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मनोरंजन / शौर्यपथ /सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई द्वारा की जा रही पूछताछ में शामिल होने के लिए रिया चक्रवर्ती का भाई शौविक चक्रवर्ती गुरुवार को डीआरडीओ के गेस्ट हाउस पहुंचे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब मामले की जांच कर रही सीबीआई रिया चक्रवर्ती के परिवार के किसी सदस्य से पूछताछ कर रही है। शौविक सांताक्रूज के कलीना स्थित डीआरडीओ के गेस्ट हाउस में सुबह करीब सवा 10 बजे एक कार में सवार होकर पहुंचे। मालूम हो कि यहीं पर सीबीआई के अधिकारी रुके हुए हैं।
पिछले हफ्ते उच्चतम न्यायालय ने सुशांत मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले को सही ठहराया था। शौविक से पहले, सीबीआई ने गुरुवार को सिद्धार्थ पिठानी को लगातार सातवें दिन पूछताछ के लिए बुलाया था। पिठानी सुशांत के साथ उनके घर में रहते थे।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पिठानी डीआरडीओ के गेस्ट हाउस में सुबह करीब 9 बजे एक कैब में सवार होकर पहुंचे थे। जांच एजेंसी ने बुधवार को भी पिठानी से 12 घंटे से भी अधिक समय तक पूछताछ की थी। सुशांत जिस वॉटरस्टोन रिजॉर्ट में कुछ समय के लिए रुके थे, वहां का मैनेजर भी बुधवार को डीआरडीओ के अतिथि गृह में आया था। बांद्रा पुलिस का एक दल भी बुधवार को यहां आया था और करीब एक घंटे रुका था।
गौरतलब है कि बांद्रा के मॉन्ट ब्लैंक अपार्टमेंट्स में 14 जून को 34 वर्षीय सुशांत की लाश उनके कमरे में मिली थी। घटना के वक्त पिठानी, खानसामा नीरज सिंह और घरेलू सहायक दीपेश सावंत घर में ही मौजूद थे। कूपर अस्पताल जहां पर सुशांत की अटॉप्सी हुई थी वहां बुधवार को सीबीआई का दल गया था।
जांच एजेंसी ने शुक्रवार को पिठानी और नीरज सिंह के बयान दर्ज किए थे। शनिवार को सीबीआई का दल पिठानी, नीरज और सावंत को लेकर सुशांत के फ्लैट पर गया था जहां 14 जून को हुई घटनाओं की कड़ियों को सिलसिलेवार समझने के लिए घटनाक्रम को री-क्रिएट किया गया। इसके बाद तीनों को रविवार को फिर से फ्लैट पर ले जाया गया और बाद में डीआरडीओ के गेस्ट हाउस में उनसे पूछताछ हुई।
खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी में मैच को खत्म करने की जो स्किल्स थी, वो किसी और में नहीं है। इस मामले में उन्होंने धोनी को 'बीस्ट' बताया है। आरपी सिंह ने फिनिशर के तौर पर एक और खिलाड़ी का नाम लिया है, जिसने अपने देश को कई मैच जिताए और वो हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल बेवन, लेकिन साथ ही कहा कि धोनी जैसा कोई फिनिशर नहीं रहा है। अपने करियर में धोनी ने ज्यादातर नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी की है।
'खुद धोनी नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते थे'
आरपी सिंह का मानना है कि धोनी अगर बैटिंग ऑर्डर में ऊपर खेलने आते तो उनका रिकॉर्ड और भी बेहतर होता, लेकिन वो खुद लोअर ऑर्डर में खेले, जिससे वो दबाव में भी टीम को जीत दिला सकें। Cricket.com को दिए इंटरव्यू में आरपी सिंह ने कहा, 'अगर मैं गलत नहीं हूं तो धोनी ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि वो नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते हैं, लेकिन टीम ने सोचा था कि लोअर ऑर्डर में दबाव में उनसे बेहतर खेलने वाला और कोई नहीं है। अगर आप इस खेल के इतिहास के बारे में बात करें तो आपको कभी धोनी जैसा कोई खिलाड़ी नहीं मिलेगा, जिसने लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करके अपनी टीम को इतना सारे मैच जिताए हों।'
'अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं'
उन्होंने आगे कहा, 'हम माइकल बेवन के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन एमएस एकदम अलग तरह के 'बीस्ट' थे इस मामले में।' आरपी सिंह ने धोनी के ऑफ-फील्ड नेचर के बारे में भी बात की और कहा कि वो हमेशा से जमीन से जुड़े शख्स रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वो हमेशा से जमीन से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। हम इसकी शिकायत करते रहते हैं कि वो हमारे फोन कॉल्स नहीं उठाते, एक बार उन्होंने मुनफ पटेल और मुझसे कहा था, जब मैं रिटायर हो जाऊंगा तो आधी रिंग में ही फोन उठा लूंगा, अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं।'
