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March 10, 2026
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भारत

भारत (964)

नई दिल्ली / शौर्यपथ /18 साल के लंबे अंतराल के बाद सरकार जम्मू और कश्मीर के कठुआ में सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा रेखा (जीरो लाइन) पर खेती करने के लिए कदम उठा रही है। सीमा पर जमीनी हकीकत का आकलन करने और खेती के लिए तैयार करने के लिए कठुआ के उपायुक्त ओपी भगत, एक सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी, कृषि विभाग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और एक सीमा क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि की सोमवार को बीओपी पर जीरो लाइन पर एक बैठक हुई।

बैठक में खेती की सारी तैयारी, किसानों की जमीन का सीमांकन और लैंडमाइन जैसी आशंकाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने एक बंकर वाहन में जीरो लाइन का दौरा भी किया और खेती की जमीनी स्थिति और व्यवहार्यता का आकलन किया। पाकिस्तान के किसान अपने खेतों पर जीरो लाइन तक खेती कर रहे हैं, लेकिन हीरंगर सेक्टर में लगभग 3,500 नहरों की जमीन पाकिस्तान द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी के कारण असिंचित पड़ी है।
कठुआ के उपायुक्त ओपी भगत ने बैठक के बाद किसानों को आश्वासन दिया कि अक्टूबर के महीने में बाड़ के पार गेहूं की अगली फसल की खेती जीरो लाइन पर की जाएगी।
सरकार किसानों को हर संभव मदद करेगी। किसानों को उपकरण, ट्रैक्टर और सीमा सुरक्षा बल द्वारा सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। भगत ने किसानों को जीरो लाइन पर खेती के लिए तैयार रहने के लिए कहा है, क्योंकि जम्मू और कश्मीर सरकार पूरी भूमि पर बाड़ लगाने के लिए इच्छुक है। यह बीएसएफ को जीरो लाइन पर सतर्कता बनाए रखने में भी मदद करेगा।
उन्होंने कहा, "हम यहां बोआई की व्यवहार्यता और प्रक्रिया का आकलन करने के लिए आए हैं। किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और मुझे उम्मीद है कि हम यहां गेहूं की फसल बोने में सफल होंगे। हम किसानों को बुआई और जुताई के लिए यहां लाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे किसानों को फायदा होगा। साथ ही यह बीएसएफ अधिकारियों के लिए लाइन को साफ कर देगा, जिससे उग्रवाद और गोलाबारी में कमी आएगी।"
बीडीसी के चेयरमैन मरीन ब्लॉक करन कुमार और सीमा निवासी अशोक कुमार भी यहां मौजूद थे और 18 साल की लंबी अवधि के बाद जीरो लाइन की जमीन पर खेती करने की सरकार की पहल की सराहना की। दो दशकों से बंजर पड़ी ज़मीनों की खेती के लिए सरकारी समर्थन मिलने के बाद वे खुश हो गए। यह सीमावर्ती किसानों की मांग थी।
अशोक कुमार ने कहा, "डीसी अन्य अधिकारियों के साथ यहां स्थिति का मूल्यांकन के लिए आए थे। राज्यपाल ने हमें यहां खेती करने का भी निर्देश दिया है, जिसके कई लाभ होंगे। सरकार और बीएसएफ हमारी मदद करने के लिए तैयार हैं। हम इस पहल के लिए सरकार को धन्यवाद देना चाहते हैं।"

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक और चिट्ठी लिखी है। 24 घंटे के अंदर लिखी गई इस दूसरी चिट्ठी में उन्होंने इस बात पर एतराज किया है कि कवर्धा के एक आदिवासी के मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा हत्या करने को उन्होंने संज्ञान नहीं लिया। श्री अकबर ने एक दिन पहले लिखी गई चिट्ठी का हवाला देते हुए कहा है यह मामला बेहद गंभीर है अभी तक मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है।
वन मंत्री ने कहा कि 6 सितंबर को मध्यप्रदेश पुलिस ने छत्तीसगढ़ के एक निर्दोष आदिवासी की हत्या कर दी और दूसरे आदिवासी की हत्या का प्रयास किया, जो बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। वन मंत्री अकबर ने उनके द्वारा पहले लिखी गई चिट्ठी पर कार्रवाई न होने पर निराशा जाहिर की। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज से अनुरोध किया कि इस संवेदनशील प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच तत्काल की जाए और छत्तीसगढ़ सरकार को इसकी जानकारी मुहैया कराई जाए।

