August 02, 2026
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    भारत

    भारत (1077)

    **एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

    गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

    नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

    जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


    जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

    जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
    विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


    वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

    यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
    विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


    सरकारी मंच, निजी लापरवाही

    सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
    पर सवाल यह है कि—

    • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

    • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


    माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

    घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

    “प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

    लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

    • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

    • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


    गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

    यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
    खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
    ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
    समझ लिया गया।


    एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
    यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

    नई दिल्ली / एजेंसी /
    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव का उद्घाटन किया।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, अपनी लिपि के अभाव में संताली भाषा को प्रारंभ में रोमन, देवनागरी, उड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था। नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग भी वहाँ प्रचलित लिपियों का उपयोग करते थे। ये लिपियां संताली भाषा के मूल शब्दों का सही उच्चारण सही तरीके से नहीं कर पा रही थीं. साल 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। तब से यह संताली भाषा के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आज यह लिपि विश्वभर में संताल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है और समुदाय में एकता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि की शताब्दी समारोह इस लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर होना चाहिए। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बंगाली या किसी अन्य भाषा में शिक्षा मिल सकती है, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली भी अलचिकि लिपि में सीखनी चाहिए।

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    राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि अनेक लेखक अपने साहित्यिक कार्यों से संताली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की सलाह दी।

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    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का उपवन है। भाषा और साहित्य समुदायों के भीतर एकता को बनाए रखने वाले सूत्र हैं। साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध होती हैं। संताली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक अनुवाद और लेखन के माध्यम से पहुंचाने तथा अन्य भाषाओं के साहित्य को संताली में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच अलचिकि लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।

    14 मिलियन से अधिक डाउनलोड, 10 लाख लोगों ने घर बैठे अपडेट किया मोबाइल नंबर

    नई दिल्ली /
    भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित नया आधार ऐप देश में डिजिटल पहचान प्रबंधन का एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों के बीच इसे जबरदस्त स्वीकार्यता मिल रही है, जो सुरक्षित, सरल और गोपनीयता-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
    यूआईडीएआई के इस नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल ऐप को अब तक 14 मिलियन (1.4 करोड़) से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। 28 जनवरी 2026 को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से यह ऐप औसतन प्रतिदिन एक लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज कर रहा है।

    घर बैठे आधार सेवाएं, लाखों नागरिकों को राहत
    आधार ऐप ने नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बना दिया है।
    अब तक—
    10 लाख से अधिक लोगों ने ऐप के माध्यम से अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया
    3.57 लाख आधार धारकों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक की सुविधा का उपयोग किया
    लगभग 8 लाख लोगों ने ई-आधार डाउनलोड किया
    यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आधार से जुड़ी सेवाएं अब बिना कतार और बिना कार्यालय गए, घर बैठे संभव हो रही हैं।

    गोपनीयता और सुरक्षा पर विशेष जोर
    यह ऐप डेटा मिनिमाइजेशन, कंसेंट कंट्रोल और सेलेक्टिव डेटा शेयरिंग जैसी आधुनिक अवधारणाओं को बढ़ावा देता है। फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से पहचान सत्यापन, सिंगल क्लिक में बायोमेट्रिक प्रबंधन और ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने जैसी सुविधाएं इसे और अधिक सुरक्षित बनाती हैं।

    QR आधारित वेरिफिकेशन से आसान हुआ दैनिक जीवन
    आधार ऐप के जरिए अब—
    होटल चेक-इन
    अस्पतालों में भर्ती
    कार्यक्रमों में प्रवेश
    आयु सत्यापन
    गिग वर्कर्स एवं सर्विस पार्टनर्स का सत्यापन
    जैसे कार्य ऑफलाइन QR कोड वेरिफिकेशन के माध्यम से आसानी से किए जा सकते हैं। इसके लिए UIDAI एक मजबूत ऑफलाइन वेरिफिकेशन इकोसिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिससे संस्थाएं पंजीकरण कर इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

