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नई दिल्ली / शौर्यपथ / विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि एक "गोपनीय कानूनी मुद्दे" के तहत भगोड़े विजय माल्या के प्रत्यर्पण में बाधा आ रही है. बता दें कि माल्या भारत में हजारों करोड़ रुपये के कर्ज का डिफॉल्टर होने के चलते वांछित है. मंत्रालय ने बताया कि ब्रिटिश अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, "हमें बताया गया है कि एक गोपनीय कानूनी मुद्दा है जिस पर कार्यवाही चल रही है. जिसके बाद विजय माल्या को भारत को सौंपा जा सकता है. हमें किसी विशेष समयरेखा का संकेत नहीं दिया गया है और हम इस मामले पर बातचीत जारी रखना चाहते हैं."
गौरतलब है कि विजय माल्या, 9,000 करोड़ के कर्ज का डिफॉल्टर है. वह मार्च 2016 से यूनाइटेड किंगडम में है और भारत को अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है. 64 वर्षीय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश एक ब्रिटिश अदालत ने मई में दिया था, लेकिन देश में शुरू की गई "गुप्त कार्यवाही" में देरी हुई है. विजय माल्या, जो अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करता है, ने बार-बार कहा है कि भारतीय बैंक उस पर बकाया मूल राशि को 100 प्रतिशत वापस ले सकते हैं.
अहमदाबाद / शौर्यपथ / गुजरात के अहमदाबाद शहर में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए शुक्रवार से निगम सीमा अंतर्गत 57 घंटे का सप्ताहांत कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया गया है. इस बीच, एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मौजूदा हालात के मद्देनजर गुजरात सरकार ने राज्य में 23 नवंबर से माध्यमिक स्कूल और कॉलेज खोलने के अपने फैसले पर रोक लगा दी है. अधिकारियों ने कहा कि अहमदाबाद शहर में शुक्रवार (20 नवंबर) रात नौ बजे से कर्फ्यू शुरू होगा, जो सोमवार (23) सुबह छह बजे तक जारी रहेगा. अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि इस ''पूर्ण कर्फ्यू'' के दौरान केवल दूध और दवा की दुकानें ही खुली रहेंगी.
गुप्ता को गुजरात सरकार ने विशेष कार्याधिकारी नियुक्त किया है और उनका काम अहमदाबाद नगर पालिका के कोरोना वायरस संक्रमण संबंधी कामकाज की निगरानी करना है. गुप्ता ने शाम को घोषणा की थी कि शुक्रवार (20 नवंबर) से अगले आदेश तक रोजाना रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक रात्रि कर्फ्यू लागू रहेगा. हालांकि इसके कुछ घंटों बाद ही गुप्ता ने कहा कि शुक्रवार रात से सोमवार सुबह तक “पूर्ण कर्फ्यू” लागू होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि रात्रि कर्फ्यू शहर में सोमवार रात नौ बजे से प्रभावी होगा.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश में कोरोना (Coronavirus India) के संक्रमण की चपेट में आए करीब 94 फीसदी मरीज ठीक हो चुके हैं और 5 फीसदी से कम मरीजों का ही इलाज चल रहा है. केंद्र सरकार ने गुरुवार को कोविड-19 के आंकड़े जारी करते हुए यह जानकारी दी. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने कहा कि लगातार 47 दिनों से ऐसा है कि रोज संक्रमण के नए मामलों के मुकाबले स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा रही.
देश में कोविड-19 से 48,493 और लोग गुरुवार को स्वस्थ हो गए. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में 83 लाख 83 हजार 602 लोगों के स्वस्थ होने के साथ ही स्वस्थ होने की दर (रिकवरी रेट) सुधरकर 93.58 प्रतिशत हो गया है. संक्रमण के नए मामलों की तुलना में स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. देश में संक्रमण के 4,43,303 मामले हैं जो कि कुल मामलों का महज 4.95 प्रतिशत है. स्वस्थ होने वालों में 77.27 प्रतिशत मरीज 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के हैं. केरल में एक ही दिन में 7066 लोग बीमारी से उबर गए. दिल्ली में 6901 लोग और महाराष्ट्र में 6608 लोग 24 घंटे में स्वस्थ हुए.
