August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित अपने डांस और एक्सप्रेशंस की वजह से बॉलीवुड में खास तौर पर पहचाना जाता है. 'तेजाब' फिल्म से बॉलीवुड में जबरदस्त पहचान बनाने वाली माधुरी दीक्षित अब भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के साथ जुड़ी हुई हैं और फिल्मों के साथ ही टीवी पर भी नजर आती हैं. माधुरी दीक्षित के वीडियो और फोटो समय-समय पर सोशल मीडिया पर धूम मचाते रहते हैं. माधुरी दीक्षित का एक पुराना डांस वीडियो (Madhuri Dixit) सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, जिसमें एक्ट्रेस अपने ही सुपरहिट सॉन्ग पर जमकर थिरक रही हैं.
    माधुरी दीक्षित का एक पुराना डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें माधुरी दीक्षित 'लज्जा' फिल्म के 'बड़ी मुश्किल' गाने पर कुछ इस अंदाज में स्टेप्स कर रही हैं कि दर्शक खूब हंगामा मचा रहे हैं. इस वीडियो में माधुरी दीक्षित के एक्सप्रेशंस भी देखने लायक है, और यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद भी किया जा रहा है. बता दें कि माधुरी दीक्षित ऑनलाइन डांस क्लासेज भी चलाती हैं.

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवत भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है।

    ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुजन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।

    अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिक मास को गहराई से जानते हैं-
    वैज्ञानिक आधार-

    अधिक मास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिक मास का नाम दिया गया है।
    अधिक मास का पौराणिक आधार-

    अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके।

    इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीर कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।

    मल मास क्यों कहा गया?-

    हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
    पुरुषोत्तम मास का नाम क्यों और कैसे पड़ा-

    अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिक मास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया।
    इसका महत्व क्यों है?-

    हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिक मास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन-मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिक मास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।
    अधिक मास में क्या करना उचित-

    आमतौर पर अधिक मास में हिंदू श्रद्धालु व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।
    पितृ पक्ष और नवरा‍त्रि प्रारंभ
    में
    लगभग एक मास का अंतर क्यों !

    वर्ष 2020 में पितृ पक्ष 02 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 17 सितंबर 2020 तक रहेगा, इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2020 तक मल मास रहेगा जिस कारण पितृ पक्ष और नवरा‍त्रि में लगभग एक मास का अंतर होगा। ऐसा संयोग इसके पूर्व 1963 और 2001 में हुआ था।

    शौर्यपथ । पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली," प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?" इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु, संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप के सभी पाप घुल जाएंगे।" गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती कहां हैं? इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं पाया जा सका। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं। जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप आता है उसे मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो स्वभाविक है। वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा अर्थात (मर्करी) विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में कैल्सियम और फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है। हड्डियों में गंधक (सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के साथ मिलकर पारद का निर्माण होता है। इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी को स्वच्छ रखने का काम करता है। धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन हो जाते हैं। हर हर गंगे

