
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
प्रदेश के मुखिया का गृह निवास भिलाई तीन में तथा गृह मंत्री का निवास दुर्ग में है ऐसे में रायपुर जाने के लिए इन्हें भी जर्जर और घटिया सडको से गुजरना पड़ता है . ये अलग बात है कि प्रोटोकाल की वजह से इन्हें ट्राफिक जाम का सामना नहीं करना पड़ता किन्तु जर्जर सडक से रूबरू जरुर होते है .
दुर्ग / शौर्यपथ / घटिया निर्माण सिर्फ चाँद दिनों का ही होता है परदेश में कई स्थानों पर घटिया निर्माण की आये दिन बात खुलती रहती है फिर भी कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया जिसमे घटिया निर्माण के जिम्मेदार एजेंसी व प्रभारी अभियंता पर कोई कार्यवाही हुई हो और इसी का परिणाम एक बार फिर सामने है . मामला अब कुम्हारी से गुज्रने वाली सड़क के निर्माण का है जो वर्तमान में आम जनता के लिए परेशानी का सबब तो है ही गंभीर दुर्घटना की आशंका को भी नहीं नकारा जा सकता .
रायपुर और दुर्ग के बीच आवाजाही करने वालों के लिए कुम्हारी का स्टेशन चौक परेशानी का सबब बना हुआ है। शाम ढलने के साथ ही यहां पर दोनों ओर वाहनों का लंबा जाम लग जाता है। यह स्थिति रात के 9 बजे तक बनी रहती है। लोगों को आधा से एक घंटा इंतजार करने के बाद ही आगे निकल पाने में कामयाबी मिल पा रही है। यह स्थिति बीमार मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस के लिए बेहद ही विकट बन रही है। शाम 5 बजे के बाद जब यातायात में तेजी आ जाती है तो जाम की वजह से रायपुर छोर में वाहनों की कतार खारून टोल प्लाजा को पार करके टाटीबंध तक लग जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। दुर्ग की ओर जंजगिरी मोड़ तक वाहनों की लंबी कतार लग जाने से रायपुर से भिलाई अथवा दुर्ग का सफर दो से तीन घंटे में तय हो रहा है।
कुम्हारी के स्टेशन चौक के दोनों ओर फोरलेन सड़क पर जाम की समस्या बढ़ गई है। लॉकडाउन में बनी सड़क बारिश की इस पहली झड़ी में फिर से जर्जर हो जाने से वाहनों का लग रहा जाम एक तरह से जी का जंजाल साबित हो रहा है। यातायात की बिगड़ी हुई दशा यहां बन रहे फ्लाई ओव्हर का कार्य प्रगति पर होने के साथ बरकरार है।
जाम की इस स्थिति के लिए काफी हद तक स्टेशन चौक के आसपास की सड़क का जर्जर हो जाने को जिम्मेदार माना जा रहा है। यहां पर फ्लाई ओव्हर का निर्माण चल रहा है जिसके लिए फोरलेन के मेन कैरिज-वे को कब्जे में लेकर दोनों ओर के पुराने सर्विसलेन की चौड़ाई को बढ़ाकर दोनों दिशा में यातायात बहाल रखा गया है। एक ही सड़क पर सभी तरह के वाहनों का दबाव बने रहने से उसकी दशा और दिशा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कुछ दिन पूर्व लॉकडाउन के दौरान कृष्णा हास्पिटल के आसपास की सड़क को बनाया गया था। जिससे शाम को लगने वाली जाम से आंशिक मुक्ति मिली थी। लेकिन अभी लगी बारिश की अनवरत झड़ी के चलते लॉकडाउन में बनी सड़क फिर से जर्जर हो गई है। इसके साथ ही वाहनों की रफ्तार कम हो जाने से फिर एक बार जाम की समस्या बढऩे लगी है। जाम की यह समस्या फ्लाई ओव्हर निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही बनी हुई है। इससे दुर्घटना होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।
हो चुकी है कई जानलेवा दुर्घटना
फ्लाई ओव्हर निर्माण के साथ ही सड़क के सिमटकर आधी हो जाने के चलते स्टेशन चौक के आसपास लगातार दुर्घटनाएं पेश आ रही है। इन दुर्घटनाओं में अनेक लोगों को जान तक गंवानी पड़ी है। जिस तरह की स्थिति यहां पर शाम के वक्त बन रही है उससे जानलेवा दुर्घटना होने की संभावना बनी हुई है। शाम को जाम की सबसे भयावह स्थिति रायपुर से दुर्घ की दिशा में देखी जा रही है। इससे राहत के लिए ट्रेफिक पुलिस के द्वारा दुर्ग से रायपुर की दिशा में जा रहे वाहनों को कृष्णा हास्पिटल से पहले आधे-आधे घंटे के अंतराल में रोककर रायपुर से दुर्ग की ओर गुजरने वाले वाहनों को दोनों दिशा की सड़क से गुजारते हैं। इससे स्थानीय वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।
