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दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के एप की लॉन्चिंग की। इस अवसर पर उन्होंने पाटन के ग्राम सिकोला के ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सरपंच श्रीमती उषा निषाद से गौठान की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही गोबर खरीदी की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सरपंच ने बताया कि गोबर खरीदी बहुत अच्छी हो रही है गोधन न्याय योजना से लोगों में काफी उत्साह का वातावरण है। लोग इससे काफी लाभ कमा रहे हैं। ग्रामीण इससे काफी खुश हैं अब इसके दूसरे चरण में वर्मी कंपोस्ट से भी आय होगी। मुख्यमंत्री ने उप सरपंच पुरुषोत्तम यादव से गांव के चारागाह बाड़ी आदि के बारे में जानकारी ली। श्री यादव ने बताया कि नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के माध्यम से हम लोग अपने गांव को संवार रहे हैं। बाड़ी का विकास कर रहे हैं। बाड़ी के माध्यम से सब्जियां उगा रहे हैं जिससे हमारे बच्चों को भी पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने पशु पालकों से भी चर्चा की। पशुपालक श्रीमती कविता ने बताया कि वह 35 क्विंटल गोबर बेच चुकी है जिससे उन्हें 7000 रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है। गोधन न्याय योजना पशु पालकों के लिए बहुत अच्छी है। साथ ही इससे जैविक खेती करने के लिए भी रास्ता मिलेगा। ग्रामीणों को वर्मी कंपोस्ट से भी आय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गौठान अध्यक्ष श्री गोकरण यादव से भी बातचीत की। श्री यादव ने बताया कि गांव में हम लोगों ने दो चरवाहे रखे हैं । एक चरवाहा समिति की ओर से रखा है और एक चरवाहा गांव की ओर से रखा गया है जो आवारा पशुओं की भी देखभाल करता है। मुख्यमंत्री ने ग्राम सचिव श्री बिहारी लाल साहू से कहा कि ऐप के बारे में प्रचार प्रसार करें साथ ही गोधन योजना के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार करें ताकि ग्रामीणों को इस महत्वपूर्ण योजना के माध्यम से आर्थिक लाभ हासिल हो सके। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने इस मौके पर ग्रामीणों से गांव की समस्या एवं गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी भी ली तथा उन्हें सामूहिक रूप से काम कर इस योजना का लाभ उठाने की अपील भी की। जिला पंचायत सीइओ एस. आलोक ने बताया कि जिले की 216 गौठान में नोडल अधिकारी नियुक्ति किए गए है। जो शासन की महत्वकांक्षी योजना एनजीजीबी के तहत बनाए गए गौठान में सतत् गतिविधियां एवं गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन निरीक्षण करेंगे।
गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं के द्वारा बेचे गए गोबर का खरीदी विक्रय का विवरण रखने के लिए एप तैयार किया गया जिसके माध्यम पंजीकृत हितग्राही अपने सभी विवरण इसमें देख सकेगे । इस संबंध में नोडल अधिकारियों को एप से संबंधित जानकार को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक ने बताया कि गोबर खरीदी के लिए शासन के द्वारा चिप्स के माध्यम से एप तैयार कराया गया है। जिले में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंन्द्र भुरे के मार्ग दर्शन में गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। एस. आलोक बताया कि अब एप के माध्यम से गोधन न्याय योजना का संचालन किया जाएगा। जिस तरह से धान खरीदी में किसानों का पंजीयन किया जाता है। उसी तरह गोधन न्याय योजना में गोबर विक्रता का पंजीयन कृषि सहकारी समिति द्वारा किया जाना है। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है क्योकि गोबर खरीदी के समय विक्रताओं की जानकारी भरने की आवश्यकता न रहे। केवल क्रय किए गए गोबर की मात्रा ही भरना पड़े। उन्होंने बताया कि जिन हितग्राहियों ने गोबर की विक्रय किया है। उनकी जानकारी एनआईसी में एकत्रित हो गई है। उनका पंजीयन दुबारा करने आवश्यक नही होगा। सिर्फ जिन्होने अब तक गोबर नहीं बेचा है, उनका ही पंजीयन कराये जाने को कहा है। उन्होने गौठान नोडल अधिकारियों को अभियान चलाकर शेष सभी गोबर विके्रता का पंजीयन कराने कहा है। एप के संबंध में सभी नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बाद भी अगर कही पर भी कोई कठिनाई आती है, तो जिलास्तरिय अधिकारी या फिर चिप्स के हेल्पलाईन नम्बर पर कॉल करके समस्या का समाधन कर सकते है। उन्होने कहा कि इस एप को सहायता से पंजीकृत हिजग्राही अपने पंजीयन की जानकारी जैसे व्यक्तिगत विवरण, बैक विवरण एवं संबंधित गौठान का नाम देख पाएगें। इसमें हितग्राही द्वारा बेचे गए गोबर की तिथिवार जानकारी एवं विक्रय से प्राप्त राशि को जानकारी आसानी से देख सकेगें।
दुर्ग / शौर्यपथ / युवा कांगे्रस व एनएसयुआई के संयुक्त तत्वावधान में आज सेक्टर-1 मुर्गा चौक पर बेरोजगारी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर केन्द्र सरकार के रोजगार विरोधी नीतियोंं के खिलाफ युवा कांग्रेस व एनएसयुआई के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए बेरोजगारों के लिए रोजगार की मांग की। यही नहीं भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिकों के शोषण के खिलाफ भी आवाज उठाई। कार्यक्रम में भिलाई शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती तुलसी साहू, भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव, भारतीय युवा कांग्रेस प्रभारी महेन्द्र, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष अंकुश पिल्ले, युवा कांग्रेस भिलाई नगर अध्यक्ष अफरोज, एनएसयुआई जिला अध्यक्ष आदित्य सिंह, सीजू एंथोनी, नीता लोधी सहित सैकड़ों की संख्या में युवा कांग्रेस व एनएसयुआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से उपस्थित भिलाई शहर जिला अध्यक्ष श्रीमती तुलसी साहू ने केन्द्र सरकार पर जमकर हल्ला बोला। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार देश में बेरोजगारी का बीज बो रही है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देशभर में नौ रत्नों का निर्माण किया जिसमें से भिलाई इस्पात संयत्र एक है। एक ओर जहां जवाहर लाल नेहरू ने देश में युवाओं को रोजगार दिया वहीं दूसरी ओर केन्द्र की मोदी सरकार देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों का नीजिकरण करने में लगी हुई है। नेहरू जी का सपना था युवाओं को काम देंगे तो उनके हाथ में पैसा आएगा। जब लोगों के हाथ में पैसा होगा तो बाजारों में पैसा पहुंचेंगा और देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी। कार्यक्रम को भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव ने भी संबोधित किया। साथ ही भारतीय युवा कांग्रेस प्रभारी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष अंकुश पिल्ले, एनएसयुआई अध्यक्ष आदित्य सिंह ने भी अपनी बात रखी।
दुर्ग / शौर्यपथ / शंकराचार्य अस्पताल के संचालक ने अपने ऊंची सोर्स के बल पर आपदा को अवसर में बदलने के लिए प्रशासन से यहां कोविड अस्पताल बनवा लिया। प्रारंभिक दौर में ये अस्पताल में अच्छी सुविधाएं दी लेकिन बाद में यहां की व्यवस्था एक दम लचर हो गई। यहां भरपूर गंदगी है, सफाई पर कोई ध्यान नही दे रहा है। दो दिन तक यहां डॉक्टर जांच करने नही आते। यहां न ही मरीजों को ठीक से और समय पर खाना ही दिया जा रहा है और न ही गरम पानी। आक्सीजन रहते हुए भी आवश्यकता वाले मरीजों को नही दिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा यहां कोरोना के लोगों को ले जाकर भर्ती करके इतिश्री कर लिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण यहां लोग असमय ही परलोक सिधार रहे हैं, अभी दो दिन पहले ही जैसे प्लेटफार्म पर कोई भिखारी कराहते कराहते बिना इलाज पानी के मर जाता है, वही स्थिति यहां निर्मित हो रही है,जिसके कारण दो दिन पूर्व एक बुर्जुग कराहते कराहते मर गया उसे ऑक्सीजन की आश्यकता होने के बाद भी ऑक्सीजन नही दिया गया। जिसका विडिया वायरल होने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले को संज्ञान में लेकर कलेक्टर को जांच करने कहा तो प्रशासन द्वारा जांच करने और व्यवस्था सुधारने के बजाय समाचार प्रकाशन के लिए भिजवाया जा रहा है कि शंकरा अस्पताल में कितने लोग इलाज कराने आये, कितने ठीक हुए। यहां की लापरवाही के कारण अब लोग भारी दहशत में आ गये है, अधिकांशतर लोग बुखार सर्दीं, खंासी व अन्य लक्षण होने के बाद भी जांच कराने नही जा रहे है कि कही कोरोना निकल गया तो यहां के लावरवाही कोविड अस्पतालों में मरने कौन जायेगा। बल्कि लोग घर में ही तुलसी, चिरैता व अन्य जड़ी बुटियो का काढा बनाकर या मेडिकल से दवालाकर घर में ही रहकर अपना इलाज कर रहे हैं।
शंकराचार्य कोविड अस्पताल प्रबंधन द्वारा किये जा रहे लापरवाही का एक और मामला सामने आया है जिसमें एक पुत्र ने शंकरा अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि मेरी मां का उपचार नही किया गया और न ही खाना पानी दिया गया, जिसके कारण उसकी मां की मौत हो गई। मृतक के पुत्र मुकुंद बंसोड़ ने मीडिया को बताया कि मेरी मां लीला बाई बसोड़ जिनकी तबियत खराब होते ही मेरे व्दारा इलाज के दौरान मेरी मां को कोरोना पाज़िटिव बताकर शंकराचार्य में भर्ती करवाया और न बात करवाईं न खाना दिया न पानी दिया, मेरी मां से मंगलवार गत 2 सितंबर को रात 8 बजे बात हुई जो बगल वाले मरीज ने करवाईं, मां से कहा मैं कल आऊंगा मैं 3 सितंबर बुधवार को वहां पर अनिस सर से दिन भर कहता रहा कि मेरी मां से बात करा दो, लेकिन किसी ने नहीं सुनी मेरी दिन भर बात नहीं होने के कारण मेरी मां सदमे में आ गयी और वो परलोक सिधार गई। मुझे मां से बात करने के लिए एक नम्बर दिया गया था 6260221616 नम्बर को मैं दिन भर लगात रहा लेकिन किसी ने कोई जानकारी नहीं दी और रात 1 बजे मेरी मां की मरने की ख़बर दी गई। यानी मेरी मां की मौत एक साजीस के तहत हुई है, जिसका आडीयो वाईस रिकार्डिंग मेरे पास है, वहां किसी को जाने नहीं देते, और सही ढंग से देख देख नहीं होती मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है, मेरी मां के मौत का हिसाब प्रबंधन को देना होगा।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर पांच के बाहर नौ वर्ष पहले सात सितम्बर के दिन सूटकेस में रखे बम में हुए विस्फोट में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 76 लोग घायल हुए थे. यह आतंकवादी घटना थी. धमाके की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) ने ली थी. वर्ष 2011 की इस आतंकवादी घटना के बाद सात सितम्बर की तारीख एक दर्दनाक याद के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई. सात सितंबर की तारीख भारत के लिए एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष उपलब्धि के तौर पर दर्ज हो सकती थी, जब भारत ने पिछले साल अपने ‘चंद्रयान-2' अभियान के तहत लैंडर ‘विक्रम' को चांद पर उतारने का प्रयास किया था, लेकिन चांद की सतह से सिर्फ 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर लैंडर का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया. इसके साथ ही इसरों के वैज्ञानिकों की कई वर्ष की मेहनत पर पानी फिर गया और पूरे देश में मायूसी छा गई.