    भोपाल । शौर्यपथ । मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना के नाम पर लूट मचा रहे निजी अस्पतालों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कोरोना मरीज के इलाज के लिए छह लाख का बिल दिए जाने के मामले में भंवरकुआं स्थित एप्पल अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही तीन सरकारी डॉक्टर्स को भी नोटिस दिए गए हैं, जो अनुमति नहीं होने के बाद भी वहां इलाज के लिए गए। एप्पल अस्पताल से जब्त रिकाॅर्ड की प्रारंभिक जांच में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त हो सकता है। कलेक्टर के आदेश पर पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को अस्पताल में छापा मारा, इस दौरान बिल और रिकॉर्ड जब्त किए गए। रिकार्ड के आधार पर जूनी इंदौर एसडीएम और डॉ. अमित मालाकार ने जो जांच प्रतिवेदन तैयार किया। प्रतिवेदन में बताया गया है कि 22 दिन तक कोरोना मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती रखा गया और लगभग छह लाख रुपये का बिल थमा दिया। इतने भारी भरकम बिल के बावजूद एक लाख की दवाइयां अलग से मंगवाई। पीपीई किट, आइसोलेशन चार्ज और यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर प्रतिदिन 9,000 रुपये के हिसाब से राशि वसूल की गई। आईसीएमआर के निर्देश और डब्लूएचओ की गाइडलाइन के विपरीत एसिंप्टोमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीज होने के बावजूद चार बार आरटीपीसीआर कोविड टेस्ट निजी लैब से करवाया गया, इसमें भी निजी लैब में जो टेस्टिंग चार्ज लगता है, उससे अधिक शुल्क मरीज से वसूल किया गया।। एक बार भी ये टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद बार-बार करवाए गए। अस्पताल ने किस चार्ज के बदले वसूले कितने रुपये आइसोलेशन चार्ज (आइसोलेश में ही कोरोना मरीजों को रखा जाता है, फिर अलग से फीस क्यों)। 63 हजार रुपये यूनिवर्सल प्रोटेक्शन (अस्पताल को भी नहीं पता ये क्या है)। 63 हजार रुपये पीपीई किट के तीन हजार रुपये रोज के हिसाब से। 63 हजार रुपये डॉक्टर की विजिटिंंग फीस, सिर्फ 22 दिनों के लिए। 1 लाख रुपये सीटी स्कैन, नेबुलाइजेशन और अन्य जांच की फीस, जो हुई ही नहीं। 8850 रुपये डॉक्टरों की विजिट के नाम पर वसूले एक लाख रुपये हॉस्पिटल की लूट यही खत्म नहीं हुई बल्कि तीन से चार डॉक्टरों की रोजाना विजिट करवाकर प्रत्येक डॉक्टर की तीन हजार रुपये फीस चार्ज की गई और एक लाख की राशि तो डॉक्टरों की विजिट के ही रूप में मरीज से वसूली गई। छापे के दौरान हॉस्पिटल से जो बिल और रिकार्ड मिले थे, उनकी जांच में भी कई तरह की असमानता नजर आई। हर मरीज से लिए गए शुल्क की राशि में भी अंतर मिला। जांच में यह भी पता लगा कि मरीज से रोजाना तीन हजार रुपये प्रतिदिन यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर लिए गए। वहां भर्ती सभी मरीजों से यह राशि ली जा रही है। जांच समिति को जो बिल की कॉपी दी गई उसमें निजी लैब में करवाई गई कोरोना जांच का उल्लेख नहीं है। मरीज को दिए गए बिल में इसका भी शुल्क जोड़ा गया है। मरीज के परिजन ने कलेक्टर से की थी शिकायत सागर निवासी व्यक्ति के परिजन ने कलेक्टर से इसकी शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि 22 दिन तक भर्ती करने के बाद मरीज को छह लाख का बिल दिया गया। एक लाख रुपये की दवाई बाहर से मंगवाई, जिससे इलाज का कुल खर्च सात लाख हो गया। इसके बाद मंगलवार रात को जिला प्रशासन की समिति ने छापामार कार्रवाई की। शिकायत करने वाले मरीज के अलावा अन्य मरीजों के बिल का रिकाॅर्ड भी लिया गया था। लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने इस मामले में तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। साथ ही कहा गया है कि जवाब न मिलने या असंतोषजनक होने पर मेडिकल एक्ट 2019 की धारा 27 में प्रोफेशनल एवं एथिकल मिसकंडक्ट मानकर मध्यप्रदेश उपचर्या अधि. 1973 एवं नियम 1997 में पंजीयन निरस्त/ एफआईआर कराई जाएगी।

    बेमेतरा। शौर्यपथ । नवागढ़ में विदेशी शराब दुकानदार मनमाने दामों पर शराब बेचकर अपनी जेब भरने में जुटे हैं। मनमाने दामों की वजह से शराब के शौकीनों की जेब ढीली हो रही हैं। खुलेआम ग्राहकों को धमकी दी जा रही है। कहा जा रहा है कि लेना है तो लो वरना यहां से भग जाओ। इसके बाद भी आबकारी विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ठेकेदार भी कमा रहे मुनाफा (Bemetara)शहर में दुकानें शासकीय कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। यहां पर हालात यह है कि अंदर शासन द्वारा चलाई जा रही दुकानों में ठेकेदार के कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। वो लोग अपने हिसाब से रेट तय कर शराब बेच रहे हैं। ठेकेदार द्वारा चलाई जा रही शराब दुकानों पर एमआरपी से भी अधिक रुपए लिए जा रहे हैं। जबकि नियम के मुताबिक एमआरपी से अधिक में शराब नहीं बेची जा सकती है। सोशल डिसटेसींग का पालन नहीं (Bemetara)शराब दुकान में करोना नियम का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। सामाजिक दूरी सिर्फ और सिर्फ कागजों पर ही दिखाई देता है। महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच भी कोई पालन करना नहीं चाहते। कीचड़ से भरे हुए हैं रास्ते हो सकता है कोई अप्रिय घटना आबकारी विभाग से लाखों रुपए किराये मिलने के बाद भी दुकान मालिक ने शराब दुकान आने जाने के लिए रास्ते पर मुरुम डलवाना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। जिससे बरसात का पानी भर जाने के कारण बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। मदिरा प्रेमियों को कीचड़ में फिसल कर गिरने से कोई अप्रिय घटना घट सकता हैं। जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