रायपुर / शौर्यपथ / क्वॉरेंटाइन सेंटर में हुई गड़बड़ी को लेकर भाजपा के आरोपों का कांग्रेस ने कड़ा और तीखा जवाब दिया है ।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार पारदर्षिता के साथ काम कर रही है।जनता को सरकारी खजाने से होने वाली खर्च की जानकारी लेने का अधिकार दिया गया है यही वजह है क्वॉरेंटाइन सेंटर को लेकर आरटीआई में मांगी गई जानकारी भी बिना रोक-टोक दी गई है। क्वॉरेंटाइन सेंटर में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।कोरोना महामारी संकटकाल में प्रवासी मजदूरों के आने जाने ,रहने,खाने पीने ,स्वास्थ्य, को लेकर किसी भी प्रकार की कोई कमी ना हो इसके लिए स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को कवारेन्टीइन सेंट्ररो की आवश्यकतओं को पूरा करने का अधिकार दिया है। राज्य में 20हजार से अधिक कवारेन्टीन सेंटर में साढ़े सात लाख प्रवासी मजदूर की रहने खाने की व्यवस्था की गई थी। इन क्वॉरेंटाइन सेंटरों में प्रवासी मजदूर क्वॉरेंटाइन अवधि को पूरा कर सकुशल घर पहुंच गए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जिस भाजपा की केंद्र सरकार पीएमकेयर फंड की जानकारी छिपा रही है पीएमकेयर फंड को आरटीआई के दायरे से बाहर रखी है।केयर फड में जमा की गई राशि एवं खर्च की राशि की जानकारी में गोपनीयता बरत रही है। वह भाजपा किस मुहँ से पारदर्शी तरीके से काम कर रही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के ऊपर आरोप लगा रही है।मोदी सरकार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की पारदर्षिता की नीति को अपनाना चाहिए।पीएम केयर फंड की जानकारी जनता को देना चाहिए। दुर्भाग्यजनक है जो जनता पीएमकेयर फंड में मुक्त हस्त से सहयोग की है उन्ही को जानकारी देने से मोदी भाजपा बच रही है।पीएमकेयर फंड में जानकारी छुपाने से स्पष्ठ हो गया की दाल में कुछ काला नही बल्कि पूरी दाल ही काली है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा नेताओं में दम है तो आरटीआई लगाकर पीएम केयर्स फंड की जानकारी लेकर बताये? पीएम केयर्स फंड में अब तक कितनी राशि जमा हुई है? कितनी राशि खर्च की गई है?पीएम केयर्स फंड से मजदूरों के लिए एक हजार करोड़ खर्च करने का दावा किया जा रहा है देशभर के कितने मजदूरों के खाते में कितनी कितनी राशि जमा हुई है जानकारी लेकर बताएं? कोरोना महामारी संकटकाल में छत्तीसगढ़ भाजपा के सांसद विधायक नेताओं का योगदान शून्य रहा है। भाजपा के सांसद क्वॉरेंटाइन सेंटर में सेवा कर रहे अधिकारियों को बेल्ट से मारने की धमकी देते रहे डराते रहे चमकाते रहे?छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी नियंत्रित करने में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के साथ साथ आम जनता और सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है इसको भुलाया नहीं जा सकता। कुछ एक क्वॉरेंटाइन सेंटर में हुई गड़बड़ी को लेकर प्रदेश भर में गड़बड़ी का आरोप लगाना भाजपा की दूषित राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा आपदा में भी राजनीति करने की अवसर तलाश रही है। झूठे मनगढ़ंत आरोप लगाने की राजनीति कर रही है।
शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव तथा उनसे जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों पर विचार-विमर्श के दौरान औद्योगिक प्रतिनिधयों ने साहसिक पर्यटन शुरू करने और क्वारंटीन अवधि कम करने के सुझाव दिए हैं। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर की मौजूदगी में होटल, राफ्टिंग, एयरो स्पोट्र्स, सीआईआई और फिक्की के 20 से अधिक प्रतिनिधियों की शनिवार को यहां वचुर्अल बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने यह सुझाव दिया। श्री जावलकर ने सरकार की तरफ से उद्योग के कर्मियों को उपलब्ध करायी जा रही मदद की जानकारी दी और उद्योग से सरकार को सहयोग करने की अपेक्षा जाहिर की। होटल उद्योग प्रतिनिधियों ने कोविड टेस्ट के सम्बंध में असमंजस की स्थिति से अवगत कराया। साथ ही पर्यटकों हेतु क्वारंटीन अवधि सात दिन से कम किये जाने का सुझाव दिया गया। राज्य के बॉर्डर पर पर्यटक सहायता केन्द्र भी स्थापित किये जाने के सुझाव दिए गए। शादी समारोह व अन्य कार्यक्रमों से सम्बन्धित आयोजनों में अधिकतम 5० अतिथियों की सीमा के स्थान पर प्रति वर्ग मी० के आधार पर अतिथियों की संख्या के निधार्रण करने का सुझाव दिया गया है।
