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June 26, 2026
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भारत

भारत (1050)

अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम

किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस

    रायपुर / शौर्यपथ / अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।
श्री परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

अयोध्या।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन एवं चोरी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर के दान पात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी तथा सोना, चांदी और हीरे के आभूषणों में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर ली है।

मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के आधार पर इस कथित घोटाले का आकार ₹200 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है, हालांकि इस राशि की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कर्मचारियों की संपत्ति पर उठे सवाल

मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच भारी अंतर सामने आने के दावे किए गए। आरोप है कि 14 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने कई कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

दान में मिली चांदी और आभूषणों का रिकॉर्ड सवालों के घेरे में

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन समेत कुछ दानदाताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण और धार्मिक उपयोग के लिए भेजी गई लगभग 60 किलो चांदी तथा कई बहुमूल्य हार, चरण पादुकाएं और अन्य आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई दान वस्तुओं की रसीद और आधिकारिक अभिलेख भी नहीं मिल रहे हैं।

SIT की कार्रवाई, कर्मचारी हिरासत में

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। जांच के दौरान दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार उसके घर से अलमारी और उपलों के ढेर के नीचे छिपाकर रखी गई लगभग 10 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है। मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और कार्रवाई की गई है।

ट्रस्ट पदाधिकारियों से लंबी पूछताछ

जांच के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, रामशंकर यादव (टिन्नू) सहित कई पुजारियों और बैंक अधिकारियों से बंद कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई। SIT ने अयोध्या के ग्रीन हाउस में छह दिनों तक डेरा डालकर दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और दान प्रबंधन प्रणाली की जांच की।

CCTV फुटेज बनी बड़ी चुनौती

जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी बाधा मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम को लेकर सामने आई है। परिसर में लगभग 1,000 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे होने के बावजूद फुटेज का बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद डेटा स्वतः नष्ट हो जाता है। जांच एजेंसियों को कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ रवाना हो चुकी है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई, संभावित अभियोजन और विस्तृत वित्तीय ऑडिट पर निर्णय लिया जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मामले की जांच अभी जारी है। ₹200 करोड़ की कथित हेराफेरी, आभूषणों की चोरी और अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही तय होगी।

12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कोलकाता से दुनिया को संदेश – “योग को उत्सव नहीं, जीवनशैली बनाइए”

कोलकाता।
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। लाखों लोगों की उपस्थिति और विश्व के अनेक देशों की सहभागिता के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी कला है जिसे प्रत्येक व्यक्ति, परिवार और आने वाली पीढ़ियों की दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में योग को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया इसे स्वास्थ्य, संतुलन और शांति के माध्यम के रूप में स्वीकार कर रही है। उन्होंने योग को मानवता के लिए भारत का अमूल्य उपहार बताते हुए इसके वैश्विक विस्तार पर प्रसन्नता व्यक्त की।

70 की उम्र में भी 50 जैसा स्वास्थ्य संभव

प्रधानमंत्री ने "हेल्दी एजिंग" अर्थात स्वस्थ बुढ़ापे की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि योग को नियमित जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो 70 वर्ष की आयु में भी व्यक्ति स्वयं को 50 वर्ष जैसा स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय महसूस कर सकता है। योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

‘योग 365’ अभियान की शुरुआत

योग को दैनिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने ‘योग 365’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके तहत 100 दिनों का एक ऑनलाइन अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसमें अब तक 130 देशों के लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई है। यह पहल योग को एक दिन के कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर वर्ष के 365 दिनों की जीवनशैली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विश्व शांति की राह दिखाता है योग

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग का महत्व केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह समाज में सकारात्मकता, राष्ट्रों के बीच सद्भाव और विश्व शांति का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, तब योग मानवता को संतुलन, संयम और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखा रहा है।

भारत की विरासत बना वैश्विक उत्सव

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने उन करोड़ों लोगों का आभार व्यक्त किया जो दुनिया के विभिन्न देशों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है और यह दिखाता है कि योग की शक्ति सीमाओं से परे मानवता को जोड़ने का कार्य कर रही है।