देश-दुनिया के इतिहास में सात सितंबर की तारीख में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है-
1812: नेपोलियन ने रूसी सेना को हराया.
1822: ब्राजील ने पुर्तगाल से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की.
1906: बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना.
1921: मिस अमेरिका प्रतियोगिता की शुरुआत की गई.
1923 : विएना में इंटरपोल की स्थापना.
1927: फिलियो टेलर ने पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक टीवी बनाने में सफलता हासिल की.
1931: लंदन में गोलमेज सम्मेलन का दूसरा सत्र शुरू.
1940: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने अपनी वायुसेना के जरिए ब्रिटेन के शहरों पर बमबारी शुरू की.
1963 : अशोक चक्र विजेता विमान परिचारिका नीरजा भनोट का जन्म. नीरजा ने एक अपहृत विमान के यात्रियों को बचाने के दौरान अपनी जान गंवा दी थी.
1986 : बिशप डेसमंड टूटू केपटाउन के पहले अश्वेत आर्कबिशप बने.
2008 : भारत-अमेरिका परमाणु करार के तहत एन.एस.जी. के 45 सदस्यों ने भारत को अन्तरराष्ट्रीय बिरादरी से परमाणु व्यापार की छूट दी.
2009 : भारत के पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियडर्स का ख़िताब जीता.
2011 : दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर पांच के बाहर बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत, 76 अन्य घायल.
2019 : भारत का चंद्रयान-2 अभियान असफल, लैंडर ‘विक्रम' का चांद पर उतरने से ठीक पहले पृथ्वी के नियंत्रण केन्द्र से संपर्क टूटा.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / संकट में फंसी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लि. (वीआईएल) ने उच्चतम न्यायालय द्वारा ऑपरेटरों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का बकाया चुकाने के लिए 10 साल का समय देने के फैसले को अंतत: एक अच्छा नतीजा बताया है. हालांकि, इसके साथ ही वोडाफोन आइडिया का मानना है कि मोबाइल शुल्कों में बढ़ोतरी जरूरी है, तभी दूरसंचार कंपनियां टिक सकेंगी और मुनाफे की स्थिति में लौट सकेंगी.
वोडाफोन आइडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रविंदर टक्कर ने सोमवार को एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पूर्व में कंपनी शुल्क बढ़ाने से नहीं हिचकिचाती थी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नियामक और सरकार को न्यनूतम दर की अधिकतम सीमा तय करने के लिए कदम उठाना चाहिए. वोडाफोन आइडिया के निदेशक मंडल ने पिछले सप्ताह इक्विटी और ऋण के जरिये 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को मंजूरी दी है.
इससे कंपनी को परिचालन में बने रहने में मदद मिलेगी. इस राशि से नकदी संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनी को बड़ी राहत मिल सकेगी. कंपनी को जहां भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है वहीं उसके ग्राहकों की संख्या घट रही है तथा प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) नीचे आ रहा है. इसके अलावा कंपनी पर करीब 50,000 करोड़ रुपये का एजीआर का बकाया है.
इससे पहले इसी महीने उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को एजीआर के बकाये का भुगतान दस साल में करने की अनुमति दी है. इसकी शुरुआत अगले वित्त वर्ष से होगी. हालांकि, कंपनियों को 10 प्रतिशत बकाया का भुगतान इसी वित्त वर्ष में करना होगा. टक्कर ने कहा, ‘‘10 साल में भुगतान न्यायालय के फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अलावा 10 प्रतिशत का शुरुआती भुगतान करना होगा, जो कंपनी पहले ही दूरसंचार विभाग को अदा कर चुकी है. ऐसे में न्यायालय के फैसले के अनुरूप हमें पहला भुगतान मार्च, 2022 में करना होगा. यह दस साल के भुगतान की पहली किस्त होगी. अंतत: इस फैसले का नतीजा अच्छा रहा है.''
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के टुकड़ों में भुगतान के फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह काफी उपयोगी होगा, क्योंकि हम अपनी 10 साल की यात्रा की योजना बना सकेंगे. उन्होंने भुगतान के लिए 10 साल का समय देने पर न्यायालय का आभार जताया. मोबाइल शुल्कों में बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा कि समूचे उद्योग का मानना है कि भारत में दरें टिकने योग्य नहीं हैं. कंपनियों को अपनी लागत से कम पर बिक्री करनी पड़ रही है. पिछले वर्षों के दौरान डेटा और वॉयस के इस्तेमाल में भारी वृद्धि का उल्लेख करते हुए टक्कर ने कहा कि लघु अवधि मोबाइल दरों में बढ़ोतरी जरूरी है.
मुंबई / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर कंगना रनौत की मुंबई को लेकर किए गए कमेंट का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कंगना के इस कमेंट पर शिवसेना हमलावर बनी हुई है, राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख की ओर से तीखी प्रतिक्रिेया सामने आ चुकी है. देशमुख ने कहा था कि शुक्रवार को कहा कि यदि कंगना यहां असुरक्षित महसूस करती हैं तो उन्हें यहां पर रुकने का कोई अधिकार नहीं है. देशमुख के इस बयान के बाद शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने भी सोमवार इस मसले पर टिप्पणी करते हुए कंगना पर कार्रवाई की मांग की.