ऑनलाईन बैठक के दौरान राफ्टिंग व साहसिक पर्यटन से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को खोले जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही ट्रैकिंग गतिविधियों को खोलने के लिए वन विभाग को दिशा-निदेर्श जारी किये जाने का भी सुझाव दिया गया। साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के संचालन हेतु एडवेंचर टुअर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एटीएएआई) द्वारा तैयार की गई गाईडलाइन्स को प्रयोग में लाने का सुझाव दिया गया। सीआईआई के प्रतिनिधि ने पर्यटकों से जुड़ी समस्याओं एवं उनके समाधान के लिए कॉल सेंटर स्थापित किये जाने का सुझाव दिया। फिक्की के प्रतिनिधि द्वारा राज्य में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटकों को इनसन्टिवध्डिस्काउंट दिये जाने के साथ ही सकारात्मक प्रचार अभियान चलाये जाने का भी सुझाव दिया गया। कोविड से सम्बन्धित सभी प्रोटोकॉल गाईडलाइन्स पर स्पष्ट आदेश जारी किये जाने के सुझाव दिये गये, जिसमें किसी प्रकार का असमंजस न हो। श्री जावलकर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग के कार्मिकों को तात्कालिक सहायता के रूप में 1000 रुपये प्रति कार्मिक उपलब्ध कराये जाने हेतु धनराशि जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है, जिसमें लगभग 2.5० करोड़ की धनराशि वितरित भी की जा चुकी है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि अधेड़ उम्र में लोगों का व्यवहार रूखा और चिड़चिड़ा हो जाता है। लेकिन, अधेड़ उम्र के लोग असल में अन्य उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा सकारात्मक होते हैं। एक हालिया शोध के अनुसार 40 से 60 साल की उम्र के लोग युवाओं और बुजुर्गों की तुलना में कहीं ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में 30,000 लोगों पर किए गए शोधों की समीक्षा करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि अधेड़ उम्र के लोग जीवन में अच्छी चीजें होने लेकर ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधेड़ लोग जो अपने जीवन में मूल्यों और संतुष्टि को ज्यादा कीमती समझते हैं वे अच्छी बातों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, शोध में यह पता चला कि जर्मनी के लोग अधेड़ उम्र में भी सकारात्मक नहीं होते। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम चोपिक ने कहा, जैसे-जैसे लोग परिपक्व होते हैं वे अपने काम में अधिक सक्षम हो जाते हैं।
सफलता उनके लिए थोड़ी आसान हो जाती है क्योंकि वे अपने जीवन के विभिन्न कार्यों में महारत हासिल कर लेते हैं, इसलिए वे अधेड़ उम्र तक पहुंचते ही अधिक आशावादी बनने लगते हैं। अधेड़ उम्र के लोग जीवन में आगे बढ़ने पर कम ध्यान केंद्रित करते हैं और जो वर्तमान में मौजूद है उसे खुशी से जीने को कोशिश करते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में यह सकारात्मक रवैया 60 साल की उम्र के बाद घटने लगता है। प्रोफेसर चोपिक ने जर्नल ऑफ रिसर्च इन पर्सनैलिटी ने बताया कि सकारात्मक रवैया स्वास्थ्य और लोगों के नजरिये से जुड़ा होता है इसलिए उम्र बढ़ने पर इसमें कमी आती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / परिवार बढ़ाने की कोशिशों में जुटे पुरुष जरा गौर फरमाएं। इजरायल में हुए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि रात में टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने या लैपटॉप पर दोस्तों के साथ चैटिंग करने की आदत पिता बनने की खुशी छिन सकती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण शुक्राणुओं के उत्पादन और गुणवत्ता में आना इसकी मुख्य वजह है।
