August 07, 2026
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    लॉकडाउन को लेकर आमजनता में शासन प्रशासन के खिलाफ आक्रोश Featured

    • doing of business

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में 6 अप्रेल से जारी लॉक डाउन के बीच अब आम जनता का सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है, छोटी छोटी चीजों के लिए लोगो को तरसते देखा जा रहा है ! रोज मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले परिवार अब सड़कों पर भीख मांग कर अपना काम चलाने को मजबूर हो गए है, तो वही मध्यम वर्गीय परिवार भी एक दुसरे की आगे क़र्ज़ के लिए हाथ फैलाते नजर आ रहे है ! पूर्व वर्ष में लगाए गए लॉकडाउन से सबसे ज्यादा निचले स्तर और मध्यम वर्गीय लोग प्रभावित हुए थे, और आज पहले से जयादा बद्तर स्थिति में जीवन यापन कर रहे है !
    गंभीर सवाल है विचार करे सरकार क्योकि सिर्फ किसान किसान करने से नहीं चलेगा शहर में भी लोग बसते है
    आज आम जनता का सवाल है शासन प्रशासन से अगर इस प्रकार से आपको लॉकडाउन करने का आदेश देता है, तो लॉकडाउन के दौरान घर का और दुकान बिजली का मीटर, टेलेफोन और मोबाइल का मीटर, दुकानों में काम करने वाले लोगो का सैलरी, बच्चों के स्कूल की फीस और घर में लगने वाला राशन ये सब शासन प्रशासन क्यों नहीं देता ! क्योकि हम तो शासन प्रशासन का सहयोग करने उनके आदेश का पालन करने घरों में बैठे है, कहा से आएगा ये पैसा !
    शासन प्रशासन के लिए पूरी गंभीरता से विचार करने योग्य विषय
    दुर्ग जिले की बात करे तो लगभग सभी ग्राम पंचायत में एक से दो मुक्तिधाम है इस हिसाब से दुर्ग जिले में लगभग 500 से अधिक मुक्तिधाम है जहा शवों का दाह संस्कार किया जाता है, लेकिन आज सभी के शवों का कुछ सिमित जगहों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है, तो स्वभाविक सी बात है कि वहा शवों की संख्या भी जयादा होगी और लोगो को आशंकित भी करेगी !
    इसी तरह दुर्ग जिले में बहुत से छोटे और बड़े क्लिनिक और अस्पताल संचालित है, अब क्योकि मरीज और अस्पताल के बीच अब कोरोना टेस्ट आ गया है, जिसको लेकर नार्मल इलाज प्रतिबंधित है, अब मजबूरन लोगो को इलाज के लिए सिमित और शासन द्वारा चिन्हित अस्पतालों में ही आना पड़ रहा है, और शासन प्रशासन ने मेडिकल स्टोर पर कुछ दवाइयों को प्रतिबंधित किया हुआ है, जो बिना किसी डॉ की पर्ची के आपको नहीं दी जायेगी, इसलिए भी थोड़ी थोड़ी तकलीफ के लिए लोगो सिमित अस्पताल तक आना पड़ रहा है, तो स्वभाविक सी बात है कि जब सिमित जगह पर लोग इलाज करायेंगे तो भीड़ भी होगी और इलाज में लापरवाही भी होगी, और स्वाभाविक रूप से होने वाली मौतों के साथ कुछ तो भीड़ की वजह से इलाज के आभाव में भी मौत हो रही ! ऐसे में जिले भर की अनेक जगहों पर होने वाले दाह संस्कार को सिमित जगह पर किया जाए तो देखकर दहशत का माहौल बनना भी लाजमी है !
    मै कोरोना के संक्रमण और उससे होने वाली मौतों पर सवाल खड़ा कर रहा हूँ जिसपर विचार तो जरुर किया जाना चाहिए, मै किसी भी प्रकार से ये नहीं कहता कि कोरोना है या नहीं है, लेकिन जिस तरह से अस्पतालों में बिना पीपीई किट और बिना दस्तानो के कोरोना मरीजों का इलाज जारी है, उसके मद्देनजर कोरोना मरीज को लेकर होने वाली गंभीरता, दहशतगर्दी और लॉकडाउन जैसी स्थिति से हमें बाहर जरुर आने का प्रयास करना चाहिए ! क्योकि गंभीरता और दहशतगर्दी के कारण जहा लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे है, तो वही लॉकडाउन के चलते आबादी का एक बड़ा हिस्सा भुखमरी के मुहाने पर पहुच गया है ! जिसमे से आने वाले समय में कई लोग के पास अपराध का रास्ता अपनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, क्योकि इंसान की तीन जरूरतें उनको अपराध की ओर खिचती है जहा वो अंजाम से बेपरवाह हो जाता है ! पहला अगर परिवार को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा हो तो, दूसरा अगर उसका कोई अस्पताल में भर्ती हो और इलाज के लिए उसके पास पैसे ना हो तब और अगर फीस के आभाव में उसके बच्चों का स्कूल निकालने की बात हो तब, ये तीन ऐसी जरूरतें है जिसको लेकर कोई भी किसी भी हद तक जा सकता है !

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