धर्म संसार / शौर्यपथ / बलरामजी को विष्णुजी बताते हैं कि उसे शक्ति माता दुर्गा ने वर दिया है। यदि तुम वध करोगे तो ये अनुचित होगा। इसीलिए शिवजी के आशीर्वाद से कामदेव ने श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वीलोक पर संभरासुर का वध करने के लिए जन्म लिया है जो सर्वथा उचित है। मैं अलग-अलग माध्यमों से अधर्मियों का संहार करता हूं इस समय में प्रद्युम्न के माध्यम से संभरासुर का वध करूंगा। यही विधि का विधान है बलराम। यही भगवान शिवजी की इच्छा है। इसलिए प्रद्युम्न के लिए आतंकित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बलराम वो सुरक्षित है बिल्कुल सुरक्षित। यह सुनकर बलरामजी प्रसन्न हो जाते हैं। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम श्रीकृष्ण वासुदेव का कहना मानो अत: तुम्हें पानी रोकने की आवश्यकता नहीं है। इस पर बलरामजी कहते हैं- जैसी आपकी आज्ञा भगवन। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम अब तुम मेरा ये दर्शन भूल जाओगे और यह भी भूल जाओगे की तुम शेषनाग का अवतार हो।
फिर श्रीकृष्ण और बलराम खुद को उसी नदी के किनारे खड़ा पाते हैं तब बलरामजी कुछ समझ नहीं पाते हैं कि ये हुआ क्या। तभी श्रीकृष्ण कहते हैं- दाऊ भैया अब आप हल निकाल लीजिये। यह सुनकर बलरामजी कहते हैं- हल! इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- हां दाऊ भैया हल निकाल लीजिये।..बलरामजी को कुछ समझ में नहीं आता है परंतु वे श्रीकृष्ण की आज्ञा मानकर हल निकाल लेते हैं तब सभी नदियों का प्रवाह पहले जैसा हो जाता है। फिर श्रीकृष्ण बलरामजी से कहते हैं- चलिये दाऊ भैया आइये। बलरामजी कुछ बोले बगैर ही उनके साथ हो लेते हैं।
उधर, संभरासुर जोर-जोर से हंसते हुए अपनी पत्नी से कहता है- और महारानी जिस कृष्ण ने हमसे हमारा पुत्र छीन लिया था हमने उससे उसका पुत्र छीन लिया है। काश आप देखती रानी कि कृष्ण की रानियां पुत्र शोक के कारण किस तरह से विलाप कर रही थीं। उन्हें शोकाकुल देखकर पुत्र वियोग के कारण मेरा शोकाकुल मन शांत हुआ था।
इधर, रुक्मिणी उदास बैठी रहती है अपने पुत्र वियोग में तो श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी अब ये भावुकता छोड़िये और इस नाटक से बाहर आइये। देखिये देवी हम जैसा चाहते थे वैसा ही हो गया। वाह देवी आपके अभिनय ने तो संभरासुर जैसे मायावी को भी धोखे में डाल दिया। यह सुनकर रुक्मिणी कहती हैं- वो अभिनय नहीं था भगवन, वो तो एक मां के दिल की वेदनाओं का प्रदर्शन था। मेरे आंसू झूठे नहीं थे। वह तो एक मां की आंखों में झलकने वाले ममता के मोती थे। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी पृथ्वीलोक में निवास करने के बाद आप भी माया-मोह के चक्कर में उलझ गई।.. तब रुक्मिणी कहती हैं कि एक देवी के भीतर एक मां भी है। प्रद्युम्न और मेरा जब मिलन होगा तब वह बड़ा हो चुका होगा। उसका बचपन मेरे हाथ से फिसल गया है। जब वह पहली बार किसी को मां कहकर पुकारेगे तब मैं तो उसके पास भी नहीं होऊंगी भगवन।...इस तरह दोनों में वार्तालाप होता है।
बाद में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देखते हैं कि समुद्र में एक मछली के पेट के भीतर प्रद्युम्न है। यह देखकर रुक्मिणी कहती है वाह प्रभु! आपकी लीला अगाथ है। प्रद्युम्न को देखकर मेरा व्याकुल मन शांत हो गया। फिर यह बताया जाता है कि नाव में बैठे कुछ मछुआरे जाल डालकर उस मछली को पकड़ लेते हैं जिसने प्रद्युम्न को निगल लिया था।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देवी मायावी संभारासुर का वध करने के लिए प्रद्युम्न को भी मायावी विद्या की शिक्षा लेना जरूरी है। अब इन मछुआरों के माध्यम से प्रद्युम्न संभरासुर के साम्राज्य में प्रदेश करेगा और संभरासुर का काल बनेगा।
उधर, वो मुछआरे उस मछली को बड़ी मुश्किल से जल से बाहर निकालकर खुश हो जाते हैं। एक कहता है- बहुत बड़ी मछली फंसी आज। इतनी बड़ी मछली बेचेंगे कहां और खरीदेगा कौन? ऐसा लगता है कि मछली नहीं मजरमच्छ गले पड़ गया है। तब दूसरा कहता है यही तो समस्या है इसे हम कहां ले जाएंगे? तब तीसरा कहता है कि यदि हम इस मछली को महाराज संभरासुर को भेंट कर दें तो? इस पर एक कहता है वो क्यों? तब वह कहता है कि अरे! महाराज हमें इनाम देंगे तो हम वारे-न्यारे हो जाएंगे।
तब वे सभी उस मछली को ले जाकर महाराज संभरासुर को दे देते हैं। संभरासुर उस मछली को देखकर कहता है- वाह! महारानी हमारे इन शुभचिंतकों को इस अनुपम भेंट के लिए पुरुस्कार मिलना ही चाहिए। फिर उन मछु्आरों को महारानी मायावती सिक्कों की एक थैली दे देती हैं। वह थैली लेकर मछुआरे वहां से चले जाते हैं।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देखा देवी! होनी जब होनी होने को आती है तो मनुष्य कैसा अंधा हो जाता है। इस समय संभरासुर के समक्ष यही समस्या है। उसे अपने समीप प्रद्युम्न के रूप में साक्षात मृत्यु दिखाई नहीं दे रही है। मूर्ख उस मछली को देखकर कितना प्रसन्न हो रहा है।
फिर उधर, संभरासुर अपने एक सेवक से कहता है- प्रतिहारी हमारे उस विशेष रसाइये भाणासुर को हमारा संदेश दो। कहो की महल में इसी समय उपस्थित हो। महाराज ने एक विशेष मछली का विशेष व्यंजन तैयार करने की आज्ञा दी है।..सेवक यह सुनकर कहता है- जो आज्ञा महाराज।
