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भिलाई में निकली गफ्फार कालोनी से केवल एक ताजिया, ताजियादार सिर्फ सेहरा लेकर पहुंचें करबला,इमामबाड़ों में ही सोशल डिस्टेंसिंग में ढोल के साथ दिखाये करतब
दुर्ग / शौर्यपथ / इस साल का मोहर्रम भी कोरोना के भेंट चढ गया। शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार ही इस बार मोहर्रम मनाया गया जिसके कारण इस बार अखाड़ा और जुलूस नही निकला। हर मोहर्रम को पूरे शहर में चहल पहल रहता था लेकिन आज के दिन सड़ों पर सन्नाटा छाया रहा। मोहर्रम पर इस बार केवल रस्म अदायगी की गई। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप इस बार सिर्फ एक ताजिया करबला मैदान तक पहुंचा। वहीं शेष सभी ताजिए अपने-अपने मकाम पर ही रहे, जहां दिन में फातिहा ख्वानी और लंगर में सीमित तादाद में लोग शामिल हुए। करीब 22 ताजियादार अपने ताजिए से सेहरे के फूल लेकर करबला पहुंचे और शाम को कुल की फातिहा के बाद लोग अपने घरों को लौटे।
हर साल जहां एक एक से एक ताजिया लोगों को देखने को और विशेष रूप से महाराष्ट्र का मटका पार्टी सुनने और इस अवसर पर जगह जगह चौक चौराहों पर लोगों को करतब देखने और शरबत खिचड़ा और हल्वा सहित अन्य सामान खाने पीने को मिलता था और मोहर्रम के ढोल ताशों की गुंज रहती थी इस बार लोगों को सुनने को नही मिला। कोरोना के वबा को देखते हुए इस आर सुप्र्रीम कोर्ट एवं सरकार तथा प्रशासन द्वारा ताजिया निकालने पर रोक लगा दिया गया। केवल एक ताजिया सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड के नियमों के गाईड लाईन के ध्यान में रखते हुए निकालने का परमीशन दिया गया था जिसके तहत गफ्फार कालोनी से एक ताजिया निकलकर पावर हाउस, के बाद टाउनशिप न जाकर सीधे करबला शरीफ पहुंची। यहां रस्म अदा करने के बाद ताजिया वापस अपने इमाम बाड़े की ओर चले गई और वहीं बाकी ताजियादार सिर्फ सेहरा लेकर ही कर्बला पहुंचें। प्रशासन की ओर से कोरोना से जुड़े दिशा-निर्देश का पालन करवाने पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई। यहां करीब 45 ताजिया, अखाड़ा और सवारी से जुड़ी अंजुमन के ओहदेदारों की मौजूदगी में कुल की फातिहा हुई और इसके बाद लोग अपने घरों को लौटे। शनिवार की रात मोहर्रम की नवमीं को फरीदनगर,कोहका, सुपेला सहित इमामबाड़ों पर ताजिया रखा गया। फातिहा की गई। नवमीं की रात में शहादत हुसैन यंग अखाड़ा कमेटी इमामबाड़ा चौक सुपेला में क्षेत्र के सभी घरों में लंगर का खाना पहुंचाया गया। फातिहा कर देश में अमन चैन की दुआएं मांगी।
इमामबाड़ों में ही इस बार लोगो ने दिखाएं करतब
इमामबाड़ों में ही इस बार बजा ढोल, और इक्का, दुक्का लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सेक्टर 6 मामा-भांजा मजार के पास सड़क 35-36 में इमामबाड़ा में शेरे इस्लाम अखाड़ा के सदस्यों ने तथा रूआबांधा, रिसाली, सेलूद, स्टेशन मरोदा, सेक्टरों तथा फरीदनगर, कोहका, अयप्पा नगर, कृष्णा नगर, रामनगर, केम्प एक, केम्प 2, पॉवर हाउस, हाउसिंग बोर्ड, जब्बार कालोनी, खूर्सीपार, न्यूू खूर्सीपार सहित अन्य जगहों के इमामबाड़ों में वहां के अखाड़ा के सदस्यों ने अपना करतब दिखाया और वहीं पर शरबत और शिरनी तथा खिचड़ा बांटे।
मस्जिद में लोगों ने पढ दुआएं आशूरा