लोगों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं लोगों के बीच जाकर विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास कराया और प्रतिभागियों को सुरक्षित तथा वैज्ञानिक तरीके से योग करने के लिए प्रेरित किया। रेड रोड पर आयोजित यह विशाल योगाभ्यास कार्यक्रम अनुशासन, ऊर्जा और सामूहिक चेतना का अद्भुत उदाहरण बन गया।

संदेश स्पष्ट है

कोलकाता के रेड रोड से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था—
“योग को एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन की दिनचर्या बनाइए। स्वस्थ शरीर, शांत मन और बेहतर भविष्य का यही सबसे सरल मार्ग है।”

    नई दिल्ली / शंघाई में होने वाले आगामी वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन के लिए भारत अपनी तैयारियों को तेज़ कर रहा है, इसी क्रम में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज ऑस्ट्रेलिया में होने वाले ग्लोबल स्किल्स चैलेंज (GSC) 2026 के लिए टीम इंडिया को रवाना किया। 30 सदस्यों वाले भारतीय दल में 15 प्रतियोगी और 15 विशेषज्ञ शामिल हैं, जो 23 से 29 जून 2026 तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय स्किल्स सिमुलेशन इवेंट में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

वर्ल्डस्किल्स ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित ग्लोबल स्किल्स चैलेंज, वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन का ही एक बड़े स्तर का अंतरराष्ट्रीय सिमुलेशन है। यह चीन के शंघाई में होने वाले 48वें वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन से पहले तैयारी के लिए एक अहम मंच का काम करता है। असल अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन जैसे हालात तैयार करने के मकसद से आयोजित यह इवेंट, भाग लेने वाले देशों को एक हाई-इंटेंसिटी वाले ग्लोबल माहौल में अपने प्रदर्शन को मापने, तैयारियों को परखने और कॉम्पिटिशन के लिए अपनी तत्परता को बेहतर बनाने का मौका देता है।

यह प्रतियोगिता चार दिनों तक चलने वाले स्किल कॉन्टेस्ट के ज़रिए WorldSkills जैसा माहौल बनाएगी। इसमें मार्किंग और असेसमेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 'कॉम्पिटिशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा। वर्ल्ड स्कूल्स के सदस्य देशों से लगभग 600 कॉम्पिटिटर्स, एक्सपर्ट्स, ट्रांसलेटर्स और अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह इवेंट 'टीम इंडिया' को अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड्स, नई टेक्नोलॉजी और दुनिया भर में अपनाए जाने वाले बेहतरीन तरीकों (बेस्ट प्रैक्टिसेज़) को जानने-समझने का शानदार मौका देगा।

इस मौके पर स्किल डेवलपमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप मिनिस्ट्री की सेक्रेटरी, सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने कहा, "ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 ऑस्ट्रेलिया “ सिर्फ़ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि 'टीम इंडिया' के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने, अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और शंघाई में होने वाली वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता के लिए तैयारी करने का एक अहम मौका है। मैं हर कॉम्पिटिटर से कहूँगी कि वे अपने एक्सपर्ट्स की बात ध्यान से सुनें, फोकस और डिसिप्लिन बनाए रखें और सीखने के हर मौके का पूरा फ़ायदा उठाएँ। वे सभी पहले से ही देश के लिए चैंपियन हैं और हमें उनके सफ़र पर बहुत गर्व है। मैं 'टीम इंडिया' को शुभकामनाएँ देती हूँ कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और ग्लोबल स्टेज पर भारत का नाम रोशन करें।"