प्रताप सरनाइक ने कंगना के कमेंट पर रिएक्शन देते हुए कहा, 'आज मैंने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि मुम्बई और महाराष्ट्र की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर से करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए. अगले 24 घंटों में इस पर इन्क्वायरी पूरी की जाएगी. उन्होंने कहा,'केंद्र सरकार का महाराष्ट्र पर कितना प्यार है..महिला आयोग को भी उत्तर प्रदेश, बिहार में होने वाले बलात्कार को नहीं दिखते हैं.. आज सुनने आया है कि कंगना को Y सिक्युरिटी दी गई है.. आज भी शायद इन्हें मुम्बई पुलिस पर भरोसा नहीं है.. हमारी पुलिस लगातार काम कर रहे हैं, कई कोरोना के वजह से मर गए हैं.. फिर भी इन्हें उनपर भरोसा नहीं है. अगर कल महाराष्ट्र सरकार दाऊद के खिलाफ बोलेगी तो केंद्र सरकार शायद दाऊद को भी सुरक्षा देगी, इन्हें महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ रहना है.'
गौरतलब है कि कंगना अपने मुंबई वाले ट्वीट को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं. एक्ट्रेस ने शिवसेना नेता संजय राउत के बयान पर जवाब देते हुए ट्वीट किया था. दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना पर मुंबई पुलिस का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उन्हें मुंबई वापस न लौटने की सलाह दी थी. इस पर कंगना रनौत ने कहा था कि मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जैसा क्यों महसूस हो रही है. इस कमेंट को लेकर कंगना की कई बॉलीवुड सितारों ने भी आलोचना की है.
नई दिल्ली /शौर्यपथ / भारतीय सेना और लेह में तिब्बती समुदाय के लोगों ने सोमवार को तिब्बती जवान नीमा तेन्जिन को अंतिम विदाई दी. तेन्जिन कभी गुप्त समूह रहे स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो थे. यह फोर्स भारतीय सेना के अंडर में ऑपरेट में काम करती है. अगस्त के आखिरी महीने में नीमा तेन्जिन दक्षिणी पैंगॉन्ग में एक पुराने लैंडमाइन की चपेट में आ गए थे, जिससे हुए धमाके में उनकी जान चली गई थी.
उनके अंतिम संस्कार में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के महासचिव राम माधव शामिल हुए. उन्होंने इस दौरान की तस्वीरें शेयर कर एक ट्वीट भी किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया. हालांकि, पिछले हफ्ते ही चीन और भारत के बीच हुई एक और झड़प के बाद बीजेपी नेता का तिब्बती जवान की अंतिम विदाई में शामिल होने को चीन को कड़े जवाब के रूप में देखा जा रहा है.
बता दें कि स्पेशल फ्रंटियर फोर्स दलाई लामा, तिब्बती और भारतीय झंडे से अपनी प्रतिबद्धता रखता है. यह फोर्स पहाड़ी युद्धों की विशेषज्ञ है और तिब्बत में दुश्मनों के बीच में ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित है.
तिब्बती सैनिक नीमा तेन्जिंग के जान गंवाने के बाद इस प्रतिष्ठित लेकिन बहुत आम जानकारी से बहुत दूर रहने वाले ऊंचाइयों पर लड़ने वाले इन योद्धाओं की थोड़ी झलकियां सामने आई हैं. फोर्स अधिकतर तिब्बती शरणार्थियों को भर्ती करती है, जो 1959 में विफल रहे बगावत के बाद दलाई लामा के भारत में शरण लेने के बाद से भारत आ गए थे. बाकी कुछ भारतीय नागरिक हैं.
1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इस कोवर्ट फोर्स का संगठन किया गया था. हालांकि, इस फोर्स के बारे में बहुत जानकारी सार्वजनिक नहीं है. अनुमान है कि इस फोर्स में 3,500 पुरुष सैनिक हैं.
बता दें कि पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने बताया था कि चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर दो बार 'आक्रामक सैन्य गतिविधियां' की थीं, लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया था.
शौर्यपथ / किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए व्यवहार प्रमुख आधार होता है। कद-काठी या रंग-रूप का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन एक हालिया अध्ययन की मानें तो थोड़ी मोटी काया वाले पुरुष बेहतर पिता साबित होते हैं। उन्हें बेहतर अभिभावकीय क्षमता वाला आंका जाता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अभिभावक के तौर ऐसे पुरुष बच्चों से दुबली कद-काठी वाले पिताओं की तुलना में बेहतर रूप से पेश आते हैं। वहीं अध्ययन में गठीले बदन वाले पिताओं की अभिभावकीय क्षमताओं को नकारात्मक तौर पर आंका गया। द टाइम्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक लोग पुरुषों की अभिभावकीय क्षमताओं का आकलन उनके शरीर के अनुसार करते हैं।
प्रतिभागियों को दिखाई तस्वीरें -
-अध्ययन में शामिल 800 से अधिक प्रतिभागियों को दुबले, सामान्य, थोड़े मोटे और अधिक वजन वाले पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गईं। फिर उनसे इसके आधार पर बेहतर पिता की छवि के बारे में पूछा गया। दुबली काया वाले पुरुषों को लेकर प्रतिभागियों ने उनके अभिभावक वाले गुणों को नकारात्मक आंका। वहीं, थोड़े ज्यादा वजन वाले पिताओं को बेहतर पिता माना।
बच्चों पर विचार नहीं थोपते-