हर साल की तरह इस साल भी दोपहर को बाद नमाज-ए-जोहर दुआएं आशूरा सोशल डिस्टेंसिंग में बैठकर लोगों ने पढा। जामा मस्जिद सेक्टर 6 के पेशईमाम जनाह इकबाल अंजुम अशरफी ने सभी को दुआएं आशूरा पढाया और सभी के हक में दुआएं की। उसके बाद सेक्टर दस निवासी शेख कमाल रजा ने पॉलिथीन में पैककर सबकों खिचड़ा वितरण और अन्य कुछ लोगों ने मिठाई का वितरण किया।
शिया समुदाय ने भी सादगी से मनाया मोहर्रम, आज इमाम हुसैन की होगी मजलिस शिया समुदाय ने भी मुहर्रम की मजलिसें कोरोना से जुड़े दिशा-निर्देश के अनुरूप आयोजित की।
शहर में हास्पिटल सेक्टर व प्रियदर्शिनी परिसर के इमामबाड़े-मस्जिद में समान दूरी बनाते हुए मातम किया गया। वहीं 10 मुहर्रम पर रविवार को सुबह आमाल में 4 रकअत नफिल नमाज के बाद आशूरे की दुआ पढ़ी गई। दोपहर में इमामबाड़े में ही एकमात्र ताजिया निकाला गया जो पास में गश्त करते हुए वापस लौटा। रविवार को ही शाम-ए-गरीबां रखी गई। जिसमें नौहा-मरसिया पढ़ा गया। लोगों ने मातम मनाया। अब 31 अगस्त को जियारत में इमाम हुसैन की मजलिस इन इमामबाड़ों में की जाएगी। शिया समुदाय ने पहली बार 10 दिन की तकरीर के लिए बाहर से किसी आलिम को नहीं बुलाया। हर साल जिक्रे शोहदाए करबला के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां आलिम बुलाए जाते रहे हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / प्रदेश के अग्रणी दिग्विजय महाविद्यालय में पत्रकारिता के कोर्स कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय रायपुर द्धारा संचालित है। जिसमें केवल दिग्विजय महाविद्यालय में 40 सीट निर्धारित हैं । प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष प्रवेश की जो प्रक्रिया है वह आनलाईन पद्धति से ली जा रही थी की अचानक से बीच में ही ऑनलाईन प्रवेश की प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्धारा बंद कर दी गई हैं, जिसके चलते बहुत से इच्छुक विद्यार्थी अपना फार्म भरने से वंचित रह गये है।
नगर मंत्री कमलेश प्रजापति ने कहा कि पत्रकारिता देश का चौथा स्तंभ माना जाता हैं एक ओर विद्यार्थी पुरी तनमयता के साथ इस विषय को लेकर अपनी आगे की भविष्य को लेकर अग्रसर है तो वहीं विश्वविद्यालय अवसर के दरवाजे बंद कर रहे है। विद्यार्थी परिषद ने मांग पत्र सौंपे हुए कहा कि जल्द ही ऑनलाईन प्रवेश प्रारंभ किया जाये। अन्यथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होंगा। ज्ञापन सौंपाते वक्त मुख्य रूप से नगर मंत्री कमलेश प्रजापति नगर सहमंत्री अशीष सोरी, षनुध मिश्रा, अनिकेत साहू, राकेश साहू हरिश सोनवानी ,शशांक दुबे अन्य उपस्थित थे।
सेहत / शौर्यपथ / कद्दू की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी, कद्दू के सेहत फायदे भी जानते होंगे लेकिन हम आपको कद्दू के जो 4 नुस्खे बता रहे हैं वे आपको शर्तिया नहीं पता होंगे, बालों से लेकर त्वचा के लिए कद्दू के ये नुस्खे किसी चमत्कार से कम नहीं है -
1 बालों के लिए -
आपको जानकर हैरानी होगी कि कद्दू का तेल नारियल तेल के विकल्प के रूप में लगा सकते है, क्योंकि यह नारियल तेल के समान ही प्रभावी होता है। कद्दू के तेल में पोटेशियम, आयरन, मैंगनीज, मैग्नीशियम, विटामिन ए, के और ई भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने और बढ़ने में मदद करते हैं।
2 त्वचा के लचीलेपन के लिए -