नई दिल्ली / शौर्यपथ  / लद्दाख और साउथ चाइना सी के बाद चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) अब भूटान के खिलाफ नया मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चीन ने सीमा को लेकर 25वें दौर की बातचीत को अपने पक्ष में झुकाने के मकसद से भूटान पर दबाव बनाने के लिए पश्चिमी और मध्य भाग में बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है।
थिंपू को सर्वोच्च स्तर पर पीएलए के खतरे को लेकर सावधान कर दिया गया है। संभावना है कि आगामी बातचीत में पहले से अतिक्रमित क्षेत्रों और पश्चिमी भाग में दावों की सौदेबाजी के लिए बीजिंग पीएलए के घुसपैठ और अतिक्रमण का इस्तेमाल करेगा। भूटान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में हैं क्योंकि यह देश सिलीगुरी कॉरीडोर के करीब है और भूटान की ओर से जमीन को लेकर किया गया कोई भी समझौता भारतीय रक्षा पर बुरा प्रभाव डालेगा।
भारतीय सेना, कूटनीति और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि 2017 में 73 दिनों तक चले डोकलाम स्टैंड ऑफ के दौरान भारत ने भूटान को पीएलए का सामना करने में मदद की, लेकिन चीनी सेना ने दोनों सहयोगी देशों की सेनाओं को परखना बंद नहीं किया है।
चीन भूटान के पश्चिमी सेक्टर में 318 स्क्वायर किलोमीटर और सेंट्रल सेक्टर में 495 स्क्वायर किलोमीटर पर दावा करता है। विस्तारवादी नीति के तहत चीनी सेना रोड और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में जुटी है और आक्रामक पेट्रोलिंग के जरिए भूटान की रॉयल आर्मी को डराने की कोशिश की जाती है।
थिंपू और नई दिल्ली में मौजूद कूटनीतिज्ञों के मुताबिक, डोकलाम तनातनी के बाद से पीएलए ने पश्चिमी भूटान के पांच इलाकों में घुसपैठ की और नई सीमा पर दावा ठोका है जो भूटान में 40 किलोमीटर भीतर चुंबी वैली तक है। इसने बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है, रक्षापंक्ति को बेहतर बनाया है, सैनिकों और रसद को अंतिम छोड़ तक पहुंचाने के लिए सड़कें, हेलीपैड्स का निर्माण किया गया है।