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न मिसिसिपी के शोधकर्ताओं ने बताया कि ज्यादा वजन वाले पिताओं को लेकर हम मानते हैं कि वह बच्चों पर जल्दी अपने विचार नहीं थोपते हैं। इसलिए बच्चों से उनके रिश्ते कीफी मजबू होते हैं। लोग अक्सर इसकी मिसालें भी दिया करते हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया कि बहुत अधिक वजन होना भी ठीक नहीं। इससे भी पिता के तौर पर नकारात्मक छवि ही बनती है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / भिंडी की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी लेकिन इसका अचार भी खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। खास बात यह है कि इसे पकने में सिर्फ 5 मिनट का ही समय लगता है और यह अचार बाकी अचारों के मुकाबले थोड़ा हेल्दी होता है। तो अगली बार जब कभी आपके घर लंच या डिनर पर कोई मेहमान आएं तो उन्हें भी खाने के साथ जरूर परोसे यह टेस्टी अचार।
भिंडी का अचार बनाने के लिए सामग्री-
-250 ग्राम भिंडी
-2 चम्मच मेथी दाना
-1 चम्मच हल्दी पाउडर
-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
-2 चम्मच सरसों पाउडर
-2 चम्मच रोस्टेड तिल
-10-12 करी पत्ते
-चुटकी भर हींग
-1 कप नींबू का रस
-नमक स्वादानुसार
-2 छोटे चम्मच तेल
भिंडी का अचार बनाने का तरीका-
भिंडी का अचार बनाने के लिए सबसे पहले भिंडी को धोकर सुखा लें। भिंडी सुखाने के बाद उसे बीच से चीरा लगाकर काट लें। अब एक कटोरी में लाल मिर्च पाउडर, नमक, हल्दी पाउडर, सरसों पाउडर, हींग और दो चम्मच नींबू का रस एक साथ मिलाएं।अब इस मसाले को भिंडी में भर लें।
एक पैन में तेल गर्म करके उसमें करी पत्ते डालने के बाद भिंडी भी डालकर भून लें। भिंडी को ज्यादा नहीं भूनना है वरना भिंडी का मसाला जलने लगेगा। गैस बंद करके बचा हुआ नींबू का रस और भुने हुए तिल को भी इसमें अच्छे से मिलाएं।
आपका टेस्टी इंस्टेंट भिंडी का अचार बनकर तैयार है। आप इसे तुरंत ही खा सकते हैं, अगर आप इस अचार को 3-4 दिन के लिए स्टोर करना चाहते हैं तो उसके लिए एयर टाइट कंटेनर का ही इस्तेमाल करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / विकटासुर पुतले से पैदा किए अपने असुर अचंभासुर को भानामति और प्रद्युम्न का वध करने के लिए गंधमादन पर्वत पर भेजता है। उधर भानामति से मायावी विद्या सिखने के बाद प्रद्युम्न दक्षिणा देने के बाद करते हो तो भानामति कहती है कि तुम मुझे गुरु दक्षिणा देना चाहते हो ना? तब प्रद्युम्न कहता है- हां गुरुदेव। फिर भानामति कहती है- तो उठो वत्स और देखो आसमान में संभुरासुर का भेजा हुआ राक्षस हमें ढूंढता हुआ आ रहा है। तुम मेरी दी हुई शिक्षा से उस राक्षस का वध कर दो यही मेरी गुरु दक्षिणा होगी। तभी वह राक्षस अचंभासुर जिसे विकटासुर ने भेजा था उन दोनों को देख लेता है।
अचंभासुर उन्हें देखकर कहता है- अच्छा तो तुम यहां हो। अब मैं तुम्हें असुरेश्वर के पास ले जाऊंगा। यह देखकर प्रद्युम्न अपनी माया से एक धनुष और बाण प्राप्त करता है और फिर उसे बाण मारने का प्रयास करता है तो वह असुर अपनी माया से अदृश्य होकर जोर-जोर से हंसने लगता है। वह असुर भी अदृश्य होकर अस्त्र-शस्त्र चलाता है। अंत में भानामति कहती है कि किसी मायावी से मायावी युद्ध ही करना चाहिए तुम उसकी माया नष्ट कर दो। फिर वह तुम्हारे सामने आ जाएगा। फिर जैसे ही वह दिखाई देने लगता है तो भानामति कहती है- अब समय मत गवांओ और इसी समय इसका वध कर दो वर्ना संभरासुर के कई मायावी यहां आ जाएंगे।
तब प्रद्युम्न अपने तीर से अचंभासुर का एक हाथ काट देता है परंतु वह फिर जुड़ जाता है। फिर वह गर्दन काट देता है तो गर्दन भी फिर से जुड़ जाती है। फिर तलवार से दो टूकड़े कर देता है तो वह असुर कहता है कि मैंने कहा था न कि मेरा कोई वध नहीं कर सकता। मुझे कोई मिटा नहीं सकता। यह कहकर वह दानव अदृश्य हो जाता है तो भानामति घबराकर श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती है कि हे प्रभु! इस संकट में मेरे प्रद्युम्न की रक्षा करो।
तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि भानामति विकटासुर ने अचंभासुर का निर्माण किया है। उसने एक मिट्टी की मूरत बनाकर उस मूरत से अचंभासुर के प्राणों की स्थापना की है। तुम्हें उस मूर्ति को नष्ट करना होगा। जिस पल तुम उस मूर्ति को नष्ट कर दोगी उसी पल प्रद्युम्न अचंभासुर का वध करने में सफल हो जाएगा। यह सुनकर भानामति अपने सूक्ष्म शरीर से वहां से चली जाती है और इधर प्रद्युम्न अचंभासुर से लड़ता और बचता रहता है।
उधर, भानामति विकटासुर के द्वारा स्थापित पुतले को ढूंढते हुए उसके पास पहुंच जाती है और फिर अपनी माया से उस पुतले को नष्ट कर देती है। जैसे ही वह पुतला नष्ट होता है उधर प्रद्युम्न भी अचंभासुर का वध कर देता है। फिर भानामति पुन: अपने स्थान पर लौट आती है। जब यह घटना विकटासुर को पता चलती है तो वह कहता है- भानामति मैं तुमसे बदला लूंगा। मैं किसी भी प्रकार तुम्हारा वध करूंगा। ऐसा कहकर विकटासुर भी गंधमादन पर्वत की ओर उड़ चलता है।
उधर, भानमति कहती है कि इन आयुधों को देखकर लगता है कि तुम्हें विकटासुर का विस्मरण हो गया है। यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है- नहीं माताश्री। तब वह कहती है कि तो फिर तुमने इन आयुधों को नीचे क्यों रख दिया है? अभी तक तो युद्ध का प्रारंभ ही नहीं हुआ पुत्र प्रद्युम्न और तुमने इन आयुधों को नीचे रख दिया। तुमने जिस अचंभासुर का वध किया था उसका निर्माण विकटासुर ने किया था और वह बदला लेने यहां अवश्य ही आएगा। इसके बाद तो तुम्हें हर पल सावधान रहना चाहिए। अचंभासुर की तरह विकटासुर का भी वध कर दिया तो समझ लो कि युद्ध प्रारंभ होने के पहले ही संभरासुर का आत्मविश्वास डगमगा गया।..
