युवाओं के लिए रोजगार तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
समारोह का भावनात्मक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का मंच से शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल और अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को भी प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, क्षेत्रीय विधायकगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ ने बजट में किए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान, 318 प्रकार के विकास कार्यों से गांवों को मिलेगा नया स्वरूप
रायपुर । ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' का शुभारंभ 1 जुलाई 2026 से देशभर में किया जाएगा। रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना को नई गति देने वाली इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी।
योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को साकार करते हुए गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना है। इसके अंतर्गत रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और टिकाऊ परिसंपत्तियों के विकास जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के विकास कार्यों को शामिल किया गया है, जिससे गांवों की आधारभूत संरचना मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
योजना का औपचारिक शुभारंभ 2 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इस अवसर पर वे देशभर के राज्यों से वर्चुअल संवाद करेंगे। छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित होगा, जहां उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीणों से जुड़ेंगे।
योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता, डिजिटल जॉब कार्ड, तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली तथा पारदर्शी भुगतान व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
नई व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार होगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा। साथ ही सामाजिक अंकेक्षण और डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही को भी मजबूत किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और गांवों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना विकसित भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक व्यापक पहल मानी जा रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी की प्रशासकीय स्वीकृति, सभी जिलों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश
रायपुर,। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक संवर्ग को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस निर्णय से प्रदेशभर के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर शासन ने सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य स्तर तक पात्र शिक्षक संवर्ग को पुनर्नियुक्ति देने का अनुमोदन प्रदान किया है।
शासन ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देशित किया है कि जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाए। साथ ही सभी जिलों में इस संबंध में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शासन के इस फैसले से शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बनी रहेगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के संचालित हो सकेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस निर्णय से शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षण कार्य की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी तथा विद्यालयों के संचालन में स्थिरता आएगी।
जनशिकायतों का बढ़ता अंबार, आयुक्त से मुलाकात की स्पष्ट व्यवस्था नहीं, लंबित मामलों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा; प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल।
दुर्ग/ शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग नगर पालिक निगम के आयुक्त सुमित अग्रवाल को कुछ माह पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति (Award of IAS) प्राप्त होना न केवल उनके व्यक्तिगत प्रशासनिक जीवन की उपलब्धि है, बल्कि दुर्ग नगर निगम के लिए भी गौरव का विषय माना गया। पूर्व आयुक्त लोकेश चंद्राकर और प्रकाश सर्वे के बाद वे ऐसे तीसरे आयुक्त हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ है।
हालांकि, इस उपलब्धि के साथ ही नगर निगम की वर्तमान कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़े प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। शासन की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार आईएएस अवार्ड प्राप्त अधिकारियों को प्रशिक्षण सहित अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होता है, लेकिन फिलहाल श्री अग्रवाल दुर्ग नगर निगम आयुक्त का दायित्व संभाल रहे हैं। ऐसे में शहर में यह चर्चा भी है कि क्या वे अपने संभावित स्थानांतरण अथवा आगामी प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं, अथवा नगर निगम के कार्यों को पहले की तरह गति देने की दिशा में कोई ठोस पहल करेंगे।
शहर के नागरिकों और शिकायतकर्ताओं की प्रमुख शिकायत यह है कि आयुक्त से मुलाकात की कोई स्पष्ट एवं व्यवस्थित व्यवस्था दिखाई नहीं देती। पिछले दिनों आयुक्त के निजी सहायक (पीए) से जुड़े विवाद के बाद उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया। इसके बाद से अब तक उस पद पर नियमित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम नागरिकों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि आयुक्त किस समय कार्यालय में उपलब्ध रहेंगे अथवा जनसुनवाई कब होगी। परिणामस्वरूप प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग निगम कार्यालय पहुंचकर भी बिना मुलाकात लौटने को विवश हो रहे हैं।
नगर निगम से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मामलों की जांच और निर्णय भी लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं। शहर में अवैध अतिक्रमण, बाजार व्यवस्था, स्वच्छता, बदबू, विभिन्न निर्माण कार्यों तथा कथित अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें लगातार उठ रही हैं, लेकिन इन पर अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। इससे प्रशासनिक सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
इसी क्रम में शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र द्वारा भी पूर्व में कथित गुमटी आवंटन, आश्रय स्थल संचालन तथा बकरी पालन परियोजना से जुड़े मामलों में नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। समाचार पत्र ने आश्रय स्थल के आवंटन में पारदर्शिता तथा संबंधित समूह के पूर्व कार्यों की जांच की भी मांग उठाई थी। समाचार पत्र के अनुसार इन शिकायतों की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा उक्त मामलों को उठाने के बाद संबंधित पक्ष के एक व्यक्ति द्वारा संपादक को कथित रूप से धमकी दी गई, जिसकी शिकायत पुलिस में की गई है। यह मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्थापित होगा।