संक्रमितों की संख्या 90 लाख के करीब
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, संक्रमण के 45,576 नए मामलों से भारत में कुल 89.58 लाख संक्रमित हो गए हैं. संक्रमण के कारण 585 और लोगों ने दम तोड़ा और मृतकों की संख्या 1,31,578 पहुंच गई. कोविड-19 के 77.28 प्रतिशत नए मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए. दिल्ली में 24 घंटे में 7486 मामले आए. केरल में 6419 और महाराष्ट्र में 5011 नए मामले आए.
महाराष्ट्र और बंगाल में सर्वाधिक मौतें
कुल 585 मौत में से 79.49 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए. दिल्ली में 131 लोगों की मौत हुई. महाराष्ट्र में 100 और पश्चिम बंगाल में 54 और मरीजों की मौत हो गई.
सबरीमाला / शौर्यपथ / कोरोनावायरस महामारी के बीच केरल के सबरीमाला में भगवान अयप्पा की दो महीने तक चलने वाली तीर्थ यात्रा आज शुरू हो गई. सबरीमाला मंदिर को वार्षिक तीर्थ यात्रा कार्यक्रम के लिए रविवार को खोला गया था. हालांकि, कड़े कोरोना रोकथाम उपायों के बीच श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट आज खोले गए हैं. मंदिर अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रियों को एक वर्चुअल कतार प्रणाली के माध्यम से सुबह 3 बजे ट्रेकिंग शुरू करने की अनुमति दी गई थी.
सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले अधिकांश तीर्थ यात्री आज पहुंचे. मास्क पहने मंदिर बोर्ड के कर्मचारी और पुलिसकर्मी तीर्थयात्रा में शामिल लोगों पर करीब से नजर रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी श्रद्धालु कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें. जिसमें कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट, फिटनेस सर्टिफिकेट और मास्क पहनाना अनिवार्य है.
मंदिर बोर्ड ने कहा, "62 दिन तक चलने वाले तीर्थयात्रा कार्यक्रम में हर साल लाखों लोग आते हैं. हालांकि, इस बार केवल 85000 श्रद्धालुओं को पूजा करने के लिए आने की अनुमति दी जाएगी. कोरोनावायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए भीड़भाड़ से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है."
बोर्ड की ओर से कहा गया है कि हर दिन केवल 1000 श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दी जाएगी, जिन्होंने वर्चुअल कतार प्रणाली के माध्यम से दर्शन के लिए बुकिंग की होगी. शनिवार और रविवार को 2000 लोगों को दर्शन की अनुमति दी जाएगी."
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कटिहार से चौथी बार निर्वाचित विधायक तारकिशोर प्रसाद को रविवार को बीजेपी विधानमंडल दल का नेता और बेतिया से पांचवी बार विधायक चुनी गईं रेणु देवी को उपनेता चुना गया. बाद में इन दोनों को बिहार का उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया. नीतीश कुमार नीत नई एनडीए सरकार में तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. रेणु देवी अति पिछड़ा वर्ग के तहत नोनिया समुदाय से आती हैं. रेणु देवी ने शपथ लेकर बिहार की पहली महिला उप मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रच दिया है.
बीजेपी की विधायक रेणु देवी बिहार की पहली महिला उप मुख्यमंत्री बनी हैं. बिहार में एनडीए के मुख्य घटक बीजेपी और जेडीयू में सत्ता के सर्वोच्च पदों का बंटवारा यूपी की तर्ज पर किया गया है. जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार जहां एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री बने हैं वहीं बीजेपी की तरफ से उप मुख्यमंत्री दो बनाए गए हैं. इसमें से एक पद महिला और एक पद पुरुष को दिया गया है. डिप्टी सीएम के लिए बीजेपी ने जहां पहला नाम कटिहार से विधायक तारकिशोर प्रसाद का तय किया था, तो वहीं दूसरा नाम रेणु देवी का है.
बिहार में पहली बार महिला उप मुख्यमंत्री बनीं रेणु देवी बेतिया की विधायक हैं. वे इस विधानसभा क्षेत्र से पांचवीं बार चुनी गई हैं. रेणु देवी पहली बार सन 2000 में एमएलए बनी थीं. इसके बाद वे साल 2005 और 2010 में भी विधायक बनीं. इसके बाद 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था.