मध्यकालीन साम्राज्य के अंदाज में पीएलए के सैनिक 13 और 24 अगस्त को दक्षिण डोकलाम में तोरसा नाले को पार कर गए और राजा रानी झील के पास भूटानी चरवाहों को इलाका खाली करने को कह दिया। पीएलए के इस कदम के पीछे वास्तविक सोच यह है कि भारत और भूटान इस बात पर सहमत हो जाएं कि चीनी सीमा झामपेरी रिज पर गयेमोचन तक है, नाकि सिंचे ला बतांग ला एक्सिस। यह वही है जो चीन 2017 में करना चाहता था, लेकिन भारतीय सेना ने पीएलए को रोक दिया था।
नेशनल सिक्यॉरिटी प्लानर्स के मुताबिक, पीएलए ने नॉर्थ डोकलाम में सर्विलांस में वृद्धि कर दी है। इसने यहां सर्विलांस कैमरे लगा दिए हैं और आक्रामक तरीके से सेना का टेक्नीकल अपग्रेडेशन किया जा रहा है। थिंपू ने भी रॉयल भूटानी आर्मी को तैयार रहने को कहा है और पीएलए को तोरसा नाले के दक्षिण से आने से रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया है।
पीएलए का विस्तारवादी प्लान केवल पश्चिमी भूटान तक सीमित नहीं है। जून में चीन ने भूटान के साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य प्रोजेक्ट पर आपत्ति जाहिर की थी। चीन ने कहा था कि यह विवादित सीमा इलाके में मौजूद है। भारत और चीन से लगती सीमा के पास यह 750 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है। नए दावा भारत को भी विवाद में खींच सकता है क्योंकि अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के निकल है, जिस पर चीन अपना दावा करता है।
यह भूटान के लिए बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि चीन ने साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य या पूर्वी भूटान के किसी जमीन पर पहले कभी दावा नहीं किया था। यहां तक की चीन ने 36 सालों से चल रहे कूटनीतिक बातचीत में भी कभी इसका जिक्र नहीं किया था। स्वभाविक रूप से भूटान सरकार ने इसका मजबूती से विरोध किया। चीन के दावे को खारिज करते हुए थिंपू ने यह भी साफ किया कि यह भूटान का संप्रभु हिस्सा है और यह विवादित नहीं है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और भूटान के बीच सीमा निर्धारित नहीं है। पूर्वी, मध्य और पश्चिमी सेक्टर को लेकर लंबे समय से विवाद है।
यह ध्यान देने योग्य है कि चीन का यह रुख जून में सामने आया जब बीजिंग के कहने पर पीएलए सैनिक लद्दाख में भारतीय सैनिकों के साथ तनातनी में जुटे थे। चीन का पूर्वी भूटान में नया दावा बीजिंग की मंशा की ओर संकेत करता है। अचानक क्षेत्रीय दावे ने विस्तारवादी नैरेटिव को पुष्ट किया जो जिसे शी जिनपिंग अंजाम दे रहे हैं।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोना संकट और उसकी वजह से किए गये लॉकडाउन में आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई थी. कर्जदारों को अपना EMI चुकाने में मुश्किल हो रही थी. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए RBI ने लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम (Supreme Court) कोर्ट ने कहा कि अगले दो महीनों तक बैंक खातों को नॉन परर्फोमिंग एसेट्स (NPA) घोषित नहीं किया जा सकता. तीन न्यायाधीशों की बैंच ने मामले पर सुनवाई के बाद कहा कि जिन ग्राहकों के बैंक खाते 31 अगस्त तक NPA नहीं हुए है उन्हें मामले का निपटारा होने तक सुरक्षा दिया जाय. न्यायाधीश अशोक भूषण,आर सुभाष रेड्डी और एम आर शाह वाली तीन सदस्यीय बैंच ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.

सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल और न्यायाधीश ने क्या कहा?
सरकार और आरबीआई की तरफ से दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ब्याज पर छूट नहीं दे सकते है लेकिन भुगतान का दबाव कम कर देंगे. मेहता ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र (Banking Sector) अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वे मानते है कि जितने लोगों ने भी समस्या रखी है वे सही हैं. हर सेक्टर की स्थिति पर विचार जरूरी है लेकिन बैंकिंग सेक्टर का भी ख्याल रखना होगा. तुषार मेहता ने कहा कि मोरेटोरियम का मकसद यह नहीं था कि ब्याज माफ कर दिया जायेगा. कोरोना के हालात का हर सेक्टर पर प्रभाव पड़ा है लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी है जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है. फार्मास्यूटिकल और आईटी सेक्टर ऐसे सेक्टर है जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है. उन्होंने कहा कि जब मोरेटोरियम लाया गया था तो मकसद था कि व्यापारी उपलब्ध पूंजी का जरूरी इस्तेमाल कर सके और उनपर बैंक के किश्त का बोझ नहीं पड़े.