कद्दू में मौजूद विटामिन ए, सी और ई कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है जिससे त्वचा का लचीलापन बरकरार रहता है। इसका असर ये होता है कि झुर्रियों का प्रभाव धीमा हो जाता है और खूबसूरती बनी रहती है।
3 ड्राय त्वचा और मुंहासों से छूटकारा -
कद्दू में मौजूद जिंक और विटामिन ई त्वचा की हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ाते हैं, मुंहासों से लड़ते हैं और त्वचा के दाग को हल्का करने में सहायक होते हैं।
4 ड्राय बालों के लिए असरदार -
ड्राय बालों से निजात पाने के लिए आपको 2 कप पके कद्दू में 1 चम्मच नारियल तेल, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच दही डालकर मिलाना है। अब शैंपू किए हुए बालों पर पेस्ट को लगभग 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। फिर बालों को अच्छी तरह से धोलें। हर हफ्ते इसे दौहराएं और बालों में
फर्क मेहसूस करें।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम में एक प्रथा सी चल गयी है जो गोस्वामी बोले वही सही उसके आगे शासन का कोई नियम काम नहीं करता सब नियम जैसे दुर्ग निगम के प्रभारी ईई मोहनपुरी गोस्वामी के आगे नतमस्तक हो जाते है . कहने को तो शासन द्वारा जनहित के कार्य हेतु कई नियम बनाए गए है ताकि जनता का पैसा पूरी पारदर्शिता से जनहित में ही खर्चा हो . प्रदेश के मुखिया भी लगातार आम तबके के लिए कोई ना कोई योजना निकाल रहे है ताकि सभी को रोजगार प्राप्त हो सके किन्तु दुर्ग निगम में भाजपा के 20 साल की सत्ता को भरष्टाचार की सत्ता का तमगा देने वाली कांग्रेस आज निगम में है , विधान सभा क्षेत्र में है और प्रदेश में है बावजूद इसके लगातार शासन के नियमो की धज्जी उड़ाई जा रही है और निगम के सर्वेसर्वा आयुक्त बर्मन जो सयुक्त कलेक्टर स्तर के अधिकारी है मौन है , विधायक जो भाजपा शासन में एक नाली भी निर्माणाधीन के समय टूट जाती तो निगम के दरवाजे पर धरना देने बैठ जाते थे और जो आज सत्ता पक्ष में प्रभारी है ऐसे कई नेता भाजपा शासन के समय छोटे छोटे भरष्टाचार पर पानी पी पी कर आरोप लगाते थे आज वही जनप्रतिनिधि और अधिकारी निगम में खुले आम प्रभारी ईई के कार्य पर मौन है .
प्रभारी ईई मोहन पूरी गोस्वामी द्वारा पिछले कई महीनो से कार्य की निविदा बाद में निकाली जाती है और कार्य पहले ही अपने पसंद के ठेकेदार को दे दिया जाता है . ऐसा मामला पहली बार शौर्यपथ समाचार द्वारा तब उठाया गया था जब टूटी फूटी डिवाईडर के रंगरोगन का कार्य गोस्वामी द्वारा एक ठेकेदार को दे दिया गया था तब यह बात कही गयी थी कि अति आवश्यक कार्य है किन्तु डिवाईडर पेंटिंग के कार्य के 3-4 माह बाद डिवाइडर के संधारण का कार्य जिला पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किया गया और एक बार फिर निगम के लाखो रूपये बर्बाद हो गए तब भी आयुक्त बर्मन ही थे किन्तु तब भी शासकीय / मौखिक आदेशो का हवाला दिया गया .
ऐसा ही मामला पिछले माह हुआ जब 10-12 कार्य जो पूर्ण हो चुके थे या पुर्णत: की ओर थे तत्पश्चात उसका टेंडर निकला जो की दिखावा मात्र था और निगम के किसी भी ठेकेदार को ये टेंडर नहीं भरने दिया गया ये गजब कैसे हुआ ये यहाँ बताने की आवश्यकता नहीं क्योकि कोई भी ठेकेदार अधिकारियों से बैर मोल नहीं ले सकता किन्तु इन सब कार्यो में खुलकर शासन के नियमो की धज्जी उडी और ये मामला भी दबा दिया गया और एक बार फिर गोस्वामी के द्वारा शासन के नियमो को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया .
अब ऐसी ही स्थिति वर्तमान में फिर से आ गयी जब 5-6 कार्य की निविदा प्रपत्र अभी जमा करने की तारीख नहीं आयी और ठेकेदार को कार्य चालु करने का आदेश हो गया और ये कार्य गौठान में प्रारंभ भी हो गया . क्या मोहनपुरी गोस्वामी अन्तर्यामी है या आयुक्त ऐसी कोई कला जानते है कि टेंडर में भले ही 1000 लोग भाग ले टेंडर फला आदमी के नाम ही खुलेगा इसलिए कार्य प्रारंभ करने का आदेश दे दिया जाए . अगर ऐसी कला में निपुण है तो दुर्ग निगम सहीत प्रदेश के लिए भी ये एक बड़ी उपलब्धि होगी कि कार्य किसे करना है ये पहले से ही ज्ञात हो जाता है दुर्ग निगम के अधिकारियो को . अगर ऐसा नहीं है तो फिर किस नियम के तहत चुनिन्दा ठेकेदारों को कम दर पर कार्य दिया जा रहा है बिना मुकाबले के . अगर कार्य की गुणवत्ता पर इन्ही चुनिन्दा ठेकेदारों पर भरोसा है तो निगम के बांकी ठेकेदारों का क्या काम ?
कहा गए वो सत्ता पक्ष के काबिल जनप्रतिनिधि जो विपक्ष में रहते हुए टूटी हुई नालिया देख कर भ्रष्टाचार का राग अलापते थे क्या बिना निविदा के कार्य का आदेश देने पर अब मौन धारण कही टेबल के निचे का लिफाफा तो नहीं क्योकि प्रभारी ईई गोस्वामी पर पिछली दीपावली में लिफाफा बाँटने का खेल का उजागर एक समाचार पत्र में हुआ था और इस पर ईई गोस्वामी द्वारा आपत्ति ना उठाना साफ़ सन्देश देता है कि दाल में काला है तभी मौन रह गए वरना कोई इमानदार अधिकारी होता तो अभी तक मानहानि का दावा ठोक चुका होता किन्तु यहाँ सब मौन है , फिर क्या आयुक्त , क्या विधायक , क्या महापौर , क्या निगम के सबसे वरिष्ठ और जानकार पीडब्ल्यूडी प्रभारी गनी सभी मौन है क्या अर्थ निकाले आम जनता इनके मौन का ?
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर निगम सीमा क्षेेत्र के आम नागरिक एवं गणोशत्सव समिति गणेश विसर्जन ठगड़ाबांध, शिवनाथ नदी गुरुद्वारा, कसारीडीह शीतला तालाब, और उरला का बांधा तालाब में सुविधाजनक पूर्वक कर सकेगें। इन स्थानों पर नगर निगम दुर्ग द्वारा साफ-सफाई के साथ पहुॅच मार्ग को दुरुस्त कर लाईट और माईक की व्यवस्था की गई है।
उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महापौर धीरज बाकलीवाल के निर्देशानुसार शहर में गणपति विसर्जन के लिए चार स्थानों पर तैयारी और व्यवस्था किया जा रहा है। इसके तहत् शिवनाथ नदी गुरुद्वारा रोज के गड्ढो को डस्ट से भर कर समतलीकरण किया जा रहा है वहीं कसारीडीह शीतला तालाब, ठगड़ाबांध, और उरला बांधा तालाब पार की साफ-सफाई करायी गई । इन जगहों पर पहुॅच मार्ग में पर्याप्त लाईट की व्यवस्था की जा रही है वहीं माईक और साफ-सफाई करायी गई ।
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टोरेट सभागार में आज हुई बैठक में छग चेंबर ऑफ कॉमर्स भिलाई ईकाई के पदाधिकारियों ने बाजारों को लेकर कई सुझाव दिए। कलेक्टर डॉ सुरेश्वर भूरे के साथ हुई बैठक में व्यापारियों की ओर से चेंबर के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। प्रदेश उपाध्यक्ष गार्गी शंकर मिश्रा ने बताया कि भिलाई चेम्बर द्वारा यह सुझाव प्रेषित किया गया कि सभी दुकाने सुबह 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुलने की अनुमति प्रदान की जाए।