इस बार के चुनाव में बीजेपी ने उन पर विश्वास किया और उन्हें फिर एक बार टिकट दिया. वे अपनी खोई हुई सीट फिर से जीतने में सफल रहीं. रेणु देवी 62 साल की हैं और उन्हें लंबा राजनीतिक अनुभव है. रेणु देवी की मां भी संघ परिवार से जुड़ी थीं. उनके ननिहाल पर भी बीजेपी और आरएसएस का प्रभाव रहा है. रेणु देवी बीजेपी के महिला मोर्चा में विभिन्न तरह की जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. वे नीतीश के नेतृत्व वाली साल 2005 में बनी सरकार में भी मंत्री का पद संभाल चुकी हैं. वे बीजेपी की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं.
अमृतसर / शौर्यपथ / 14 नवंबर को धूमधाम से दीवाली मनाई गई. भारत के कई शहरों में शानदार अंदाज में दीवाली मनाई गई. अमृतसर में शानदार आतिशबाजी के साथ दिवाली का पर्व मनाया गया. लोगों ने स्वर्ण मंदिर में शानदार आतिशबाजी का आनंद लिया. अमृतसर की दिवाली को सबसे शानदार माना जाता है. स्वर्ण मंदिर को सजाया जाता है, जो दिखने को बहुत खूबसूरत लगता है. इस बार भी दीवाली पर शानदार तरीके से अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की खूबसूरती देखी गई.
टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि स्वर्ण मंदिर को सजाया गया है और लोग पास ही खड़े हैं और ऊपर हो रही आतिशबाजी का मजा ले रहे हैं.
हरभजन सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'दाल-रोटी घर दी, दीवाली अमृतसर दी.'
पटना / शौर्यपथ / बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को राजभवन में आयोजित हुआ. जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उन्होंने लगातार चौथी बार राज्य के सीएम पद की शपथ ली है. राज्यपाल फागु चौहान ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. नीतीश के अलावा बीजेपी कोटे से दो उप मुख्यमंत्री (तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी) ने भी शपथ ली.जनता दल-यूनाइटेड के कोटे से अशोक चौधरी, विजय चौधरी, मेवालाल चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव और शीला मंडल ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की जबकि बीजेपी के मंगल पांडेय, जीवेश मिश्रा, रामप्रीत पासवान, अमरेन्द्र प्रताप सिंह और रामसूरत राय ने शपथ ली है.
इसके अलावा 'हम' से संतोष मांझी और वीआईपी से मुकेश साहनी ने शपथ ली. संतोष मांझी, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे हैं. जीतनराम भी इस बार हम के टिकट पर चुनाव जीते हैं.शपथ ग्रहण समारोह में वरिष्ठ बीजेपी नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा, देवेन्द्र फडणवीस सहित पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद रहे
कटिहार के तारकेश्वर प्रसाद की बात करें तो उनकी गिनती बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में की जाती है. कटिहार से वे लगातार चौथी बार विधायक बने हैं. उन्होंने चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के डॉक्टर रामप्रकाश महतो को पराजित किया है.दूसूरी ओर, रेणु देवी, बीजेपी विधायक दल की उपनेता चुनी गई है. वे बेतिया से विधायक हैं. वे 2000 से 2015 तक बेतिया से विधायक रहीं. बाद में 2015 में वे कांग्रेस के प्रत्याशी से चुनाव हार गई थीं. वर्ष 2020 में उन्होंने फिर से बेतिया से चुनाव जीता है.
गौरतलब है कि बिहार के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन ने 125 सीटें हासिल कर बहुमत हासिल किया है जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 110 सीटों से से ही संतोष करना पड़ा सत्ताधारी एनडीए में शामिल बीजेपी ने 74 सीटों पर, जेडीयू ने 43 सीटों पर, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने चार सीटों पर और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है. महागठबंधन में शामिल आरजेडी (RJD) ने 75 सीटों पर, कांग्रेस (Congress) ने 19 सीटों पर, भाकपा माले (CPI ML) ने 12 सीटों पर, भाकपा (CPI) एवं माकपा (CPM) ने दो-दो सीटों पर जीत हासिल की है. इस चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) ने 5 सीटें, लोजपा (LJP) एवं बसपा (BSP) ने एक-एक सीट जीती है. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है.
बिहार / शौर्यपथ / मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनज़र वो त्योहार के सीज़न में किसी तरह की लापरवाही न बरतें. उन्होंने लोगों से मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन जारी रखने के लिए कहा है.