     भोपाल / शौर्यपथ / मध्यप्रदेश के मंदसौर के सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव को लेकर पूर्व कांग्रेसी विधायक और वर्तमान शिवराज सरकार के मंत्री हरदीप सिंह डंग लगातार तूफानी दौरे कर रहे हैं. इस दौरान वे माइक के सहारे नुक्कड़ सभाएं भी कर रहे हैं. ऐसी एक सभा के दौरान हरदीप सिंह डंग से एक कांग्रेसी नेता द्वारा बहस किए जाने का मामला सामने आया है. इस दौरान कांग्रेस नेता हरदीप सिंह डंग पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उनसे नुक्कड़ सभा के दौरान ही बहस करने लगे. मामला बिगड़ता देख किसी तरह से मौके पर तैनात पुलिस कर्मियों ने कांग्रेस नेता को मौके से हटाया.
      इसके बाद मंत्री जी भी ज्यादा देर नहीं रुके और अपना भाषण संक्षिप्त में समाप्त करके अगले गांव की ओर चल दिए. यह मामला बुधवार सुबह का है. अब यह गर्मागर्म नोंकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीडियो सीतामऊ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रतनपुरा का है जहां बुधवार को सुबह जनसंपर्क करने पहुंचे केबिनेट मंत्री हरदीप सिंह डंग की युवक कांग्रेस के कर्मवीर सिंह भाटी से बहस हो गई. सार्वजनिक रूप से हुई इस बहस के बाद मंत्री जी के गार्ड ने बहस कर रहे कर्मवीर को वहां से हटा दिया.युवक कांग्रेस के अध्यक्ष कर्मवीर भाटी ने हरदीप सिंह डंग पर इस दौरान झूठ बोलने ओर धर्म पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया. मामला बढ़ते देख पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और कर्मवीर को सभा स्थल से हटाया गया.
     दरअसल हरदीप सिंह डंग नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने वादाखिलाफी की. समूह लोन माफ नहीं किए. किसानों का दो लाख का कर्जा माफ नहीं किया. यहां तक कि एक नेता तो जयकार पर आपत्ति लेते थे. इस दौरान आपत्ति जताते हुए कर्मवीर ने मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