तेल अविव स्थित असुता मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने ‘स्लीप एंड फैटीग सेंटर’ में नपुंसकता का इलाज करा रहे 116 पुरुषों के शुक्राणुओं के नमूने इकट्ठे किए। ये पुरुष 21 से 59 साल के आयुवर्ग में आते थे। सभी प्रतिभागियों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल और सोने की आदत से जुड़ी एक प्रश्नावली भरवाई गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन ढलने के बाद स्मार्टफोन, टीवी या लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल करने से न सिर्फ शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। शुक्राणुओं के तैरकर अंडाणुओं तक पहुंचने और उनके आकर्षित करने की क्षमता भी घट जाती है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. अमित ग्रीन के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाले नीली रोशनी स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है। इससे व्यक्ति देर रात तक जगा तो रहता ही है, साथ ही उसमें स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव भी बढ़ जाता है। दोनों ही अवस्थाएं शुक्राणुओं की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। व्यक्ति को यौन उत्तेजना में कमी की शिकायत सता सकती है।
‘जर्नल स्लीप’ के हालिया अंक में प्रकाशित में ग्रीन ने शाम से ही स्क्रीन का इस्तेमाल घटाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी कोशिकाओं में विभाजन की प्रक्रिया को भी अनियंत्रित कर सकती है। इससे कैंसर से मौत के खतरा 50 फीसदी तक बढ़ जाता है।
जेब में न रखें मोबाइल-
-सितंबर 2017 में टेक्नियॉन यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए अध्ययन में स्मार्टफोन को पैंट की जेब में रखने से बचने की नसीहत दी गई थी। शोधकर्ताओं का दावा था कि फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणें शुक्राणुओं को नष्ट करती हैं। इससे व्यक्ति को नपुंकता की शिकायत हो सकती है।
सावधान-
-मोबाइल-टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है
-स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्राव बढ़ाती है, इससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है
लत ये गलत लग गई-
-75 फीसदी से अधिक पुरुष फोन को सिरहाने रखकर सोते हैं
-पार्टनर के मुकाबले 02 गुना ज्यादा समय गैजेट के साथ बिताते हैं
-25 प्रतिशत पुरुष पत्नी के बजाय स्मार्टफोन की शक्ल देखकर सोते हैं
-33 फीसदी रिश्तों में सुधार के लिए फोन की लत से काबू पाना चाहते हैं
खाना खजाना /शौर्यपथ / सन्डे को अगर आप कुछ स्पेशल बनाने की सोच रहे हैं, तो आज बनाएं तंदूरी गोभी टिक्का-
सामग्री
गोभी- 1
गाढ़ा दही- 1 कप
लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
गरम मसाला पाउडर- 1 चम्मच
चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
हल्दी पाउडर- 1/2 चम्मच
धनिया पाउडर- 1 चम्मच
अजवाइन- 1/2 चम्मच
कसूरी मेथी- 1 चम्मच
बेसन- 3 चम्मच
तेल- आवश्यकतानुसार
नमक- स्वादानुसार
विधि
गोभी की कलियों को काटकर धो लें और चार से पांच मिनट तक भाप में पका लें। गोभी को भाप पर पकाने से मसाले बेहतर तरीके से उसमें समा पाते हैं। भाप पर पकी हुई को गोभी को एक बड़े से बाउल में निकाल लें। उस बाउल में तेल के अलावा अन्य सभी सामग्री डालें और हल्के हाथों से मिलाएं। बाउल को ढककर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। कड़ाही में आवश्यकतानुसार तेल गर्म करें और उसमें गोभी के टुकड़ों को डालें। मध्यम आंच पर कुछ मिनट तक पकाएं। तली हुई गोभी एक बाउल में निकालें। कोयले का एक छोटा-सा टुकड़ा गर्म करें। जब कोयला लाल हो जाए तो उसे एक स्टील की कटोरी में डालें। इस कटोरी को तंदूरी गोभी वाले बाउल के बीच में रख दें। कटोरी में एक चम्मच घी डालें और बाउल को एक मिनट के लिए ढक दें। ऐसा करने से कोयले का फ्लेवर गोभी टिक्का में समा जाएगा। तंदूरी गोभी को सर्विंग प्लेट में डालें। हरी चटनी और प्याज के छल्लों के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद में तुलसी को रोग नाशक जड़ी-बूटी माना जाता है। तुलसी को कई बीमारियों में दवा की तरह इस्तेमाल करने के साथ स्किन इन्फेक्शन में भी तुलसी की पत्तियों को इलाज किया जाता है। आइए, जानते हैं तुलसी के फायदे-