इसके अलावा, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सीईओ , श्री अरुणकुमार पिल्लई ने कहा, "हमारे हर कैंडिडेट ने भारत में सबसे बेहतरीन लोगों में शामिल होने के लिए एक मुश्किल और बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिटिव सफ़र तय करके यहाँ अपनी जगह बनाई है। 'ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 ऑस्ट्रेलिया' शंघाई से पहले का आखिरी पड़ाव है, और अब और भी ज़्यादा फ़ोकस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की ज़रूरत है। मुझे उम्मीद है कि वे हर अनुभव से सीखेंगे, अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा करेंगे और सफलता की कल्पना करेंगे। उस पल की कल्पना करें जब वे सितंबर 2026 में देश की उम्मीदों को लेकर पोडियम पर खड़े होंगे। हमारे लिए, वे पहले से ही हीरो हैं। जब वे दुनिया का सामना करने के लिए आगे बढ़ेंगे, तो उन्हें पता होना चाहिए कि पूरा 'स्किल इंडिया' परिवार हमारे हर कैंडिडेट के साथ मज़बूती से खड़ा है और हर कदम पर उनकी सफलता के लिए हौसला बढ़ा रहा है।"

इस मौके पर एमएसडीई की सीनियर इकोनॉमिक एडवाइज़र श्रीमती मनीषा सेनशर्मा, जॉइंट सेक्रेटरी श्रीमती हेना उस्मान के साथ-साथ अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे।

भारत 'ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026' में 15 स्किल कैटेगरी में हिस्सा लेगा। ये कैटेगरी हैं: 3D डिजिटल गेम आर्ट, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, ब्यूटी थेरेपी, ब्रिकलेइंग (ईंट-चिनाई), क्लाउड कंप्यूटिंग, फ्लोरिस्ट्री, ग्राफिक डिज़ाइन टेक्नोलॉजी, हेयरड्रेसिंग, हेल्थ और सोशल केयर, इंडस्ट्रियल मैकेनिक्स, पेंटिंग और डेकोरेटिंग, रेस्टोरेंट सर्विस, वॉल और फ्लोर टाइलिंग, और वेब टेक्नोलॉजीज़। ये क्षेत्र एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़, कंस्ट्रक्शन ट्रेड और सर्विस-सेक्टर स्किल्स का एक मिला-जुला रूप हैं, जो भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम के विस्तार और उसमें आ रहे आधुनिक बदलावों को दिखाते हैं।

उम्मीद है कि इस अनुभव से तकनीकी तैयारी बेहतर होगी, इंटरनेशनल मूल्यांकन सिस्टम की समझ बढ़ेगी और कॉम्पिटिटर्स को ग्लोबल स्टेज पर जाने से पहले असल कॉम्पिटिशन के माहौल में परफॉर्म करने का मौका मिलेगा।

यह चैलेंज यूरोप, पूर्वी एशिया, ओशिनिया और अन्य भाग लेने वाले क्षेत्रों के प्रमुख प्रतिस्पर्धियों और विशेषज्ञों के साथ जुड़कर बेंचमार्किंग का एक मज़बूत प्लेटफ़ॉर्म भी देता है। एडवांस्ड इक्विपमेंट वाले माहौल, इंडस्ट्री की बदलती उम्मीदों और अलग-अलग तरह के कॉम्पिटिशन के तरीकों से भारत की तैयारी और परफॉर्मेंस की क्षमताएं और मज़बूत होंगी।

ग्लोबल स्किल्स चैलेंज में भारत की भागीदारी 'स्किल इंडिया मिशन' के उस बड़े विज़न को और मज़बूत करती है, जिसका मकसद भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स बनाना और ग्लोबल स्किल्स इकोसिस्टम में भारत की स्थिति को मज़बूत करना है। व्यवस्थित ट्रेनिंग, एक्सपर्ट मेंटरिंग और मज़बूत इंडस्ट्री पार्टनरशिप के ज़रिए, टीम इंडिया वर्ल्ड लेवल पर उत्कृष्टता के ऊंचे स्टैंडर्ड हासिल करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

नई दिल्ली / भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 जून, 2026) मध्य प्रदेश स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया। उन्होंने राष्ट्रीय उद्यान के चीता प्रबंधन क्षेत्र का अवलोकन किया। उन्हें प्रोजेक्ट चीता के संबंध में वन मंडलाधिकारी द्वारा जानकारी दी गई।
नवंबर 2025 में बोत्सवाना की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बोत्सवाना द्वारा भारत को आठ चीतों के प्रतीकात्मक हस्तांतरण की साक्षी बनी थीं। ये चीते फरवरी 2026 में कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाए गए थे।