लेकिन, ऐसा लगता है कि शायद उनका यह संदेश बिहार के लोगों तक नहीं पहुंचा है.बिहार में विधानसभा चुनावों में पहले चरण की वोटिंग 28 अक्तूबर को होने वाली है. चुनाव प्रचार के लिए बिहार में बड़ी-बड़ी राजनीतिक रैलियां हो रही हैं और इन रैलियों में लोगों की भारी भीड़ भी उमड़ रही है.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत चुनावी अखाड़े में उतर रही रही सभी पार्टियों ने प्रचार अभियान तेज़ कर दिया है.कुछ रैलियों की वीडियो फुटेज से दिखाई दे रहा है कि लोगों में नेताओं की एक झलक पाने के लिए भगदड़ जैसे हालात बन रहे हैं. इन रैलियों में शामिल हो रही भीड़ में शायद ही कोई मास्क पहनता दिख रहा है.वायरोलॉजिस्ट और डॉक्टरों ने चुनावी रैलियों में जुट रही इस भारी भीड़ को "संवेदनहीन" करार दिया है और कहा है कि इस तरह की लापरवाही के भयानक दुष्परिणाम हो सकते हैं.
उनका कहना है इससे कोरोना वायरस कहीं ज़्यादा तेज़ी से लोगों में फैल सकता है.भारत में अब तक कोरोना संक्रमण के 70 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जो चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में रोज़ाना संक्रमितों की संख्या में गिरावट आ रही है.
जहां कुछ लोगों का कहना है कि महामारी का सबसे बुरा दौर ख़त्म हो चुका है, वहीं कई जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि इतनी जल्दी कोरोना के ख़त्म होने का जश्न मनाना सही नहीं होगा.चुनाव आयोग ने कोविड-19 के लिए बताए गए नियमों का उल्लंघन करने वाले नेताओं को चेतावनी दी है. लेकिन, ऐसा लग रहा है कि इसका शायद ही कोई असर हुआ हो क्योंकि रैलियों में भीड़ लगातार इकट्ठी हो रही है.
कोरोना सेफ्टी नियमों का उल्लंघन
वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को और अधिक ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है और उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को भी जागरूक बनाना होगा.उन्होंने बताया, "हमें इन रैलियों में हजारों लोग जुटते दिखाई दे रहे हैं और शायद ही कोई व्यक्ति मास्क पहन रहा हो. राजनीतिक पार्टियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो अपने फ़ॉलोअर्स को कोरोना से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का पालन करने के लिए कहें."
बिहार में पहले चरण का मतदान 28 अक्तूबर को होना है. इसके बाद 3 नवंबर और फिर 7 नवंबर को मतदान होना है. चुनावों के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.यहां बीजेपी के अगुवाई वाला गठबंधन एक बार फिर सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वामदलों का गठबंधन है. इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनाव मैदान में हैं.
इन चुनावों में सभी पार्टियों के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है. चुनाव में शुरुआती कैंपेन वर्चुअल रहा, लेकिन अब प्रचार पूरी तरह से ऑफ़लाइन हो चुका है. शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन रैलियां थीं. वहीं कांग्रेस के राहुल गांधी भी रैलियों में शामिल हो रहे हैं.
राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि प्रचार के मुद्दे के तौर पर कोई भी यहां कोरोना के बारे में बात नहीं कर रहा है.उन्होंने कहा, "ऐसा लग रहा है कि जैसे राज्य से कोरोना एकदम ग़ायब चुका है. लोग लापरवाह हो गए हैं और नेता लोगों को सतर्क करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं."
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता
राज्य सरकार का कहना है कि वह हर दिन औसतन डेढ़ लाख कोरोना टेस्ट कर रही है और गुज़रे कुछ हफ्तों में संक्रमितों का अस्पतालों में आना कम हुआ है.लेकिन, जानकार इसे लेकर संशय जता रहे हैं. उनका कहना है कि जिस टेस्ट की बात राज्य सरकार कर रही है वो रैपिड एंटीजन टेस्ट है जिसका नतीजा 30 मिनट में आ जाता है. लेकिन इनमें कुछ मामलों में एक्युरेसी रेट केवल 30 फीसदी तक होता है.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 22 सितंबर को कहा था कि राज्य ने पहले रोज़ाना दो लाख टेस्ट किए जा रहे थे. लेकिन, इनमें से केवल 11,732 ही आरटी-पीसीआर टेस्ट थे.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्थिति जोख़िम भरी है क्योंकि रैपिड एंटीजन टेस्ट से टेस्ट नतीजे ग़लत आने के आसार बढ़ते हैं. ऐसे में संक्रमित होने के बावजूद लोग इससे अनजान रह सकते हैं और वे इधर-उधर जाकर वायरस फैला सकते हैं.जानेमाने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ए फतहउद्दीन कहते हैं कि बिहार सेफ्टी नियमों को तोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता, इससे समस्याओं में और इजाफ़ा होगा.
