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पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, किसान को धमकी
पुलिस ने बताया राजस्व विवाद, पीडि़त को न्यायालय जाने की सलाह
दबंगों के आगे असहाय किसान? दुर्ग में फिर उठा जमीन सुरक्षा का सवाल
दुर्ग / शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
दुर्ग जिले में किसानों की जमीन से जुड़े विवाद लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। ताजा मामला खंडेलवाल कॉलोनी से सटे क्षेत्र का है, जहां एक किसान ने अपनी पुश्तैनी भूमि पर जबरन कब्जा करने और धमकी देने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद इसे राजस्व से जुड़ा भूमि विवाद बताते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।
पीडि़त किसान डुलेश्वर सिन्हा (48 वर्ष), निवासी दुर्ग, थाना पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके नाम दर्ज भूमि है, जो चार किसानों की संयुक्त पुश्तैनी जमीन से जुड़ी हुई है। इसी भूमि से लगी हुई जमीन रमेश कुमार ताराचंद जैन की बताई जा रही है।
पीडि़त के अनुसार, रमेश कुमार जैन द्वारा जिस भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन का हिस्सा है। जब किसान ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने कथित रूप से कहा—
"मैं अपना काम नहीं रोकूंगा, जो करना है कर लो,"
और उन्हें धमकी दी गई।
पुलिस ने माना राजस्व विवाद, दर्ज किया अपराध क्रमांक
मामले की प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने इसे भूमि विवाद एवं राजस्व से संबंधित प्रकरण बताया। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी प्रकार की मारपीट या संज्ञेय अपराध के स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं, ऐसे में पुलिस हस्तक्षेप की स्थिति नहीं बनती। पीडि़त किसान को न्यायालय की शरण लेकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है।
प्रकरण को अपराध क्रमांक 0037/2026 के अंतर्गत धारा 174(2) क्चहृस्स् में दर्ज किया गया है, जो जांच के आधार पर दर्ज किया जाने वाला प्रावधान है।
पीडि़त किसान की चाची भी आईं सामने
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीडि़त किसान की चाची और उनके परिजन भी सामने आए। उनका आरोप है कि उनकी जमीन को भी रमेश कुमार जैन द्वारा किसी अन्य राज्य के किसान को फसल उत्पादन के लिए दे दिया गया है। परिजनों का कहना है कि बिना सहमति और अधिकार के भूमि का उपयोग किया जा रहा है।
पूर्व विवादों से भी जुड़ा रहा नाम
क्षेत्र में चर्चा है कि ताराचंद रमेश कुमार जैन का नाम पूर्व में भी शासकीय नाले की जमीन के एक हिस्से पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल निर्माण से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है। हालांकि उस समय किसी ठोस कार्रवाई या जांच की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों का दावा है कि नाले की बड़ी भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई आज तक स्पष्ट नहीं है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
हाल के समय में जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रसूखदारों द्वारा किए गए कथित अवैधानिक कार्यों पर कार्रवाई किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है कि क्या जमीन से जुड़े मामलों में किसानों को त्वरित और प्रभावी सुरक्षा मिल पा रही है, या फिर दबंगों के सामने किसान खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
आरोपी पक्ष से संपर्क का प्रयास असफल
इस पूरे मामले में रमेश कुमार जैन से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फिलहाल विवादित भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य रुका हुआ बताया जा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मामला राजस्व न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या पीडि़त किसान को न्याय मिल पाता है, या यह मामला भी फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाएगा।
आईटी पार्क से खेल सुविधाओं तक मंत्री का विजऩ, निगम में गंदगी और कब्ज़ों का राज
विकास बनाम बदहाली की दो तस्वीरें, दुर्ग की जनता के सामने
दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में अगर बीते एक वर्ष के विकास कार्यों का निष्पक्ष आकलन किया जाए, तो एक कड़वा सच सामने आता है—शहर में विकास यदि कहीं दिखाई देता है, तो वह सिफऱ् पोस्टरों और दावों तक सीमित है। ज़मीनी स्तर पर आम नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं और सुव्यवस्थित शहर की तलाश में भटक रहा है।
हालांकि, इस बदहाल परिदृश्य के बीच कुछ सकारात्मक प्रयास भी नजऱ आते हैं। शहर की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था मेघ गंगा ग्रुप ने जनसहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए ग्रीन चौक, राजेंद्र प्रसाद चौक, कपड़ा लाइन स्थित वाई-शेप ब्रिज जैसे क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। इन स्थानों की साज-सज्जा और हरियाली ने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो शहर की खूबसूरती संवारी जा सकती है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पहल शहरी सरकार की नहीं, बल्कि समाजसेवियों की देन है।
शहरी सरकार के कार्यकाल में बढ़ती अव्यवस्था
महापौर श्रीमती अलका बाघमार के एक वर्ष के कार्यकाल में दुर्ग शहर कई गंभीर समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है।