वहीं यह भी चर्चा का विषय है कि आश्रय स्थल के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया प्रारंभ होने के काफी समय बाद भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। यदि ऐसा है तो संबंधित विभाग द्वारा प्रक्रिया में हो रही देरी के कारणों को सार्वजनिक किया जाना पारदर्शिता की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में लगातार लंबित शिकायतों, प्रशासनिक निर्णयों में विलंब तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के बीच जनप्रतिनिधियों के स्तर पर भी अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाने की स्थिति में नागरिकों की निगाहें स्वाभाविक रूप से निगम आयुक्त पर टिकती हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि नगर निगम प्रशासन शिकायतों के निराकरण, जनसुनवाई की नियमित व्यवस्था, लंबित जांचों की स्थिति तथा विकास कार्यों की प्रगति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या आईएएस अधिकारी बनने के बाद आयुक्त सुमित अग्रवाल अपने संभावित प्रशासनिक बदलाव तक वर्तमान व्यवस्था को इसी प्रकार संचालित होने देंगे, या फिर वे नगर निगम प्रशासन को नई गति देते हुए जनशिकायतों के त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएंगे। इसका उत्तर आने वाले दिनों में निगम प्रशासन की कार्यशैली से स्पष्ट होगा।
कोंडागांव। जिला मुख्यालय स्थित डाकघर में पदस्थ कर्मचारी शेख रूहुल ताज पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक विभागीय कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार शेख रूहुल ताज के खिलाफ अब तक तीन अलग-अलग शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पहला मामला एक डॉक्टर से दुर्व्यवहार का है, जिसमें डॉक्टर ने संभागीय अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। हालांकि, आरोप है कि इस मामले को झूठी रिपोर्ट बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दूसरा मामला कोपाबेड़ा निवासी सुमित्रा नेताम से जुड़ा है। आरोप है कि उनसे खाते में जमा करने के नाम पर 20 हजार रुपये लिए गए, लेकिन एक साल तक राशि खाते में जमा नहीं की गई। बाद में रकम लौटा दी गई, पर खाते में जमा नहीं की गई, जिसे ठगी की श्रेणी में माना जा रहा है।
तीसरा मामला कोंडागांव के 20 से अधिक व्यापारियों से जुड़ा है। व्यापारियों को पोस्टर लगाने के नाम पर 6 महीने से 1 साल तक विज्ञापन का आश्वासन दिया गया, लेकिन पोस्टर एक महीने के भीतर ही हटा दिए गए। जब इस संबंध में डाकघर में जानकारी ली गई, तो पता चला कि ऐसी कोई योजना विभाग में थी ही नहीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि व्यापारियों को गुमराह कर ठगी की गई।
इन तीनों मामलों की जांच के बाद यह बात सामने आ रही है कि संबंधित कर्मचारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। मामले को लेकर जब जगदलपुर के संभागीय अधीक्षक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस देरी से लोगों में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डाकघर जैसे भरोसेमंद संस्थान में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
वहीं, कोंडागांव डाकघर के मुख्य अधिकारी श्री मिश्रा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए बताया कि उनका स्थानांतरण हो चुका है और इस विषय में उनके वरिष्ठ अधिकारी ही जवाब देंगे।
रायपुर स्थित उच्च अधिकारी अजय सिंह चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
अब सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इस मामले में शामिल है, या फिर इसे जानबूझकर दबाया जा रहा है? आम जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
आम जनता उठा रही दोहरे मानदंड का मुद्दा; स्थानीय सरकारी बंगलों के आवंटन और उपयोग पर नियम स्पष्ट करने की मांग
शौर्यपथ लेख । नकटी गांव में विधायक निवास के लिए भूमि खाली कराए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच अब एक नया सवाल राजनीतिक और जनचर्चा का विषय बन गया है। आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि यदि गांव की जमीन पर सरकारी आवास निर्माण के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो ऐसे विधायक और मंत्री जो पहले से राजधानी रायपुर में शासन द्वारा आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे हैं, वे अपने स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में सरकारी आवास या बंगलों का उपयोग किस नियम के तहत कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में स्थानीय विधायक अनुज शर्मा का कहना है कि प्रभावित 75 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास आवंटित कर दिए गए हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, इस बयान के बावजूद स्थानीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि जनप्रतिनिधियों के लिए सरकारी आवासों के आवंटन संबंधी नियमों का पालन समान रूप से हो रहा है या नहीं।
चर्चा का केंद्र यह है कि यदि छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार विधायक एवं मंत्रियों को राजधानी में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है, तो क्या उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र में भी सरकारी बंगले के उपयोग की अनुमति है? यदि है, तो उसका कानूनी आधार क्या है, और यदि नहीं, तो ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
जनता का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि आम नागरिकों के अतिक्रमण या शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में बुलडोजर और सख्त कार्रवाई की जाती है, तो जनप्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय स्तर पर सरकारी बंगलों के उपयोग की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विषय पर सरकार को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। यदि स्थानीय सरकारी आवासों का आवंटन किसी विशेष नियम, प्रशासनिक आदेश या सुरक्षा कारणों से किया गया है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
अब सबकी नजर राज्य सरकार पर है। देखना होगा कि सरकार स्थानीय विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे सरकारी आवासों की स्थिति स्पष्ट करती है या नहीं। यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो क्या समान मानदंड अपनाते हुए कार्रवाई होगी, या फिर यह विवाद केवल राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएगा।
नोट: इस समाचार में व्यक्त प्रश्न और दावे सार्वजनिक चर्चा एवं जनभावनाओं पर आधारित हैं। यह आवश्यक है कि संबंधित नियमों, आवंटन आदेशों और शासन के आधिकारिक अभिलेखों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
