August 07, 2026
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    क्या नारी को नहीं है आराम का हक .. Featured

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    शौर्य की बातें / सम्पादकीय / दुनिया की सबसे उत्तम रचना नारी को माना जाता है कभी बेटी , कभी बहन , कभी दोस्त , कभी अर्धांग्नी , कभी हमदर्द , कभी बहु , कभी माँ , कभी सहकर्मी ऐसे कई रूप है जो एक ही जीवन में नारी का जीवन यापन होता है . अपनी हर जिम्मेदारी प्रत्येक रूप में कुशलता से पूर्ण करने वाली आदि शक्ति की उत्तम रचना नारी ही है खुद की पीड़ा को भूलकर अपनी समस्त जिम्मेदारियों को निभाने की जो कला नारी में होती है वो किसी और में नहीं हो सकती . पुरानो में भी नारी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है . सभी की उम्मीद की किरण नारी के अलग अलग रूप है किन्तु इन सभी रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाली इस देवी को क्या कभी खुद के लिए दो पल निकालने का भी समय मिल पाया . नारी के जीवन की आज के युग में कुछ ऐसी व्यथा है जिसे जानते तो सब है किन्तु स्वीकार नहीं कर पाते क्या आज के इस युग में नारी को आराम करने का हक नहीं है क्या हम और आप इस व्यथा पर कोई पहल नहीं कर सकते . आइये देखे कि बालपन से वृद्धावस्था तक नारी की चाह को कैसे पूरी करे कैसे दो पल का सुकून दे सके ...

    "माँ मुझे थोडा आराम करना है.."
    स्कूल, क्लास, पढ़ाई से थक कर बेटी ने माँ से कहा।
    "अरी बिटिया अच्छी पढ़ाई कर, बाद मे आराम ही तो करना है .."
    बिटिया उठी , पढ़ने बैठी और फिर आराम करनातो रह ही गया। ..*
    "माँ मुझे थोडा समय दो.. दो घडी आराम कर लू" ऑफिस से थक कर आयी बिटिया ने कहा.." मैं थक गई हू"....
    अरी शादी कर ले और सेटल हो जा.. फिर आराम ही करना है ..
    बिटिया शादी के लिए तैयार हो गई और.. आराम करना तो रह हीगया.*
    "अरे इतनी क्या जल्दी है.. एकाध साल रुकते है ना.."
    "अरी समय के साथ बच्चे हो जाए तो टेंशन नहीं , फिर आराम ही आराम है ..."
    बिटिया माँ बन गई और आराम करना तो रह हीगया..*
    "तुम माँ हो.. तुम्हें ही बच्चे के साथ जागना पड़ेगा.. मुझे सुबह ऑफिस जाना है ..बस थोडे दिन.. बच्चे बड़े हो जाए फिर आराम ही आराम है.....
    वो बच्चों के लिए कई रातें जागी और आराम करनातो रह ही गया..*
    "सुनो जी.. बच्चे अब स्कूल जाने लगे है.. अब तो दो घडी बैठने दो आराम से..
    "बच्चों की तरफ ध्यान दो , उनको पढ़ा लो फिर आराम ही आराम है"।
    बच्चों का प्रोजेक्ट बनाने बैठी.. और आराम करनातो रह ही गया..*
    " बच्चे पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़े हो गए ,अब कुछ आराम कर लू ."
    "अब बच्चों की शादी करनी है.. ये जिम्मेवारी पार पडे के फिर आराम ही आराम है ."
    उसने हिम्मत जुटाई.. बच्चों की शादी का काम निपटाया.. और फिर आराम करना तो रह हीगया..* .
    "बच्चों का अपना संसार चलने लगा ,अब मैं ज़रा आराम कर लू .."
    "अरी अब अपनी बिटिया माँ बनने वाली है , पहला बच्चा मायके मे होगा ना.. चलो तैयारी करे ."
    हमारी बिटिया की डिलीवरी हो गई और आराम करना रह ही गया..
    "चलो, ये जिम्मेदारी भी पूरी हुई , अब आराम "
    "माँ जी, मुझे नोकरी पर वापस जाना होगा ..तो आप आरव को सम्भाल लेंगी ना ?"
    नाती के पीछे दौड़ते दौड़ते थक गई और आराम करना रह ही गया ..
    "चलो नाती भी बड़ा हो गया अब.. सारी जिम्मेदारियाँ खत्म... अब मैं आराम करूंगी.."
    "अरी सुनती हो , गुठने दुख रहे है मेरे , मुझसे उठा नही जा रहा ..Bp भी बढ़ गया है शायद , डायबिटीस है सो अलग ..डॉकटर ने परहेज़ करने को कहा है .."
    पति की सेवा मे बचा-खुचा जीवन गुज़र गया ..और.. आराम करना तो रह ही गया ..
    एक दिन भगवान खुद धरती पर आए और कहा.." आराम करना है ना तुझे ? उसने हाथ जोड़े और भगवान उसे ले गए ..आखिरकार उसे आराम मिल ही गया ,
    हमेशा के लिए ..!!!
    ( शरद पंसारी - सम्पादक शौर्यपथ दैनिक समाचार )

     

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