तुलसी के पोषक तत्व
तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व तुलसी की पत्तियों में विटामिन और खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन आदि पाए जाते हैं। इसके साथ ही तुलसी में सिट्रिक, टारटरिक एवं मैलिक एसिड पाया जाता है।
तुलसी के फायदे
खांसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसी जाती है।
श्वास रोगों में तुलसी के पत्ते काले नमक के साथ सुपारी की तरह मुंह में रखने से आराम मिलता है।
तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है।
तुलसी के पत्तों के साथ 4 भुनी लौंग चबाने से खांसी जाती है।
तुलसी के कोमल पत्तों को चबाने से खांसी और नजले से राहत मिलती है।
खांसी-जुकाम में - तुलसी के पत्ते, अदरक और काली मिर्च से तैयार की हुई चाय पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है।
10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।
फेफड़ों में खरखराहट की आवाज़ आने व खांसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियां 4 ग्राम मिश्री के साथ देते हैं।
काली तुलसी का स्वरस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खाँसी एकदम शान्त होती है।
10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी, अस्थमा एवं श्वांस रोगों को ठीक किया जा सकता है।
स्किन केयर के लिए तुलसी
तुलसी पिंपल्स और एक्ने पर भी काम करता है। तुलसी रक्त में से टॉक्सिन्स और अशुद्धि हटा कर उसे साफ़ करने का काम करता है। इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो एक्ने को कम करता है। आप इसके लिए तुलसी पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और 10 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं और फिर सादे पानी से धो लें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /खुशहाली का संदेश देने वाला त्योहार ओणम दक्षिण भारत विशेषकर केरल में बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जो केरल के राजा महाबली की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। दस दिनों तक इस उत्सव को उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार संपूर्णता से भरा हुआ है। हर घर को यह पर्व खुशियों से भर देता है। प्रत्येक घर को फूलों से सजाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जिसमें पूजा मंदिर में नहीं बल्कि घर में की जाती है।
इस त्योहार को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार केरल में महाबली नामक राजा राज्य करते थे। भगवान श्री हरि विष्णु ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में तीनों लोक को माप लिया। भगवान वामन ने जब तीसरा पग रखा तो राजा बलि पाताल लोक चले गए। राजा बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा कि प्रभु मैं वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का समय चाहता हूं। माना जाता है कि ओणम पर राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और अपनी प्रजा के लिए उमंग तथा खुशियां लाते हैं। इस त्योहार में भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। ओणम मलयाली हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मोहर्रम में सड़कें वीरान रही वहीं लोगों ने घर में ही रहकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