उधर, भाणासुर को बताया जाता है जो अपनी पत्नी के साथ भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष खड़ा होता है। उसकी पत्नी प्रार्थना करती है कि हे ईश्वर! तू ही जन्मदाता और तूही मृत्यु देने वाला, मेरी गोद कब से खाली है तू उसे भर दे प्रभु, जल्दी भर दे।....यह सुनकर भाणासुर कहता है तो तुम पहले से ही पूजा कर रही थी? यह सुनकर उसकी पत्नी कहती हैं- हां। तब वह कहता है तो अब तक क्यों नहीं सुनी तुम्हारे भगवान विष्णु ने तुम्हारी प्रार्थना? इस पर वह कहती है कि इसलिए की तुमने मेरे साथ प्रार्थना नहीं की। तुम केवल एक बार भगवान विष्णु की प्रार्थना करो। वो हमारी प्राथना अवश्य सुनेंगे। यह सुनकर भाणासुर कहता है- नहीं ये नहीं हो सकता।
तभी वहां पर संभरासुर का भेजा सेवक द्वार पर आवाज लगता है भाणासुर, ओ भाणासुर। ऐसा कहते हुए वह सेवक अंदर प्रवेश कर जाता है तो भाणासुर की पत्नी जल्दी से विष्णु की मूर्ति का परदा गिरा देती है।
फिर वह सैनिक कहता है- भाणासुर क्या कर रहे थे? यह सुनकर भाणासुर कहता है- कुछ नहीं परंतु तुम राजमहल छोड़कर इधर क्या कर रहे हो? तब वह सेवक कहता है कि असुरेश्वर ने तुम्हें तुरंत उपस्थित होने की आज्ञा दी है और तुम्हारी आज की छुट्टी रद्द की गई है। यह सुनकर वह कहता है कि परंतु महल में और भी तो दूसरे रसोईये हैं। तब वह सेवक कहता है- हैं पर असुरेश्वर को एक बहुत बड़ी मछली भेंट में मिली है और आप मछली के व्यंजन बनाने के विशेषज्ञ हैं। इसलिए महाराज ने आप दोनों को ये विशेष काम सौंपा है। चलिये, चलिये।
फिर भाणासुर और उसकी पत्नी दोनों ही राजमहल में जाकर देखते हैं वह विशालकाय मछली। यह देखकर उसकी पत्नी कहती हैं- इतनी बड़ी मछली इसे मैं काटूंगी कैसे? तब भाणासुर बड़ा छूरा देकर कहता है कि बड़ी मछली के लिए बड़ा छूरा। एक भाग तुम काटो और दूसरा भाग मैं काटता हूं। फिर भाणासुर मछली का पिछला हिस्सा और उसकी पत्नी अगला हिस्सा काटने लगते हैं तभी उसकी पत्नी को मछली के पेट में से छपाक-छपाक की आवाज सुनाई देती है तो वह कहती है स्वामी इसका पेट देख रहे हो कितना बड़ा है। ये अवश्य ही गर्भवती है, नहीं मैं इसे नहीं काटूंगी।
यह सुनकर उसका पति भाणासुर कहता है- अरी पगली! यदि ये मछली गर्भवती भी है तो इसके पेट से अंडा निकलेगा, बच्चा थोड़े ही निकलेगा। चलो काटो इसे जल्दी से, मुझे पहले से ही बहुत देर हो चुकी है। फिर भी उसकी पत्नी कहती है कि मैं इसे नहीं काटूंगी।... यह दृश्य देवर्षि नारद, देवी रति, रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देख रहे होते हैं।
फिर भाणासुर की पत्नी मछली काटने लग जाती है और वे जैसे ही मछली का अगला हिस्सा काटकर अलग करती है तो उसकी पत्नी ये देखकर दंग रह जाते हैं कि उसके पेट में तो एक जिंदा बालक है। तभी प्रद्युम्न रोने लगता है। यह देखकर उसकी पत्नी आश्चर्य से कहती है- बालक! फिर वह उसे बाहर निकालकर कहती है- स्वामी स्वामी, ये देखिये ये बालक। भाणासुर भी उसे देखकर आश्चर्य करता है। उसकी पत्नी कहती है- स्वामी ये तो रो रहा है ये जीवित है स्वामी।...
उसकी पत्नी भगवान विष्णु का कोटि-कोटि धन्यवाद करती हैं। फिर वह अपने पति भाणासुर से कहती है कि अब तुम भी प्रार्थना करो। यह सुनकर उसका पति कहता है- अरे ये तुम क्या कह रही हो? पता नहीं किसका बच्चा है ये जिसे तुम अपना कह रही हो और इसका श्रेय भी तुम भगवान विष्णु को दे रही हो। तब उसकी पत्न कहती है कि कुछ भी हो ये भगवान विष्णु का ही उपहार है। तब उसका पति कहता है- इस झूठ को तुम भगवान विष्णु का उपहार कह रही हो। अपनी निराश ममता को इस झूठी आस से समझा रही हो। कितनी भोली हो तुम। आज तक तुम मुझसे छुपकर उस गुड़िया को सीने से लगाए मन को बहलाए करती थी अब तुम्हारे पागलपन को ये सचमुच की गुड़िया मिल गई है। मेरा मन तो यह नहीं मान सकता कि ये मेरा बच्चा है। तब उसकी पत्नी कहती है कि सबकुछ मानने से ही होता है स्वामी। मानो तो फूल है वर्ना माटी और धूल है।
यह सुनकर उसका पति कहता है- मानने के लिए कुछ तर्क तो होना चाहिए। ना तो तुमने इसे जन्मा है और ना तुमने इसे दूध पिलाया है फिर मां बेटे के संबंध को भला कोई क्यूं मानेगा? लाओ इस बच्चे को मुझे दे दो। महाराज के पास ले जाकर सब सच-सच बता दूंगा। यह सुनकर उसकी पत्नी कहती है कि नहीं नहीं मैं तुम्हें ऐसा अनर्थ नहीं करने दूंगी। ये बालक तो भगवान विष्णु का दिव्य उपहार है। उनकी पूजा से हमें ये मिला है। यह हमारे भाग्य से हमें ये मिला है। फिर ये बच्चा, इस बच्चे को तो मछली के पेट में ही समाप्त हो जाना चाहिए था। और, फिर ये मछली हमारे पास ही कटने के लिए क्यूं आती? दूसरे रसोइये के पास भी तो जा सकती थी। इधर हम बच्चे के लिए भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे और उधर वे हमारे लिए बच्चे का प्रबंध कर रहे थे। ये केवल बालक ही नहीं भगवान विष्णु की लीला है और आप इस लीला को नकार रहे हैं। उसे मुझसे छीन ले जाना चाहते हैं।