    “वन फैमिली – वन ऐप” की अवधारणा
    यह आधार ऐप एक ही मोबाइल डिवाइस पर पांच आधार प्रोफाइल प्रबंधित करने की सुविधा देता है, जिससे पूरे परिवार के लिए एक ही ऐप पर्याप्त हो जाता है। पता अपडेट के साथ-साथ अब पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट की सुविधा भी इसमें शामिल है। भविष्य में और भी सेवाओं को जोड़ने की योजना है।

    डिजिटल भारत की दिशा में मजबूत कदम
    आधार ऐप की यह व्यापक स्वीकार्यता सेवा वितरण में सुधार, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में UIDAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नियमित अपडेट, उन्नत सुरक्षा फीचर्स और सरल इंटरफेस के कारण यह ऐप सभी आयु वर्ग और क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
    आधार ऐप आज केवल एक एप्लिकेशन नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पहचान का नया चेहरा बन चुका है।

    नई दिल्ली /
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया।
    श्री मोदी ने कहा कि नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी उत्साही लोगों के बीच उपस्थित होना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए बदलावकारी समाधान तैयार करेगी, बल्कि वैश्विक विकास में भी योगदान देगी।
    एक्स पर अपनी पोस्ट में श्री मोदी ने कहा, “भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। यहां नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और तकनीक प्रेमियों के बीच रहकर एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है। हम मिलकर ऐसे समाधान तैयार करेंगे जो केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए होंगे!”

    नई दिल्ली / एजेंसी /
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में 17 फरवरी 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह करेंगे। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित बनाना है।
    बैठक में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और भविष्य की साझा कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
    मंथन बैठक का प्रमुख फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर रहेगा। इसके तहत 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर विचार किया जाएगा। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत आधुनिक गोदामों के विस्तार से किसानों को बेहतर भंडारण और बाज़ार तक सीधी पहुंच देने पर चर्चा होगी।
    बैठक में नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में राज्यों की भागीदारी पर भी विमर्श होगा, जिससे निर्यात, जैविक खेती और बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका सुदृढ़ हो सके।
    इसके अलावा सहकारिता कानूनों में सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने, डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी, सहकारी बैंकों की मजबूती, सदस्यता विस्तार, डिजिटलीकरण, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
    यह मंथन बैठक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहकारिता को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई अग्रणी नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए एकत्रित हुए

    नई दिल्ली / 
    राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। यह शिखर सम्मेलन इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर इस स्तर का वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य समावेशी विकास, मजबूत सार्वजनिक प्रणालियों और सतत प्रगति के लिए एआई की भूमिका को वैश्विक दृष्टिकोण से परिभाषित करना है।
    16 से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 60 से अधिक मंत्री एवं उपमंत्री, तथा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही, विश्वभर से 500 से अधिक सीईओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और परोपकारी संगठनों के प्रतिनिधि इस मंच पर एकत्रित हुए हैं।
    19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भाषण देंगे। उनका संबोधन वैश्विक सहयोग को सशक्त करने और जिम्मेदार, सुरक्षित एवं समावेशी एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को दिशा देने वाला होगा।
    शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन वैश्विक प्रभाव चुनौतियाँ — एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई हैं। इन पहलों के तहत दुनिया भर से 60 से अधिक देशों के 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो एआई नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। बहुस्तरीय मूल्यांकन के बाद 70 शीर्ष टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है, जो 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम एवं सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी।
    18 फरवरी को आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से आयोजित एआई एवं इसके प्रभाव पर अनुसंधान संगोष्ठी शिखर सम्मेलन का प्रमुख अकादमिक मंच होगा। इसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से प्राप्त लगभग 250 शोध प्रस्तुतियों पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की उपस्थिति प्रस्तावित है।
    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जन, ग्रह और प्रगति के तीन मूल स्तंभों पर आधारित है और सात विषयगत कार्य समूहों के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई, मानव पूंजी और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर परिणाम-उन्मुख सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई सहयोग का प्रमुख केंद्र बनाने और जिम्मेदार नवाचार को जनहित से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    रायपुर / /महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज श्रीलंका के कोलंबो में खेले गए टी-20 विश्व कप मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 61 रनों से पराजित कर राष्ट्र का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जांबाज खिलाड़ियों ने संयम, रणनीति और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय देते हुए यादगार जीत दर्ज की। यह क्षण करोड़ों देशवासियों के लिए गर्व, उत्साह और उल्लास का अवसर है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों को इस गौरवपूर्ण सफलता के लिए हार्दिक बधाई देते हुए आगामी मुकाबलों के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