कुआं चौक, महाराजा चौक, धमधा नाका स्थित शासकीय अस्पताल के सामने, सुराना कॉलेज के आसपास बदबूदार वातावरण आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर अनुबंध की शर्तें समाप्त होने के बावजूद कब्जा, गणेश मंदिर के सामने अवैध निर्माण, विश्वदीप स्कूल के पास नाली पर स्लैब डालकर संचालित अवैध बाजार—ये सभी उदाहरण प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करते हैं।
इतना ही नहीं, दुर्ग नगर निगम के लगभग 20–30 वर्षों के इतिहास में पहली बार भेदभावपूर्ण कार्रवाई के इतने मामले सामने आ रहे हैं। आम नागरिकों पर सख्ती और प्रभावशाली लोगों पर मेहरबानी—यह दोहरा मापदंड आज शहर में खुलकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
आवारा पशुओं की सड़कों पर भरमार, कई वार्डों में जल संकट और गंदगी के ढेर ने जनता के धैर्य की परीक्षा ले ली है।
विधायक से मंत्री तक, गजेंद्र यादव की विकास यात्रा
दूसरी ओर, यदि दुर्ग के विकास की बात की जाए तो वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद शहर को विधायक के रूप में गजेंद्र यादव का नेतृत्व मिला। अल्प समय में विधायक से मंत्री पद तक पहुंचे स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शहर को कई ठोस सौगातें दीं, जो अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन चुकी हैं।
आईटी पार्क दुर्ग की शुरुआत, जिसका एमओयू प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में संपन्न हुआ, आने वाले समय में दुर्ग को आईटी और रोजगार के नक्शे पर नई पहचान देगा।
इसके अलावा स्विमिंग पूल, बैडमिंटन ग्राउंड, समृद्धि बाजार के सामने फुटकर सब्जी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित शेड, गया नगर में सामाजिक भवन जैसी योजनाएं आज धरातल पर दिखाई दे रही हैं।
कभी अतिशयोक्ति मानी जाने वाली ये घोषणाएं अब साकार रूप ले चुकी हैं। कई और वादे हैं, जो भविष्य में पूरे होंगे या नहीं—यह समय तय करेगा, लेकिन वर्तमान में दो वर्षों के कार्यकाल में मंत्री गजेंद्र यादव ने दुर्ग की जनता को ठोस विकास का अहसास जरूर कराया है।
जनता के सामने दो मॉडल
आज दुर्ग शहर के सामने विकास के दो मॉडल स्पष्ट हैं—
एक ओर राज्य सरकार और मंत्री गजेंद्र यादव की योजनाएं, जो रोजगार, खेल, सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम की शहरी सरकार, जहां अव्यवस्था, गंदगी, अवैध कब्जे और भेदभावपूर्ण कार्रवाई आम नागरिकों के लिए रोज़मर्रा की परेशानी बन चुकी है।
दुर्ग की जनता अब पोस्टरों में नहीं, ज़मीनी हकीकत में विकास देखना चाहती है। सवाल यह है कि क्या शहरी सरकार जनता की इस अपेक्षा पर खरी उतरेगी, या फिर विकास की असली कहानी सिफऱ् मंत्री स्तर तक ही सीमित रह जाएगी?
10वें दिन 130 से अधिक प्रदर्शनों का आंकड़ा पार; अंतर्राष्ट्रीय नाटकों और नुक्कड़ नाटकों ने जीता दर्शकों का दिल
बिलासपुर / शौर्यपथ / नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वां भारत रंग महोत्सव (BRM), अपने 10वें दिन भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सिल्वर जुबली मना रहे इस महोत्सव ने अपनी विविधता और भव्यता से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के 19 केंद्रों पर थिएटर की एक नई ऊर्जा का संचार किया है। अब तक इस फेस्टिवल में 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें माइक्रो ड्रामा, वन-एक्ट प्ले और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं।
महोत्सव के 10वें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली के मंच पर "बदज़ात" और "डैडी" जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ, वहीं कश्मीरी लोक परंपरा 'भांड पाथर' पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” और रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को मजबूती प्रदान की।एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल 'आद्वित्य' के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया। इसमें बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर "कुछ अनसुने", पेरेंटिंग स्टाइल पर आधारित "बेबी शार्क डू डू डू डू" और कैदियों के जीवन के संघर्ष को दर्शाते नाटकों ने युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही एफटीआईआई की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने सिनेमाई बारीकियों से दर्शकों को परिचित कराया।
भारत रंग महोत्सव 2026 की खास बात इसकी व्यापक पहुंच है। दिल्ली के मुख्य केंद्र के साथ-साथ यह महोत्सव छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। रायपुर के रंगमंच प्रेमी इन उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का गवाह बन रहे हैं, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच और नई दृष्टि मिल रही है। रायपुर के अलावा बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में भी नाटकों का मंचन जारी है।
यह 25वां संस्करण 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे 25 दिनों के इस सफर में 9 देशों और भारत के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के थिएटर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन दिखाए जाएंगे, जिनमें कई दुर्लभ और कम बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / साहित्य समिति, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) द्वारा वार्षिक साहित्यिक महोत्सव “आईरिस 2026” का आयोजन 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांच दिनों तक चले इस आयोजन के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें मिथोलॉजिकल क्विज, स्लोगन लेखन, कविता पाठ, गेस द डिज़ीज, मेडिकल एटलस, मेडिकल क्विज, एक्सटेम्पोर और वाद-विवाद प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता का अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पाया।
सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन महाविद्यालय के अनुभवी और सम्मानित संकाय सदस्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से किया गया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कार्यक्रम की गुणवत्ता बनी रही।
महोत्सव के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जो माननीय अधिष्ठाता (डीन) डॉ. पी. एम. लुका की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. लुका ने साहित्य समिति और आयोजक दल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह संपूर्ण आयोजन संकाय समन्वयकों डॉ. दिव्या साहू, डॉ. अनिल बरन चौधरी, डॉ. इंदु पद्मेय एवं डॉ. रूबी साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वहीं छात्र समन्वयकों आशुतोष चंद्र कुमार एवं जी. सृष्टि ने कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाई और सभी व्यवस्थाओं को अच्छे ढंग से संभाला।
आईरिस 2026 का समापन अत्यंत सफल और यादगार रहा। इस महोत्सव ने विद्यार्थियों को सीखने, अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान किया, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण और भी समृद्ध हुआ।
रायपुर | शौर्यपथ
राज्य सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमतरी जिले के भखारा, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के तहसील मुख्यालय लवन, तथा बिलासपुर जिले के सकरी और राजकिशोर नगर में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोले जाएंगे। इन कार्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों की लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।
नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन कार्यों में भीड़ कम होगी, प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन, पारदर्शिता और जन-सुविधा की दिशा में एक मजबूत पहल है।
वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। इससे पंजीयन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ अब इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से—
ऑटो डीड जनरेशन
आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन
घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
स्वतः नामांतरण
ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र
एकीकृत कैशलेस भुगतान प्रणाली
व्हाट्सएप आधारित सेवाएं
डिजीलॉकर एकीकरण
डिजी-डॉक सेवा
खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड
राज्य सरकार का यह फैसला पंजीयन व्यवस्था को विकेंद्रीकृत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता भी सुदृढ़ होगी।
इस प्रतिष्ठित क्विज़ प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रमुख कॉर्पोरेट संगठनों से जुड़े अधिकारी एवं पेशेवर प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में व्यावसायिक समझ, वित्त, अर्थशास्त्र, बाजार, समसामयिक घटनाओं तथा विश्लेषणात्मक क्षमता का गहन मूल्यांकन किया गया। सुश्री शालिनी चौरसिया ने अपने सशक्त ज्ञान, तार्किक सोच और समसामयिक विषयों पर मजबूत पकड़ के बल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष प्रतिभागियों में स्थान बनाया।
‘द हिंदू बिज़नेस लाइन सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़’ देश की सबसे प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट क्विज़ प्रतियोगिताओं में से एक है। यह प्रतियोगिता अपने 22वें संस्करण में आयोजित की जा रही है और बीते वर्षों में यह श्रृंखला कॉर्पोरेट जगत में ज्ञानवर्धन, रणनीतिक सोच और बौद्धिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाले एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित हुई है।
22वें सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़ के अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में क्षेत्रीय दौर आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी राष्ट्रीय फाइनल के लिए चयनित होंगे।
सुश्री शालिनी चौरसिया की इस उपलब्धि पर भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों, सहकर्मियों एवं कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
भिलाई।
युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए दुर्ग पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और समन्वित कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई छापेमारी में पुलिस ने गोगो/रोलिंग पेपर, हुक्का सामग्री, चिलम और प्रतिबंधित जर्दायुक्त पान मसाला की भारी खेप जब्त की है। इस दौरान COTPA Act के तहत 16 दुकानदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देश पर संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत की गई, जिसमें 35 से अधिक पुलिस टीमों ने एक साथ दुर्ग–भिलाई के संवेदनशील इलाकों में रेड की।
पुलिस जांच में सामने आया कि शहर के विभिन्न पान ठेले, गुमटियां और डेली नीड्स की दुकानों पर गांजा सेवन के लिए उपयोग होने वाले गोगो/रोलिंग पेपर, चिलम, हुक्का फ्लेवर और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे थे। यह बिक्री खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास की जा रही थी।