नई दिल्ली / एजेंसी / भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. भारत के चहेते राष्ट्रपतियों में शुमार 84 साल के प्रणब मुखर्जी दिल्ली में आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल में भर्ती थे. उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उनकी हालत नाजुक होने के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. उनके ब्रेन में एक थक्का बन गया था, जिसको निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया था. आर्मी अस्पताल की ओर से जानकारी दी गई थी 10 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति की सर्जरी हुई थी, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं दिख रहा था. इसके साथ ही उनको कोरोनावायरस का संक्रमण भी था.
भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के जाने पर पूरे देश में शोक की लहर है. नेताओं से लेकर आम जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे रही है. राष्ट्रपति को महामहिम कहे जाने की रीति से ऐतराज करने वाले प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति थे. उनका राजनीतिक जीवन 40 सालों से भी ज्यादा लंबा रहा है. कांग्रेस पार्टी में रहते हुए उन्होंने विदेश से लेकर रक्षा, वित्त और वाणिज्य मंत्री तक की भूमिका निभाई. उन्होंने भारतीय राजनीति को बहुत लंबे समय तक, बहुत करीब से देखा, हम एक बार उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर पर नजर डाल रहे हैं.
- प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक छोटे से गांव मिराती के एक साधारण से परिवार में हुआ था. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां का नाम राजलक्ष्मी था. प्रणब मुखर्जी के पिता भी कांग्रेसी नेता थे और आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए.
- प्रणब मुखर्जी ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी इतिहास और राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन किया था और लॉ की पढ़ाई भी की थी. उन्होंने सबसे पहले बतौर कॉलेज टीचर अपना करियर शुरू किया लेकिन नेता पिता की संतान होने के चलते वो राजनीति से दूर नहीं रहे और 1969 में चुनकर राज्यसभा में आ गए. इस तरह उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई.
- उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मार्गदर्शन में काम किया. 1973-74 में उन्हें उद्योग, जहाजरानी व परिवहन से लेकर इस्पात व उद्योग उपमंत्री और वित्त राज्यमंत्री बनाया गया.
- 1982 में प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी के कैबिनेट में वित्तमंत्री बने. इसके बाद 2012 तक कांग्रेस में रहने के दौरान कांग्रेस की सरकारों के कार्यकालों में उन्होंने वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसी अहम भूमिकाएं निभाईं. वो दो बार विदेश मंत्री बने- 1995 से 1996 तक फिर 2006 से 2009 तक. मुखर्जी 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे.
- 2012 में उन्होंने 25 जुलाई को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और 2017 तक देश के राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवा देते रहे. संवैधानिक नियम के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव लडऩे से पहले उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
- पूर्व राष्ट्रपति ने कूटनीतिक स्तर पर भी अहम भूमिकाएं निभाईं. मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ्रीकी विकास बैंकों के संचालक मंडलों में रहे. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से लेकर गुटनिरपेक्ष विदेश मंत्रियों के सम्मेलन सहित कई सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया.
- प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था. इसके पहले 2008 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा वो सर्वोत्तम सांसद और प्रशासक भी रह चुके थे. उन्हें दुनियाभर के विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधियां मिली हुई थीं.
- भारत के सक्षम प्रशासक नेताओं में से एक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था से लेकर एक देश के निर्माण जैसे विषयों पर कई किताबें लिखी हैं. "The Turbulent Years- 1980-1996Ó, ÒThe Coalition YearsÓ, ÒThe Dramatic DecadeÑ The Indira Gandhi Years, और 'Thoughts and Reflections " उनकी कुछ चर्चित किताबें हैं.

नई दिल्ली । शौर्यपथ । जब से देश की सत्ता प्रधानमंत्री मोदी के हांथ आई तब से प्रति माह देश के सामने पीएम मोदी अपने मन की बात कहते आये है । विभिन्न माध्यम से प्रसारित इस कार्यक्रम में मोदी विभिन्न मुद्दों पर अपने मन की बात कहते है किंतु मोदी -2 में अब मोदी के मन की बात पर कुछ ऐसी बात सामने आई जो चौकाने वाली है । मन की बात का प्रसारण भारतीय जनता पार्टी के यू ट्यूब चेनल , प्रधानमंत्री मोदी के यू ट्यूब चेनल सही रेडियो , टीवी चैनल आदि पर प्रसारित होता है किंतु इन पर आम जनता अपनी टिप्पणी नही कर सकता सिर्फ लाइक / डिसलाइक ही कर सकता है । पीएम के इस कार्यक्रम से देश की जनता का मोह अब धीरे धीरे भंग होता दिख रहा है । पिछले माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' कार्यक्रम इंटरनेट यूज़र्स की नकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण चर्चा में आ गया है. आकाशवाणी पर रविवार को प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम का दूरदर्शन के अलावा कई निजी चैनल भी सीधा प्रसारण किया था . इसके साथ ही पीआईबी, बीजेपी और पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल पर भी देश के नाम पीएम के संबोधन को सुना जा सकता है. मगर इस रविवार के मन की बात को लेकर इन यूट्यूब चैनलों पर यूज़र्स की प्रतिक्रिया सकारात्मक कम, नकारात्मक ज़्यादा रही है. इन तीनों ही जगह मन की बात के वीडियो पर लाइक्स की तुलना में डिसलाइक बहुत ज़्यादा हैं. इस बात को असामान्य माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले मन की बात को लेकर दर्शकों का रवैया इतना नेगेटिव नहीं रहता था. ऐसे में चर्चा हो रही है कि आख़िर इसकी वजह क्या हो सकती है. क्या है स्थिति । इस रविवार को मन की बात के वीडियो पर इंटरनेट यूज़र्स की प्रतिक्रिया शुरू से ही सुस्त रही. कार्यक्रम का प्रसारण सुबह हुआ था मगर देर रात तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ था. रात ढ़ाई बजे, ख़बर लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 'मन की बात' कार्यक्रम पर लगभग 30 लाख व्यूज़ थे. इस चैनल पर इस वीडियो को 1लाख 37 हज़ार लोगों ने लाइक किया था जबकि 7 लाख 35 हज़ार ने डिसलाइक किया था. स्पष्ट है कि यह अंतर काफ़ी बड़ा है. जबकि यह भारतीय जनता पार्टी का आधिकारिक चेनल है । इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने यूट्यूब चैनल (Narendra Modi) पर इसके 15 लाख हज़ार व्यूज़ थे. इस वीडियो पर 94 हज़ार लाइक और 226 हज़ार डिसलाइक थे. इसी तरह पीआईबी के यूट्यूब चैनल पर 'मन की बात' पर मात्र 91 हज़ार व्यूज़ थे जबकि लाइक 3.2 हज़ार और डिसलाइक 10 हज़ार थे. इतनी बड़ी संख्या में नापसंद किया जाना इन दिनों चर्चा का विषय है । आखिर ऐसी क्या बात कही पीएम मोदी ने इस बार मन की बात में कई लोगो ने इसे बड़े अंतर में नापसंद किया । एक बार आप भी देखे कि बेरोजगारी , कोरोना आपदा , स्वास्थ्य की बदहाल व्यवस्था के काल मे देश के पीएम ने मन की बात में क्या कहा आखिर वर्तमान स्थिति में उनके मन मे क्या चल रहा ? पीएम मोदी के मन की बात पर आप कोई टिप्पणी तो नही कर सकते किन्तु लाइक डिसलाइक ज़रूर कर सकते है ।