यह सारी बातें विकटासुर सुन लेता है और अपनी माया से एक सुंदर हिरण बनाकर उस उपवन में छोड़ देता है। उसे देखकर भानामति और प्रद्युम्न दोनों ही प्रफुल्लित हो जाते हैं। तब प्रद्युम्न उस हिरण को अपने तीर से मार देता है तो भानामति कहती है कि ठहरों इसे मैं लेकर आती हूं। जब मायावती वहां से चली जाती है तो विकटासुर अपनी माया से भानामति बनकर हाथ में मृत हिरण लेकर प्रद्युम्न के पास पहुंच जाता है। तब प्रद्युम्न कहता है- माताश्री आप अतिशीघ्र आ गई? तब भानामति बना विकटासुर कहता है कि हां पुत्र प्रद्युम्न कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो अतिशीघ्र पूरे किए जाते हैं। यदि मैं इस हिरण को अतिशीघ्र उठाकर नहीं लाती तो अन्य वनपशु इसे ले जाते। अब मैं इसका स्वादिष्ट भोजन बनाकर तुम्हें खिलाऊंगी, लो इसे जाकर रख दो।
प्रदयुम्न वह हिरण हाथ में से ले लेता है तभी वहां पीछे से असली भानामति हिरण लेकर आती है तो वह यह दृश्य देखकर अचंभित हो जाती है। वह जोर से चीखती है- प्रद्युम्न। यह देखकर प्रद्युम्न भी अचंभित हो जाता तभी नकली भानामति असली भानामति पर अपने मायावी अस्त्र का प्रहार करती है। तत्काल भानामति भी अस्त्र का प्रहार करके उसे विफल कर देती है। प्रद्युम्न को समझ में नहीं आता कि कौन असली है। तभी विकटासुर अपने असली रूप में आकर वहां से भागकर आकाश में स्थित हो जाता है। प्रद्युम्न के हाथ में रखा मायावी हिरण सर्प में बदलकर प्रद्युम्न को जकड़ लेता है। यह देखकर भानामति घबरा जाती है।
फिर विकटासुर अपनी माया से सर्प में जकड़े प्रद्युम्न को आसमान में खींच लेता है। तब भानामति कहती है- प्रद्युम्न! अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करके विकटासुर का प्रतिकार करो। फिर प्रद्युम्न मंत्र पढ़कर नागपाश से मुक्ति होकर विकटासुर से मायावी युद्ध करने लगता है। फिर दोनों अग्निरूप धारण करके नीचे उतरकर मल्ल युद्ध करने लगते हैं। फिर वह संभरासुर को आसमान में फेंक देता है जहां पर वह अपने असली रूप में आ जाता है तब प्रद्युम्न कहता है कि विकटासुर जब तक तुम मेरी जीत का कथन संभरासुर को नहीं कर देते तब तक तुम्हारे प्राण तुम्हारे मुंड में अटके रहेंगे। ऐसा कहकर प्रद्युम्न एक दिव्य त्रिशूल छोड़ता है जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो जाता है। धड़ भूमि पर गिर पड़ता है और सिर आसमान में दूर चला जाता है।..यह देखकर भानमति हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण का धन्यावाद करती है। प्रद्युम्न अपनी माता भानामति को प्रणाम करता है।
उधर, कुंभकेतु अपने पिता संभुरासुर से कहता है कि पिताश्री अब आप विश्राम कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि विश्राम कैसे करूं। उधर विकटासुर प्रद्युम्न के साथ युद्ध कर रहा है फिर मैं विश्राम कैसे कर सकता हूं। यह सुनकर मायावती कहती है कि परंतु विकटासुर अभी तक आया कैसे नहीं?
इस पर संभरासुर कहता है कि अवश्य आएगा महारानी अवश्य। वह किसी भी पल आएगा और बताएगा कि स्वामी मैंने प्रद्युम्न का वध कर दिया है। कदाचित वह प्रद्युम्न का सिर भी प्रमाणित करने के लिए साथ लेकर आएगा। ऐसा कहकर संभरासुर जोर-जोर से हंसने लगता है।
तभी वहां पर प्रद्युम्न द्वारा त्रिशूल से फेंका गया विकटासुर का अकेला मुंड आकर कहता है- स्वामी, स्वामी।.. यह देखकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेत अचंभित हो जाते हैं। तब वह मुंड कहता है- स्वामी प्रद्युम्न अजेय है, प्रद्युम्न तुम्हारा काल है। प्रद्युम्न के हाथों तुम्हारी मृत्यु निश्चित है। विकटासुर ही क्या बल्कि आप भी प्रद्युम्न का बाल भी बांका नहीं कर सकते स्वामी।
यह सुनकर संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- विकटासुर तुमने मेरा और मेरी मायावी शक्तियों का अपमान किया है। तब विकटासुर का मुंड कहता है- क्षमा करें महाराज। मैं आपको वास्तविकता बताना चहता था। मुझे खेद है कि मैं आपकी आज्ञा का पालन नहीं कर सका। मुझे दुख है महाराज कि मैं आपकी सेवा पूरी तरह से नहीं कर सका।..
यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम मुझे अपना मुंह दिखाने का साहस कर रहे हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है- क्षमा कीजिये स्वामी मैं यहां आना नहीं चाहता था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम अपनी हार की कहानी मुझे सुनाने चले आए हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है कि मुझे प्रद्युम्न ने विवश किया स्वामी प्रद्युम्न ने। यह सुनकर संभरासुर कहता है फिर से तुम मेरे सामने शत्रु की प्रशंसा कर रहे हो।
इस पर विकटासुर कहता है कि क्षमा करें स्वामी मैं आपको वास्तविकता बताना चाहता हूं कि प्रद्युम्न ने मेरा वध करके मेरा सिर आपके पास भेज दिया है।....यह सुनकर संभरासुर अचंभित रह जाता है तब विकटासुर कहता है ये उसकी माया है माया। जब तक मैं प्रद्युम्न की जीत का समाचार आप तक नहीं पहुंचाता तब तक मेरे प्राण मेरे मुंड में अटके रहेंगे, स्वामी अटके रहेंगे। स्वामी मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार करें। ऐसा कहते हैं कि विकटासुर का मुंड भस्म हो जाता है। यह देखकर संभरासुर अचंभित और भयभित हो जाता है।
उधर, भानामति अपने पुत्र प्रद्युम्न की आरती उतारती है और तिलक लगाती है तब प्रद्युम्न कहता है कि माताश्री मैं धर्मयुद्ध आरंभ करने जा रहा हूं। आप मुझे आशीर्वाद दीजिये। भानामति उसे विजयीभव: पुत्र कहकर आशीर्वाद देती है और फिर युद्ध का उपदेश देकर कहती है कि शत्रु के घर में आचानक घुसकर उसे आश्चर्य चकित करो पुत्र। धर्मयुद्ध में जीत हमेशा धर्म की ही होती है। फिर भानामति कहती है कि संभरासुर के घमंड का प्रतीक है उसका विजय स्तंभ। तुम अपने अंतरचक्षुओं से देखो तो तुम्हें अवश्य नजर आएगा।
फिर उधर, संभरासुर को अपने विजयी स्तंभ के पास खड़ा हुआ बताया जाता है जहां पर वह खड़ा होकर अपने सभी पुत्रों को युद्ध के लिए एक-एक करके तलवार भेंट कर रहा होता। तलवार भेंट करते वक्त वह विजयी स्तंभ की ओर देखकर ही तलवार भेंट करता है।.. प्रद्युम्न अपने अंतरचक्षु से यह सब देख रहा होता है।
तब संभरासुर कहता है मेरे वीर पुत्रों हमारा ये विजय ध्वज और ये विजय स्तंभ हमारे लिए हमारे प्रणों से भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारी विजय और हमारी सत्ता का प्रतीक है। इसलिए हम इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा दिन-रात करते रहते हैं। परंतु अब मैं चाहता हूं कि इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा का मेरे चारों वीर पुत्र अपने सर लें। चारों पुत्र कहते हैं- अवश्य पिताश्री। तब संभरासुर कहता है कि तुम लोग ये बात भलिभांति समझ लो की चाहे महाप्रलय आ जाए परंतु इस विजय स्तंभ पर तनीक भी खरोच नहीं आनी चाहिये।
फिर इधर, भानामति कहती है- पुत्र तुमने त्रिलोक के सांप और उसके चारों सपोलों के साथ विजयी स्तंभ को भी देख लिया है। तुम्हें इस विजय स्तंभ को तोड़ना है परंतु उससे पहले तुम्हें संभरासुर का घमंड तोड़ना है। इसके लिए तुम्हें उसके घर में जाकर उसे भयभित करना है और उसे युद्ध के लिए ललकारना है। इस पर प्रद्युम्न कहता है- अवश्य माताश्री। अब मुझे आज्ञा दीजिये। मैं शत्रु के घर में घुसकर उसे ललकारने जा रहा हूं।
फिर उधर, राजदरबार में अपने सभी पुत्रों और दरबारियों से संभरसुर कहता है कि मेरा एक शत्रु चूहे की भांति बिल में छुपा बैठा है। फिर संभरासुर बताता कि प्रद्युम्न रसायन विद्या से युवा बन बैठा है और छल से उसने मेरे असुरों का वध कर दिया है। त्रिलोक पर आक्रमण करने से पहले हमें उसका वध करना अति आवश्यक है। इसलिए यदि वो पातल में भी छुपा बैठा हो तो उसे ढूंढ निकालो क्योंकि वह कायर कभी भी सामने से आक्रमण करने वाला नहीं है।
तभी वहां पर कुछ सैनिक गिर पड़ते हैं तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है सैनिकों ये क्या कर रहे हो। तभी वहां पर द्वार के बाहर से कुछ और सैनिक फेंके जाने लगते हैं। संभरासुर कहता है ये सब क्या हो रहा है? किसने सैनिकों को फेंककर हमारा अपमान किया है, हमारे दरबार का अपमान किया है? यह सुनकर एक सैनिक कहता है- क्षमा करें महाराज! कोई सिरफिरा युवक है जो अंदर आना चाहता था जब हमने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने हमें उठाकर यहां फेंक दिया है। यह सुनकर संभारासुर कहता है कि अवश्य ही उसकी मृत्यु उसे यहां खींच लाई है जाओ उसे इसी क्षण बंदी बनाकर हमारे सामने प्रस्तुत करो।
तभी वहां पर प्रद्युम्न खुद ही द्वार पर आ धमकता है और कहता है- हे दैत्यराज।....सभी उसकी ओर देखने लगते हैं। फिर प्रद्युम्न चलकर सभा के बीच में उपस्थित हो जाता है तो संभरासुर उसे उपर से नीचे तक देखता है तब प्रद्युम्न कहता है- मुझे कहीं भी जाने से और कहीं भी आने से कोई भी रोक नहीं सकता।