संयुक्त पुलिस टीमों ने नियमानुसार तलाशी लेकर करीब ₹2 लाख मूल्य का नशीला सामान जब्त किया। इसके साथ ही संबंधित दुकानों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत इस्तगासा प्रस्तुत कर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई।
रेड के दौरान:
मोहन नगर – 8 दुकानें
स्मृतिनगर – 5 दुकानें
नेवई – 2 दुकानें
दुर्ग – 1 दुकान
कुल 17 व्यक्तियों के खिलाफ COTPA Act के तहत कार्रवाई की गई है।
दुर्ग पुलिस ने जब्त सामग्री की सप्लाई चेन (Backward Linkage) का भी पता लगाया है। पुलिस के अनुसार, इन नशीले उत्पादों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ भी आगामी दिनों में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
कार्रवाई के दौरान जिन दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए, उनमें प्रमुख रूप से—
अभिनंदन सिंह (30), प्रगति नगर
चित्रांश साहू उर्फ सोनू (23), रुआबांधा बस्ती, मिलाई
विजेश बारवे (44), मुखर्जी नगर, मोहन नगर
देवेन्द्र भोसले (20), सिकोला भाठा, दुर्ग
शंकर लाल बंछोर (65), मोहन नगर
संजय कुमार बडानी (48), दुर्ग
लोकेश कुमार साहू (35), मोहन नगर
कुशाल प्रजापति (30), मोहन नगर
अर्जुन यादव (46), मोहन नगर
राजकुमार महोबिया (39), दुर्ग
राजेश कुमार द्विवेदी (57), सुपेला/स्मृतिनगर
मनोज कुमार चौहान, मॉडल टाउन, स्मृतिनगर
त्रिवेणी साहू (50), जुनवानी
लक्की चंदानी (43), मोहन नगर
भगवान साहू, हाउसिंग बोर्ड
विमल जसवानी (23), सिंधी कॉलोनी, दुर्ग
दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान निरंतर और और भी सख्त रूप में जारी रहेगा।
भिलाई नगर।
आवासहीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भिलाई नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम तथा नगरपालिका (कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 2013 के तहत ईडब्ल्यूएस (EWS) भूमि प्रदान करने के एवज में जमा की जाने वाली राशि को ‘गरीबों की सेवा निधि’ के नाम से पृथक बैंक खाते में रखने का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 128-ग के अनुसार, इस सेवा निधि की राशि का उपयोग स्लम बस्तियों एवं आवासहीन व्यक्तियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकता है। इसी क्रम में निगम के विगत बजट में गरीबों की सेवा निधि से 3 करोड़ रुपये व्यय का प्रावधान किया गया है।
माननीय विधायक वैशाली नगर श्री रिकेश सेन द्वारा भी गरीबों की सेवा निधि के समुचित एवं जनोपयोगी उपयोग के संबंध में निगम प्रशासन से पत्राचार किया गया है। इसके फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025–26 के बजट प्रावधानों के अंतर्गत एक अहम निर्णय लिया गया है।
निर्णय के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना – सबके लिए आवास मिशन (AHP घटक) के तहत ऐसे हितग्राही, जो 31 मार्च 2026 तक अपने आवास का 90 प्रतिशत अंशदान जमा करेंगे, उन्हें शेष 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन स्वरूप गरीबों की सेवा निधि से प्रदान की जाएगी।
निगम आयुक्त ने बताया कि राज्य शासन द्वारा किए गए वैधानिक प्रावधानों का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने सभी पात्र हितग्राहियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक राशि जमा कर इस योजना का लाभ उठाएं।
नगर निगम की यह पहल न केवल आवास योजना को गति देगी, बल्कि गरीबों की सेवा निधि के उद्देश्यपूर्ण और संवेदनशील उपयोग का भी उदाहरण बनेगी। इससे शहरी गरीबों और आवासहीन परिवारों को अपने सपनों का घर पाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जशपुर को मिली पर्यटन विकास की बड़ी सौगात
होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। श्री साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र
मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।
यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
रायपुर | शौर्यपथ
राज्य सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमतरी जिले के भखारा, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के तहसील मुख्यालय लवन, तथा बिलासपुर जिले के सकरी और राजकिशोर नगर में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोले जाएंगे। इन कार्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों की लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।
नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन कार्यों में भीड़ कम होगी, प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन, पारदर्शिता और जन-सुविधा की दिशा में एक मजबूत पहल है।
वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। इससे पंजीयन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ अब इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से—
ऑटो डीड जनरेशन
आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन
घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
स्वतः नामांतरण
ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र
एकीकृत कैशलेस भुगतान प्रणाली
व्हाट्सएप आधारित सेवाएं
डिजीलॉकर एकीकरण
डिजी-डॉक सेवा
खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड
राज्य सरकार का यह फैसला पंजीयन व्यवस्था को विकेंद्रीकृत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता भी सुदृढ़ होगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