तब भाणासुर कहता है कि तुम्हारे भावुक होने से वास्तविकता तो नहीं बदल सकती। ना तो तुमने इसे जन्म दिया है और ना ही इसे दूध पिलाया है। लाओ ये बच्चा मुझे दे दो। ऐसा कहकर वह उसकी पत्नी से बच्चा छीनकर ले जाने लगता है तब उसकी पत्नी पीछे से उसका हाथ पकड़कर कहती है ये बच्चा मेरा है इसे मुझे दे दो।...तभी रुक्मिणी अपने चमत्कार से उसकी पत्नि के स्तन में दूधभर देती है और दूध बाहर झरने लगता है यह देखकर उसकी पत्नी कहती है- रुको स्वामी ये देखो। देखो ये क्या हो रहा है? ये देखो भगवान विष्णु की एक और लीला। उसका पति भी ये देखकर आश्चर्य करता है और कहता है ये तो सचमुच चमत्कार है।
फिर वह उस बच्चे को स्तनपान कराते हुए कहती है- स्वामी अब तो आपकी शिकायत दूर हो गई ना? अब ये बच्चा मेरा दूध पिकर मेरा हो गया है। अब ये मेरा बच्चा है और जब मैं इसकी मां बन गई हूं तो आप इसके पिता बन गए हैं ना? यह सुनकर भाणासुर कहता है- हां भानामति।.. तब भानामति कहती है कि तो फिर आप एक वचन दीजिये कि आप यह किसी को नहीं बताएंगे कि ये बच्चा मछली के पेट से मिला है। तब भाणासुर कहता है कि मैं वचन देता हूं। फिर भानामति कहती है कि आपका ये वचन मेरे माथे पर लगे बांछपन के कलंक को मिटा देगा।
फिर बाद में वे दोनों महाराज संभरासुर और रानी मायावती के पास जाकर उन्हें प्रणाम करते हैं और कहते हैं- महाराज ये हम दोनों का पहला पुत्र है। इसलिए हम दोनों आपसे आशीर्वाद लेने आएं हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- लाओ हम भी देखें कि तुम्हारा पुत्र कैसा है।... यह सुनकर रति घबरा जाती है और नारदमुनि भी देखने लगते हैं। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी भी इस घटना को देखते हैं।
फिर भाणासुर अपने पुत्र (प्रद्युम्न) को संभरासुर के हाथ में दे देता है। संभरासुर हंसते हुए उसे अपनी गोद में लेता है और तब फिर उस बालक को गौर से देखकर वह कुछ समझ नहीं पाता है तब फिर वह पूछता है ये तुम्हारा बालक है? यह सुनकर भाणासुर सकपका जाता तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- हां महाराज ये मेरा ही पुत्र है। फिर संभरासुर कहता है- ये बालक बड़ा ही शूरवीर लगता है। यह सुनकर भानापति कहती है- महाराज आप इसे लंबी आयु का आशीर्वाद दीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है- आयुष्यमान भव:। ऐसा कहकर वह उस बालक को अपनी रानी मायावती के हाथ में देकर कहता है- लीजिये महारानी आप भी देखिये इस बालक को। महारानी हाथ में लेकर कहती है- बधाई हो भाणासुर, बधाई हो भानामति। तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हुई ये देखकर मुझे परम संतोष हुआ।
फिर संभरासुर अपने गले का एक हार निकालकर कहता है- ये लो भाणासुर हमारी तरफ से तुम्हारे पुत्र के लिए भेंट। क्या नामकरण किया है तुमने अपने पुत्र का? यह सुनकर भाणासुर कहता है- महाराज अभी तक नामकरण नहीं हुआ है। यह सुनकर रानी मायावती कहती है- क्यों भाणासुर? यह सुनकर भानामति कहती है यदि आप दोनों ही इसे आशीर्वाद देकर इसका नामकरण करेंगे तो हम धन्य हो जाएंगे महारानी। फिर भाणासुर कहता है कि महाराज संभरासुर जैसे परमप्रतापी, बलशाली, शौर्यशाली और महावीर का आशीर्वाद यदि हमारे पुत्र को प्राप्त हुआ तो भविष्य में हामारा पुत्र भी वीर बनकर दुष्टों को नष्ट करेगा। यह सुनकर गर्वित होकर संभरासुर कहता है- अवश्य करेगा। तुम्हारा पुत्र बड़ा होकर शत्रु का सर्वनाश करेगा।
फिर भाणासुर कहता है- महाराज इसका नामकरण तो कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कुछ सोचने लग जाता है और फिर कहता है- हम इसका नाम प्रद्युम्न रखते हैं।... यह सुनकर देवर्षि और रति चौंक जाते हैं। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की ओर देखती है तो वे मुस्कुराने लगते हैं।
यह नाम सुनकर रानी मायावती संभरासुर की ओर देखकर कहती है- प्रद्युम्न! तब संभरासुर मुस्कुरा देता है। फिर भाणासुर और उसकी पत्नी कहती है- प्रद्युम्न अच्छा नाम है महाराज। अब आज्ञा दें महाराज। फिर वे दोनों वहां से चले जाते हैं तब मायावती पूछती है कि महाराज आपने ये कैसा नाम रखा है? तब संभरासुर कहता है क्यों मायावती आपको ये नाम पसंद नहीं आया? तब वह कहती हैं- परंतु प्रद्युम्न तो वासुदेव श्रीकृष्ण के पुत्र का नाम था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि तो क्या हुआ। भाणासुर और भानामति के पुत्र को देखकर न जाने क्यों मुझे कृष्ण का पुत्र याद आ गया। इसीलिए मैंने उसका नाम प्रद्युम्न रख दिया। यह सुनकर मायावती कहती है- परंतु शत्रु पुत्र का नाम अब इस महल में गुंजकर शत्रु की याद दिलाता रहेगा। यह सुनकर संभरासुर कहता है- नहीं मायावती नहीं, बल्कि शत्रु पर विजय की याद दिलाता रहेगा जिसके पुत्र का मैंने वध किया है।
फिर उधर रसोई घर में प्रद्युम्न रो रहा होता है तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- आप ध्यान नहीं दे रहे इस पर। तब वह कहता है कि भानापति आज राजमहल में राजगुरु पधार रहे हैं उनके लिए भोजन बनाना है यदि देर हो गई तो महाराज क्रोधित हो जाएंगे। इसलिए तुम बालक को संभालो, मैं भोजन बनाता हूं। फिर भानामति बालक को चुप कराने लग जाती है।