जिले में अबकी बार एक से 10वीं तक निकलने वाले गश्ती, मातम और इमामबाड़ा से निकलने वाला शाही जूलूस कोरोना के कारण स्थगित रहा। राज्य सरकार के निदेर्शों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सख्ती के कारण जहां वह इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के गम को नहीं मना सके वहीं उन्हें इस बात का दुख था कि ऐसा न कर पाने के कारण कहीं कोई अनहोनी न न हो जाये।इस बार मुहर्रम का जूलूस स्थगित हो जाने से सबसे ज्यादा ठेले, मुहर्रम में ताजिया बनाने वालों और अलम उठाने वालो पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर का मुहर्रम पूरे प्रदेश में सबसे मशहूर है और पूवीर् उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिले अपने मुहर्रम के कार्यक्रम गोरखपुर में स्थित इमाम बाडा के मियां साहब फरूख अदनान शाह के निदेर्शों पर होता है।
शिया और सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम अपने-अपने तौर तरीकों से मनाते हैं। शिया समुदाय के लोगों ने इस दौरान महिलाओं का मजलिस सम्पन्न हुआ जिसमें शहीदों के बलिदान को याद किया गया जबकि सुन्नी समुदाय न कोविड-19 के आदेशों का पालन करते हुए अपने घरों में शहीदे कर्बला पर कार्यक्रम किये गए। 9वीं मुहर्रम को आज शनिवार को इमाम बाडाा पर रखे जाने वाले ताजिये नजर नहीं आये। शहीदों के याद में लोगों को शर्बत भी नहीं पिलाया गया।
इसके अलावा इमाम बाडें में रखे सोने और चांदी के ताजिए का दर्शन करने वाले जो विभिन्न प्रान्तों से भी गोरखपुर आते थे वह नहीं आ सके। इस ताजिए का दर्शन मुहर्रम के एक से दसवी दिन तक किया जाता रहा है। 10वीं मुहर्रम का दरवाजा बन्द हो जाने के बाद अगले साल ही दर्शन करने मौका मिल पायेगा।
खेल / शौर्यपथ / पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इसी साल 15 अगस्त के दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है, लेकिन क्रिकेट इतिहास में उनकी यादगार पारियां हमेशा याद की जाएंगी। 2004 में क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने के बाद उन्होंने अपना और खेल दोनों का कद ऊंचा किया है। हाल ही में इंग्लैंड के स्पिनर मोंटी पनेसर ने धोनी से जुड़ी यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा, धोनी के साथ मेरे सबसे पसंदीदा पल वे थे, जब मैं मुंबई के लिए खेल रहा था।
मोंटी पनेसर ने बताया, ''मुझसे धोनी का एक कैच छूट गया था। गेंद मुझसे 10 मीटर दूर थी। मेरी आंखों पर सूरज पड़ रहा था। मैं गेंद को जज नहीं कर पाया। इसके दो गेंद बाद मैंने ही उनका कैच पकड़ा। यही क्रिकेट है, एक मिनट में जीरो और एक मिनट में हीरो। धोनी हमेशा हीरो रहेंगे।''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है धोनी की पाकिस्तान के खिलाफ शतकीय पारी बेस्ट थी। उस समय वह शोएब अख्तर को चौके-छक्के लगा रहे थे। हम सब चकित थे कि वह यह सब कैसे कर रहे हैं।'' पनेसर फैसलाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ धोनी की 148 रनों की पारी का जिक्र कर रहे थे।
इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर ने कहा, ''मुझे याद है मैं कोलकाता में उन्हें गेंदबाजी कर रहा था। उन्होंने मेरी गेंद पर एक शानदार छक्का मारा। गेंद मीलों दूर गई। आम बल्लेबाज के मुकाबले छक्के मारने की धोनी की क्षमता 20 मीटर अधिक है।''
पनेसर ने कहा, ''धोनी हमेशा कूल और शांत खिलाड़ी रहे हैं। उन्हें देखकर लगता है कि जिंदगी कितनी धीमी गति से चल रही है। अधिकांश क्रिकेटरों में यह गुण नहीं होता, लेकिन धोनी अपने पूरे करियर में ऐसे ही बन रहे। यही बात उन्हें महान बनाती है।'' महेंद्र सिंह धोनी 19 सितंबर से यूएई में शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2020) में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की कप्तानी करते हुए नजर आएंगे।
बता दें कि आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 के बाद से धोनी ने कोई क्रिकेट नहीं खेला है। ऐसे में धोनी के फैन्स अब उन्हें आईपीएल में देखने को लेकर काफी उत्साहित हैं। धोनी की कप्तानी में सीएसके तीन बार आईपीएल का खिताब अपने नाम कर चुकी है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