यह सुनकर संभरासुर कहता है- अच्छा तो बड़ा गुमान है तुम्हें अपने बाहुबल पर। सैनिकों ले जाओ इसे और डाल तो कारागार में। चार सैनिक प्रद्युम्न का हाथ पकड़ लेते हैं परंतु वह उसे खींच नहीं पाते हैं। प्रद्युम्न एक ही जगह खड़ा-खड़ा मुस्कुराता रहता है और फिर वह चरों सैनिकों को जब उठाकर फेंक देता है तो संभरासुर के चार पुत्र तलवार निकालकर उसके पास पहुंचते हैं तो संभरासुर कहता है- रुको। चारों पुत्र पुन: अपने सिंहासन पर बैठ जाते हैं।
तब संभरासुर कहता है- हे युवक मेरे पुत्र तुम पर मृत्यु बनकर टूट पड़े थे फिर भी तुम्हें भय नहीं लगा। तब प्रद्युम्न कहता है कि मृत्यु से भय कैसा, अपनी मृत्यु से तो कायर डरते हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- वाह तुम्हारी बहादुरी ने तो हमारा दिल जीत लिया। तब प्रद्युम्न कहता है- जीत तो मेरा भाग्य है असुरेश्वर, जिसे कोई बदल नहीं सकता। तब संभरासुर कहता है- हे तेजस्वी वत्स! अपना परिचय नहीं दोगे हमें? कौन हो तुम और हमारी इस सभा में क्यूं आए हो? इससे पहले तो हमने अपने साम्राज्य में तुम्हें पहले कभी नहीं देखा।
इस पर प्रद्युम्न कहता है कि मैं एक योद्धा हूं और आप ही के साम्राज्य में रहता हूं। मेरा नाम, मेरी पहचान मेरी शक्ति और विद्याएं हैं। मैंने सभी विद्याएं ग्रहण की है और उनका प्रदर्शन करने के लिए ही मैं आपकी सभा में उपस्थित हुआ हूं। यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं उनका प्रदर्शन करूं। यह सुनकर संभरासुर मायावती की ओर देखता है तो महाराजी मायावती कहती है- आज्ञा है।
फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां पर बादल पैदा कर देता है और उन बादलों में बिजली भर देता है। भयानक बिजलियां कड़कने लगती है। ये देखकर सभी घबरा जाते हैं। फिर प्रद्युम्न भूमि पर आग का गोला प्रकट कर देता है तो सभी अपने-अपने सिंहासन से उठकर दूर खड़े हो जाते हैं। सभी में भय व्याप्त हो जाता है। संभरासुर और मायावती ये देखकर भयभित और अचंभित रह जाते हैं। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां वर्षा उत्पन्न कर देता है। उस वर्षा से आग बुझ जाती है और फिर सबकुछ पहले जैसा हो जाता है। संभरासुर ये देखकर अवाक् रह जाता है। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से अदृश्य हो जाता है।
फिर वहां पर अपनी माया से वह भानमति और उसके हाथ में छोटा-सा बालक सभा में उपस्थित कर देता है। बालक हाथ में लेकर भानामति कहती है- महाराज महाराज।.. ये देखकर संभरासुर और मायावती अचंभित हो जाते हैं। भानामति रोते हुए अपने बालक को अपने हाथ में लेकर संभरासुर के पास पहुंचती है और कहती है- महाराज..महाराज मेरे बच्चे की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे पुत्र की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे प्रद्युम्न की रक्षा कीजिये।...यह देखकर संभरासुर को कुछ समझ में नहीं आता कि ये हो क्या रहा है तभी वहां पर भानामति अदृश्य हो जाती है और विशाल काया में प्रद्युम्न प्रकट होकर जोर-जोर से हंसता और फिर कहता है और माया दिखाऊं असुररेश्वर?
भयभित खड़ा असुरेश्वर संभरासुर पूछता है- कौन हो तुम? यह सुनकर प्रद्युम्न जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- कौन हो तुम बताते क्यों नहीं? यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर कहता है कि तुम मेरा उपहास कर रहे हो। जानते हो संभरासुर ऐसे लोगों को मृत्युदंड देता है मृत्युदंड। यदि तुम समझते हो कि संभरासुर तुम्हारी माया के प्रभाव में आ गया होगा तो ये तुम्हारी भूल है। मैं स्वयं महान मायावी हूं। यदि मैं चाहूं तो तुम्हें इसी पल मृत्यु के हवाले कर सकता हूं।
यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसते हुए कहता है परंतु आप ऐसा नहीं कर सकते असुरेश्वर। यह सुनकर संभरासुर कहता है- क्यों, क्यों नहीं कर सकता? तब प्रद्युम्न कहता है- क्योंकि आप ही ने तो मुझे अभय दिया है। इस पर संभरासुर कहता है- मैंने अभय दिया है तुम्हें! कब अभय दिया है तुम्हें? तुम्हें तो आज मैं पहली बार देख रहा हूं। हे मायावी युवक तुम मुझे भ्रमित करने का प्रयास मत करो।
यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि मैं आपको भ्रमित नहीं कर रहा हूं असुरेश्वर बल्कि आपका भ्रम तोड़ने का प्रायास कर रहा हूं। मैं आपको स्मरण करा देना चाहता हूं कि मेरी और आपकी भेंट पहले भी हो चुकी है। आप ही ने तो मुझे अपने हाथों में लेकर मुझे सीने से लगाया था और आपने ही मेरा नामकरण भी किया है। यह सुनकर संभरासुर और मायावती चौंक जाते हैं। फिर भी संभुरासुर आश्चर्य से पूछता है- मैंने तुम्हारा नामकरण किया है? यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि हां असुरेश्वर और जब युवराज कुंभकेतु जब मेरा वध करने आया था तब आप ही ने मुझे अभय दिया था। यह सुनकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेतु आश्चर्य चकित और भयभित हो जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