भोपाल । शौर्यपथ । मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना के नाम पर लूट मचा रहे निजी अस्पतालों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कोरोना मरीज के इलाज के लिए छह लाख का बिल दिए जाने के मामले में भंवरकुआं स्थित एप्पल अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही तीन सरकारी डॉक्टर्स को भी नोटिस दिए गए हैं, जो अनुमति नहीं होने के बाद भी वहां इलाज के लिए गए। एप्पल अस्पताल से जब्त रिकाॅर्ड की प्रारंभिक जांच में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त हो सकता है। कलेक्टर के आदेश पर पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को अस्पताल में छापा मारा, इस दौरान बिल और रिकॉर्ड जब्त किए गए। रिकार्ड के आधार पर जूनी इंदौर एसडीएम और डॉ. अमित मालाकार ने जो जांच प्रतिवेदन तैयार किया। प्रतिवेदन में बताया गया है कि 22 दिन तक कोरोना मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती रखा गया और लगभग छह लाख रुपये का बिल थमा दिया। इतने भारी भरकम बिल के बावजूद एक लाख की दवाइयां अलग से मंगवाई। पीपीई किट, आइसोलेशन चार्ज और यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर प्रतिदिन 9,000 रुपये के हिसाब से राशि वसूल की गई। आईसीएमआर के निर्देश और डब्लूएचओ की गाइडलाइन के विपरीत एसिंप्टोमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीज होने के बावजूद चार बार आरटीपीसीआर कोविड टेस्ट निजी लैब से करवाया गया, इसमें भी निजी लैब में जो टेस्टिंग चार्ज लगता है, उससे अधिक शुल्क मरीज से वसूल किया गया।। एक बार भी ये टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद बार-बार करवाए गए। अस्पताल ने किस चार्ज के बदले वसूले कितने रुपये आइसोलेशन चार्ज (आइसोलेश में ही कोरोना मरीजों को रखा जाता है, फिर अलग से फीस क्यों)। 63 हजार रुपये यूनिवर्सल प्रोटेक्शन (अस्पताल को भी नहीं पता ये क्या है)। 63 हजार रुपये पीपीई किट के तीन हजार रुपये रोज के हिसाब से। 63 हजार रुपये डॉक्टर की विजिटिंंग फीस, सिर्फ 22 दिनों के लिए। 1 लाख रुपये सीटी स्कैन, नेबुलाइजेशन और अन्य जांच की फीस, जो हुई ही नहीं। 8850 रुपये डॉक्टरों की विजिट के नाम पर वसूले एक लाख रुपये हॉस्पिटल की लूट यही खत्म नहीं हुई बल्कि तीन से चार डॉक्टरों की रोजाना विजिट करवाकर प्रत्येक डॉक्टर की तीन हजार रुपये फीस चार्ज की गई और एक लाख की राशि तो डॉक्टरों की विजिट के ही रूप में मरीज से वसूली गई। छापे के दौरान हॉस्पिटल से जो बिल और रिकार्ड मिले थे, उनकी जांच में भी कई तरह की असमानता नजर आई। हर मरीज से लिए गए शुल्क की राशि में भी अंतर मिला। जांच में यह भी पता लगा कि मरीज से रोजाना तीन हजार रुपये प्रतिदिन यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर लिए गए। वहां भर्ती सभी मरीजों से यह राशि ली जा रही है। जांच समिति को जो बिल की कॉपी दी गई उसमें निजी लैब में करवाई गई कोरोना जांच का उल्लेख नहीं है। मरीज को दिए गए बिल में इसका भी शुल्क जोड़ा गया है। मरीज के परिजन ने कलेक्टर से की थी शिकायत सागर निवासी व्यक्ति के परिजन ने कलेक्टर से इसकी शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि 22 दिन तक भर्ती करने के बाद मरीज को छह लाख का बिल दिया गया। एक लाख रुपये की दवाई बाहर से मंगवाई, जिससे इलाज का कुल खर्च सात लाख हो गया। इसके बाद मंगलवार रात को जिला प्रशासन की समिति ने छापामार कार्रवाई की। शिकायत करने वाले मरीज के अलावा अन्य मरीजों के बिल का रिकाॅर्ड भी लिया गया था। लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने इस मामले में तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। साथ ही कहा गया है कि जवाब न मिलने या असंतोषजनक होने पर मेडिकल एक्ट 2019 की धारा 27 में प्रोफेशनल एवं एथिकल मिसकंडक्ट मानकर मध्यप्रदेश उपचर्या अधि. 1973 एवं नियम 1997 में पंजीयन निरस्त/ एफआईआर कराई जाएगी।