उधर राजमहल के बाहर संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरते हैं।... उन्हें देखकर रति नारदमुनिक से कहती हैं- ये क्यों आए हैं? देवर्षि राजगुरु को देखकर मेरे मन में भय की आंधी क्यों उठ रही है। संभरासुर के राजगुरु का चेहरा बता रहा है कि वो ज्ञानी हैं, तपस्वी हैं।
संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरकर राजमहल की छत पर देखते हैं तो उन्हें काला साया नजर आता है। तभी पास में खड़ा संभरासुर का पुत्र कुंभकेतु कहता है गुरुदेव आप रुक क्यों गए, क्या हुआ? तब वे कहते हैं कि मुझे राजमहल पर संकट की काली छाया दिखाई दे रही है। तब वह कुंभकेतु कहता है परंतु मुझे तो नहीं दिखाई दे रही गुरुदेव। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं तुम्हें वह काली छाया नहीं दिखाई देगी युवराज कुंभकेतु। तब कुंभकेतु कहता है यदि काली छाया है भी तो इसमें संकट की क्या बात है गुरुदेव? तब वे कहते हैं ये छाया घोर संकट का प्रतीक है कुंभकेतु। राजमहल पर अवश्य ही कोई विकट समय आने वाला है।
फिर गुरुदेव अपनी शक्ति से भगवान शंकर का नाम लेकर उस काली छाया से प्रकट होने का कहता है और पूछते हैं बताओ की तुम कौन हो तो वह काली छाया प्रकट होकर कहती है कि मैं काल हूं और संभरासुर का भक्षण करूंगा। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं- परंतु संभरासुर तो अजेय और अमर हैं। यह सुनकर काल कहता है कि केवल में ही अजर और अमर हूं और कोई नहीं। ये उसकी भूल है मैं संभरासुर का काल हूं। यह सुनकर गुरुदेव चौंक जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों कई वार्ड ऐसे है जहा पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है और सत्ता पक्ष पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है वही विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष कांग्रेस पर अनुभवहीनता का आरोप लगा कर मामले को राजनीती रंग देने की कोशिश कर रही है . जबकि इन सबके बीच में जिम्मेदार अधिकारी मौज में है , अमृत मिशन के अधिकारी मौन है और हो भी क्यों ना क्योकि असली जिम्मेदार अधिकारी सत्ता और विपक्ष की राजनीती में अपनी नाकामी छुपाने में सफल हो रहे है .
किसी भी जनप्रतिनिधि का कार्य ये नहीं होता कि विभाग के संसाधनों को दुरुस्त करे आपत्ति पर आपातकाल व्यवस्था करे , शहर की व्यवस्थाओ का जमीनी स्तर पर निरिक्षण करे . जनप्रतिनिधि जब आम जनता को कोई परेशानी होती है तो उस बात को संज्ञान में लेकर विभागीय अधिकारियो को अवगत कराये और व्यवस्था को सुचारू रूप से निर्वहन करने के लिए निर्देश दे किन्तु दुर्ग निगम के जल विभाग के अधिकारी हो या अमृत मिशन के अधिकारी जिनकी लापरवाही का नतीजा अज पुरे दुर्ग की जनता भुगत रही है और जनप्रतिनिधि एक दुसरे पर आरोप लगा रहे है जबकि इस अव्यवस्था की सारी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियो के ऊपर है किन्तु राजनितिक वर पलटवार का पूरा मजा अधिकारियो द्वारा उठाया जा रहा है और अव्यवस्था के असली जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस राजनीतिक समीकरण का पूरा लाभ उठाकर अपनी नाकामी छुपाने में सफल भी हो रहे है .
वैसे निगम के हर कार्य में वर्तमान में शहर के विधायक की मंशा और अनुशंषा ही कार्य कर रही है किन्तु जिस तरह वर्तमान में शहर के विधायक द्वारा कई बार निगम की कार्य पद्दति पर सवाल भी खड़े किये किन्तु इसे जनप्रतिनिधि के निर्देशों की अवहेलना कहे या अधिकारियो द्वारा वर्तमान के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के निर्देश को हलके में लेने की प्रक्रिया क्योकि जिस तरह सत्ता में रहने के बाद भी जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार पर आरोप लगा रहे है कार्य में लापरवाही की उससे यही प्रतीत होता है कि निगम के अधिकारियों को न तो शहर की आम जनता की सुविधाओ का ख्याल है और ना ही किसी प्रशासनिक दबाव से फर्क पड़ रहा है .
दुर्ग / शौर्यपथ विशेष / दुर्ग शहर में 23 अगस्त को शायद ही कोई होर्डिंग ऐसी नहीं होगी जिसमे प्रदेश के मुख्यमंत्री के बधाई के पोस्टर ना लगे हो . शहर में कई कद्दावर कांग्रेसी नेताओ राजेन्द्र साहू , प्रदीप चौबे , लक्ष्मण चंद्राकर , मदन जैन , प्रतिमा चंद्राकर , जयंत देशमुख , मुकेश चंद्राकर , अरुण वोरा , धीरज बाकलीवाल ,आर.एन.वर्मा , ऋषभ जैन , नीलू ठाकुर आदि कई नेताओ सहित कार्यकर्ताओ की तस्वीर वाली मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जन्मदिन की शुभकामनाओ वाले पोस्टर से पूरा शहर पट गया था . अमूमन ऐसी ही स्थिति पूर्व की सरकार के समय डॉ.सरोजपाण्डेय , मुख्यमंत्री रमन सिंह , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आदि के जन्मदिन के समय भी ऐसी स्थिति रहती है और पूरा शहर इन संदेशो में होर्डिंग्स में दिखाई देता है किन्तु इस बार कुछ ऐसा हुआ कि चर्चा का केंद्र बन गया .
