August 04, 2026
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    क्या रिसाली निगम के कांग्रेसी महापौर के दावेदार के रूप में जितेन्द्र साहू को स्वीकार करेंगे ? Featured

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    रिसाली / शौर्यपथ राजनीती / चुनाव और नेता एक सिक्के के दो पहलु है किसी भी दल के नेता हो उनका लक्ष्य रहता है चुनाव में टिकिट मिले और विजयी होकर जनप्रतिनिधि के रूप में एक अलग पहचान हो इसके लिए नेता सालो से मेहनत करते है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करते है . अभी तक दुर्ग में कांग्रेसी सिर्फ महापौर या पार्षद तक के सपने देखते थे क्योकि इसके आगे का रास्ता दुर्ग कांग्रेसी के लिए बंद रहता था . दुर्ग कांग्रेस में कांग्रेस के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा ने जब से राजनीती कदम रखा है दुर्ग विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे है जीत हो या हार ये कोई मायने नहीं रहा टिकिट मिलने के लिए क्योकि पार्टी में जो स्थान मोतीलाल वोरा का है उस स्थान का ये लाभ मिलना लाजिमी भी रहा है . वैसे भी कांग्रेस में परिवारवाद हावी रहा . दुर्ग के कई कांग्रेसी पार्षद या महापौर से आगे उड़ान भरने के लिए दुर्ग विधान सभा सीट को छोड़ भिलाई , वैशाली नगर या ग्रामीण क्षेत्र पर दावेदारी करते नजर आ चुके है .
    १५ साल बाद कांग्रेस की सत्ता आयी और आते ही दुर्ग जिले में एक और नगर निगम का एलान हुआ रिसाली नगर पालिक निगम . सारी कानूनी अड्चनो को पार करते हुए आखिरकार रिसाली निगम अस्तित्व में आ ही गया . निगम के अस्तित्व में आने के बाद दिसंबर में चुनाव होने थे किन्तु कोरोना आपदा के कारन चुनाव की तारीख टल गयी जो कि अब अप्रैल या मई माह में होने की सुगबुगाहट हो रही है . रिसाली निगम के निर्माण में प्रमुख भूमिका प्रदेश के गृहमंत्री और दुर्ग ग्रामीण विधान सभा के विधायक ताम्रध्वज साहू की अहम् भूमिका रही या कहा जाए तो जो वादा उनके द्वारा चुनाव के पहले किया गया था वो वादा पूरा हुआ . अब चूँकि चुनावी माहौल गर्म होते ही राजनीती हलको में ये चर्चा जोरो पर है कि रिसाली निगम क्षेत्र के कार्यो में जिस तरह सक्रीय गृहमंत्री के पुत्र जितेन्द्र साहू हुए है उससे यही चर्चा जोरो पर है कि रिसाली निगम के महापौर की दावेदारी जितेन्द्र साहू की बन रही है . इसमें कोई दो राय नहीं कि रिसाली निअगम के जन्मदाता के रूप में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को हमेशा याद किया जायेगा उसी तरह जो भी रिसाली निगम का महापौर बनेगा वो भी इतिहास के पन्नो में प्रथम महापौर के रूप में दर्ज हो जायेगा . ऐसे में सभी कोशिश कर रहे है कि इतिहास में अपना नाम दर्ज कराये किन्तु कांग्रेस पार्टी के कई नेता अपने सपनो को टूटते हुए देख रहे है कुछ का तो यह भी कहना है कि सालो से जमीनी रूप में कार्य करने के बाद अब जब एक सुनहरा मौका हाँथ आने की उम्मीद थी यो भी टूटती जा रही है और जैसा हाल दुर्ग निगम क्षेत्र का है वैसा ही हाल रिसाली निगम का भी हो सकता है .
    जैसा कि सभी को मालूम है कि दुर्ग निगम में एल्डरमैन हो या प्रभारी या महापौर सभी पद विधायक की अनुशंषा के बैगर संभव नहीं है अगर दुर्ग में राजनीती करनी है तो वोरा निवास के तले ही चल सकती है भले ही राजनीती का ये सफ़र ऊँची उड़ान तक न पहुंचे . ठीक वही हालत अब रिसाली निगम की भी देखने को मिल सकती है रिसाली निगम का एक बड़ा क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण में आता है ऐसे में दुर्ग ग्रामीण के विधायक के साथ साथ प्रदेश के गृह मंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू का एक अलग मुकाम है .अगर रिसाली निगम में महापौर के रूप में गृह मंत्री के पुत्र जितेन्द्र साहू दावेदारी करते है तो बगावत के स्वर तो उठेंगे ही किन्तु ये स्वर कितनी उंचाई तक पहुंचेंगे ये कहना मुश्किल है किन्तु ऐसे कांग्रेसी जो सालो से रिसाली क्षेत्र में जमीनी राजनीती कर रहे है वो निष्क्रिय हो जायेंगे जिसका फायदा भाजपा की मजबूत संगठन उठा लेगी . ऐसा नहीं है कि भाजपा संगठन में भीतरी घात नहीं है भाजपा में भी दो गुट आपस में परस्पर विरोधी है किन्तु रिसाली निगम और भिलाई निगम के चुनाव एक साथ होने से अगर दोनों गुट समझौता कर लेते है या प्रदेश संगठन से कोई कडा निर्देश मिल जाता है तो भाजपा रिसाली निगम में भारी पड़ सकती है .
    हालाँकि अभी किसी भी दल के कोई नेता ने अधिकारिक रूप से महापौर की दावेदारी पेश नहीं की किन्तु राजनीती सक्रियता की माने तो चर्चो में जितेन्द्र साहू की दावेदारी के आसार नजर आ रहे है किन्तु ये राजनीती है जो हर पल बदलती रहती है जैसा की विधान सभा चुनाव के समय तुलसी साहू की टिकिट आखिरी दिन कटी और बद्दृद्दीन कुरैशी को टिकिट मिला वही प्रतिमा चंद्राकर की टिकिट कटी तो सांसद ताम्रध्वज साहू को टिकिट मिला इस अदला बदली में साहू तो जीत गए किन्तु कुरैशी की हार हुई यानी कि कही ख़ुशी कही गम ...

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