August 07, 2026
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    कक्षावार पीरियड में विषय शिक्षकों के द्वारा पढ़ाई नहीं होने से विद्यार्थियों के ज्ञान अर्जन में गिरावट हुई - फेडरेशन

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    राजनंदगांव /शौर्यपथ /

    प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत किये बिना विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, राजनांदगांव जिला अध्यक्ष शरद शुक्ल एवं जिला महामंत्री पी आर झाड़े का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग अपने सेटअप 2008 में व्याप्त गलतियों को पुन: 2022 में दोहराने जा रहा है। कक्षावार पीरियड में विषय शिक्षकों के द्वारा पढ़ाई नहीं होने से विद्यार्थियों के ज्ञान अर्जन में गिरावट आयी है। जब तक विद्यार्थियों को कक्षा अनुसार पढ़ाने वाला विषय शिक्षक नहीं मिलेगा, तब तक गुणवत्तायुक्त शिक्षा का अभाव विशेषकर प्राथमिक कक्षाओं के साथ माध्यमिक, उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक में रहेगा। Óदर्ज संख्या के आधार पर पद स्वीकृति के स्थान पर कक्षा की संख्या एवं पढ़ाये जाने वाले विषयों के अनुसार शिक्षक संवर्ग का पद स्वीकृत करना प्रभावकारी होगा। उन्होंने बताया कि प्राथमिक विद्यालय में 80 विद्यार्थी संख्या पर सेटअप में 1 प्रधानपाठक और 2 सहायक शिक्षक पद के स्वीकृति का उल्लेख है। जबकि कक्षा पहली से पाँचवी तक कुल 5 कक्षाओं में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण सहित 4 विषयों को पढ़ाना है। गतिविधियों के लिये एक पीरियड भी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से प्रश्न किया है कि 5 कक्षाओं में 1 प्रधानपाठक सहित 2 सहायक शिक्षक कैसे पढ़ायेंगे ? इसका समाधान होना चाहिये। उन्होंने बताया कि दर्ज संख्या में क्रमश: 30 विद्यार्थियों की वृद्धि पर 1 अतिरिक्त सहायक शिक्षक का पद सेटअप में स्वीकृत होने का उल्लेख अव्यवहारिक
    उन्होंने बताया कि पूर्व मध्यमिक विद्यालय (6 वीं से 8 वीं तक) के सेटअप में 1 प्रधानपाठक और 4 शिक्षक के पद स्वीकृत करने का उल्लेख है। रोज 3 कक्षाओं में 6 विषयों अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, गणित और विज्ञान को कैसे पढ़ायेंगे, यह सेटअप बनाने वाले अधिकारियों को बताना चाहिये। विद्यालय दर्ज संख्या 30 से कम होने पर प्रधानपाठक पद स्वीक़ृत नहीं होने का उल्लेख आश्चर्यजनक है। अर्थात् संस्था प्रमुख बिना संस्था ! विद्यालय दर्ज संख्या में 30 विद्यार्थियों की वृध्दि पर 1 शिक्षक पद और स्वीकृत होने का उल्लेख सेटअप में है।
    उन्होंने बताया कि हाईस्कूल (9 वीं एवं 10 वीं) में 220 दर्ज संख्या पर सेटअप में 1 प्राचार्य और 5 व्याख्याता के पद स्वीकृत होंगे। कक्षा 9 एवं 10 में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान पढ़ाया जाता है। संस्कृत विषय का पद 220 दर्ज संख्या से अधिक होने पर स्वीक़ृत होने का उल्लेख सेटअप में है। लेकिन 220 अथवा कम की दर्ज संख्या वाले स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को संस्कृत कौन पढ़ायेगा इसका जवाब शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लिया जाना चाहिये। हाई स्कूल में पी टी आई का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। सरकार खेल को बढ़ावा देने योजना बना रही है, लेकिन शिक्षा विभाग के हाई स्कूल के सेटअप में इसे नजरअंदाज किया गया है।
    उन्होंने जानकारी दिया कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9 वी से 12 वीं तक) के सेटअप में 1 प्राचार्य सहित 9 व्याख्याता के पद स्वीकृत करने का उल्लेख है। गौरतलब है कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गणित संकाय, विज्ञान संकाय, कला संकाय एवं वाणिज्य संकाय अंतर्गत पढ़ाई होता है। सेटअप में हिंदी, अंग्रेजी, भौतिक, रसायन, बायोलॉजी प्रत्येक विषय के लिए व्याख्याता पद स्वीकृत है। लेकिन राजनीति विज्ञान अथवा इतिहास में 1, अर्थशास्त्र अथवा भूगोल में 1 तथा कॉमर्स में 1 व्याख्याता पद की स्वीकृति 200 दर्ज संख्या पर करने का उल्लेख है। Óकिसी विषय मेंÓ दर्ज संख्या 201 से 400 होने पर अतिरिक्त 1 विषय व्याख्याता, 401 से 600 पर 2 व्याख्याता तथा 601 से 800 तक होने पर उस विषय का 3 अतिरिक्त व्याख्याता पद स्वीकृति का उल्लेख है। कॉमर्स विषय के अंतर्गत एकाउंटेंसी, बिजऩेस स्टडी एवं अर्थशास्त्र आता है। कक्षा 11 वीं एवं 12 वीं में 1 व्याख्याता द्वारा प्रतिदिन 6 क्लास लेना कठिन कार्य है। गौरतलब है कि 2008 के सेटअप में कामर्स में 2 व्याख्याता पद स्वीकृत हुआ था। 2022 के सेटअप में 1 पद स्वीकृत होने से अतिशेष की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। विषय में 30 अतिरिक्त दर्ज संख्या पर 1 अतिरिक्त व्याख्याता का पद स्वीक़ृति का उल्लेख है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत विषय दर्ज संख्या अनुसार व्याख्याता का पद, 1 पी टी आई एवं 3 विज्ञान सहायक शिक्षक का पद स्वीक़ृत किया गया है।
    उन्होंने बताया कि सामान्यत: प्राथमिक विद्यालय में पर्याप्त विषय शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण एक कक्षा को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक को अधिकांश विषय दिया जाता है। जोकि विद्यार्थियों की विषय में बुनियादी ज्ञान को विकसित करने में बाधक होता है। विद्यार्थियों का आधार (बेस) कमजोर रहने से उच्च कक्षाओं में वो पढ़ाई से दूर होने लगता है। सेटअप में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर सर्वाधिक फोकस करना था जोकि नहीं हुआ है। सेटअप में पूर्व माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की विषयवार पढ़ाई के लिए विषय शिक्षकों की पदस्थापना को ध्यान नहीं रख गया है। वहीं सेटअप 2008 में स्वीकृत रहे पदों को विलोपित कर शिक्षकों को प्रताडि़त कर शोषण करने का आधार तैयार किया जा रहा है।

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