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले ही लचर हालत में है और यहां डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और नर्सों की भारी कमी है. जुलाई और अगस्त महीने की शुरुआत में कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफ़ा होने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भयंकर दबाव बन गया था. कुछ मरीज़ों के परिवारों को ख़ुद ही ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था करनी पड़ी थी, जबकि इलाज के अभाव में कुछ मरीज़ों की मौत हो गई थी.
डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं, "राज्य में जनसंख्या का घनत्व काफी अधिक है और लोग संयुक्त परिवारों में रहते हैं. इन रैलियों में शिरकत करने वाले लोग लौट कर अपने परिवारों में जाएंगे, लोगों से मिलेंगे. ये लोग अपने साथ संक्रमण फैला सकते हैं."त्योहारों के सीज़न और मौसम का भी राज्य में वायरस के फैलने में अहम रोल होगा. नवंबर के बाद से तापमान में गिरावट आने के चलते उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है.
कई अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषण से कोविड-19 से होने वाली मौतों और संक्रमण की दर बढ़ जाती है.डॉ. शाहिद जमील कहते हैं, "रैलियों की ऐसी तस्वीरें, सर्दियों के दिन और आने वाले त्योहार के सीज़न को देखते हुए मैं डर जाता हूं. मुझे डर लगता है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में देश में सावधानी नहीं बरती गई तो किस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं."जानकारों का कहना है कि बिहार में जो हो रहा है उसका असर दूसरे राज्यों पर भी पड़ सकता है.
डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं कि इस तरह की धारणा फैल रही है कि युवा लोगों में वायरस का ज़्यादा असर नहीं होता. वे कहते हैं, "इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि युवा लोग इस वायरस से गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ सकते हैं." डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं कि देश के दूसरे हिस्सों में लोगों को इस तरह की बड़ी भीड़ दिखाई देगी तो उन्हें लग सकता है कि वायरस अब नहीं फैल रहा है. ये अपने आप में काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकता है.
बिहार / शौर्यपथ / मेड़ से थोड़ी ही चौड़ी सड़क है, सड़क के दोनों ओर धान की बालियां लहरा रही हैं. ये सीधी सड़क मुज़फ़्फ़रपुर के रतनौली गांव को जाती है. सड़क के किनारे छोटी सी किराना दुकान पर बैठे शख़्स से संजय सहनी के घर का पता पूछा तो जवाब मिला नरेगा वाले भईया के यहां जाएंगी ना... इसके बाद हमने कुछ क़दम नापे ही थे कि सामने एक तिरपाल में 40 से 50 लोग ज़मीन पर बैठे नज़र आए.
इनमें महिलाएं ज़्यादा और पुरुष कम हैं. लोगों से घिरे संजय सहनी लोगों को बता रहे हैं कि, "जो नेता कभी यहां आए ही नहीं दिल्ली में बैठे हैं उनके नाम पर हमेशा वोट माँग लिया जाता है. जिस नेता को सामने से देखे तक नहीं उनके लिए वोट करने को कहा जाता है."
नीली सफ़ेद धारियों वाली शर्ट, गहरे भूरे रंग की पतलून और काले रंग की स्लीपर पहने संजय सहनी असाधारण रूप से सफ़ेद कुर्ते और गेंदे के फूलों की माला से लदे नेताओं से बिलकुल अलग दिखते हैं. ना ही उनकी बातों में आम नेताओं सी लफ़्फ़ाज़ी है और ना ही नेताओं से तेवर.
उन्हें घेर कर बैठीं तमाम बूढ़ी-अधेड़ उम्र की महिलाओं के लिए वह किसी उम्मीदवार से ज़्यादा उनके संजय भईया हैं.संजय सहनी मुज़फ़्फ़रपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. संजय को अलमारी चुनाव चिन्ह मिला है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