कोरोना आपदा के कारण 23 अगस्त के पूर्व और वर्तमान में भी ऐसे कई होर्डिंग्स है जो विज्ञापन की राह देख रहे है और खाली है . नगर पालिक निगम दुर्ग ने होर्डिंग्स के लिए शुल्क लेने हेतु 6 जोन में बाँट दिया है जिसे 4 कंपनियों द्वारा ठेका लिया गया है जिसमे दो कंपनी के पास दो दो और दो कंपनी के पास एक एक क्षेत्र का ठेका है . इन क्षेत्रो में होर्डिंग पर लगने वाले पोस्टर का शुल्क इन्ही कंपनी द्वारा लिया जाता है और निगम को सालाना शुल्क भुगतान किया जाता है . आज से पहले भी शहर में प्रदेश व देश के कद्दावर नेताओ के बधाई सन्देश इन्ही होर्डिंग्स पर लगाया जाता रहा जिसे कम से कम 4 से 5 दिन तक लगे रहने दिया जाता था जबकि उस हालत में होर्डिंग्स में अन्य कंपनी के प्रचार ( विज्ञापन ) लगे होते थे बावजूद इसके होर्डिंग्स के ठेकेदार 4-5 दिन तक बधाई सन्देश नहीं निकालते थे किन्तु इस वर्ष कोरोना आपदा में जब शहर के आधे से ज्यादा होर्डिंग्स खाली है बावजूद इसके ठेकेदारों द्वारा या अनजान व्यक्ति द्वारा 24 अगस्त को ही ऐसे सारे पोस्टर हटा दिए गए या चोरी हो गए . केवल वही पोस्टर सलामत रहे जिसमे बधाई सन्देश के प्रायोजक के रूप में शहर के विधायक के समर्थक या निगम के प्रभारी थे . अगर ये इत्तिफाक है तो बहुत ही गजब का इत्तिफाक है अगर ये किसी ऐसे व्यक्ति की साजि़श है जो शहर कांग्रेस को दो गुट में बाँट रहा है तो आने वाले दिनों में दुर्ग कांग्रेस के लिए गलत सन्देश है .
क्या शहर के वो कांग्रेसी जिनके पोस्टर गायब / उतारे / चोरी हुए है वो मामले को संज्ञान लेंगे या मौन रहकर आगे की रणनीति तय करेंगे ?
भिलाई नगर / शौर्यपथ / वार्ड-28 छावनी स्थित दर्री तालाब की रौनक फिर लौटेगी। इस दिशा में नगर पालिक निगम प्रशासन कार्य कर रही है और दर्री तालाब में साफ पानी भरने और उनके किनारे को हरियाली को बढ़ाने के लिए चारो तरफ रिटेनिंग वाॅल का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होते ही क्षेत्र के रहवासियों को निस्तारी के लिए पहले की तरह तालाब में साफ पानी मिलेगा। तालाब में पाथवे और रिटेनिंग वाॅल पर बनाई जाने वाली बस्तर कलाकृतियां लोगों के लिए मनोरंजन का केन्द्र साबित होगी।
40 लाख की लागत निर्माणाधीन हैं कार्य
महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव के निर्देशानुसार निगम प्रशासन ने दर्री तालाब के सौंदर्यीकरण के साथ महिलाओं की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है। अधोसंरचना मद से प्रस्तावित 40 लाख रूपए की लागत से निर्माणाधीन विकास कार्य में महिलाओं के लिए निर्मला घाट और चेंजिंग रूम बनाया जाएगा। तालाब में मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए चारो तरफ कांक्रीट से बाउंडीवाल बनाई गई है। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए किनारे से लोहे की रेलिंग से ट्रू वाॅल बनाया जा रहा है। जहां पर फूल पौधे के साथ फलदार और पत्तीदार पौधे रोपे जाएंगे। कारपेट ग्रास लगाया जाएगा। तटबंध (पार) पर पेवर ब्लाॅक लगाने के साथ चैनलिंग फेसिंग किया गया है। प्रकाश व्यवस्था के लिए चारो तरफ ट्यूबलर पोल लगाई गई हैै।
ऐसे रखा जाएगा पानी को स्वच्छ तालाब का पानी स्वच्छ रहे इसके लिए निगम प्रशासन ने तालाब के बाजू में अलग से एक पैठू (छोटा तालाब) बनाई है। जहां पशुपालक अपने मवेशियों को नहला सकेंगे। वहीं तालाब में बारिश के पानी को भरने के लिए इन लेट और तालाब का पानी गंदा होने की स्थिति में निकासी के लिए आउट लेट नाली बनाई गई है। इस तरह की व्यवस्था से जल संरक्षण के साथ क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुुफ्त में हो गया गहरीकरण
आयुक्त रघुवंशी के निर्देशानुसार सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। जोन-4 के आयुक्त अमिताभ शर्मा ने बताया कि निगम प्रशासन ने तालाब के गहरीकरण पर राशि खर्च नहीं किया है। पीपीपी माॅडल पर तालाब की सफाई और गहरीकरण कराया गया। सौंदर्यीकरण का लगभग 65 फीसद कार्य पूर्ण हो चुका है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / गर्भवती महिलाओं व शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जिले के लगभग 3,000 आंगनबाड़ी केंद्रों में लगातार कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म और शिशुओं का अन्नप्राशन कराया गया। इस कार्यक्रम को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य सही पोषण की जानकारी देना है, जिससे मां व बच्चा दोनों सुरक्षित व स्वस्थ रहे।
गोदभराई और अन्नप्राशन के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने अंबागढ़ चौकी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा वितरित टेक होम राशन एवं सूखा राशन के संबंध में भी निरीक्षण किया और लाभार्थियों से जानकारी ली। इस दौरान लाभार्थियों ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से टेक होम राशन एवं सूखा राशन दिया जा रहा है। उन्होंने सभी सीडीपीओ को जमीनी स्तर पर इसके संबंध में निरीक्षण करने के निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने तुलसी मां बम्लेश्वरी स्व सहायता समूह कोडूटोला सेंटर, सामग्री मिक्सिंग एवं पैकेजिंग कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं सक्रियता से कार्य कर रही हैं और विशेषकर कोरोना संक्रमण के दौर में मॉस्क का उपयोग कर रही हैं। उन्होंने सभी को एप्रन एवं ग्लब्स का उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री को और भी सुव्यवस्थित तरीके से रखा जा सकता है। उन्होंने समूह की महिलाओं द्वारा सामग्री को भुनने एवं पीसने के नवाचार की सराहना की।
इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता व वार्ड पार्षद ने गर्भवती महिलाओं को पोषण से संबंधित जानकारी दी। इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को लाल चुनरी ओढ़ाकर व तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया। पौष्टिक पदार्थ भी भेंट किए गए। साथ ही हरी पत्तेदार सब्जी भी भेंट की। महिलाओं ने मंगल गीत गाकर गोदभराई रस्म को पूरा किया। सभी गर्भवती महिलाओं को खानपान के बारे में जानकारी दी गई। गर्भवती महिलाओं को हरी पत्तेदार सब्जियों में सहजन का पत्ता, धनिया का पत्ता तथा पालक की साग का सेवन करने की सलाह दी गई। साथ ही धात्री महिलाओं को आयरन की गोलियां दी गई।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने कहा स्वच्छता एवं साफ-सफाई को पोषण अभियान के पांच सूत्रों में शामिल किया गया है। सफाई ही बीमारियों से लड़ने का पहला हथियार होता है। बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका सफाई का पहला चरण खाने से पहले और शौच के बाद विधिवत रूप से हाथ धोने से होता है। हर व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति इन छोटी-छोटी बातों के प्रति सजग होना चाहिए, ताकि हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें। उन्होंने बताया कि गोद भराई एक परंपरागत सामुदायिक गतिविधि है जिसे उत्सवी माहौल में माता व गर्भ में पल रहे शिशु के पोषण को सुदृढ़ व समृद्ध बनाने हेतु किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु व माता की जांच सुनिश्चित करते हुए शिशु की दो वर्ष की अवस्था तक पोषण एवं वृद्धि की सतत निगरानी हेतु समुदाय को प्रेरित करना है। कार्यक्रम के दौरान सात माह के दो शिशुओं को अन्नप्राशन कराया गया।
कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं को अपने दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। पोषण की कमी होने से महिलाओं में खून की कमी हो जाती है। जिससे होने वाले बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। उन्होंने लड़कों एवं लड़कियों में भेदभाव को कम करने के लिए भी जागरूक किया। कार्यक्रम में आसपास की महिलाएं भी शामिल हुई। लाभार्थी सरिता ठाकुर ने कहा कि इस कार्यक्रम से हमें पता चला कि स्वच्छता नियमों का पालन करने से कई बीमारियों से खुद व अपने बच्चे को बचाया जा सकता है।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों कई वार्ड ऐसे है जहा पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है और सत्ता पक्ष पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है वही विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष कांग्रेस पर अनुभवहीनता का आरोप लगा कर मामले को राजनीती रंग देने की कोशिश कर रही है . जबकि इन सबके बीच में जिम्मेदार अधिकारी मौज में है , अमृत मिशन के अधिकारी मौन है और हो भी क्यों ना क्योकि असली जिम्मेदार अधिकारी सत्ता और विपक्ष की राजनीती में अपनी नाकामी छुपाने में सफल हो रहे है .
किसी भी जनप्रतिनिधि का कार्य ये नहीं होता कि विभाग के संसाधनों को दुरुस्त करे आपत्ति पर आपातकाल व्यवस्था करे , शहर की व्यवस्थाओ का जमीनी स्तर पर निरिक्षण करे . जनप्रतिनिधि जब आम जनता को कोई परेशानी होती है तो उस बात को संज्ञान में लेकर विभागीय अधिकारियो को अवगत कराये और व्यवस्था को सुचारू रूप से निर्वहन करने के लिए निर्देश दे किन्तु दुर्ग निगम के जल विभाग के अधिकारी हो या अमृत मिशन के अधिकारी जिनकी लापरवाही का नतीजा अज पुरे दुर्ग की जनता भुगत रही है और जनप्रतिनिधि एक दुसरे पर आरोप लगा रहे है जबकि इस अव्यवस्था की सारी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियो के ऊपर है किन्तु राजनितिक वर पलटवार का पूरा मजा अधिकारियो द्वारा उठाया जा रहा है और अव्यवस्था के असली जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस राजनीतिक समीकरण का पूरा लाभ उठाकर अपनी नाकामी छुपाने में सफल भी हो रहे है .
वैसे निगम के हर कार्य में वर्तमान में शहर के विधायक की मंशा और अनुशंषा ही कार्य कर रही है किन्तु जिस तरह वर्तमान में शहर के विधायक द्वारा कई बार निगम की कार्य पद्दति पर सवाल भी खड़े किये किन्तु इसे जनप्रतिनिधि के निर्देशों की अवहेलना कहे या अधिकारियो द्वारा वर्तमान के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के निर्देश को हलके में लेने की प्रक्रिया क्योकि जिस तरह सत्ता में रहने के बाद भी जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार पर आरोप लगा रहे है कार्य में लापरवाही की उससे यही प्रतीत होता है कि निगम के अधिकारियों को न तो शहर की आम जनता की सुविधाओ का ख्याल है और ना ही किसी प्रशासनिक दबाव से फर्क पड़ रहा है .
पानी की समस्या पर जल गृह प्रभारी कोवले के बयान पर पूर्व प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने किया पलटवार..
कहा अपनी नाकामी छिपाने पूर्व के परिषद पर दोषारोपण कर रहे है..