इस मौके पर भिलाई चेंबर के संयोजक अजय भसीन ने अपनी बात प्रस्तुत करते हुए कहा कि रविवार दुकान बंद होने की वजह से शनिवार व सोमवार को बाजारों में अतिरिक्त भीड़ हो जाती है। इसलिए साप्ताहिक अवकाश गुमास्ता एक्ट के तहत ही हो। भिलाई के सभी बाजारों में साप्ताहिक अवकाश वाले दिन दुकाने बंद रहे यह सुनिश्चित किया जाए। मेडिकल स्टोर जो शाम 7 बजे बंद हो रहे है उन्हें भी रात्रि 9 बजे खोंलने की अनुमति दी जाए। पेट्रोल पंप को भी आवश्यक वस्तु के तहत रात्रि तक खोंलने कि अनुमति दी जाए। कलेक्टरेट में आयोजित बैठक में चेंबर की ओर से अश्वनी देवानी,नरेश वासवानी, रवि विजवानी, शंकर सचदेव व पदाधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / संसदीय क्षेत्र के लिए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में आज अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए। बैठक में सड़कों में दुर्घटनाओं को रोकने सहायक सड़कों पर रंबल स्ट्रिप बनाने, आवारा मवेशियों को सड़क से हटाने ड्राइव चलाने तथा स्ट्रीट लाइट की समस्या वाली सड़कों पर विशेष रूप से कार्य करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सांसद विजय बघेल ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की वजह से बहुत सी अनमोल जाने जाती हैं लेकिन इंजीनियरिंग साइड से थोड़े से तकनीकी परिवर्तन कर बहुत सी दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। इस संबंध में कार्य किया जाए।
सांसद विजय विजय बघेल उन्होंने कहा कि जहां पर जरूरत है वहां रंबल स्ट्रिप और संकेतक लगाए जाएं। जो ब्रेकर अनुपयुक्त हैं अथवा इंजीनियरिंग की दृष्टि से सही नहीं बने हैं उन्हें हटाने की और ठीक करने की कार्रवाई की जाए। बैठक में आवारा मवेशियों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं पर चर्चा की गई। सदस्यों ने कहा कि गौठानों के निर्माण हो जाने की वजह से पशुओं को यहां रखने में आसानी होगी। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिये कि इसके लिए लगातार ड्राइव चलाया जाए। भिलाई स्टील प्लांट एरिया की कुछ सड़कों पर और नगर की कुछ अन्य सड़कों में स्ट्रीट लाइट की समस्या की बात भी बैठक में रखी गई जिस पर अविलंब कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग में 4 ब्लैक स्पाट एवं 13 ग्रे स्पाट पर विशेष ध्यान देते हुए संकेतक बोर्ड, रंबल स्ट्रीप लगाने एवं अभियांत्रिकीय दोष दूर करने पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यातायात की सुगमता को देखते हुए कार्य किया जाए। सड़क सुरक्षा समिति की सबसे अहम जिम्मेदारी सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है इसके लिए जिस तरह के भी तकनीकी निर्णय और कार्य किये जाने हैं उस पर कार्य किया जाए। बैठक में स्कूलों में भी सड़क सुरक्षा से संबंधित बातें बताने की बात सांसद ने कही। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सिलेबस में यह शामिल है और बच्चों को इस संबंध में जागरूक करने लगातार विशेष रूप से पहल की जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि स्कूलों के सामने इमरजेंसी नंबर लिखवाये गये हैं। कुछ स्कूलों में यह कार्य बाकी है जिसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में ड्राइवरों के नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से कराने के निर्देश भी सीएमएचओ को दिये गये। बैठक में अवैध होर्डिंग एवं गलत स्थान पर लगाये गए होर्डिंग भी हटाने का निर्णय लिया गया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने ग्रामीण क्षेत्र में इस संबंध में हो रहे कार्यों की जानकारी दी। बैठक में विधायक विद्यारतन भसीन, दुर्ग महापौर धीरज बाकलीवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / महंगाई की मार को लेकर प्रदेश कांग्रेस की नेत्री वंदना राजपूत ने पीएम मोदी पर कडा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने मन की बात की 68 वी कड़ी में अपने विचार व्यक्त किए, मोदी जी ने मन की बात में एक बार भी बढ़ती हुईं महगांई के मुद्दे का जिक्र भी नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते आर्थिक बदहाली से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं पर महगांई की मार बढ़ती जा रही हैं। देश में बढ़ती महगांई को रोकने में केंद्र सरकार पूरी तरह से विफल रही हैं।
