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पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, किसान को धमकी
पुलिस ने बताया राजस्व विवाद, पीडि़त को न्यायालय जाने की सलाह
दबंगों के आगे असहाय किसान? दुर्ग में फिर उठा जमीन सुरक्षा का सवाल
दुर्ग / शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
दुर्ग जिले में किसानों की जमीन से जुड़े विवाद लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। ताजा मामला खंडेलवाल कॉलोनी से सटे क्षेत्र का है, जहां एक किसान ने अपनी पुश्तैनी भूमि पर जबरन कब्जा करने और धमकी देने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद इसे राजस्व से जुड़ा भूमि विवाद बताते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।
पीडि़त किसान डुलेश्वर सिन्हा (48 वर्ष), निवासी दुर्ग, थाना पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके नाम दर्ज भूमि है, जो चार किसानों की संयुक्त पुश्तैनी जमीन से जुड़ी हुई है। इसी भूमि से लगी हुई जमीन रमेश कुमार ताराचंद जैन की बताई जा रही है।
पीडि़त के अनुसार, रमेश कुमार जैन द्वारा जिस भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन का हिस्सा है। जब किसान ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने कथित रूप से कहा—
"मैं अपना काम नहीं रोकूंगा, जो करना है कर लो,"
और उन्हें धमकी दी गई।
पुलिस ने माना राजस्व विवाद, दर्ज किया अपराध क्रमांक
मामले की प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने इसे भूमि विवाद एवं राजस्व से संबंधित प्रकरण बताया। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी प्रकार की मारपीट या संज्ञेय अपराध के स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं, ऐसे में पुलिस हस्तक्षेप की स्थिति नहीं बनती। पीडि़त किसान को न्यायालय की शरण लेकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है।
प्रकरण को अपराध क्रमांक 0037/2026 के अंतर्गत धारा 174(2) क्चहृस्स् में दर्ज किया गया है, जो जांच के आधार पर दर्ज किया जाने वाला प्रावधान है।
पीडि़त किसान की चाची भी आईं सामने
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीडि़त किसान की चाची और उनके परिजन भी सामने आए। उनका आरोप है कि उनकी जमीन को भी रमेश कुमार जैन द्वारा किसी अन्य राज्य के किसान को फसल उत्पादन के लिए दे दिया गया है। परिजनों का कहना है कि बिना सहमति और अधिकार के भूमि का उपयोग किया जा रहा है।
पूर्व विवादों से भी जुड़ा रहा नाम
क्षेत्र में चर्चा है कि ताराचंद रमेश कुमार जैन का नाम पूर्व में भी शासकीय नाले की जमीन के एक हिस्से पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल निर्माण से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है। हालांकि उस समय किसी ठोस कार्रवाई या जांच की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों का दावा है कि नाले की बड़ी भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई आज तक स्पष्ट नहीं है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
हाल के समय में जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रसूखदारों द्वारा किए गए कथित अवैधानिक कार्यों पर कार्रवाई किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है कि क्या जमीन से जुड़े मामलों में किसानों को त्वरित और प्रभावी सुरक्षा मिल पा रही है, या फिर दबंगों के सामने किसान खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
आरोपी पक्ष से संपर्क का प्रयास असफल
इस पूरे मामले में रमेश कुमार जैन से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फिलहाल विवादित भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य रुका हुआ बताया जा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मामला राजस्व न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या पीडि़त किसान को न्याय मिल पाता है, या यह मामला भी फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाएगा।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