दुर्ग / शौर्यपथ / शहर में 8 दिनों से पानी सप्लाई बाधित होने पर भाजपा पार्षदों के विरोध पर तिलमिलाए निगम के जलगृह प्रभारी संजय कोवले द्वारा इस समस्या के लिए भाजपा की पिछले परिषद को दोषी ठहराने पर पूर्व जल गृह प्रभारी व वार्ड 17 पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा है विधायक अरुण वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल की नाकामी छिपाने प्रभारी जी मिथ्या आरोप लगाना बंद करे क्योंकि जनता अब जान चुकी है कि किस प्रकार निगम में आग लगने पर कुंआ खोदने जैसे कार्यशैली चल रही है।
वार्ड 17 पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने जलगृह प्रभारी के बयान को औचित्यहीन व तथ्यों से परे बताते हुए आगे कहा कि वास्तव में आज अमृत मिशन का जो कार्य दिखाई दे रहा है वह पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकार के कार्यकाल में स्वीकृत परिषद के है जिसमें पूरे शहर के प्रत्येक वार्डो में आगामी 40 वर्षो की पानी की आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्लानिंग की गई थी और इसके लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अमृत मिशन योजना के तहत निगम के इतिहास में पहली बार एकमुश्त 142 करोड़ की राशि प्रदान कि है जिसके तहत आज यह सब कार्य चल रहा है जिसमें सभी वार्डो के प्रत्येक गलियों तक पाईप लाईन पानी टंकियां,फिल्टर प्लांट व पंप हाउस में नई मोटर व ट्रांसफार्मर लगाने जैसे सभी आवश्यकताएं शामिल है और यह कार्य वर्ष 2017-18 से प्रारम्भ होकर 2020 तक पूर्ण किया जाना है किंतु जब से निगम में सत्ता परिवर्तन हुआ है और कांग्रेस का महापौर परिषद काबिज हुआ है तब से राजनीतिक भेदभाव व श्रेय की राजनीति के चलते विधायक महोदय के इशारे व महापौर के अनुभवहीनता के चलते पूरी योजना बैगर प्लानिंग के शुरू होने के कारण परेशानी बढ़ती जा रही है जिसका ताजा उदाहरण रायपुर नाका स्थित फिल्टर प्लांट है जहां 6 माह से रखे नई ट्रांसफार्मर को लगवाने की फुर्सत तब मिली जब पुराने पूरी तरह खराब हो गया और पानी व्यवस्था ठप्प हो गया और इतनी बड़ी लापरवाही का नतीजा आज जनता भुगत रही है जिसे 8दिनों से भी अधिक समय से पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।फिल्टर प्लांट में नए पुराने मिलाकर 6 ट्रांसफार्मर पड़ी है जिसमें से 4 खराब पड़ी है जबकि इनके कार्यकाल को 8माह बीत चुका है।
भाजपा पार्षद व पूर्व जल गृह प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने जल गृह प्रभारी कॊवले को विधायक व महापौर की नाकामी छिपाने पूर्व परिषद पर दोषारोपण करने से बाज आने की चेतावनी देते हुए कहा है कि शहर जनता पानी के लिए हलाकान है और वे अब अच्छी तरह से जानते है कि आज यह समस्या कैसे पैदा हुई इसलिए यदि शीघ्र समस्या हल नहीं हुई जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / वॉशिंगटन एक रिसर्च में सामने आया है कि आखिर कैसे फरवरी में हुए एक इवेंट के चलते पूरे अमेरिका में कोरोनावायरस कैसे फैला और यहां महामारी के सबसे ज्यादा प्रभाव की शुरुआत कैसे हुई. Broad Institute, Massachusetts General Hospital और Massachusetts Department of Public Health सहित कई संस्थानों में 54 से ज्यादा रिसर्चर्स ने लगभग 800 कोरोनावायरस जीनोम का अध्ययन किया है, जिसे मंगलवार को वेबसाइट MedRxiv पर पब्लिश किया गया है. यह रिसर्च शायद अब तक अमेरिका में किसी भी वायरस के आउटब्रेक का सबसे गहरा विश्लेषण है.
दरअसल, फरवरी में अमेरिका के बॉस्टन में ड्रग कंपनी Biogen की सालाना लीडरशिप मीटिंग हुई थी. जिसमें दुनियाभर से कर्मचारी और मेहमान आए थे. दो दिन तक चली इस मीटिग में किसी को भी शक नहीं हुआ कि उनमें से एक शख्स के फेफड़ों में कोरोनावायरस मौजूद है. 27 फरवरी तक मीटिंग खत्म होने तक कई लोगों तक वायरस पहुंच चुका था. यहां वायरस का प्रसार हुआ और मीटिंग खत्म होने के बाद कुछ लोग वापस जहां से आए थे, वहां चले गए. कोई इंडियाना गया, कोई नॉर्थ कैरोलाइना तो कोई बॉस्टन के उपनगरों में. वहीं स्लोवाकिया, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर से आए लोग भी वापस चले गए. अगले दो हफ्तों में यहां से निकला वायरस 35 नए मामलों में सामने आया. अप्रैल में बॉस्टन के उपनगरीय इलाकों में यह वायरस दो बेघरों के शेल्टरों में फैल गया, जहां 122 लोग संक्रमित पाए गए.
दरअसल, वैज्ञानिकों को संक्रमण के इस चेन का पता कोरोनावायरस के रेप्लिकेशन प्रोसेस में हुई गलती की वजह से चला है. इस प्रोसेस में वायरस के 30,000 कैरेक्टर वाले जीनोम कोड में दो अक्षरों का आपस में बदलाव होता है. वायरस का यह म्यूटेशन फरवरी में बायोजेन की कॉन्फ्रेंस के वक्त ही फ्रांस में दो वृद्ध मरीजों में मिला था. कॉन्फ्रेंस के बाद इस वायरस का संक्रमण जहां भी फैला, यह म्यूटेशन भी उसके साथ फैलता रहा. इस स्टडी में पाया गया है कि इस म्यूटेशन वाला वायरस बॉस्टन के कई इलाकों में सैकड़ों को लोगों को शिकार बना चुका है, वहीं ऐसे वायरस वाले मरीज सेनेगल और लग्ज़मबर्ग तक पाए गए हैं. जुलाई के मध्य तक मैसाचुसेट्स के वायरस के सीक्वेंस में एक तिहाई और पूरे अमेरिका से लिए गए वायरस के जीनोम्स में से तीन फीसदी जीनोम में यह म्यूटेशन मिला है.
जिस दिन बायोजेन की मीटिंग शुरू होने वाली थी, उस दिन अमेरिका में कोविड-19 के कुल 15 केस सामने आए थे. ये सभी केस बाहर से यात्रा करके आए लोगों या फिर उनके करीबियों में मिले थे. उस वक्त Center for Disease Control and Prevention ने संभावित 'कम्युनिटी स्प्रेड' की बात स्वीकारी थी. उप-राष्ट्रपति माइक पेंस कोरोनावायरस टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाले थे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस वायरस से अमेरिकियों को 'बहुत कम' खतरा है. आज अमेरिका में विश्व में सबसे ज्यादा कोरोनावायरस के केस हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