मोदी जी ने 6 साल पहले से दस मिनट के भाषण में कितनी बार महगांई को कम करने की बात की है। जब से मोदी जी के हाथों में जनता ने केन्द्र की चाबी सौंपी है तब से महगांई बेलगाम होती चली जा रही हैं डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जनता के जेब पर डाका डाला है। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों का असर आवश्यक दैनिक वस्तुओ पर पड़ा है। आज महगांई आसमान छू रही है। क्यो मोदी जी को मालूम नहीं है क्या? डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के कारण परिवहन का किराया बढ़ेगा, जिसके कारण हर एक वस्तु महंगी हो जायेगी। बेलगाम महगांई चिंताजनक है लेकिन प्रधानमंत्री जी ने ना कभी इस पर चिन्ता की और ना बढ़ती हुये महगांई को रोकने आवश्यक कदम उठाए।
वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी जी के मन की बात का आयोजन जब-जब होता है तब-तब महिलाओं को लगता है कि अब शायद मोदी जी महगांई के मुद्दे पर चर्चा करके महगांई से थोड़ा बहुत निजात दिलाएंगे लेकिन हर बार महिलाओं के हाथ निराशा लगती है। बढ़ती महगांई के कारण रसोई का बजट बिगड़ गया है। बेशक भारत की जनता बहुत सहनशील और भावनात्मक है लेकिन 80-90 रुपए लीटर के भाव का डीजल- पेट्रोल बेचकर कब तक मोदी जी जनता के भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे। प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना काल में लोगों की आमदनी कम हो गई हैं। पहले से ही बेरोजगारी की मार थी। कोरोना काल में जिसके पास रोजगार था वह भी छिन गया। आमदनी चव्वनी और खर्चा रूपया हो गया है, केन्द्र सरकार प्रमुख मुद्दे को छोड़ बाकी सभी विषयों पर बात करती हैं। केन्द्र सरकार अपनी जिममेदारियों से भाग रही है।
वंदना राजपूत ने कहा कि पिछले 6 साल में मंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर दी है। मंदी के इस दौर में पहले नरेन्द्र मोदी ने नोट बंदी की और फिर जीएसटी, रही-सही असर कोरोना ने पूरी कर दी। देश की जनता को भी 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर सवाल उठाने का अधिकार है आखिर उसका बड़ा लाभ कौन उठा रहा है। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और उसमें मुखिया की अपनी भूमिका को समझें। छह माह पुराने कोरोना ने आज पूरे भारत में पांव पसार लिया है, मोदी यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाते तो कोरोना के मरीजों की संख्या 35 लाख के पार नहीं होती।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. भारत के चहेते राष्ट्रपतियों में शुमार 84 साल के प्रणब मुखर्जी दिल्ली में आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल में भर्ती थे. उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उनकी हालत नाजुक होने के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. उनके ब्रेन में एक थक्का बन गया था, जिसको निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया था. आर्मी अस्पताल की ओर से जानकारी दी गई थी 10 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति की सर्जरी हुई थी, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं दिख रहा था. इसके साथ ही उनको कोरोनावायरस का संक्रमण भी था.
भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के जाने पर पूरे देश में शोक की लहर है. नेताओं से लेकर आम जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे रही है. राष्ट्रपति को महामहिम कहे जाने की रीति से ऐतराज करने वाले प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति थे. उनका राजनीतिक जीवन 40 सालों से भी ज्यादा लंबा रहा है. कांग्रेस पार्टी में रहते हुए उन्होंने विदेश से लेकर रक्षा, वित्त और वाणिज्य मंत्री तक की भूमिका निभाई. उन्होंने भारतीय राजनीति को बहुत लंबे समय तक, बहुत करीब से देखा, हम एक बार उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर पर नजर डाल रहे हैं.
- प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक छोटे से गांव मिराती के एक साधारण से परिवार में हुआ था. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां का नाम राजलक्ष्मी था. प्रणब मुखर्जी के पिता भी कांग्रेसी नेता थे और आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए.
- प्रणब मुखर्जी ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी इतिहास और राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन किया था और लॉ की पढ़ाई भी की थी. उन्होंने सबसे पहले बतौर कॉलेज टीचर अपना करियर शुरू किया लेकिन नेता पिता की संतान होने के चलते वो राजनीति से दूर नहीं रहे और 1969 में चुनकर राज्यसभा में आ गए. इस तरह उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई.
- उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मार्गदर्शन में काम किया. 1973-74 में उन्हें उद्योग, जहाजरानी व परिवहन से लेकर इस्पात व उद्योग उपमंत्री और वित्त राज्यमंत्री बनाया गया.
- 1982 में प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी के कैबिनेट में वित्तमंत्री बने. इसके बाद 2012 तक कांग्रेस में रहने के दौरान कांग्रेस की सरकारों के कार्यकालों में उन्होंने वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसी अहम भूमिकाएं निभाईं. वो दो बार विदेश मंत्री बने- 1995 से 1996 तक फिर 2006 से 2009 तक. मुखर्जी 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे.
- 2012 में उन्होंने 25 जुलाई को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और 2017 तक देश के राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवा देते रहे. संवैधानिक नियम के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव लडऩे से पहले उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
- पूर्व राष्ट्रपति ने कूटनीतिक स्तर पर भी अहम भूमिकाएं निभाईं. मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ्रीकी विकास बैंकों के संचालक मंडलों में रहे. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से लेकर गुटनिरपेक्ष विदेश मंत्रियों के सम्मेलन सहित कई सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया.
- प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था. इसके पहले 2008 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा वो सर्वोत्तम सांसद और प्रशासक भी रह चुके थे. उन्हें दुनियाभर के विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधियां मिली हुई थीं.
- भारत के सक्षम प्रशासक नेताओं में से एक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था से लेकर एक देश के निर्माण जैसे विषयों पर कई किताबें लिखी हैं. "The Turbulent Years- 1980-1996Ó, ÒThe Coalition YearsÓ, ÒThe Dramatic DecadeÑ The Indira Gandhi Years, और 'Thoughts and Reflections " उनकी कुछ चर्चित किताबें हैं.
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए इसे राष्ट्र के लिए अपूरनीय क्षति बताया और इस दुख की घड़ी में परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने अपने शोक सन्देश में कहा है कि श्री प्रणब मुखर्जी ने अपने लंबे राजनैतिक जीवन में देश की उन्नति और समाज के हर वर्ग के हित के लिए कार्य करते हुए अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। उनका निधन राष्ट्रीय क्षति है, इस कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की यादें छत्तीसगढ़ से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वर्ष 2007 में विदेश मंत्री रहते हुए राजधानी रायपुर में नवीन पासपोर्ट कार्यालय का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए वर्ष 2012 में 6 और 7 नवम्बर 2012 को दो दिवसीय यात्रा के दौरान राज्योत्सव कार्यक्रम में शामिल होने के साथ ही उन्होंने नए मंत्रालय परिसर का उद्घाटन, स्वामी विवेकानन्द हवाई अड्डा रायपुर में नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। श्री मुखर्जी अपनी इस यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिला नारायणपुर में जनजाति कल्याण विभाग के 500 सीटर छात्रावास और रामकृष्ण मिशन आश्रम के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवन की आधारशिला रखी। श्री मुखर्जी 26 जुलाई 2014 को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह और 17 अप्रैल 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में भी शामिल हुए थे।
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