    नई दिल्ली । शौर्यपथ । कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार देश की अर्थव्यवस्था पर केंद्र सरकार को कोशिश की है। वहीं इस बार राहुल गांधी ने एक अंग्रेजी पेपर में छपी खबरों को लेकर मोदी सरकार हमला बोला है। कहा कि जो मैं कई महीनों से बोल रहा था आरबीआई ने उसे माना है। आलम ऐसा है कि आज देश की अर्थव्यवस्था खतरे में आ गई है। राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा- ‘आरबीआई ने अब पुष्टि कर दी कि जिसकी मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं। सरकार को अब ज्यादा खर्च करने की जरूरत है, कर्ज देने की जरूरत नहीं है। गरीबों को पैसा दें, उद्योगपतियों का टैक्स मत माफ कीजिए। खपत के जरिए अर्थव्यवस्था को दोबारा शुरू करें। मीडिया के जरिए ध्यान भंग करने से न तो गरीबों की मदद होगी और न ही आर्थिक आपदा गायब होगी।’ अपने ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने एक अखबार की खबर को शेयर किया है। बता दें कि इस खबर में आरबीआई की रिपोर्ट है। जिसमें बताया गया है कि देश में खपत को गंभीर झटका लगा है। गरीब को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बता दें कि इससे पहले भी राहुल गांधी ने कोरोना संकट के दौर में अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र पर हमला बोले चुके हैं।

    नई दिल्ली। शौर्यपथ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का खुलकर नाम लेते हुए अपराधियों को चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय के हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन है। इसके गिरोह के 97 साथी पुलिस की हिरासत में हैं और ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। हाइलाइट्स: उत्तर प्रदेश में माफिया डॉन और विधायक मुख्तार अंसारी पर शिकंजा कसना शुरू सीएम योगी ने दो टूक कहा, मुख्तार के काले साम्राज्य के अंत का समय आ गया है सीएम योगी ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया, 97 साथी पुलिस हिरासत में ट्वीट में आगे कहा गया, उत्तर प्रदेश में कानून का शासन है, ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी । लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का खुलकर नाम लेते हुए अपराधियों को चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा कि माफिया मुख्तार अंसारी के काले-साम्राज्य के अंत का समय आ गया है। इसके गिरोह के 97 साथी पुलिस की हिरासत में हैं और ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय के हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन है। यहां के शब्दकोष में अवैध, अनैतिक और अराजक जैसे शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुख्तार अंसारी जैसा माफिया हो या कोई भी अन्य अपराधी, सरकार जीरो टॉलरेंस के साथ इनके कुकृत्यों पर पूर्णविराम लगाने को प्रतिबद्ध है। जनभावनाओं के अनुरूप कार्रवाई जारी रहेगी।' 'माफिया मुख्तार अंसारी के काले साम्राज्य के अंत का समय' एक अन्य ट्वीट में कहा गया, 'माफिया मुख्तार अंसारी के काले-साम्राज्य के अंत का समय आ गया है। अब तक इसकी ₹66 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त हो चुकी है। ₹41 करोड़ की अवैध आय की प्राप्ति का मार्ग बंद किया जा चुका है। इसके गिरोह के 97 साथी पुलिस की हिरासत में हैं। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।' मुख्तार के खिलाफ पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक कार्रवाई मुख्तार के खिलाफ पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही हैं। मऊ सदर विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी इन दिनों यूपी पुलिस के रेडार पर हैं। यूपी के पूर्वांचल में पैठ जमाए मुख्तार गैंग की कमर टूटती जा रही है। मुख्तार का खास नन्हे खां यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उधर मऊ पुलिस ने मुख्तार के करीबी 12 अपराधियों को जिला बदर कर दिया है। लखनऊ के डालीबाग में बनीं दो इमारतें हुईं जमींदोज लखनऊ के डालीबाग इलाके में बने मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे को जमींदोज कर दिया गया। एलडीए, प्रशासन और पुलिस टीम ने गुरुवार तड़के डालीबाग कॉलोनी में मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे वाली दो इमारतों को ध्वस्त कर दिया। ये इमारतें उसके बेटों के नाम दर्ज हैं। एलडीए ने 11 अगस्त को इमारत ढहाने का आदेश दिया था।