नई दिल्ली । शौर्यपथ । कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार देश की अर्थव्यवस्था पर केंद्र सरकार को कोशिश की है। वहीं इस बार राहुल गांधी ने एक अंग्रेजी पेपर में छपी खबरों को लेकर मोदी सरकार हमला बोला है। कहा कि जो मैं कई महीनों से बोल रहा था आरबीआई ने उसे माना है। आलम ऐसा है कि आज देश की अर्थव्यवस्था खतरे में आ गई है। राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा- ‘आरबीआई ने अब पुष्टि कर दी कि जिसकी मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं। सरकार को अब ज्यादा खर्च करने की जरूरत है, कर्ज देने की जरूरत नहीं है। गरीबों को पैसा दें, उद्योगपतियों का टैक्स मत माफ कीजिए। खपत के जरिए अर्थव्यवस्था को दोबारा शुरू करें। मीडिया के जरिए ध्यान भंग करने से न तो गरीबों की मदद होगी और न ही आर्थिक आपदा गायब होगी।’ अपने ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने एक अखबार की खबर को शेयर किया है। बता दें कि इस खबर में आरबीआई की रिपोर्ट है। जिसमें बताया गया है कि देश में खपत को गंभीर झटका लगा है। गरीब को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बता दें कि इससे पहले भी राहुल गांधी ने कोरोना संकट के दौर में अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र पर हमला बोले चुके हैं।

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