17 सितंबर, 2022 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया प्रोजेक्ट चीता जैव-विविधता के पुनर्स्थापन के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में विलुप्त हो चुके चीते का पुनर्प्रवेश कराना है। प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत कूनो राष्ट्रीय उद्यान को भारत के प्रथम चीता पुनर्प्रवेश स्थल के रूप में विकसित किया गया है, क्योंकि यहां चीतों के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार तथा न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप उपलब्ध है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों का प्रथम दल सितंबर 2022 में नामीबिया से, द्वितीय दल फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से तथा तृतीय दल फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाया गया था।

  रायपुर, /केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये नई दिल्ली से देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रियों से टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर व्यापक चर्चा की। छत्तीसगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंस से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भाग लिया और उन्होंने टीबी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तेजी से कई गांव एवं ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुए है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री विकासशील भी छत्तीसगढ़ से शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों के मुख्य सचिव भी शामिल हुए।

श्री नड्डा ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए हम सभी केन्द्र एवं राज्यों की सरकारें आपसी समन्वय से कार्य कर रहे है। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को सभी के सहयोग से पूरा कर लिया जाएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने टीबी के मरीजों की तेजी से पहचान करने, इलाज में नियमिता, हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में मरीजों की जांच एवं ईलाज तथा त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना जरूरी है। इसी तरह से जनप्रतिनिधियों के सहयोग एवं जनसहभागिता से कार्य करने पर बल दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अधिकारी भी शामिल हुए।

नई दिल्ली, ।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे उपायों की व्यापक समीक्षा करते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति की 25वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

बैठक में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने हेतु पेट्रोल पंपों एवं सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की समीक्षा की गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन, बीएस-III और उससे पुराने वाहनों पर कार्रवाई तथा यातायात जाम वाले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

सड़क धूल एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के तहत दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 5,500–6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज करने पर जोर दिया गया।

पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में पराली आधारित बायोमास पेलेट्स के उपयोग को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 1 नवंबर 2026 तक न्यूनतम 30 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया।

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की रोकथाम, लैंडफिल स्थलों पर आग नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में उद्योगों के लिए नए उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि निर्धारित पीएम उत्सर्जन सीमा का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बंदी सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी एजेंसियां सख्त प्रवर्तन, नियमित समीक्षा और त्वरित सुधारात्मक कदमों के साथ निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

राज्यसभा नामांकन विवाद में कांग्रेस की अगली रणनीति पर नजर, 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित नामांकन विवाद में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होगी और क्या मीनाक्षी नटराजन चुनाव याचिका दायर कर इस मामले को आगे बढ़ाएंगी।

हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज ही आया है और फिलहाल मीनाक्षी नटराजन द्वारा चुनाव याचिका दायर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस की विधिक टीम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति तय कर सकती है।

हाई कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस मामले को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर नामांकन निरस्तीकरण की वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

राज्यसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल गया

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने का सीधा असर राज्यसभा चुनाव की दिशा पर पड़ा। कांग्रेस की प्रमुख दावेदार के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए और भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

कांग्रेस ने लगाए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप

कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। पार्टी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से विपक्षी प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा है। वहीं भाजपा ने निर्वाचन प्रक्रिया को नियमसम्मत और वैधानिक बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है।

अब सबकी नजर कांग्रेस के अगले कदम पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, नामांकन की वैधता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े व्यापक सवाल भी इससे जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस हाई कोर्ट का रुख करती है या नहीं, इस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा को तत्काल राजनीतिक लाभ मिला है, जबकि कांग्रेस के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री साय का न्योता
आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह

  हैदराबाद / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित 'छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्टÓ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए 'रेड कारपेटÓ बिछा हुआ है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए 'इन्विटेशन टू इन्वेस्टÓ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।

सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ?4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।

फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे।

सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।
श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमश: लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे।

हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस एनर्जी, सेल्कॉन ग्रुप, मैग्नमविंग्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की।

इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई।

कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री रितु सैन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक श्री प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।

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