    नई दिल्ली । शौर्यपथ । ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाने वाले तीन युवकों को कोतवाली पुलिस ने किदवईपुरी इलाके में स्थित होटल के समीप से गिरफ्तार कर लिया। वहीं दो कॉलगर्ल और एक महिला दलाल को भी पुलिस ने पकड़ा है। कॉलगर्ल कोलकाता की रहने वाली है। दरअसल कोतवाली थानेदार रामशंकर सिंह को यह खबर मिली थी कि जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल कुछ लड़के किदवईपुरी इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने अपनी पहचान छिपाकर इसमें शामिल लड़कों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इन्हीं युवकों की निशानदेही पर एक महिला दलाल व दो कॉलगर्ल को पकड़ा गया। पकड़े गये युवकों में बुद्धा कॉलोनी बांसघाट का रहने वाला आलोक रंजन, पूर्णिया के रौटा का रहने वाला मन्नौवर आलम और परसा के ब्रह्मस्थान का कुंदन कुमार शामिल है। पुलिस ने सभी से पूछताछ की है। काफी दिनों से ये लोग पटना के अलग-अलग इलाकों में सेक्स रैकेट चला रहे थे।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई-चरोदा नगर निगम क्षेत्र में वैध कालोनी में सुमार श्याम नगर के रहवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। इस नवविकसित कालोनी में लगभग 80 प्रतिशत की बसाहट होने के बाद भी सड़क व नाली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोग तरस रहे हैं। बारिश के दिनों में कीचड़ भरी सड़कों के चलते लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
    निगम कार्यालय से चंद फर्लांग दूर पर श्याम नगर कालोनी बसी है। क्षेत्र के चुनिंदा वैध कालोनियों में शामिल श्याम नगर का दुर्भाग्य है कि यहां अब तक पक्की सड़क व नाली का अभाव बना हुआ है। निगम के द्वारा इसी कालोनी के पास अटल आवास का निर्माण कराया गया है। अटल आवास में तो सड़क व नाली बनी हुई है, लेकिन श्याम नगर में ऐसी सुविधा नहीं होने से लोगों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है। बारिश के इस मौसम में खासकर चारपहिया वाहन रखने वालों को कीचड़ भरी सड़क बेहद हलाकान कर रही है अनेक लोग तो बारिश के मौसम में अपने निजी वाहनों को कहीं और रहने वाले परिचित अथवा रिश्तेदार के घर पर खड़ी करने में अपनी भलाई समझते हैं।
    यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि श्याम नगर कालोनी में निगम द्वारा भवन अनुज्ञा प्रदान किया जाता है। विधिवत भवन अनुज्ञा प्राप्त करने पर मकान बनाने वालों से निगम को अच्छा खासा राजस्व भी मिलता है। बावजूद इसके सड़क नाली और बिजली जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिलने से रहवासियों में न केवल निगम के अधिकारी बल्कि चुने गए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी जमकर आक्रोश देखा जा रहा है।
    गौरतलब रहे कि साडा काल में सिंधी कालोनी के रूप में पुराने पूनम टाकीज के पास आवासीय भूखंड बेचे गए थे। नियमानुसार इस कालोनी के वैध श्रेणी में होने से अनेक लोगों ने यहां पर आवासीय भूखंड खरीदा और अपनी सुविधा के अनुसार मकानों का निर्माण कराया। कुछ बरस पहले इसका नाम सिंधी कालोनी से श्याम नगर किया गया। निगम कार्यालय, सिविल कोर्ट, तहसील, महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय सहित अनेक सामाजिक भवनों के आसपास होने के चलते यह कालोनी तेजी के साथ आबाद होने लगी है। आज की स्थिति में लगभग 80 प्रतिशत भूखंड में मकान बन चुके हैं। लेकिन सड़क व नाली के अभाव में रहवासियों को भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है।

