February 01, 2026
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वनांचल की महिलाएं जुटी वर्मी खाद बनाने

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रायपुर / शौर्यपथ / गोधन न्याय योजना ग्रामीणों के लिए आजीविका का साधन बनते जा रहा है। राज्य के विभिन्न गौठानों में स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी खाद बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वनांचल की महिलाएं भी इस योजना से लाभ ले रहीं है। सुकमा जिले की गांव दुब्बाटोटा गौठान की कमल स्व-सहायता समूह की 13 महिलाओं द्वारा गोबर में केंचुआ डालकर वर्मी खाद तैयार किया जा रहा है। समूह की महिलाएं बताती है कि गोबर से बने खाद से उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक खाद से किसानों को अच्छी फसल मिलेगी। महिलाओं ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा उन्हें जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

       छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी गोेधन न्याय योजना का क्रियान्वयन सुकमा जिले में सार्थक रूप से किया जा रहा है। योजना के तहत गौठान समितियों द्वारा गोबर क्रय किया जा रहा है। गोबर विक्रय करने वाले हितग्राहियों को सीधा उनके बैंक खातांे में भुगतान किया जा रहा है। खरीदे गए गोबर से वर्मी खाद तैयार करने की जिम्मेदारी महिला स्व सहायता समूहों को सौंपी गई हैं। सुकमा जिले में अब तक 13 हजार से भी अधिक पशुपालकों का पंजीयन गौठानो में किया जा चुका है। गौठान समितियों द्वारा 3 हजार 918 क्विंटल से भी अधिक गोबर क्रय किया गया है। जिले के कोंटा विकासखंड के ग्रामपंचायत दुब्बाटोटा गौठान में 250 क्विंटल से अधिक की गोबर खरीदी की गई ह,ै जिसमें विश्वास स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 45 क्विंटल गोबर बेचकर 9000 रुपए की आमदनी प्राप्त की है। अतिरिक्त आय कमाकर महिलाओं में खुशी है। उनका कहना है कि इस योजना से अब उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने में सहायता मिल रही है। पहले गोबर का उपयोग केवल घर लीपने और छेना बनाने में करते थे, योजना के फलस्वरूप अब गोबर से भी आय कमा रहे हैं।

      गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना का शुभारंभ हरेली पर्व 20 जुलाई 2020 को पूरे प्रदेश में किया गया था। शुभारंभ के बाद से ही पशुपालक गोबर का विक्रय करने गौठानों में पहुच रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल रहा है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रय करने वाले हितग्राहियों को महीने में दो बार बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाना है। शासन की गोधन न्याय योजना ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए कल्याणकारी कदम साबित हो रहा है। गौठानों से जुड़कर ग्रामीण अंचल के लोग भी आत्मनिर्भर बन रहे है।

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