    नई दिल्ली।
    ICC पुरुष T20 विश्व कप 2026 के ग्रुप-A मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए नामीबिया को 93 रनों के विशाल अंतर से पराजित किया। यह मुकाबला 12 फरवरी 2026 को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला गया, जहां भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी—दोनों विभागों में अपना वर्चस्व कायम रखा।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 209 रन बनाए। भारतीय पारी के हीरो इशान किशन रहे, जिन्होंने मात्र 24 गेंदों में 61 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनके अलावा हार्दिक पांड्या ने 28 गेंदों में 52 रन बनाकर नामीबियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता के सामने नामीबिया का गेंदबाजी आक्रमण बेबस नजर आया।

    210 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 18.2 ओवरों में महज 116 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से वरुण चक्रवर्ती ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके। वहीं, हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल ने 2-2 विकेट लेकर नामीबिया की रनचेज को पूरी तरह पटरी से उतार दिया।

    ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए हार्दिक पांड्या को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्होंने न केवल अर्धशतकीय पारी खेली, बल्कि महत्वपूर्ण विकेट भी अपने नाम किए।

    इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है और ग्रुप-A में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें भारत के अगले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां भारतीय टीम रविवार, 15 फरवरी को कोलंबो में चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से भिड़ेगी। यह मुकाबला ग्रुप चरण का सबसे चर्चित और निर्णायक मैच माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य भवनों का किया उद्घाटन, सुशासन और 'राष्ट्र प्रथमÓ के संकल्प को मिली नई ऊर्जा

    नई दिल्ली /

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 'सेवा तीर्थÓ को राष्ट्र को समर्पित किया। संध्या समय आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 'सेवा तीर्थÓ परिसर में पट्टिका का अनावरण कर कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया गया।

    यह कार्यक्रम देश की प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों की सेवा के अपने अटूट संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह परिसर 'नागरिक देवो भवÓ की पावन भावना से प्रेरित है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 'सेवा तीर्थÓ केवल एक भवन नहीं, बल्कि कर्तव्य, करुणा और 'राष्ट्र प्रथमÓ के सिद्धांत के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की सेवा के संकल्प और 'नागरिक देवो भवÓ की भावना को साथ लेकर इस पहल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

    प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाली पीढिय़ों को नि:स्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण हेतु समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस परिसर में प्रवेश करते समय 'कर्तव्यÓ की सर्वोच्च भावना को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    कार्यक्रम में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर,प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तथा केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू विशेष रूप से उपस्थित थे।

    तोखन साहू का वक्तव्य

    इस अवसर पर श्री तोखन साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'सेवा तीर्थÓ प्रधानमंत्री की जन-केंद्रित शासन व्यवस्था की सोच का मूर्त रूप है और यह भारत की प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रशासन को संवेदनशील, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम बनाने की जो दिशा दी है, यह पहल उसी संकल्प की अभिव्यक्ति है।

    श्री साहू ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए गर्व का विषय है और यह आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र बिलासपुर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास और आशीर्वाद के कारण ही उन्हें राष्ट्र निर्माण के इस गौरवपूर्ण क्षण में सहभागी बनने का अवसर मिला है।

    उन्होंने अपने परिवारजनों के प्रति भी हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके संस्कार, मार्गदर्शन और सतत सहयोग ने उन्हें सदैव जनसेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी है।

    उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा,
    "यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प का सजीव प्रतीक है। मैं अपने संसदीय क्षेत्र की जनता और अपने परिवार का हृदय से आभारी हूँ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सेवा तीर्थÓ आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा और हम सभी को 'राष्ट्र प्रथमÓ की भावना के साथ निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।"
    'सेवा तीर्थÓ को सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केन्द्रित प्रशासन की दिशा में एक नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक माना जा रहा है, जो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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