    भिलाई नगर / शौर्यपथ / वन होम वन ट्री अभियान के अंतर्गत शहर में हरियाली के दायरे को बढ़ाने को लेकर की गई नगर पालिक निगम प्रशासन का प्रयास सफल होती नजर आ रही है। हरियाली लाने के लिए निगम प्रशासन ने जहां सड़कों के किनारे और गली मोहल्ले की खाली जगहों पर पौधे रोपने का कार्य किया है। पिछले दो महीने में 5412 पौधे रोपे हैं। वहीं व्यापारी, सामाजिक संगठन और लोगों ने 22754 पौधे निगम से लेकर अपने घर और आसपास की खाली जगहों पर लगाए हैं। इस तरह से अब तक निगम क्षेत्र में कुल 28166 पौधे रोपे जा चुके हैं।
    इस कार्य के लिए महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव और निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने आभार भी जताया है। अपने घरों के आसपास के पौधों की देखभाल कर बड़ा करने का आग्रह भी किया है।
    सड़कों के किनारे रोपे गए हैं पौधे
    इस वर्ष निगम ने प्रमुख सड़कों के किनारे और वार्डों के गली मोहल्ले की खाली जगहों पर नीम, कदंब, गुलमोहर, करंज, बादाम, स्टोपीडिया, तपेदिया रोजा सहित अन्य प्रजाति के 3738 पौधे रोपे हैं। नेहरू नगर से डबरापारा खुर्सीपार तक नेशनल हाइवे के किनारे गुलमोहर, कंदब, स्टोपीडिया, तपेदिया रोजा, कपोप के लगाए गए हैं। बांस से बनाई गई ट्री गार्ड से सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार जुनवानी से कोहका रोड किनारे, राधिका नगर स्लाटर हाउस, लिम्हा तालाब कोहका, मुक्तिधाम खम्हरिया, भिलाई नगर रेलवे स्टेशन स्थित गोठान में पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा जोन-1 विभिन्न क्षेत्रों में पौधे रोपे गए हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए टी गार्ड और कांटा तार से घेरा भी किया गया है
    डिवाइडर्स में रोपे पौधे
    निगम प्रशासन ने शहर के प्रमुख सड़कों के डिवाइडर पर पौधे लगवाए हैं। सुपेला चौक से डाॅ राजेन्द्र प्रसाद चौक पहुंच मार्ग के डिवाइडर में कनेर, चंपा और मालश्री के पौधे लगाए गए हैं। इसी प्रकार नंदनी रोड पावर हाउस से एसीसी चौक तक डिवाइडर पर, छावनी से हथखोज रोड के डिवाइडर में और नेहरू नगर चौक से डबरा तक नेशनल हाइवे के डिवाइडर में पौधे रोपे गए हैं।
    निगम के ने बांटे 22754 पौधे
    नगर पालिक निगम के उद्यान विभाग ने इस वर्ष जोन कार्यालयों के माध्यम से लोगों को 22,754 पौधे लोगों को मुफ्त में दिए हैं। नेहरू नगर स्थित कुसुम कानन उद्यान की नर्सरी में नीम, कदंब, पुत्रजीवा, करंज, गुलमोहर, आम, पीपल, बरगद, अमलतास, मौलश्री, जामुन, सीताफल, बादाम, अमरूद, अशोक सहित अन्य प्रजाति के पौधे तैयार किए हैं। जिसे जोन के माध्यम से वितरित की गई है।
    व्यापारियों ने ली पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
    सुपेला के व्यापारी अब्दुल, नेशनल हाइवे के रोड के किनारे के व्यापारी सौरभ सिंह, मोहम्मद शमसाद, मनीष सिंह सहित चेंबर आफ काॅमर्स के सदस्यों ने रोड किनारे अपने दुकानों के सामने रोपे गए पौधों की देखभाल करने का संकल्प लिया है। व्यापारियों ने आम लोगों से भी अपने घरों के आसपास के पौधों की देखभाल करने का आग्रह किया है।

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